Saturday, September 17, 2011

सरकार ने मुस्लिम मुसाफिर खाने के नाम से मांगे भूखंड को आवंटित करने से साफ मना कर दिया

राजस्थान सरकार ने भग्गुवाला कुआ के चिपते हुए भूखंड को  आवंटित किए जाने को स्पष्ट रूप से रोक दिया है

राज्य सरकार ने मुस्लिम मुसाफिर खाने के नाम से मांगे जा रहे भूखंड को आवंटित करने से साफ मना कर दिया
जिला कलक्टर श्रीगंगानगर की रिपोर्ट पर हुआ निर्णय
सूरतगढ़ के भग्गुवाला कुआ के चिपते हुए भूखंड का प्रकरण
नागरिक अधिकार मंच के सचिव सुरेश कौल ने किया था मुकद्दमा और शिकायतें
नगरपालिका के उन ईओज पर कार्यवाहियां जिन्होंने तथ्यहीन झूठी रिपोर्टे दी व गुमराह करते रहे- सुरेश कौल
  करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 17 सितम्बर, 2011. राजस्थान सरकार ने भग्गुवाला कुआ के चिपते हुए भूखंड को मुस्लिम मुसाफिर खाने के नाम से एक संस्था को आवंटित किए जाने को स्पष्ट रूप से रोक दिया है कि उक्त भूखंड नहीं दिया जा सकता। यह भूखंड विवादों में घिरा रहा और जिला कलक्टर श्रीगंगानगर की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने यह निर्णय किया और साफ मना कर दिया। राज्य सरकार के इस निर्णय कि सूचना अभी दो दिन पूर्व ही यहां पर प्राप्त हुई है।
    यह प्रकरण नागरिक अधिकार मंच के सुरेश कौल ने लगातार शिकायतों व मुकद्दमों में उठा रखा था कि उक्त भूखंड विवादित है और उक्त संस्था को आवंटित नहीं किया जा सकता। संस्था ने यह मामला नगरपालिका के सामने रखते हुए इस पर चालीस साल पुराना कब्जा बताया। कॉल ने नगरपालिका के ही दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप लगाते हुए शिकायतें की कि कब्जा फर्जी बताया जा रहा है। इस पर समस्त कार्यवाहियां और दस्तावेजों के आधार पर जिला कलक्टर श्रीगंगानगर ने इस पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट बना कर राज्य सरकार को भेजी।
    भग्गुवाला कुआ के पास वाला यह स्थान वर्षों से खुला ही पड़ा था और इस तरफ कुए की खेलियां थी। पशु मानव आदि इस खुले स्थान का स्वतंत्रता से उपयोग करते थे। पहले कुए की खिंचाई ऊंट से की जाती थी जिसकी चलाई पूर्व की तरफ हुआ करती थी। बीसवीं शताब्दी के साठ के दशक में नगरपालिका ने इस पर इँजन मोटरें आदि लगा कर पानी की खंचाई की थी। लेकिन संबंधित संस्था का कब्जा नहीं था। नगरपालिका ने 1978- 79 के आसपास यहां पर तारबंदी कर पार्क बनवाए। उस समय प्रदेश में जनता पार्टी का राज था। वहां पर बाद में पालिका दुकानों के रूप में भूखंड बेचने की कोशिश की तब निलामी पर अदालत के माध्यम से रोक लगवाई गई। यह निश्चित था कि उस समय उक्त संस्था का कब्जा नहीं था।
यह मामला भाजपा नगरपालिका बोर्ड में श्रीमती आरती शर्मा के कार्यकाल में 1995-2000 की अवधि में आया। बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव आया। बाहर इसका विरोध शुरू हुआ कि कब्जे की बात तथ्यहीन है। इसके बाद में विधायक श्रीमती विजयलक्ष्मी बिश्रोई ने अपने कार्यकाल में यहां पर मुस्लिम मुसाफिर खाने के नाम से विधायक कोटे से राशि तक दिए जाने का प्रस्ताव भेज दिया था, लेकिन शिकायत कायम रही कि संस्था को कब्जे के नाम पर दी नही जा सकती और सच्चाई में वहां कब्जा भी नहीं था जो दस्तावेजों के अधार पर साबित भी किया गया। वह विधायक का प्रस्ताव भी सिरे नहीं चढ सका। उस स्थान को खाली पड़ा देख वहां पर चिनाई मिस्तरियों व मजदूरों आदि ने चिनाई के काम आने वाले सामान को  रखना उठाना शुरू कर दिया और अभी भी यही हालत है। एक बार बिना नगरपालिका की अनुमति के इस भूखंड को चार दीवारी बना कर रोकने की कोशिश की गई, लेकिन जब विरोध हुआ और झगड़े की आशंका हुई तब नगरपालिका ने तुरंत ही वह दो चार फुट का निर्माण गिरा दिया।
    अब राज्य सरकार का साफ इन्कार आ गया है। सुरेश कौल ने बताया कि नगरपालिका के अनेक अधिकारी व कर्मचारी झूठी रिपोर्ट देते रहे और दस्तावेजों तक को अनदेखा करते रहे। राज्य सरकार को गुमराह करते रहे। कौल ने बताया कि झूठी रिपोर्टें देने वालों पर अब कार्यवाही करवाई जाएगी और नगरपालिका के जो भी संबंधित अधिशाषी अधिकारियों ने जानबूझ कर यह किया उनको बख्सा नहीं जाएगा।
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