सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

सूरतगढ़ के अखबार सीमांत रक्षक की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय क्यों दबी है?


अखबार के मालिक संपादक सत्यपाल मेघवाल ने सीएम पर आरोप लगाया:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ से प्रकाशित होने वाले एकमात्र रंगीन अखबार के मालिक संपादक सत्यपाल मेघवाल ने राजस्थान की मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया है कि अखबार की सरकारी विज्ञापन की मंजूरी फाईल उनके कार्यालय में दबाई हुई पड़ी है। सत्यपाल ने अपने अखबार के दीपावली अंक में यह आरोप लगाया है।फाइल सीएम कार्यालय में कैसे पहुंची?
समाचार से इतना तो मालूम पड़ रहा है कि फाइल अखबार के मालिक द्वारा ही भिजवाई हुई है लेकिन सीएम सूरतगढ़ से निकलने वाले अखबार की फाइल क्यों दबाऐगी? कोई शिकायत हुई है या कोई जाँच है?
सीएम वसुंधरा राजे पर यह सीधा आरोप गंभीर प्रकृति का है।
मुख्यमंत्री ने किस कारण से अखबार की फाईल रोक रखी है? इसका निस्तारण जल्दी होना चाहिए।
अगर अखबार के विरूद्ध कोई शिकायत है तो उसकी जाँच जल्दी कर फाईल का निस्तारण किया जाना चाहिए। सत्यपाल ने जिस तरह से आरोप लगाया है उससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उनकी फाईल का निपटारा होता हुआ लगा नहीं। अगर लगता कि निपटारा हो जाएगा,तब वे लिखते नहीं और आरोप नहीं लगाते। उनको निपटारे की संभावना लगी नहीं होगी तब सीधा वार किया है।
अखबार की ऐसी क्या शिकायत हो सकती है या अखबार पर ऐसे क्या आरोप हो सकते हैं कि मुख्यमंत्री फाईल को जाँच के लिए मंगवा ले और फिर उस पर निर्णय करने में देरी हो?
मुख्यमंत्री को पत्र तो जनता की ओर से भी लिखे जा सकते हैं कि अखबार की फाईल को क्यों दाब रखा है?


सीमांत रक्षक अखबार के लोकार्पण के वक्त मंच पर विधायक राजेन्द्रसिंह भादू,पूर्व विधायक गंगाजल मील और पूर्व विधायक अशोक नागपाल उपस्थित हैं। ये दिग्गज नेता सीएम को फाइल दाबे जाने का लिखें और शीघ्र निपटारे का लिखें तो संभव है फाईल जल्दी निपट जाए। वर्तमान विधायक राजेन्द्रसिंह भादू अखबार और सत्यपाल के नजदीकी हैं। भादू ही 
सीएम को कहदें तो फाईल का निस्तारण तुरंत हो सकता है। 

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सूरतगढ़ जेल का कितनी बार हुआ निरीक्षण?


एसडीएम या अन्य ने अपने दफ्तर में मंगवा कर रजिस्ट्रों पर दस्तखत किए या वास्तव में जेल में निरीक्षण किया?

- करणीदानसिंह राजपूत -
सीमाक्षेत्र का संवेदनशील क्षेत्र का सूरतगढ़ और इसके आसपास का इलाका। सैनिक रूप में सर्वाधिक संवेदनशील। किसी को पकड़ा जाए तो एक बार तो यहां की जेल में ही रखा जाने के लिए भेजा जाएगा।
भोपाल जेल से खतरनाक आठ आतंककारियों के भाग निकलने के बाद सूरतगढ़ जेल पर ध्यान केन्द्रित हुआ है। जो सवाल उठाया गया है वह महत्पूर्ण है।
जेल प्रशासन के अलावा इस जेल का प्रभारी अधिकारी उपखंड अधिकारी यानि की एसडीएम होता है और एसडीएम की अनुपस्थिति में जिसके पास में एसडीएम का कार्यभार हो। यहां पर छह माह से एसडीएम नहीं है। जब एसडीएम नहीं है तब उनके स्थान पर जेल का निरीक्षण किसने और कब किया?
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रविवार, 30 अक्तूबर 2016

दीपावली के अंधियारे आकाश में गर्म गैस का गुब्बारे उड़ाने का आनन्द:वाह...वाह.


अजब रोशनी गजब रोशनी के दौड़ते घोड़े और पियानो बजाती सजावट-
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। दीपावली यानि 30 अक्टूबर 2016 की रात। दीपावली की रात में अंधियारे आकाश में रोशनी से आलोकित गर्म गैस के गुब्बारे उड़ाने का आनन्द अपने आप में खुशियों से भरने वाला होता है और गुब्बारा उड़ाने वाले और देखने वाले वाह वाह कर उठते हैं। यह आनन्द इस बार अनेक लोगों ने उठाया।
सूर्यवंशी परिवार ने भी उड़ाए गुब्बारे। दीपू विशु बंटी ने किया कमाल। दूर दूर तक जाता दिखाई देता रहा गुब्बारा। कितनी चकरी कितने अनार बिखेरते रहे अनोखे रंग और कितने तीरों ने ऊंचे जाकर गगन में बिखेरे रंग।
खुले आकाश में दूर रोशनी के घोड़े दौड़ते आए नजर और कितनी सजावट बनी अनोखे पियानो का रूप।
लगा प्रकृति स्वयं ले रही है आनन्द।


शनिवार, 29 अक्तूबर 2016

दीपावली पर शिंगार: ब्यूटी शॉप पर शानदार खरीद: सूरतगढ़ बाजार:

सूरतगढ़। दीपापली का पर्व पांच दिनों का पर्व और हर और उत्साह और जोश। ऐसा लगता है कि पूरा शहर बाजारों में खरीदारी को उमड़ा हुआ है। ऐसा लगता है कि बाजार भी ठसाठस भर गए हैं।
दीपावली की खरीद में पकवानों मिठाईयों को तव्वोजह दी जाती है या फिर गहनों की खरीदारी को। आजकल इसमें इलेक्ट्रिकल सामान की खरीद भी बहुत बढ़ गई है।
घरों की साज सज्जा होती है और साथ में सौंदर्य शिंगार की सामग्री की खरीद भी सभी को मात दे जाती है। कौन नहीं चाहता सुंदर दिखाई देना। सौंदय सामग्री की खरीद में अब महिलाएं लड़कियां ही नहीं पुरूष व युवक भी आगे आ गए हैं।
देखना हो तो ब्यूटी शॉप पर देखें।
सूरतगढ़ में सौंदर्य की महानगरियों दिल्ली मुम्बई की झलक देखनी हो तो ब्यूटी हट में पहुंचे और देखें अमृत चौपड़ा की विशाल रेंज में प्रस्तुति। 


 

