सोमवार, 29 मार्च 2021

रेलवे होली 2021. बड़ी रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत.

 


💐 सूरतगढ़ की रेलवे परिसर होलिका का पूजन दिन भर चला। शाम को विधि विधान से पूजा और दहन की रस्म नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ने निभाई। 


नगर पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ने अपने वक्तव्य में रेलवे और सूर्योदय नगरी क्षेत्र के लोगों को होली का पर्व की बधाई दी। उन्होंने घोषणा की कि रेलवे अनुमति देगा तो होलिका दहन स्थल को नगरपालिका से विकसित करवा दिया जाएगा जो स्थाई रूप से दर्शनीय होगा। विदित रहे कि ओमप्रकाश कालवा के पिता भी रेलवे के कर्मचारी रहे हैं। 

लोगों ने होलिका की अग्नि में गेहूं की बालियां और हरे चने भूने। इस अवसर पर लड्डू वितरित किए गए। अनेक लोगों ने गुलाल लगाया। 



बच्चों ने रंगोलियां बनाई जिनकी सराहना हुई।


पं. मनमोहन शर्मा ने पूजन करवाया।

होलिका पर्व में करणीदानसिंह राजपूत, प्रेमसिंह सूर्यवंशी, विक्रमादित्य सिंह,विश्वेन्द्र सिंह,राजेन्द्र शर्मा,अशोक शर्मा,अशोक यादव,दिनेश शर्मा,भागूराम, परमजीत सिंह पम्मी, सतनाम वर्मा,हरिनारायण शर्मा,छोटू ठेकेदार,बाबूलाल नाहड़़िया,मास्टर राजेश शर्मा,शशिकांत शर्मा,फूलचंद बारिया,रामप्रताप सोलड़ा,आदि ने भाग लिया। 28 मार्च 2021.

( करणीदानसिंह राजपूत )






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रविवार, 28 मार्च 2021

पेटीकोट- कहानी - करणी दान सिंह राजपूत*



 

जज रायचंद डागा ने मेरी ओर देखा और आरोप सुनाया।

 तुम अपनी पत्नी का पेटिकोट धोते हो।

मैं बोला। सर मेरी रिक्वेस्ट सुनें।
 मैं आगे बोलने वाला ही था कि उन्होंने बीच में टोक दिया। तुमसे जो पूछा जाय केवल उसका जवाब केवल हां ना में दें।ज्यादा बोलने की जरूरत तुम्हें एक बार कह दिया।दो बार कह दिया। अक्ल है कि नहीं है ? तुम केवल हां या ना में जवाब दो। पत्नी का पेटीकोट धोया था या नहीं? धोया था  तो बोलो हां। नहीं धोया  था तो बोलो ना।
मैं चुप हो गयी। मैं डर गया।मैं बताना चाहता था,मगर रायचंद डागा जी की अदालत कोई अलग नहीं थी। वही प्रक्रिया थी जो आम अदालतों में अपनाई जाती है।

काले कोट वाले वकील ने कहा जज साहब क्या कह रहे हैं?क्या पूछ रहे हैं? उसका जवाब दो। तुमने पत्नी का पेटीकोट धोया था या नहीं?
लकील भी वही वाक्य वही शब्द बोला जो जज ने कहा था।

वकील ने पुनः पूछा। तुमने पत्नी का पेटीकोट धोया था या नहीं? केवल हां या ना में जवाब दो। धोया था तो हां कहो नहीं धोया था तो ना कहो।
 मैं वकील का मुंह देखने लगा। कोई सुनने को तैयार नहीं था।
अदालत में वकील प्रश्न पर प्रश्न करते जाते हैं और पूरी बात जानने की कोशिश नहीं करते। अपने आरोपों  को साबित करने के लिए कठघरे में खड़े आरोपित से केवल हां या ना में ही उत्तर चाहते हैं।

मैं आरोपी था।मैं चुप था।
मैं क्या बोलता।पत्नी का पेटीकोट धोया था, मगर क्या हालत थी.....अभी बखान करने की सोच ही रहा था कि हां कहूं या ना कहूं।अगर ना कहता हूं तो चल जाएगा। लेकिन घर में जो ठप्पा है, जनता में जो ठप्पा है सच बोलने का उसका क्या होगा?मेरी आत्मा में ग्लानी होगी। अदालत में झूठ बोला।
मैंने निर्णय किया मन ही मन में  कि इस सच को बोल दूं।

मैं सोच रहा था कि जज रायचंद डागा ने मुझे घूरा और कहा कि जल्दी बोलो।अदालत का वक्त जाया करने की जरूरत नहीं है। जल्दी से बोलो पत्नी का पेटीकोट धोया था या नहीं धोया था? केवल हां और ना में जवाब देना।

जज ने जल्दी से बोला और मैंने जल्दी से उत्तर दे दिया।
हां।
उसके साथ ही मेरे मुंह से पूरा वाक्य निकल गया।धोया था पत्नी का पेटिकोट।
पूरी अदालत में हंसी के फव्वारे छूट पड़े।
हंसी का शोर अदालत के कमरे में गूंज उठा।
जज रायचंद डागा ने मेज पर हथौड़ी बजाई। कुछ देर में अदालत के कमरे में शांति  छा गई।
 सामने खड़े काले कोट वाले वकील ने मेरे से कहा तो तुम स्वीकार करते हो की पत्नी का पेटीकोट धोया था। तुम पर किसी ने दबाव नहीं डाला है।तुम्हें डराया नहीं, धमकाया नहीं।
तुम अपनी इच्छा से यह स्वीकार करते हो की तुमने पत्नी का पेटीकोट धोया। तम्हें इसकी सजा दी जाएगी। वकील चुप हुआ।
एक बार फिर अदालत में शोर हुआ।

