Thursday, December 11, 2014

मुझे प्यार करो



तुरन्या का नृत्य
झिलमिलाते पंखों
में से आती
ध्वनि तरंगे
जो सुन पाया
मैं
मुझे प्यार करो
मुझे प्यार करो

तितिली सी कोमल
तुरन्या
और मोहक नृत्य
कितने भाव
बदन में
कितने चंचल नयनों में।

वह तो उड़ती
पलक झपक
क्या मैं उसे
पकड़ पाऊंगा?

मैं सोच रहा था
देख रहा था
उसका नृत्य
खोया था उसमें

ना जाने कैसे हाथ खुला
वह आ बैठी
हथेली में
नृत्य करती
इठलाती
और सुरीली आवाज
आई
मुझे प्यार करो
====

करणीदानसिंह राजपूत
पत्रकार,
सूरतगढ़
94143 81356



No comments:

Post a Comment

Search This Blog