शुक्रवार, 28 अक्तूबर 2016

एक दीवळौ मायड़ भाषा रे नांव रो~



प्राथमिक शिक्षा मातृ भाषा राजस्थानी में दी जानी चाहिए- डा निमिवाल
सूरतगढ़ 27 अक्टूबर- मायड भाषा प्रेमी रामेश्वर दास स्वामी की अध्यक्षता में मायड़ भाषा राजस्थानी छात्र मोर्चा की एक बैठक का आयोजन किया गया। मायड़ भाषा राजस्थानी छात्र मोर्चा के प्रदेश संयोजक डा. गौरीशंकर निमिवाल ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा मातृ भाषा राजस्थानी में दी जानी चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 345 का हवाला देते हुए बताया कि राज्य सरकार के पास ये कानूनी अधिकार है कि वह प्रदेश में राजस्थानी भाषा को दूसरी राजभाषा का दरजा देकर प्राथमिक शिक्षा मातृ भाषा में दिए जाने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
गौरीशंकर निमिवाल ने भाषा आंदोलन के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी। भाषा आंदोलन के नेता बलराम कुक्कडवाल ने कहा कि सगळी भासावानें मान्यता राजस्थानी नै टाळो क्यंू म्हारी जबान पर ताळो क्यंू। उन्होंने कहा कि चमकना है तो सूरज की तरह तपना भी होगा। बैठक में अमित कल्याणा ने कहा कि जिसके कलेजे में भाषा की मान्यता की टीस होगी वह लक्ष्य की प्राप्ति बिना नहीं बुझ सकती। यह बैठक रामेश्वरदास स्वामी की अध्यक्षता में हुई।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि दीपावली के दिन वार्ड नं 4 के करणीमाता मंदिर परिसर में एक दिवळो मायड़ भाषा रै नाम का आयोजन किया जाएगा

ज्योति स्वरूप है परमात्मा इसलिए जलाते हैं दीप: बल्ब में ज्योति नहीं होती:


दीपावली ही नहीं बाद में भी दीप जला कर कार्यक्रम कर- करणीदानसिंह राजपूत -
प्राचीन युग में लौट कर यह जानने की कोशिश करें की हम पृथ्वी लोक भारत भूमि के लोग किसी भी पूजा अर्चना पर्व धार्मिक समारोह आदि में दीप प्रज्ज्वलित कर उसकी ज्योति में अनुष्ठान व कार्य करते हैं। दीप जलाने को और उसकी ज्योति रूपी प्रकाश को अहम मान कर धार्मिक रूप प्रदान कर दिया गया है ताकि लोग इसे हर तरह से अपनाए रख सकें। यह सब कार्य पद्धतियां पृथ्वी लोक में है। पाताल लोक  के लिए संभव है नहीं हो। हमारे जो धार्मिक ग्रंथ हैं और उनमें जो कुछ लिखा हुआ है उसकी सरसरी व्याख्या नहीं हो सकती। सूक्ष्म व्याख्या के बाद ही उसके छिपे हुए सार तत्व को समझा जा सकता है।
     दीप जला कर उसकी ज्योति में आखिर करने के पीछे जो सूक्ष्म तत्व है वह समझना चाहिए। मेरा यह मानना है कि परम आत्मा जिसे परम ब्रह्म नामों से पुकारते हैं वे ज्योति स्वरूप हैं उनका कोई अन्य आकार नहीं है। ज्योति एक बिंदु आकार में है। युगों से यही माना जाता है। जब हम कोई भी कार्य करने के लिए दीप जलाते हैं तो असल में उसी ज्योति स्वरूप के सामने ही हम कार्य करते हैं। दीपावली में वैसे अनेक कारण माने जाते हैं लेकिन इस सूक्ष्म तत्व को भी ध्यान में रखना चाहिए कि हमें दीप ही क्यों जलाने चाहिए?
दीप जलाने से उसकी ज्योति को छूती हुई समीर आसपास के वातावरण को आनन्दित और स्वच्छ करती है। लेकिन बल्ब की रोशनी से ज्योति नहीं निकलती प्रकाश तो होता है। वह अन्य प्रकार से भी किया जा सकता है। लेकिन उससे ज्योति नहीं निकलती जिसे छूकर समीर बहे।
स्पष्ट है कि रोशनी तो किसी भी प्रकार से की जा सकती है लेकिन दीप की ज्योति का लाभ उससे नहीं मिलता। दीपावली पर बार बार कहा जाता है कि दीप जरूर जलाएं।
दीपावली ही नहीं बाद में जब भी कोई कार्यक्रम हो उसमें दीप जलाएं।
केवल दीपावली ही नहीं अन्य पर्वाे पर भी घरो में दीप की ज्योति में ही शुभ कार्य करते हैं।

- करणीदानसिंह राजपूत -
- अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार लेखक,
23,करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ़।
94143 81356

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Dated 11-11-2015.
up dated 28-10-2016.

बुधवार, 26 अक्तूबर 2016

राजशाही सरकार में महाराजा गंगासिंह ने गंगनहर बनाई और प्रजातंत्र की सरकारें उसमें पूरा पानी नहीं चला सकती?


जवाब दो प्रजातंत्र के हुक्मरानों:जल नहीं तो तुम्हारा कल भी नहीं:
- करणीदानसिंह राजपूत -
प्रजातंत्रीय सरकारें राजशाही को सामंतशाही कह कर आलोचना करते नहीं थकते लेकिन कितना आश्चर्य होता है जब प्रजातंत्रीय सरकारों में राजशाही को याद किया जाता है और बीकानेर के महाराजा गंगासिंह को नमन किया जाता है। श्रीगंगानगर की स्थापना पर 26 अक्टूबर को महाराजा गंगासिंह को याद किया गया व उनकी याद में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इसका जो सवाल है उसका उत्तर देना आसान नहीं है।
बीकानेर रियासत के महाराजा गंगासिंह ने अपने किसानों की पीड़ा देखी कि अकाल में उनकी कितनी दुर्दशा हो जाती थी। चाहे मानव हो चाहे पशु हो सभी लाचार हो जाते थे। महाराजा ने दरदर्शी निर्णय लिया और गंगनहर का निर्माण करवाया। इस इलाके को सरसब्ज करने के लिए पंजाब के किसानों सिखों को लाकर बसाया ताकि यहां के किसान भी उनसे नहरी खेती करना सीख सकें। महाराजा ने किसानों के लिए नहर बनाई ओर प्रजातंत्रीय चुनी हुई सरकारें उस नहर में पूरा पानी नहीं चला पा रही है। इस नहर पर केवल राजस्थान का हक बनता है लेकिन पंजाब ने अपने इलाके में सारी नैतिकता  को तोड़ कर  दो नहरें निकाल ली। नहर की संपत्ति खुर्दबुर्द कर दी लेकिन प्रजातंत्रीय राजस्थान की सरकारें व केन्द्र की सरकारें सही निर्णय नहीं कर पाई। यह हाल आजतक कायम है।
बस इतना ही समझ लेन काफी है कि उस महाराजा को इतने सालों बाद राजशाही खत्म हो जाने के बावजूद याद किया जाता है और प्रजातंत्रीय सरकारों को पांच साल के बाद भूल जाते हैं।
गंगनहर में वर्तमान में भी पानी पूरा नहीं चल रहा है। गंगनहर की हालत बहुत खराब हो चुकी है तथा जगह जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। किसान नेता लगातार कई महीनों से पूरे पानी की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रजातंत्रीय व्यवस्था की राजस्थान सरकार को सोचने तक की फुर्सत नहीं है।
राजस्थान की सरकार जनता को पीने के पानी के वास्ते सीख देने के लिए एक नारा लगवा रही है जल नहीं तो कल नहीं।
लेकिन यह नारा सिंचाई पानी के लिए सरकार पर भी लागू होता है। सरकार का जीवन भी इसी नारे पर टिका है जल नहीं तो कल नहीं।
करणीदानसिंह राजपूत-
राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क सचिवालय से अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़। राजस्थान।
संपर्क- 94143 81356.