जज रायचंद डागा ने फिर मेज पर हथोडा बजाया।
जज साहेब बोले।
शांत।शांत। अगर किसी ने शोर किया तो अदालत से बाहर निकाल दूंगा। सभी चुप बैठे रहें।अदालत का कमरा एक दम शांत हो गया।
सब चुप हो गए।
जज रायचंद डागा ने मेरी तरफ देखा और कहा कि तुमने भरी अदालत में यह आरोप पत्नी का पेटीकोट धोते हो स्वीकार किया है। तुम्हे इसके लिए दंड मिलेगा। तुमने समाज के नियमों को तोड़ा है। तुम्हें इसकी सजा जरूर और जरूर सुनाई जायेगी। समाज के नियम तोड़ना बहुत गंभीर अपराध है।अब तुम सजा सुनने के लिए तैयार हो।

मैंने अदालत के पूरे कमरे में नजर घुमाई कि कोई तो मेरे साथ होगा लेकिन कोई भी मेरे साथ नहीं था। सब मुझे हंसी का पात्र बनाने में मजा ले रहे थे। सभी के चेहरों से लग रहा था कि वे सब मुझे दंडित होते हुए देखना चाहते थे। मैं क्या कहूं? क्या बखान करूं? मेरे मित्र उनमें थे। कुछ अड़ोस पड़ोस के लोग भी थे। 

राजनीतिक कार्यकर्ता,सामाजिक कार्यकर्ता, अनेक प्रतिष्ठित जन मौजूद थे। उनमें वे लोग भी थे जिनके मैंने बहुत काम करवाए  व खुद ने किए थे।उनकी समस्याओं का हल किया था, लेकिन आज सभी भरी अदालत में मुझे दंडित होते हुए देखने को उतावले हो रहे थे।
आखिर जज ने एक बार फिर हथोड़ा बजाया और मेरा नाम लेकर कहा। तो तुम अब सजा सुनने के लिए तैयार हो?

मैंने जज साहब से हाथ जोड़कर निवेदन किया। आप मुझे पत्नी का पेटीकोट धोने की जो सजा देंगे वह मुझे मंजूर होगी। लेकिन आप एक बार मेरी बात को सुनलें।

जज ने मेरी तरफ देखा और रहम किया। बोलो तुम क्या बोलना चाहते हो, लेकिन यह ध्यान रखना तुम्हारे बोलने से अदालत प्रभावित नहीं होगी। अदालत भावनाओं में नहीं बहेगी। तुम्हें जो सजा सुनाई जाएगी। वह सुनाई ही जाएगी और जरूर सुनाई जाएगी। अदालत को भावनाओं में बहाने की कोशिश मत करना। अदालतें भावनाओं में फैसले नहीं करती। तुम्हारा अपराध तुमने खुद ने भरी अदालत में स्वीकार कर लिया है। तुमने पत्नी का पेटीकोट धोया था। अब बोलो तुम क्या कहना चाहते हो?

मैंने जज रायचंद डागा की तरफ देखा।
एक बार पुनःअदालत में बैठे महानुभावों को देखा और फिर मैं बोला।

जज साहब हमारे घर में वाशिंग मशीन है जिस पर घटना वाले दिन पत्नी कपड़े धोने में लगी हुई थी। वाशिंग मशीन चल रही थी।वाशिंग मशीन मैं कपड़े धुल रहे थे।
इतने में डोर बेल बजी। दरवाजे पर कोई आया है। पत्नी ने मुझे पुकारा मैं दूसरे कमरे बैठक में बैठा था।
पत्नी की आवाज आई- सुनते हो, थोड़ा मशीन पर आना।मैं दरवाजा खोलने जा रही हूं। कपड़े निकाल कर ड्रायर में डाल देना।
 मैं मशीन पर गया। मुझे मालूम नहीं था कि मशीन में क्या धुल रहा है।

मैने मशीन को रोका और टब में से कपड़े निकाल कर ड्रायर में डालने लगा।
इतने में ही पत्नी के साथ मशीन के पास पड़ोसन आ गई।मैं कपड़े निकाल कर ड्रायर में डाल रहा था,उन कपड़ों में पत्नी का पेटीकोट  भी था।मेरे सफेद कपड़ों पर पड़ोसन की नजर गई या नहीं गई लेकिन लाल रंग के पेटीकोट पर नजर चली गई। 
पड़ोसन ने उस समय हंसी में पत्नी से कहा ,अरे तुम्हारी तो मौज। तुम अपने पति से कपड़े धुलवाती हो और पेटीकोट भी।
पड़ोसन ने यह बात पड़ोस में फैला दी। बस इतनी सी बात थी जिसका पहले मोहल्ले में हल्ला हुआ फिर समाज में हुआ और मैं दोषी बना दिया गया। समाज के जाने माने लोगों ने पूछा तो मैंने हां कर दी। इसमें ना करने जैसी कोई बात मुझे नजर नहीं आई।
 जज साहब मैं यह ध्यान दिलाना चाहता हूं। किसी पर आरोप नहीं लगा रहा, लेकिन केवल जानना चाहता हूं कि घर में पति-पत्नी दो ही हो और पत्नी बीमार हो जाए। तब उसके कपड़े कौन धोएगा? फिर आजकल तो थापी सोटे से कोई कपड़े नहीं धोता।वाशिंग मशीन में डाल देते हैं और बिजली का बटन दबा देते हैं। कपड़े धुल जाते हैं।
 जज साहब पत्नी की बीमारी में मैंने पहले थापी सोटे से जब कपड़े धोए तब कोई बवाल नहीं मचा। किसी ने देखा नहीं था।
 जज साहब।क्या अदालत  जितने लोग बैठे हैं, इन्होंने कभी अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोया होगा। लेकिन यह आरोपित नहीं है। एक बार अदालत में शोर सा हुआ।
जज ने कहा तुम्हें किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाने की कटाक्ष करने की इजाजत नहीं है। तुम केवल और केवल अपनी बात कहो जिसकी इजाजत दी गई है।

