बुधवार, 6 अक्तूबर 2021

राजस्थानी की मान्यता को लेकर खेली जाने वाली देश की एकमात्र राजस्थानी रामलीला

 



सूरतगढ़ 06 अक्टूबर 2021.


आजादी के 70 वर्षों बाद भी अपनी भाषा की मान्यता की मांग को लेकर जूझ रहे राजस्थान के लोगों ने रंगमंच को माध्यम बनाकर अपनी भाषा की मांग की आवाज देश के सत्ताधारियों तक पहुंचाने का माध्यम बनाया है। अपनी मातृभाषा राजस्थानी में रामलीला के मंचन को लेकर । 

पूरे देश में खेली जाने वाली  राजस्थानी भाषा की रामलीला का मंचन 7 अक्टूबर 2021 से यहां शुरू किया जाएगा । 

मायड़ भाषा राजस्थानी लोक कला रंगमंच की ओर से वार्ड नंबर 5 में विगत 6 वर्षों से इस रामलीला का मंचन किया जा रहा है । इस वर्ष की रामलीला का मंचन 7 अक्टूबर से शुरू होकर 16 अक्टूबर तक किया जाएगा ।


 कलाकारों द्वारा राजस्थानी भाषा में सभी संवाद , लोकगीतों , लोक नृत्य का मिश्रण , राजस्थानी भाषा के परिवेश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से राजस्थानी पहनावे को प्राथमिकता दी जाती है । सभी संवाद कलाकारों द्वारा अपनी मातृभाषा राजस्थानी में ही बोले जाते हैं । मंचन किए जाते हैं । 

राजस्थानी रामलीला के रचनाकार मनोज कुमार स्वामी ने बताया कि आजादी के समय से लेकर अब तक अपनी भाषा की आजादी की लड़ाई राजस्थान के लोग लड़ रहे हैं । राजस्थान को भौगोलिक आजादी मिली लेकिन भाषाई आजादी नहीं मिली । यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक रंगमंच की दुनिया जिंदा रहेगी । मंचन की सभी तैयारियां कर ली गई है ।०0०

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