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शनिवार, 22 अक्तूबर 2016

पटाखों के नियम जरूरी जानें और जरूरी माने: आप कहीं भी रहते हों:


दीपावली पर्व पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश व मानदण्डों के अनुसार हो पटाखों की बिक्री -
 समस्त उपखंड अधिकारियों को निर्देश:
श्रीगंगानगर 22 अक्टूबर। जिला कलक्टर श्री पी.सी. किशन ने दीपावली पर्व पर कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा पटाखों की बिक्री निर्धारित मानदण्डों के अनुरूप करने के संबंध में जिले के समस्त एसडीएम व तहसीलदारों को आवश्यक निर्देश दिए है।
    जिला कलक्टर ने बताया कि दीपावली पर्व को मध्यनजर रखते हुए यह सुनिश्चित करे कि कोई भी व्यक्ति या दुकानदार बिना आतिशबाजी लाईसेंस के पटाखों की बिक्री नही करे व न ही खुले स्थान पर पटाखों की बिक्री करे। प€की तामीर शुद्घा दुकान के अन्दर ही पटाखों की बिक्री करे। समस्त स्थानों का शत प्रतिशत भौतिक सत्यापन किया जाए। जहां पटाखों की बिक्री हो रही है, नगर पालिका एवं राजस्व विभाग के अधिकारी ड्यूटी लगाकर यह आवश्यक सुनिश्चित कर लेवें कि बिना अनुज्ञा पत्र के बिक्री नही हो एवं सुरक्षित स्थान हो ताकि किसी अनहोनी घटना होने से बचा जा सके। जांच में यह भी सुनिश्चित कर लिया जावें कि कोई भी व्य€ित बिना लाईसेंस के पटाखा विक्रय करते हुए पाया जाए तो उसके विरूद्घ विस्फोटक एक्ट में नियमानुसार कार्यवाही करावे तथा इसकी पालना सुनिश्चित की जावे।
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माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय 
 श्रीगंगानगर, 22 अक्टूबर। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार पटाखों के निर्माण, विक्रय एवं उपयोग के लिए प्रतिषिद्घ आदेश जारी किए गए है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पटाखों के लिए शौर मानक अभिनिर्धारित किए गए है। आदेशों की पालना के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए है।
    जिला कल€टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री पी.सी. किशन ने बताया कि किसी भी प्रकार के पटाखों का उपयोग रात्रि 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक  नही किया जावेगा। शान्त क्षेत्र यथा अस्पताल, शैक्षणिक संस्थाए, न्यायालय, धार्मिक स्थलों व अन्य क्षेत्र जिन्हें सक्षम अधिकारी द्वारा प्रतिषिद्घ घोषित किया गया है, से 100 मीटर की परिधी में पटाखों पर प्रतिबन्ध रहेगा। पटाखों के लिए शौर मानक के तहत प्रस्फोटन के बिन्दु से 4 मीटर की दूरी पर 125 डी.बी. (ए.आई.) या 145 डी.बी (सी.पी.के.) से अधिक शोर स्तर जनक पटाखों का विनिर्माण या उपयोग प्रतिषिद्घ होगा। लडी (जुडे हुए पटाखें) गठित करने वाले अलग-अलग पटाखों के उपर वर्णित सीमा को 5 लोग 10 एलडीबी तक कम किया जा सकेगा। उन्होने बताया कि समस्त शिक्षण संस्थाओं के प्राचार्य व प्रधानाध्यापक छात्रों को ध्वनि प्रदूषण व वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के संबंध में जागृत करेंगे व आवश्यक बिन्दुओं के बारे में जानकारी देंगे। यह आदेश 28 अक्टूबर 2016 से एक नवम्बर 2016 तक प्रभावी रहेंगे।
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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2016

राजस्थान के वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकारों को पेंशन दिए जाने की मांग:



राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से किया गयाआग्रह:
सूरतगढ़ 21 अक्टूबर 2016.
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मांग की गई है कि राजस्थान सरकार के सूचना एवं जन संपर्क सचिवालय से अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार जिनकी आयु 60 साल से ऊपर हो चुकी है को पेंशन सुविधा दी जाए। इसके साथ अन्य सुविधाएं भी दी जाएं।
वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत ने यह आग्रह किया है। इसमें लिखा गया है कि पिछली सरकार ने पत्रकारों को पेंशन नियम बनाया था लेकिन उसमें राशि केवल 5 हजार रूपए बहुत कम थी तथा उसमें प्रपत्र में अनावश्यक तथ्य मांगे गए जिनकी आवष्यकता ही नहीं थी। उस कारण से अनेक पत्रकारों ने वह पेंशन सुविधा लेने का निर्णय नहीं किया व प्रपत्र नहीं भरे। मुख्यमंत्री राजे से आग्रह किया गया है कि आपकी सरकार जो प्रपत्र बनाए वह साधारण होना चाहिए।

बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

बहतरवें वर्ष में मेरा सुखद प्रवेश: लेखन पत्रकारिता के 51 वर्षों की आनन्दी यादें- करणीदानसिंह राजपूत:


माँ हीरा और पिता रतनसिंहजी की सीख तूं चलते जाना निर्भय होकर-पीडि़तों की आवाज बन कर:

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पत्रकारिता एवं लेखन के इक्यावन वर्षों के संघर्ष और आनन्ददायी अनुभवों व महान लेखकों पत्रकारों की रचनाओं को पढ़ते और उनसे मिलते हुए मेरे जीवन के इकहतर वर्ष पूर्ण हुए एवं 19 अक्टूबर 2016 को बहतरहवें में प्रवेश की सुखद अनुभूति।
सीमान्त क्षेत्र का छोटा सा गांव जो अब अच्छा कस्बा बन गया है अनूपगढ़ जिसमें मेरा जन्म हुआ। माता पिता हीरा रतन ने और परिवार जनों ने वह दिया जिसके लिए कह सकता हूं कि मेरी माँ बहुत समझदार थी और पिता ने संषर्घ पथ पर चलने की सीख दी।
सन् 1965 में दैनिक वीर अर्जुन नई दिल्ली में खूब छपा और सरिता ग्रुप जो बड़ा ग्रुप आज भी है उसमें छपने का गौरव मिला।
हिन्दी की करीब करीब हर पत्रिका में छपने का इतिहास बना।
धर्मयुग और साप्ताहिक हिन्दुस्तान में छपना गौरव समझा जाता था। दोनों में भी कई बार छपा।
छात्र जीवन में वाचनालय में दिनमान पढ़ता था तब सोचा करता था कि इसके लेखक क्या खाते हैं कि इतना लिखते हैं। वह दिन भी आए जब दिनमान में भी लेख खूब छपे।