जज साहब मैंने जाने अनजाने में यह कहा है लेकिन यह सच्च तो है। मैं माफी चाहता हूं।
मैं स्वीकार करता हूं। एक बार फिर कहा मैंने पत्नी का पेटीकोट धोया था। आप जो चाहे सजा सुनाएं। मुझे वह सजा कबूल होगी मंजूर होगी। मैं सजा का पालन करने का वादा करता हूं ।

जज रायचंद डागा नामी जज बड़े सुलझे हुए मगर जज की कुर्सी पर बैठने के बाद उनका रुतबा ही कुछ और हो जाता था।
सारे इलाके में रायचंद डागा का नाम और उनकी सजा से सभी डरते थे।
मैं उनके सामने सजा सुनने को तैयार खड़ा था।
उन्होंने एक बार हथोड़ा बजाया।
अदालत में शांति छा गई और अदालत में उपस्थित सभी लोग एकटक जज की तरफ देखने लगे।

मैं भी सजा सुनने के लिए तैयार था।
रायचंद डागा जज ने सजा सुनाई।
तुम पत्नी का पेटीकोट धोने का आरोप स्वीकार कर चुके हो।अब तुम्हें जो सजा सुनाई जा रही है वह ध्यान से सुनो, और उस पर कोई सवाल जवाब की इजाजत नहीं होगी।
 जज ने सजा सुनाई "तुम आगे कभी अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोओगे।

मैं जज साहब को देखने लगा।
मैंने रिक्वेस्ट की सर इस निर्णय से तो मेरी बदनामी होगी।मेरा निवेदन सुनें। अदालत में शोर होने लगा जल्दी ने फिर हथोड़ा बजाया। अदालत में शांति हुई।
मैंने रिक्वेस्ट की।जज साहब मैं आपसे बार-बार हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं कि इस फैसले से तो मैं कहीं का नहीं रहूंगा। मेरी बदनामी होगी। आपने यह कैसा फैसला सुना दिया?

 आप ने सुनाया है कि आगे से कभी अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोऊं।
जज साहब मेरा एक निवेदन है। आप इस वाक्य में से केवल एक शब्द "अपनी" बस यही शब्द काटने का रहम करें। जज साहब मैं आपके निर्णय पर कोई आपत्ति नहीं करना चाहता लेकिन आपने जो निर्णय दिया कि मैं आगे से अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोऊंगा। इससे लोग यह निर्णय निकालेंगे कि मुझे दूसरों की पत्नियों का पेटीकोट धोने की मनाही नहीं है।मेरे पर रहम फरमाएं।
जज ने कड़ी नजरों से मेरी तरफ देखा और कहा कि तुम्हें कितनी बार समझाया गया है। तुम अदालत के फैसले पर आपत्ति कर रहे हो। अदालत जो फैसला दे चुकी है वह आज और इसी समय से लागू हो गया है। तुम्हें जो कुछ कहना है तो बड़ी अदालत में अपील में कहना। तुम्हें अपील करने की इजाजत दी जाती है।
 इस अदालत का यही निर्णय है कि तुम आगे कभी अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोओगे।


मैं नोटबंदी में फंस गया। बैंक में बचत खाते में से भी खुद की ही रकम निकाल नहीं पाया। शर्म मरते किसी दोस्त से भी रूपये मांग नहीं पाया।मैं बड़ी अदालत में अपील में नहीं जा पाया।
जज रायचंद डागा का फैसला लागू रह गया कि मैं "अपनी"  पत्नी का पेटीकोट नहीं धो सकता।

***************** काल्पनिक **************

 *होली की शुभकामनाएं सहित यदि आपको मसखरी -हास्य पसंद है तो आगे शेयर करें।

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करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
 सूरतगढ़।
मो 94143 81356.
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प्रथम - 17 मार्च 2017.
अपडेट 28 मार्च 2021.







शुक्रवार, 26 मार्च 2021

होली:समधनजी की चोली:सग्गे परसंगियों और मित्रों से हंसी मजाक ठिठोली: करणीदानसिंह राजपूत-





ऊंट के मेंगनों पर चासनी चढ़ाई हुई।
 चोली का एक तरफ का फीता गायब और उस तरफ बंधी थी मूंज।

होली अजब गजब त्यौंहार। बसंत पंचमी के दिन से ही चंग ढप पर गीत धमाल और मेहरी नाच,रंग और गुलाल से तन बदन सरोबार। हंसी मजाक और ठिठोली। सग्गे परसंगियों से समधी परिवार से हास परिहास का ऐसा ऐसा रंग की हंसते हंसते पेट में दर्द होने लग जाए। कोई बुरा मानता नहीं और माने तो मानता रहे। हंसी ठिठोली करने वाले तो एक ही वाक्य बोल देते हैं...बुना माना होली है।
होली का त्यौंहार जो आजकल एक दो दिन में सिमट कर रह गया है मगर दिलदार रंग रसिया लोगों व युवाओं के लिए आज भी उतना ही रंगीन है जितना वर्षों पहले होता था।
सग्गे परसंगियों से हंसी ठिठोली के ना जाने कितने तरीके और हर साल कोई ना कोई नया तरीका। उपहार की खोथली यानि कि थैली भेजने का तरीका सबसे ज्यादा हंसाने वाला।

गुरुवार, 25 मार्च 2021

सूरतगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष महेश कुमार सेखसरिया और कार्यकारिणी पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित

 



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करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 25 मार्च 2021.

सूरतगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष महेश कुमार सेखसरिया और कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित हुए।
व्यापार मंडल में उपाध्यक्ष महावीर प्रसाद सिंगला,सचिव मनोज सोमानी,कोषाध्यक्ष सुरेंद्र साईं,सह सचिव दीपक कुमार चुने गए।

निर्वाचन अधिकारी जयप्रकाश सरावगी ने 24 मार्च 2021 को यह घोषणा की। सरावगी ने बताया कि सभी पदों पर एक एक नामांकन ही था इसलिए मतदान आदि की आवश्यकता नहीं हुई।
👌 व्यापारियों ने सर्वसम्मति का मानस बना लिया था इसलिए सभी पदों पर एक एक ही नामांकन हुआ।
महेशकुमार सेखसरिया ने कहा है कि व्यापारियों के हित में व्यापारियों के साथ रहते  कार्य करेंगे।
महेशकुमार सेखसरिया वर्तमान में कल्याण भूमि प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं। पूर्व में भाजपा नगर मंडल के अध्यक्ष और श्री गौशाला सूरतगढ़ के अध्यक्ष रह चुके हैं। समाजसेवा में लोकप्रिय व्यक्ति हैं।
वर्तमान अध्यक्ष दीपक भाटिया और कार्यकारिणी का कार्यकाल 31 मार्च 2021 तक है। यह कार्यकारिणी भी लोकप्रिय रही है। 00
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बुधवार, 24 मार्च 2021

शहीद दिवस पर भगतसिंह क्लब के रक्तदान शिविर में बहुत उत्साह रहा- पूरी रिपोर्ट






* करणीदानसिंह राजपूत *
23 मार्च 2021.
शहीद दिवस भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव के बलिदान दिवस  23 मार्च पर भगत सिंह क्लब सूरतगढ़ की ओर से अग्रसेन भवन में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर में अच्छे उत्साह की प्रेरणा से 215 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।

इस मौके पर मुख्य अतिथि प्रसिद्ध शिक्षक प्रवीण भाटिया,डॉक्टर हरविंदर कौर होम्योपैथी चिकित्सालय प्रभारी, व भरत भादू ने शहीद भगत सिंह के चित्र पर माल्यार्पण अर्पित कर रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर महावीर इंटरनेशनल के संजय बैद, समाजसेवी रमेशचंद्र माथुर,सूरतगढ़ सिटी थाना के थाना अधिकारी सीआई रामकुमार लेघा, एसआई धर्मेंद्र सिंह, भरत भादू भीम नोखवाल सूर्य ढाका मानवेंद्र सिंह शिव वर्मा मुकुल चौधरी आदि ने भाग लिया। शहीद भगत सिंह डिफेंस एकेडमी एवरग्रीन डिफेंस एकेडमी सूरतगढ़ का भी इसमें सहयोग रहा। अखिल भारतीय किसान सभा के गुरशिंदर सिंह,विकि तावनिया,हरमन पिलानिया,कमलेश शर्मा,सागर स्वामी,प्रमोद राजपूत आदि बड़ी संख्या में युवा मौजूद रहे।00
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^ वधू चाहिए.  राजपूत.^

* बैस गोत्र राजपूत 48 वर्षीय स्मार्ट अविवाहित  के लिए वधू चाहिए। हनुमानगढ़ गंगानगर जिले के आसपास की हो तो प्राथमिकता। पिता सेवानिवृत्त। माता पिता सहित छोटा पूर्ण शाकाहारी परिवार। हनुमानगढ़ में डेकोरेशन का व्यवसाय.
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*पड़िहार राजपूत मांगलिक युवक 22 वर्षीय,12 वीं उतीर्ण आगे अध्ययनरत के लिए मांगलिक वधु चाहिए. स्वयं का मकान,पुराने यूपी बेस्ड,बीकानेर वासी।
संपर्क- 94132 32660
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मंगलवार, 23 मार्च 2021

💐 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान संपूर्ण भारत का सम्मान होगा* आह्वान- करणीदानसिंह राजपूत.