सन् 1974 में प्राणघातक हमला हुआ। राजस्थान की विधानसभा में कामरोको प्रस्ताव 20 विधायकों के हस्ताक्षरों से पेश हुआ। 48 विधायक बोले और फिर संपूर्ण सदन ही खड़ा हो गया था। मुख्यमंत्री को खड़े होकर सदन को शांत करना पड़ा था। राजस्थान विधानसभा की प्रतिदिन की कार्यवाही उन दिनों छपती थी। मेरे पास वह एक प्रति है। सात दिनों तक यह हंगामा किसी न किसी रूप में होता रहा था। बीबीसी,रेडियो मास्को, वायस ऑफ अमेरिका सहित अनेक रेडियो ने दुनिया भर में वह घटना प्रसारित की। देश के करीब करीब हर हिन्दी अग्रेजी अखबार में संपादकीय छपे।आरएसएस का पांचजन्य,वामपंथी विचारधारा और जवाहर लाल नेहरू के मित्र आर.के.करंजिया का ब्लिट्ज,कांग्रेसी टच का करंट और समाजवादी विचार धारा के जॉर्ज फरनान्डीज के प्रतिपक्ष में 1974-75 में खूब छपा।/ प्रतिपक्ष साप्ताहिक था जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नींद हराम करके रखदी थी और बाद में तो इस पर आपातकाल में प्रतिबंध लग गया था।
 आपातकाल अत्याचार का काल था जिसमें मेरा साप्ताहिक भारत जन भी सरकारी कोपभाजन का शिकार बना। पहले सेंसर लगाया गया। सरकार की अनुमति के बिना कोई न्यूज छप नहीं सकती थी। विज्ञापन रोक दिए गए। अखबार की फाइल पेश करने के लिए मुझे गंगानगर बुलाया गया और  30 जुलाई 1975 को वहां गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप लगाया गया कि पब्लिक पार्क में इंदिरा गांधी के विरोध में लोगों को भड़का रहा था। एक वर्ष की सजा भी सुनाई गई। सवा चार माह तक जेल मे बिताए और उसके बाद एक संदेश बाहर कार्य करने का मिलने पर 3 दिसम्बर 1975 को बाहर आया। आपातकाल में बहुत कुछ भोगा। मेरी अनुपस्थिति में छोटी बहन,पिता और नानी को क्षय रोग ने ग्रस लिया। इलाज तो हुआ वे ठीक भी हुए लेकिन वह काल बड़ा संघर्षपूर्ण रहा। परिवार ने कितनी ही पीड़ाएं दुख दर्द भोगे मगर यह अनुभव राजपूती शान के अनुरूप था।
 मैं सरकारी पीडब्ल्यूडी की नौकरी में था तब लेख कहानियां आदि बहुत छपते थे लेकिन गरीबों व पिछड़े ग्रामों आदि पर लिखने की एक ललक थी कि दैनिक पत्रों में लिखा जाए तब 1969 में पक्की नौकरी छोड़ कर लेखन के साथ पत्रकारिता में प्रवेश किया। अनेक अखबारों में लिखता छपता हुआ सन 1972 में राजस्थान पत्रिका से जुड़ा और 15 मई 2009 तक के 35 साल का यह सुखद संपर्क रहा।
राजस्थान पत्रिका का एक महत्वपूर्ण स्तंभ कड़वा मीठा सच्च था। इस स्तंभ में लेखन में घग्घर झीलों के रिसाव पर सन् 1990 में लेखन पर सन् 1991 में राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार मिला। इंदिरागांधी नहर पर 12 श्रंखलाएं लिखी जो सन् 1991 में छपी तथा दूसरी बार 1992 में पुन: राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। राजस्थान की शिक्षा प्रणाली पर व्यापक अध्ययन कर दो श्रंखलाओं में सन् 1993 में प्रकाशित लेख पर तीसरी बार राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। इसके बाद सन 1996 में राजस्थान की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पद्धति पर व्यापक अध्ययन कर 4 श्रंखलाएं  लिखी। इस पर सन् 1997 में राज्य स्तरीय दूसरा पुरस्कार मिला।
राजस्थान पत्रिका के श्रद्धेय कर्पूरचंद कुलिश का मेरे पर वरद हस्त रहा और उन्होंने जोधपुर में पत्रकारों के बीच में कहा कि मैं तुम्हारे हर लेख को पढ़ता हूं। यह एक महान गौरववाली बात थी। गुलाब कोठारी और मिलाप कोठारी एक घनिष्ठ मित्र के रूप में आते मिलते और अनेक विषयों पर हमारी चर्चाएं होती। माननीय गुलाब जी सुझाव लेते और वे पत्रिका में लागू भी होते। गुलाब कोठारी ने श्रीगंगानगर में सर्वश्रेष्ठ संवाददाता के रूप में सम्मानित किया तब कई मिनट तक एकदूजे से गले मिले खड़े रहे। आज भी पत्रिका परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।


राजस्थान पत्रिका के प्रधानसंपादक गुलाब कोठारी सर्व श्रेष्ठ पत्रकारिता पर करणीदानसिंह राजपूत को सम्मानित करते हुए। बीच में नजर आ रहे तत्कालीन शाखा प्रबंधक अवधेश जैन और पास में उपस्थित तत्कालीन शाखा प्रभारी संपादक हरिओम शर्मा। दिनांक 16-4-2004.

वर्ष 1997 में शिक्षा संस्थान ग्रामोत्थान संगरिया के बहादुरसिंह ट्रस्ट की ओर से पत्रकारिता में पुरस्कार प्रदान किया गया।
    रामनाथ गोयनका के इंडियन एक्सप्रेस का विस्तार जब जनसत्ता दैनिक के रूप में हुआ तब जनसत्ता दिल्ली में खूब छपा। जब चंडीगढ़ से छपने लगा तब ओमप्रकाश थानवी के कार्यकाल में चंडीगढ़ में भी छपा। साप्ताहिक हिन्दी एक्सप्रेस बम्बई में भी लेख कई बार छपे।
राजस्थान की संस्कृति,सीमान्त क्षेत्र में घुसपैठ,तस्कर,आतंकवाद पर भी खूब लिखा गया। पंजाब के आतंकवाद पर टाइम्स ऑफ इंडिया बम्बई ने लिखने के लिए कहा तब कोई तैयार नहीं हुआ। वह सामग्री वहां से छपने वाली पत्रिका धर्मयुग में छपनी थी। मैंने संदेश दिया और मेरा लेख सन् 1984 में दो पृष्ठ में छपा। धर्मयुग में लेख छपना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। धर्मयुग में बाद में कई लेख प्रकाशित हुए।
मेरे लेख और कहानियां बहुत छपी।
आकाशवाणी सूरतगढ़ से वार्ताएं कहानियां कविताएं रूपक आदि बहुत प्रसारित हुई हैं।
इंदिरागांधी नहर पर दूरदर्शन ने एक रूपक बनाया जिसमें कई मिनट तक मेरा साक्षात्कार रहा। वह साक्षात्कार मेरे इंदिरागांधी नहर पर लेखन के अनुभवों के कारण लिया गया। दूरदर्शन के दिग्गज प्रसारण अधिकारी के.के.बोहरा के निर्देशन में वह साक्षत्कार हुआ व राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारण हुआ।
मेरा लेखन कानून नियम के लिए सच्च के प्रयास में रहा। कई बार ऐसा लेखन अप्रिय भी महसूस होता है लेकिन जिन लाखों लोगों के लिए लिखा जाता है,उनके लिए आगे बढऩे का कदम होता है।
मेरे परिवार जन,मित्रगण और कानून ज्ञाता जो साथ रहे हैं वे भी इस यात्रा में सहयोगी हैं। मेरे लेखन में माता पिता की सीख रही है इसलिए उनका संयुक्त छायाचित्र यहां पर दे रहा हूं।