 

शहीदों और क्रांतिकारियों की
कुर्बानियों पर सरकार और
आपके शब्द भाषण मौखिक कागजी
जरूरत पर बहाते मगरमच्छी आंसू।


मोदी जी मैं तुम्हारा एक बड़ा
समर्थक तो हो सकता हूं पर
चापलूस नहीं हो सकता।
क्योंकि चापलूस प्रशंसा करता है
लेकिन वह सच्च नहीं बता सकता।


इंदिरा के आपातकाल का विरोधी
सब कुछ नहीं तो बहुत कुछ कुर्बान
करने वाला मैं इतना तो समझता हूं
आपके भाषण आंसू सच्चे होते तो
आपातकाल के क्रांतिकारियों का
मौखिक कागजी नहीं सच्चा सम्मान होता।


भगतसिंह राजगुरु सुखदेव की शहादत
के इस महान दिवस पर एक सवाल है
मोदी जी आपसे और आपकी सरकार से,
आपातकाल के लोकतंत्र सेनानियों पर
सच्च कब बोलोगे जो इतिहास बने।


आपातकाल के क्रातिकारियों का
एक एक शब्द सच्चा इतिहास है
सम्मान रोके रखना बड़प्पन नहीं
सम्मान प्रदान करना महानता होगा
यही संपूर्ण भारत का सम्मान होगा।



- 23 मार्च 2021.



करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,चं
आपातकाल जेलयात्री.
सूरतगढ़ ( राजस्थान)
94143 81356.
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गुरुवार, 18 मार्च 2021

राजस्थानी मोट्यार परिषद की प्रदेश कार्यकारिणी घोषित - राजस्थानी भाषा आंदोलन को गति मिलेगी.

 


* करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ 18 मार्च 2021.

राजस्थानी भाषा आंदोलन को गति देने की दृष्टि से राजस्थानी मोट्यार परिषद के प्रदेशाध्यक्ष शिवदान सिंह जोलावास ने प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी की घोषणा की है । जोलावास के अनुसार 

*कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष दीपक मेहता जयपुर  , 

*प्रदेश महामंत्री प्रह्लाद सिंह झोरड़ा नागौर , *उपाध्यक्ष जगदीश मेघवाल जोधपुर,महेश चारण झुंझुनू , सुमन शेखावत बीकानेर, अमरीश वर्धन जयपुर,डाःहरिराम बिश्नोई बीकानेर,

* प्रदेश सह सचिव मगराज मेघवाल बाड़मेर ,  प्रशांत जैन बीकानेर,हरप्रीत सिंह कोटा , कानाराम सिंघल जालौर , अनुज गोदारा हनुमानगढ़।

^ प्रदेश महिला मोर्चा^

प्रभारी के रूप में सीमा राठौड़ झुंझुनू ,

सह प्रभारी तरनीजा मोहन राठौड़ जोधपुर

 * सोशल मीडिया प्रभारी महावीर मूंड चूरु, सोशल मीडिया सह प्रभारी  भाव्यांश मेवाड़ उदयपुर, नवल शर्मा श्रीगंगानगर, कुलदीप सिंह राजपुरोहित चूरू।


* बीकानेर संभाग अध्यक्ष भारत दान चारण बीकानेर,

महामंत्री रघुवीर मेव हनुमानगढ़,


* उदयपुर संभाग  अध्यक्ष राहुल सिंह भाटी।

 उदयपुर,महामंत्री दत्तात्रेय मेहता डूंगरपुर।


 ^ अजमेर संभाग अध्यक्ष अजय मीणा अजमेर। 


* जयपुर संभाग अध्यक्ष सांवरमल कुमावत दौसा।

* भरतपुर संभाग अध्यक्ष पंकज सिंह जाट भरतपुर,महामंत्री रोहित ललावत सवाई माधोपुर।

* जोधपुर संभाग अध्यक्ष योगेश सुथार जोधपुर ।

* प्रदेश मीडिया प्रभारी व प्रवक्ता भवानी सिंह टापरवाड़ा अजमेर,सह प्रवक्ता विनोद सारस्वत बीकानेर।


* प्रदेश संयोजक व संरक्षक के रूप में मनोज कुमार स्वामी सूरतगढ़ को नियुक्त किया है ।


 यह  कार्यकारिणी शिवदान सिंह जॊलावास, प्रदेश संगठन मंत्री सुरेंद्र कुमार स्वामी और  संरक्षक मनोजकुमार स्वामी ने विचार-विमर्श कर घोषित करते हुए आशा व्यक्त की है कि इससे राजस्थानी भाषा की मान्यता के आंदोलन को नई गति मिलेगी।


मोट्यार परिषद प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में राजस्थान के सभी 33 जिलों से 133 विधायकों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत  को राजस्थानी भाषा को प्रदेश की राजभाषा घोषित करने,प्राथमिक शिक्षा में लागू करने का सर्वसम्मति से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री को भेज दिया है ।  इन दिनों लगातार बढ़ रही भाषा की गतिविधियों से भाषा प्रेमियों में काफी उत्साह का संचार हुआ है । साथ ही  राजस्थान विधान सभा तथा संसद में मामला उठाए जाने से मांग करने वाले जन प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करने का सिलसिला भी जारी है।00


 

रविवार, 14 मार्च 2021

सूरतगढ़ में एडीएम तहसीलदार और राजियासर नायबतहसीलदार पद बहुत समय से खाली.रिपोर्ट

 