मैंने मेरे पूर्व के लेखों में भी लिखा है कि लिखने बोलने की यह शक्ति ईश्वर ही प्रदान करता है और वह परम आत्मा जब तक चाहेगा यह कार्य लेखन और पत्रकारिता चलता रहेगा और लोगों का साथ भी रहेगा।
मेरी वेब साईट   www.karnipressindia.com आज अत्यन्त लोक प्रिय साईट है जो देश और विदेश में प्रतिदिन हजारों लोग देखते हैं।
दिनांक 19-10-2016.
करणीदानसिंह राजपूत,
राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क सचिवालय से
अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ़ / राजस्थान/ भारत।
91 94143 81356.
मेरा ई मेल पता.   karnidansinghrajput@gmail.com
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मंगलवार, 18 अक्तूबर 2016

खाट सजवार में नशा मुक्ति कैंप और समाज को नई दशा देने की शपथ: समाज में से बुराईयों को हटाने का सकल्प- करणीदानसिंह राजपूत-


अध्यक्ष अध्यक्षणी का खून मच्छर चूंसते नहीं है या शहर में मच्छर नहीं हैं?


मुद्दा एक है:सवाल दो हैं: जवाब एक है: -तीखा तीर जहर बुझा-करणीदानसिंह राजपूत:
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इसका जवाब मच्छर देते हैं।
अरे लोगों। अध्यक्ष का खून तो हम चूंस लें और स्वाद ले ले कर चूंस लें,अगर उनके बदन में खुद का खून हो। उनके बदन में तो दूजों का खून भरा है। मच्छर चूंसते हैं और वे दूजों का खून पीते हैं। हम मच्छर चूंसें तो भी खत्म नहीं हो। दूजों का खून पी पी कर अध्यक्ष मुटा गया7 इतना मुटा गया कि भैंसे को भी पीछे छोड़ दिया। अरे। मच्छर बोला-मैं तो भूल ही गया। आपके शहर में कितना सुंदर नाम है आपके शहर का-वहां आपके शहर में तो अध्यक्षणी है। उसके बदन में भी खुद का खून नहीं है। कच्ची बस्ती... वो दूर झोंपड़ बस्ती वालों का खून भरा है पूरे बदन में। कहां गंदे लोग नहाते नहीं गंदे कपड़े पहनने वालों का गंदा खून अध्यक्षा पी ही नहीं सकती? बात तो तेरी सच्ची हो जाती मगर अध्यक्षणी का डील देख...गरीबों का ही खून भरा है पूरे डील में। लेकिन अध्यक्षा गोरी चिट्टी है,गरीबों की बस्ती का काले पीले लोगों का खून पीती तो गोरी चिट्टी कैसे होती?
अरे भाई, वो गोरी चिट्टी है इसलिए उसे रोकते टोकते नहीं और हम मच्छरों को दिन रात मारते रहते हो।
तुम आदमियों की सोच भी दोगली है। मामूली खून चूंसने वाले मच्छरों को मारते हो और खून पीने वाले अध्यक्ष अध्यक्षणी को कभी फूलों के हार से तो कभी गड्डियों से दुलारते हो।
तुम मच्छरों को क्या मालूम है? किसे प्यार करते हैं और किसे नहीं?
अरे,हम दुनिया में तो चार पांच घंटे के मेहमान होते हैं मगर हमें मालूम सारे जग की होती है। हमारी भिन भिन है न, ये तुम्हारे मोबाइल कॉल से ज्यादा पावर वाली है। दूर दूर तक की खबर इधर उधर पहुंचाते देर नहीं लगती।
देखो,अध्यक्ष और अध्यक्षणी को ज्यादा बुरा मत बताओ। तुम्हारा ईलाज वो करने वाली है।
देख तूं जो कह रहा है। वह हम मच्छरों से छिपा नहीं है।
वो अध्यक्षणी और अध्यक्ष मारना तो चाहते हैं मगर अभी सैटिंग नहीं हुई है।
सैटिंग किस बात की?
अरे वो काला तेल नालियों में डालना है न,उसकी सैटिंग होगी तब ही तो वह खरीदा और डाला जाएगा।
कितना खरीदना है? कितने का बिल बनवाना है? अभी झंझट में चल रहा है। जिस दिन तय हो जाएगा उसी दिन अध्यक्षणी और उसकी पार्षद दोस्तणियां दो चार पार्टी के चमचे साथ होंगे। कच्ची बस्ती की नाली में गंदे तालाब में काला तेल डालते फोटूएं ख्ंिाच जाऐंगी। अगले दिन वो अखबारों में छप जाऐंगी। वाह वाही हो जाएगी। दो चार वार्डों का नाटक और बाकी अगले साल। काला तेल खत्म।
बात कितनी आगे बढ़ती।
आदमी बोल गया। देख मच्छर भाई,एक बात म्हारी भी मानले। म्हारे कहने ताईं आज की रात अध्यक्षणी नै भी काट ले। तम ने तो मरनो है। अध्यक्षणी मरवाएगी। मरणे से पैलां उण नै एक बेर तो काट लो।
आदमी भाई। चल आ तेरी बात मानी।
जणां काळियो तेल नालियां में डालणो शरू हावे,उण टेम जाण लियौ हमने अध्यक्षणी के तीखी चूंच लगा दी।
आगले ही दिन कचची बस्ती में अध्यक्षणी का चककर लगावण री बात काना मांय पड़ी।
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सोमवार, 17 अक्तूबर 2016

पूर्व में उगते सूरज का स्वागत करता हुआ पश्चिमी आकाश में छाया चन्द्रमा=



नजारा 17 अक्टूबर के प्रात:काल का: फोटो करणीदानसिंह राजपूत:
सूरतगढ़। प्रकृति का यह नजारा भी अद्भुत था। पूर्व दिशा में जब सूरज उदय हो रहा था तब पश्चिम आकाश में चन्द्रमा भी विराजमान था। दृश्य यो लग रहा था मानो उगते हुए सूरज का चन्द्रमा स्वागत कर हा था।

रविवार, 16 अक्तूबर 2016

पुष्कर तीर्थ अंचल की विश्व विख्यात किशनगढ़ की राजपूत चित्रकला



पुष्कर की पवित्र झील और  दर्शनीय आरावली की पर्वत श्रंखलाएं


पुष्कर तीर्थ के अंचल की विश्व विख्यात किशनगढ़ की राजपूत चित्रकला
किशनगढ़ के शासक की प्रेमिका बणी ठणी के नाम से प्रसिद्ध है यह चित्रशैली







शानदार किशनगढ़ चित्रशैली
बनी ठणी के चित्र वाले बॉक्स
शानदार किशनगढ़ चित्रशैली

 इस शैली की चित्रकारी की सामग्री को अपने भवनों की सुंदरता बढ़ाने के लिए विदेशी पर्यटक और भारतीय खूब खरीदते हैं
 राजस्थान  के बाजारों में इस चित्र शैली की खरीद बिक्री सामान्य दिनों में भी चलती रहती है
विशेष लेख : करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान के अजमेर जिले में हजारों वर्षों से पूजनीय तीर्थराज पुष्कर के अंचल का किशनगढ़ सैंकड़ों वर्षों से राजपूत चित्र शैली से विख्यात है। यहां के शासक सांवतसिंह की एक प्रेमिका बणी ठणी का चित्र राजा के चित्रकार मोरध्वज ने बनाया था। वह चित्र राजा को पसंद आया। उसी बणी ठणी के नाम से यह चित्र शैली प्रसिद्ध हुई।
    इस चित्र शैली की मांग देश ओर विदेश में बहुत है। वर्तमान युग में जहां साज सज्जा के तरीकों में बहुत बदलाव आ गया है, लेकिन इस पुरातन शैली के चित्रों से साज सज्जा करना बढ़ता जा रहा है। वर्षों से किशनगढ़ शैली में चित्रकारी करने में सिद्धहस्त किशनगढ़ वासी जसवंतसिंह ने बताया कि इस चित्रशैली की सज्जा आवासीय भवनों में व बड़े बड़े होटलों में स्वागत कक्ष से शयन कक्ष तक की जाने का प्रचलन बढ़ रहा है। गैलरी में और सामान्य घरों तक की बैठकों में इस शैली के चित्र सजाए जाते हैं। सरकारी विश्राम गृहों सर्किट हाऊसों और पर्यटन विभाग के बंगलों व भवनों में इस शैली के चित्रों से की गई साज सज्जा देखते ही बनती है।
    इस शैली के चित्र कागज व  सिल्क कपड़े पर की जाती है।  लक्कड़ी पर आलमारी, बैड, टेबल-चेयर, सजावट के कॉर्नर पर यह चित्र शैली खूब सुंदर लगती है। संगमरमर पर इसका आकर्षण लाजवाब होता है। लोहे के सामान छोटे मोटे बॉक्स, बैंगल बॉक्स,मटके आदि पर भी इसकी सजावट करने का प्रचलन है। कांच पर भी यह चित्रकारी की जाती है। धार्मिक स्थलों में मंदिरों व धर्मशालाओं आदि में भी इस चित्र शैली की फूल पत्तियां बनवाने का प्रचलन है।
    जसवंतसिंह और उनके छोटे भ्राता विजेन्द्रसिंह किशनगढ़  शैली के चित्र बनाने में सिद्धहस्त हैं। उनसे जानकारी मिली कि किशनगढ़ में चार सौ से अधिक लोग इस चित्र शैली में चित्र बना कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। इसके अलावा आसपास के कस्बों में भी इस शैली की चित्रकारी की जाती है।
    जसवंतसिंह ने बताया कि पुष्कर मेले में हस्तकला उद्योग की प्रदर्शनी लगती है जिसमें किशनगढ़ शैली की चित्रकारी के सामान की बिक्री बहुत होती है। जसवंतसिंह स्वयं पुष्कर मेले में पुरस्कार प्राप्त है। जसवंतसिंह ने बताया कि पुष्कर तीर्थ आने वाले श्रद्धालु और दर्शनार्थी आदि सामान्य दिनों में भी खरीदारी करते हैं जिससे पूरे वर्ष इस चित्रकारी के सामान की मांग रहती है। जसवंतसिंह ने बताया कि देश विदेश में पहुंचाने के लिए बड़े व्यवसायी और कंपनियां हैं जिनके मालिक आदेश देकर मांग के अनुसार संबंधित सामान पर चित्रकारी करवाते हैं। ये जानकारी भी मिली कि अनेक वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें लाया ले जाया नहीं जा सकता, उन पर चित्रकारी उस स्थान पर पहुंच कर ही की जाती है। किशनगढ़ चित्र शैली का व्यवसाय पुष्कर व अजमेर के अलावा जयपुर, उदयपुर,जोधपुर,कोटा में खूब फलफूल रहा है। विदेशों में बढ़ रही मांग के कारण निर्यात का व्यवसाय भी काफी बढ़ा है।
किशनगढ़ शैली की चित्रकारी में सिद्धहस्त जसवंतसिंह से मोबाइल नं 98299 44359  पर तथा चित्रकार छोटे भ्राता विजेन्द्रसिंह से मोबाइल नं 77422 24021 पर संपर्क किया जा सकता है। इन भ्राताओं से चित्रकारी करवाने, देखने और जानकारी लेने के लिए संपर्क किया जा सकता है।

जसवंतसिंह     98299 44359
 विजेन्द्रसिंह   77422 24021


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किशनगढ़ चित्र शैली चित्रकारी करवाने, देखने और जानकारी लेने के लिए संपर्क करें
श्री भटियानी आर्ट्स
मालियों का मोहल्ला,गुमानसिंह गेट के पास,
नया शहर,
किशनगढ़।   
जिला अजमेर।  मोबा. 98299 44359, 77422 24021
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शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

दीप विजुएल सूरतगढ़ की सफलता के 25 वर्ष:


9 अक्टूबर 2016 को 25 साल पूर्ण:अब दीप आई हॉस्पीटल:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। दीप विजुएल का शुभारंभ भगतसिंह चौक के पास रेलवे रोड पर उपखंड अधिकारी पद पर नियुक्त वासुदेव शर्मा ने किया था। भारत विकास परिषद के जोन अध्यक्ष तक पदों पर पहुंचे राष्ट्रीय विचार धारा के घनश्याम शर्मा इसके संचालक मालिक ने इसे गति दी। श्रीगणेश के समय से ही आधुनिक मशीनों से नेत्र जाँच करने का कार्य लोगों को प्रभावित करने लगा था। उस समय जापान का उपकरण काफी महंगा था मगर इस कस्बे को उसकी सुविधा दी गई।
घनश्याम शर्मा ने अपने कार्यों से लोगों को प्रभावित किया। नेत्रों की दृष्टि वाले चश्मों की जरूरत हर जन को उम्र के हिसाब से पड़ ही जाती है।
समय की आवश्यकता के अनुसार इसका विकास हुआ।
अब ऑप्टम सर्वेश शर्मा यहां अति आधुनिक मशीनों से नेत्र दृष्टि की जाँच करते हैं। इस इलाके का सर्वश्रेष्ठ नेत्र जाँच का केन्द्र बन गया है दीप आई हॉस्पीटल।


पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा के पति सुनील छाबड़ा की हैसियत क्या है?