* इन 3 पदों का बहुत समय से खाली रहने से सरकार की आलोचना भी हो रही है*

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ में प्रशासनिक राजस्व कार्य अधिकारियों के नहीं होने से सभी कार्य और सरकारी योजनाओं पर विकास ठप है।
सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग हो रही है लेकिन हालात उपखंड जैसे भी नहीं बचे हैं।  सरकार का महत्वपूर्ण विभाग राजस्व प्रशासन माना जाता है जो उच्चाधिकारियों और सचिवालय स्तर की लापरवाही से सूना छोड़ दिया गया है।
* राजनीतिक व्यावसायिक और प्रशासनिक सहित अनेक क्षेत्रों में सूरतगढ़ महत्वपूर्ण स्थान रखता है। श्री गंगानगर जिले का ऐसा महत्वपूर्ण क्षेत्र और कोई नहीं है लेकिन फिर भी यहां का राजस्व प्रशासन पूरा ही अनदेखी का शिकार हो रहा है।
सूरतगढ़ में तीन महत्वपूर्ण पद काफी समय से रिक्त पड़े हैं।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर, राजस्व तहसीलदार और टिब्बा क्षेत्र में जनता को सुविधा देने वाला उप तहसील राजियासर का नायब तहसीलदार पद खाली है।
जिला कलेक्टर श्री गंगानगर, संभागीय आयुक्त, प्रभारी सचिव किसी का भी इस ओर ध्यान नहीं है। इससे आम लोगों के सभी प्रकार के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी योजनाएं भी प्रभावित हो रही है। जिला कलेक्टर हर हफ्ते जिला मुख्यालय पर बैठक करते हैं। जिलाकलेक्टर की ही प्रथम ड्यूटी होती है कि सरकार को सूचित करें।
1- सूरतगढ़ में एडीएम अतिरिक्त जिला कलेक्टर का पद पहले 18 महीने तक रिक्त पड़ा रहा। श्रीगंगानगर के जिला मुख्यालय से एक एडीएम सप्ताह में एक दिन आते और जाते। ऐसे में क्या और कितना काम होता रहा उसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। केवल गिनती के कागजात निकले।
अठारह महीनों की शून्यता के बाद अशोक कुमार मीणा को यहां अतिरिक्त जिला कलेक्टर लगाया गया। वे कुछ महीनों तक रहे और उसके बाद उनका स्थानांतरण श्रीगंगानगर कर दिया गया,तब से यह पद लावारिस हालत में छोड़ा गया है। अब जिला मुख्यालय के एक एडीएम को यहां का कार्य सौंपा हुआ है। वे मुख्यालय पर काम करें या सूरतगढ़ आएं?

2- राजस्व तहसीलदार का पद यहां करीब 2 साल से खाली पड़ा है। नायब तहसीलदार कार्य प्रभारी तहसीलदार बने हुए हैं। इतने काल/ समय तक से पद खाली होना आश्चर्यजनक है।

3- सूरतगढ़ टिब्बा क्षेत्र में राजियासर उप तहसील बनाई गई। पहले उसका कार्यालय नहीं था और सूरतगढ़ से ही काम होता रहा। कार्यालय बना तो कुछ समय ही नायबतहसीलदार की ड्यूटी रही। कोई स्थाईत्व नहीं हो पाया जिससे इलाके की ग्रामीण जनता को पूरा लाभ मिल पाता। अब वहां काफी समय से नायब तहसीलदार का पद खाली पड़ा है और काम ठप हैं। सूरतगढ़ में ये तीनों पद बहुत ही महत्वपूर्ण है।

पूर्व विधायक सरदार हरचंद सिंह सिद्धू ने 13 मार्च को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक महत्वपूर्ण पत्र भिजवाया है जिसमें तीनों पदों को अविलंब भरने की मांग है। यह पत्र 13 मार्च को मेल से मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। अब देखना है कि उच्च स्तरीय कार्रवाई के बाद इन 3 पदों पर कितनी जल्दी नियुक्ति हो पाती हैं। 00
दि. 14 मार्च 2021.
* करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़. राजस्थान।
94143 81356.
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गुरुवार, 11 मार्च 2021

सिगरेट पीने और तंबाकू चबाने से कैसे होता है जीवन कम-धुआं भी करता है बीमार-इसे जरूर पढें.

 



* करणीदानसिंह राजपूत*

हनुमानगढ़ 10 मार्च 2021.
धूम्रपान है बहुत खतरनाक।
शरीर के लिए खतरनाक है, क्योंकि यह शरीर को आंतरिक रूप से खोखला बना देता है। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे फेफड़े, हार्ट, कोशिकाओं को प्रभावित करता है। कई जानलेवा बीमारी कैंसर, हार्ट फेल्योर, फेफड़ा संक्रमण को जन्म देता है। एंजाइटी के अलावा मानसिक बीमारी की चपेट में लोग आ जाते हैं। धूम्रपान करने वालों को तो नुकसान होता ही है, उनके आसपास रहने वाले (पैसिव स्मोकिंग) को भी सिगरेट का धुआं बीमार बना देता है।