पालिकाध्यक्ष कार्यालय में बैठना कितना कितना उचित?
-महावीर पारीक को बतलाए सूरतगढ़ का प्रशासन-
स्पेशल रिपोर्ट - करणीदानसिंह राजपूत -

सूरतगढ़,13 अक्टूबर 2016. कांतिकारी विचारक महावीर पारीक को सुनील छाबड़ा नहीं जानता लेकिन महावीर पारीक जानता है कि सुनील छाबड़ा नगरपालिका सूरतगढ़ की अध्यक्ष काजल छाबड़ा का पति है। सुनील छाबड़ा नगरपालिका के कार्यों में दखल देता रहता है और पालिकाध्यक्ष के कार्यालय में बैठा रहता है। सुनील छाबड़ा का पालिका कार्यों में इतना दखल है कि वह नागरिकों को उल्टी रिपोर्ट करवाने की धमकी तक दे देता है। ऐसा ही मामला हुआ है,क्रांतिकारी महावीर पारीक के साथ जिन्होंने आपातकाल में कांग्रेस राज में प्रधानमंत्री इंदिरागांधी के आपातकाल की धज्जियां उड़ाते हुए प्रदर्शन किया व गिरफ्तारी दी जिसके कारण वर्तमान सरकार उनको पेंशन तक दे रही है।
महावीर पारीक को जमीन संबंधी कार्य था जिसकी रिपोर्ट पालिका प्रशासन को देनी थी। वह नहीं मिली तब महावीर पारीक पालिका में गए। वहां पालिकाध्यक्ष के कार्यालय में बैठे सुनील छाबड़ा ने कहा कि जल्दबाजी मत करो,अन्यथा कनिष्ठ अभियंता को कह कर गलत रिपोर्ट करवा दूंगा।
महावीर पारीक ने सरकारी प्रशासन से पालिका की ईओ व संबंधित कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही कार्यवाही करने का लिखा है। पारीक ने यह भी लिखा है कि सुनील छाबड़ा ने गलत रिपोर्ट करवा देने का किस हैसियत से कहा? इसके अलावा उन्होंने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या उनका पालिकाध्यक्ष कार्यालय में बैठना उचित है? प्रशासन से उचित कार्यवाही करने का कहा है।
नगरपालिका में काम के लिए चक्कर पर चक्कर लगाने पड़ते हें और इन शिकायतों से भाजपा शासन को जनता दोषी ठहराती है। पालिका में तथा बोर्ड की बैठक में विधायक राजेन्द्र सिंह भादू ने कई बार कहा है कि जनता का काम तुरंत करो व चक्कर मत लगवाओ। लेकिन पालिका का स्टाफ पुराने ढर्रे पर है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि सुनील वहां किस हैसियत से निर्देश देता है और वह सरकारी कर्मचारियों पर लागू करता है? इसकी गंभीरता को समझा नहीं गया है? कभी यह विवाद भयानक रूप ले लेगा तक क्या होगा? अच्छा यही होगा कि समय के बदलाव को समझा जाए।

चूनावढ में निशुल्क नशा मुक्ति शिविर एवं नशामुक्ति जन जाग्रति कार्यशाला का आयोजन~



 नशा करने वाला व्यक्ति अपराध कर बैठता है
श्रीगंगानगर, 14 अक्टूबर।  जिला पुलिस अधीक्षक श्री  राहुल कोटकी के निर्देशानुसार चलाए जा रहे नशामुक्ति अभियान के अन्तर्गत शुक्रवार को रा.आ.उ.मा विद्यालय चूनावढ में निशुल्क नशा मुक्ति शिविर एवं नशामुक्ति जन जाग्रति कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि एंवम मुख्य वक्ता के रूप में नशा मुक्ति विशेषज्ञ डा0 रवि कान्त गोयल ने अपने सम्बोधन में कहा कि नशा मानवता का दुश्मन है। 
नशा करने से आदमी की आत्मा मर जाती है। नशा करने वाला व्यक्ति अच्छे बुरे मे भेद न करने की वजह से चोरी, डैकेती, बलात्कार एवं हत्या जैसे अपराध कर बैठता है। डा0 गोयल ने नशे के दोषो दुषप्रभावों की जानकारी दी तथा नशें से बचने आदि के सरल उपाय बताते हुए उपस्थित जन समुह को जीवन भर नशा न करने की शपथ दिलवाई।
         कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता नशा मुक्ति उत्प्रेरक श्री विजय किरोडीवाल ने उपस्थित जन समूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि नशा बुराई का ही दुसरा नाम है। नशा करने वाला व्यक्ति न केवल अपना वरन् अपने सैकडांे लोगो को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से दुख पीडा एवं नुकसान पहुचाता है। 
         श्री दलीप सहारण  ने अपने सम्बोधन मे कहा कि नशे जैसी गन्दी आदतो से बचकर ही स्वस्थ जीवन का आनन्द लिया जा सकता है एवं नशा न करने वाले व्यक्ति ही जीवन में उॅचाइयो को छू पाते है।
         कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीमती ज्योत्स्ना ने कहा कि नशे से विधार्थीयों एवं देश की भावी पीढी को बचाना हम सभी का दायित्व बनता है तथा इस दिशा में इस प्रकार के नशा मुक्ति सभी का दायित्व बनता है। तथा इस दिशा में इस प्रकार के नशा मुक्ति अभियान चलाकर पुलिस एवं स्वास्थय विभाग एक अनूठी मिसाल कायम कर रहें है। 
         कायक्रम में राउमावि/राबाउमावि चूनावढ विद्यालयो के स्टॉफ मय छात्रा/छात्राओं ने भाग लिया एवं ग्रामीण व गणमान्य व्यक्ति श्री राजेश जी चुघ, श्री जयचन्द जी कालडा, श्री सतीश जी वधवा सहायक पुलिस निरीक्षक एवं अन्य ग्रामीण वासी उपस्थित थे।
         डा0 गोयल ने नशे से पीडितां की जांच की एवं परामर्श प्रदान किया। मंच संचालन श्री बहादर राम, व्याख्याता( अंग्रेजी) ने किया।

मंगलवार, 11 अक्तूबर 2016

सूरतगढ़ सनसनी: अपके गहनों में कितना सोना कितना तांबा है?


बड़े बैंक के 3 कांट्रेक्ट पारखी सुनार नकली गहने,असली बता कर लोगों के माध्यम से बैंक में जमा करवाते रहे:
सोना जमा करवा कर लाखों रूपए लोन /ऋण उठाया:

कितने ठुकराए नेताओंभ्रष्टाचारियों से रामलीला में संचालकों ने राम की आरती करवाई


देशभर में नवरात्रों पर रामलीलाओं का मंचन हुआ राम के आदर्शों का बखान हुआ और अभिनय हुआ। विजयादशमी पर रावण के पुतले को जलाने पर बुराइयों पर अच्छाइयों की जीत का बखान करते हुए हर वर्ष भाषण दिए जाते हैं। एक तरफ तो हम सभी लोग राम के आदर्शों के अनुरूप संपूर्ण देश को स्थापित करना चाहते हैं लेकिन जब ठुकराए हुए राजनेताओं से भ्रष्ट राजनेताओं और लोगों से वह दुराचारी लोगों से रामलीलाओं में भगवान राम की आरती करवाते हुए नहीं हिचकते तथा ऐसे लंपट बड़े के लाए जाने वाले लोगों से आरती करवाते हैं तो राम के आदर्शों वाला देश कैसे बना पाएंगे अपराधियों और भ्रष्टाचारियों को तो दंडित किया जाना चाहिए वहीं उनको हम रामलीलाओं के मंच के माध्यम से जनता में सुशोभित करते हैं जब हम ऐसे लोगों को जानते हुए समाज में सम्मान देते हैं या सम्मान दिलाते हैं तो राम के आदर्शों वाला देश स्थापित नहीं किया जा सकता वर्तमान समय में एक तरफ पाकिस्तान को आतंकवादियों को सबक सिखलाने का आह्वान किया जा रहा है अपील की जा रही है तो ऐसे समय में हम देश के भीतर जब ठुकरा नहीं सकते तब सीमाओं पर देश के दुश्मनों से कैसे लड़ सकते हैं और जीत सकते हैं हमें देश के भीतर भी बदलाव करना पड़ेगा । समाज के अंदर दोहरी और दोगली नीति अपनाने से भ्रष्टाचारी और दुराचारी कभी भी खत्म नहीं हो सकेंगे ।चाहे हम कितनी ही रामलीलाओं का मंचन करते रहे।