जिला कलक्टर श्री जाकिर हुसैन ने ‘धूम्रपान निषेध दिवस पर आयोजित रैली को हरी झण्डी दिखाने के दौरान कही। उनके साथ जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती प्रीति जैन, सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा भी उपस्थित थे।
जिला कलक्टर श्री जाकिर हुसैन ने बताया कि कुछ लोग यह सोच कर सिगरेट पीते हैं कि उन्हें इससे फ्रेश महसूस होता है, लेकिन एक सिगरेट पीने से जिंदगी के 11 मिनट कम हो जाते हैं। इसके अलावा एक सिगरेट में चार हजार से अधिक ऐसे केमिकल्स होते हैं, जिससे कैंसर फैलता है। दुनिया में हर छह सेकेंड में एक मौत तंबाकू सेवन के कारण होती है। तंबाकू में कई केमिकल होते हैं, जिनमें निकोटिन प्रमुख है। निकोटिन हमारे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। 70 लाख से ज्यादा लोग दुनियाभर में हर साल तंबाकू व अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर व अन्य बीमारियों का शिकार होकर दम तोड़ देते हैं।

जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती प्रीति जैन ने कहा कि धूम्रपान तो खतरनाक है ही, लेकिन जो धूम्रपान करने वालों के आसपास जो रहते हैं, उनको भी बहुत खतरा होता है। इससे फेफड़ा प्रभावित होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। इस कारण अस्थमा व सीओपीडी की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में धूम्रपान से स्वयं भी बचें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें। धूम्रपान छोड़ें और स्वस्थ जीवन जीयें।

सीएमएचओ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि हर साल मार्च माह के दूसरे बुधवार को नो स्मोकिंग डे मनाया जाता है। वर्ष 1984 में इस दिवस को मनाने की शुरुआत हुई। इस दिन को मनाने का उद्देश्य यह है कि लोगों को घ्मोकिंग छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाए। लोग सिगरेट जैसी खतरनाक चीज को अपनी जिंदगी से दूर करें और स्वस्थ जीवन जीयें। 10 लाख से ज्यादा लोग हर साल भारत में धूम्रपान से होने वाली बीमारियों से मरते हैं। वहीं 2,00,000 से ज्यादा लोग तंबाकू चबाने या इसके अलग-अलग रूपों में सेवन करने से मृत्यु हो जाती है। तंबाकू व धूम्रपान करने वालों की संख्या ज्यादा होने से मुंह व फेफड़ा का कैंसर होने की संभावना सबसे ज्यादा है। उन्होंने बताया कि जिले में तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ द्वारा गाइडलाइन के अनुसार तम्बाकू विक्रय करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर चालान संबंधी कार्रवाई की जा रही है। 



जिला समन्वयक निपेन शर्मा ने बताया कि धूम्रपान से पुरुष व महिलाओं के प्रजनन क्षमता में कमी आती है। जहां पुरुष के शुक्राणुओं और कोशिकाओं की संख्या को नुकसान पहुंचता है, वहीं महिलाओं द्वारा धूम्रपान करने से गर्भस्राव या जन्म देने वाले बच्चे में स्वास्थ्य समस्याएं होने की अधिक संभावना होती है। लगातार सिगरेट पीने से फेफड़े के कैंसर की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।  सिगरेट में निकोटीन और अन्य जहरीले रसायन हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा देते हैं। इसकी वजह से स्ट्रोक पैरालिसिस, आंशिक अंधापन, बोलने की शक्ति और यहां तक कि मौत का कारण भी हो सकती है। धूम्रपान न करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में स्ट्रोक होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।




आज की रैली में एएनएम प्रशिक्षण केन्द्र की छात्राओं ने जिला कलक्ट्रेट परिसर से विभिन्न स्थानों से होते हुए वापिस स्वास्थ्य भवन पहुंची, जहां उन्हें जलपान दिया गया। आज कार्यक्रम में त्रिलोक शर्मा एवं सीएमएचओ कार्यालय के स्टॉफ उपस्थित थे। 00


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बुधवार, 10 मार्च 2021

भगवान शिवधूणा संतआश्रम सूरतगढ़: सीताराम गौ शाला


* करणीदानसिंह राजपूत *
2 नवंबर 2011.

संत आश्रम सूरतगढ़ में भगवान शिव का अखंड धूणा- फोटो करणीदानसिंह राजपूत
संत राम दास शिव धूणे के पास विराजे हुए



आस्थावान संत रामदास, भीमराज तावणिया, त्रिलोकचंद अग्रवाल, महावीर प्रसाद मुद्गल,सुरेश मिश्रा

निर्माणाधीन ठाकुरजी का मंदिर

भगवान शिवधूणा संतआश्रम सूरतगढ़:
अखंड धूणे का मंगलकारी प्रभाव पाने को श्रद्धालु लगाते हैं धोक

सूरतगढ़ में शिवबाड़ी के पास में करीब 33 वर्षों से एक छोटी सी कच्ची कुटिया वाले संत आश्रम में शिव का अखंड धूणा धधक रहा है। धूणे को सुबह प्रज्ज्वलित किया जाता है और पूजा पाठ के बाद राख में अग्रि को दबा दिया जाता है, जो निरंतर इतने वर्षों से धधकती हुई श्रद्धा और आस्था बनी हुई है।
भक्त जन आते हैं और इस अखंड धूणे को धोक लगाते हैं। इसकी भस्मी का तिलक लगाते हैं तो अनेक अपने घर ले जाते हैं। श्रद्धा से इस भस्मी को प्रसाद के रूप में ग्रहण भी करते हैं। यह माना जाता है कि भगवान शिव के धूणे की भस्म को प्रसाद में ग्रहण करने वालों को स्वास्थ्य व दीर्घायु मिलती है। भगवान शिव स्वयं भी भस्म को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया करते थे।
    संत आश्रम में पवित्र धूणे में एक लंबा त्रिशूल लगा है तो कई चिमटे लगे हुए हैं। इसी धूणे वाली कुटिया में संत रामदास विराजते थे जिनका आशीर्वाद लेने को भक्तजन शुभ समझते थे।
    संत आश्रम की स्थापना लेख की दिनांक से तेतीस चौंतीस साल पहले हुई तब आसपास में बस्ती नहीं थी और दूर से केवल शिवबाड़ी ही नजर आती थी। इससे जुड़े भक्तजन भीमराज तावणियां और महावीर मुद्गल व अन्य जानकारों से बातचीत में इस धूणे की स्थापना का इतिहास इस तरह है। 
शिव बाड़ी के पास एक छोटा सा पीपल का पेड़ लगा था जो आज इस धूणे के पास में विशाल वृक्ष बन चुका है।
    अयोध्या से आए संत भीमदास ने इस पीपल के पास में एक कुटिया बनाई और शिव का धूणा जलाया। वे उस समय करीब पैंतालीस पचास साल के थे। सन् 1977-78 में धूणे की स्थापना के बाद वे करीब दो साल तक यहां धूणा तपते रहे। वे उपरी बदन उघाड़ा रखते थे तथा रामायण का पाठ करते और सुनाते। भक्त जनों की ओर से आने वाली किसी भी वस्तु और सामग्री का संग्रह नहीं करते थे। योग साधना करते तथा अन्नाहार नहीं लेते थे। फल व दूध उनका भोजन था।
    उस पहुंचे हुए संत भीमदास की महिमा आसपास फैलने लगी और अनेक भक्तजन धूणे पर पहुंचने लगे। उस समय नन्द किशोर मिश्रा,महावीर मुद्गल, रेख सिंह, भीमराज तावणियां, मनीराम सिंवाल,जगदीश ठाकराणी व कई और नियमित जाने लगे। भीमराज तावणियां ने बताया कि संत भीमदास की कुटिया को संत आश्रम कहा जाने लगा था। संत भीमदास करीब दो साल तक इस कुटिया में रहे और बाद में कहीं चले गए।
    संत भीमदास के जाने के करीब दो माह बाद में यहां पंजाब से उदासीन पंथ के महात्मा रणधीरदास आए और वे भी करीब दो साल तक रहे। इसके बाद साधु संत आते जाते रहे लेकिन कोई भी अधिक अवधि तक नहीं रहा।
    कुछ सालों तक भक्तजन ही इस पवित्र धूणे को तापते रहे। इसके बाद सन् 1990 में बीकानेर में लक्ष्मीनाथ मंदिर के पास में एक आश्रम में रहने वाले संत रामदास को इस धूणे से पुकार हुई। संत रामदास को बीकानेर में रहते हुए दस साल बीत चुके थे। संत रामदास के दोनों पैर काम नहीं करते थे। वे बैसाखियों के सहारे रहते और दूर जाना होता है तब मोटर रिक्क्षा चलाते थे।
    संत रामदास बहुत ही उदार स्वभाव के संत थे। रामदास जी ने बताया कि उनका जन्म बस्ती जिला के उसरी ग्राम में सन् 1934 में हुआ था जिसके अनुसार सन् 2011 में उनकी उम्र करीब 77 वर्ष की हो चुकी है। संत ने बताया कि अपंगता पैदाइशी नहीं थी। करीब दो ढाई साल की आयु में लकवा हुआ और एक ओर का आधा बदन प्रभावित हुआ जो बाद में काफी ठीक हो गया मगर पैर ठीक नहीं हो पाए। उन्होंने दसवीं तक शिक्षा ग्रहण की। पिता खेती करते थे।  माता पिता का नाम उन्होंने नहीं बताया। वे बोले कि संत हो गए अब गुरू का ही नाम लिया जाना उचित है। उन्होंने अपना गुरू रामकिशनदास को बनाया जो आगरा में रहते थे।
    संत रामदास आश्रम में धूणा रमाते और वर्ष में कई बार रामायण और भागवत के पाठ करवाते थे। 
वे जब यहां आए तब उन दिनों में भी असहाय छोड़ा हुआ गौ वंश यत्र तत्र भूख से तड़पता हुआ दिखाई पड़ता था। 
अमरता को प्राप्त संत रामसुख दास जी उन दिनों अपने हर उपदेश प्रवचन में इन असहाय गौ वंश बचाने की कहते थे। उनकी प्रेरणा से यहां सूरतगढ़ में संत आश्रम के पास में सन् 1992 के आसपास गौ वंश को बचाने का अभियान चलाया जाने लगा। इस अभियान में संत रामदास संयोजक बने और अनेक लोग इसमें जुड़ गए। उस समय गौ वंश के लिए खुले में ही घास तूड़ी आदि डाली जाती थी। इसके बाद सन् 1999 में संत आश्रम की सीताराम गौशाला की स्थापना हुई। उस समय संरक्षक रामदास जी बने। कार्यकारिणी का सन् 2005 में पंजियन कराया गया। 
    इस संत आश्रम और गौशाला के पास में ही ठाकुरजी का मंदिर बनाया गया। उसमें भी श्रद्धालुओं का आना जाना होता है।**

प्रथम लेखन 2 नवंबर 2011.
अपडेटेड 10 मार्च 2021.
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