सोमवार, 10 अक्तूबर 2016

करणी माता देशनोकवाली सूरतगढ़ मंदिर में शारदीय नवरात्रा की नवमी पर हवन:

 
नवरात्रा पर माता की प्रतिमा को विशेष रूप से सजाया गया।
- स्पेशल रिपोर्ट-करणीदानसिंह राजपूत -
 
सूरतगढ़ 10 अक्टूबर 2016.
राजपूत क्षत्रिय संगठन के करणी माता मंदिर में शारदीय नवरात्रा की नवमी पर पर माता के पूजन अर्चन के साथ ही मंदिर प्रांगण में हवन किया गया। पंडित मदन सारस्वत ने पूजन व हवन कराया। राजपूत क्षत्रिय सरदारों ने सपत्नी हवन किया। इस अवसर पर नौ कन्याओं को भोजन करवाया गया। समाज के नर नारियों व बच्चों ने व अन्य समाज के श्रद्धालुओं ने भी मां करणी के दर्शन किए व धोक लगाया। भैरूं का पूजन व दर्शन भी किया गया। सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
यहां मंदिर में मां करणी की देशनोक वाली प्रतिमा की अनुकृति है। यह मंदिर श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ की बाईपास सड़क पर बसंत विहार कॉलोनी के  पास में बना हुआ है।
यह प्रतिमा शिला पर है। नवरात्रा पर माता की प्रतिमा को विशेष रूप से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने मंदिर में मां के सिंगार की सामग्री भेंट की एवं चुनरियां ओढ़ाई।
इस हवन की चित्र झांकी यहां पर प्रस्तुत है।


शनिवार, 8 अक्तूबर 2016

राजस्थानी भासा री वेब साइटां अर ब्लॉग

 

राजस्थानी भाषा री  वेबसाईटा 

www.aapanorajasthan.org
www.dhartidhoranri.blog.co.in

 www.marwad.org
www.manak.org
  www.rajasthanimanak.com
www.hathai.wordpress.com
www.beawarhistory.com 


राजस्थानी भाषा रा ब्लोग
 



गुरुवार, 6 अक्तूबर 2016

एक देश एक टैक्स ~बजट की पुरानी अवधारणा को भी बदलेगेंः- अर्जुन राम मेघवाल

 
श्रीगंगानगर, 6 अक्टूबर। केन्द्रीय वित्त एवं कॉर्पारेट राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में कई सुधार किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू करना सरकार की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पहली बार कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक एक राष्ट्र एक कर लागू किया जा रहा है। 

बुधवार, 5 अक्तूबर 2016

भैरोंसिंह शेखावत स्मारक खाचरियावास से अंत्योदय जनयात्रा का शुभारंभ:


डॉ. दशरथसिंह शेखावत के नेतृत्व मेें अंत्योदय जनयात्रा :
स्व.भैरोंसिंह के दोहते अभिमन्युसिंह राजवी ने राष्ट्रीय ध्वज सौंपकर रवाना किया-
-राजस्थान के सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में जाएगी यह यात्रा:
विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत:


रविवार, 2 अक्तूबर 2016

पीएम मोदी के संपूर्ण स्वच्छता अभियान की सूरतगढ़ पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा ने निकालदी हवा:



सुभाष चौक के महिला सुविधा स्थल का बुरा हाल: गंदे पोस्टर पैम्फलेटों पर नहीं करवाते पुलिस कार्यवाही:महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की पावन जयंती पर लोग देखें गंदगी का हाल:- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 2 अक्टूबर 2016.
पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान पर सुभाष चौक पर भाजपा के हर छोटे बड़े नेता ने झाड़ू लगाते हुए फोटो खिंचवाए और अखबारों में छपवाए। आज  महान पुरूषों महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की पावन जयंती पर लोग सुभाष चौक पर पहुंचे और अपनी आँखों से देखें गंदगी का हाल। सुभाष चौक पर पुरूषों का मूत्र स्थल है वहीं चिपते ही महिलाओं के लिए भी यह सुविधा है। महिलाओं के सुविधा स्थल को भयानक रूप से गंदा किया हुआ है तथा उसके दरवाजे व दीवार पर गंदे पोस्टर चिपके हुए हैं। यह गंदगी आखिर कौन साफ करेगा और कौन साफ करवाएगा? यहां पर नगरपालिका बोर्ड भाजपा का है  


जिसकी अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा को तो फुरसत ही नहीं है कि वे कभी सड़कों पर निकल कर हालात देखें। भाजपा के 35 सदस्यीय बोर्ड में आधी संख्या में महिला पार्षद हैं। पार्षदों ने भी कभी भी मोदी के स्वच्छता अभियान को सफल बनाने की कोशिश नहीं की। पार्षदों की भी उतनी ही जिम्मेदारी बनती है जितनी पालिकाध्यक्ष की जिम्मेदारी है।
ळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळळ

राजस्थानी रामलीला देखने उमड़े दर्शक- मायड़ भाषा में संवाद सुनकर हुए रोमाचित



 सूरतगढ  2 अक्टूबर -  मायड भाषा राजस्थानी लोककला रंगमच की ओर से वार्ड नं 4 स्थित करणीमाता मंदिर परिसर में खेली जाने वाली देश की पहली राजस्थानी रामलीला को देखने को दर्शक उमडे अपनी मायड़ भाषा में संवाद सुनकर दर्शक रोमाचित हुए। 

सूरतगढ में शहीद गुरूशरण छाबड़ा प्रतिमा स्थल पर 2 अक्टूबर को धरना-नजदीक राजकीय चिकित्सालय:


जस्टिस फोर छाबड़ा संगठन का आयोजन:शहरवासी शामिल:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 2 अक्टूबर 2016.
राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर आमरण अनशन करते जयपुर में शहीद हुए सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा की प्रतिमा के आगे धरना है जो सुबह 10 बजे से 2
बजे तक चलेगा।
यह आयोजन जस्टिस फोर छाबड़ा संगठन की ओर से है जिसमें यहां के नागरिक व संगठन शामिल हैं। यह सांकेतिक धरना छाबड़ा जी के साथ हुए सरकार के समझौते को लागू कराने की मांग को लेकर है। वर्तमान भाजपा सरकार ने छाबड़ा जी के साथ जो समझौता किया वह लागू नहीं किया। छाबड़ा जी के आमरण अनशन में संसार त्यागने के बाद जयपुर में उनकी पुत्रवधु पूजा छाबड़ा के आमरण अनशन पर भी समझौता हुआ वह भी सरकार ने लागू नहीं किया। सरकार को राजकीय महाविद्यालय का नाम गुरूशरण छाबड़ा के नाम पर करना था,वह भी अभी तक नहीं किया।

आज के सांकेतिक धरने में छाबड़ाजी के पुत्र अंकुर छाबड़ा व उनकी पुत्रवधु पूनम अंकुर छाबड़ा व उनकी टीम के सदस्य शामिल हैं।

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