सोमवार, 25 मई 2020

सूरतगढ़ में कौन तुड़वा रहा है लोकडाउन?कौन उड़वा रहा है कानून की धज्जियां?




* करणीदानसिंह राजपूत*


कोरोना वायरस संक्रमण रोकने और बचाव करने के लॉकडाउन कार्यकाल में केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार की गाइडलाइन घोषित है और समझा जाना चाहिए कि हर व्यक्ति इसका जानकार है।

 सूरतगढ़ में गाइडलाइन का उल्लंघन कौन करवा रहा है?कौन तुड़वा रहा है और किसके इशारे पर कानून तोड़े जा रहे हैं? या यह समझा जाए कि कानून के पालन करवाने वाले लापरवाही में अनदेखी कर रहे हैं जिससे यह सब हो रहा है।

लॉकडाउन गाइड लाइन में 6:00 बजे बाजार बंद का नियम बनाया हुआ है। गाइडलाइन में स्पष्ट है कि शाम के 7:00 बजे से सुबह 7:00 बजे तक कोई भी अपने घरों से बाहर नहीं निकलेगा। ऐसी स्थिति में सूरतगढ़ में इसका पालन क्यों नहीं हो रहा है? नागरिक प्रशासन और पुलिस दोनों पर गाइडलाइन पालन कराने का दायित्व है। 

शाम 7:00 बजे के बाद बैंकों के एटीएम पर लोग पैसे निकलवाने के लिए पहुंचते हैं। यह लोग पहले क्यों नहीं पहुंच सकते?

इन कानून तोड़ने वालों के कारण एक और बखेड़ा हो रहा है। राठी स्कूल के पास और एसबीआई बैंक (पुराने बस अड्डे के पास ) शाम को 6:00 बजे के बाद फल सब्जी के बाजार सजने लगे हैं। इन दोनों स्थानों पर एटीएम है और आश्चर्य यह है कि रात के 8-9 बजे तक वहां फलों सब्जियों की रेहड़ियों की भरमार रहने लगी है।

जो वीआईपी लोग रात को कानून तोड़कर बाहर निकलते हैं एटीएम पर पहुंचते हैं उनके लिए यह बाजार सजते हैं। कोई रोक-टोक नहीं है। कई दिनों से यह देखा जा रहा है।इसके अलावा जब यह नियम बन चुका है कि रात को कोई शाम के 7:00 बजे बाद नहीं निकलेगा तो अनेक लोगों को सड़कों पर घूमने दौड़ लगाने की अनुमति कौन दे रहा है? क्यों नहीं रोका जा रहा ?ये वीआईपी लोग जानबूझकर नियमों को तोड़ रहे हैं और पालन करवाने वाले जांच के लिए निरीक्षण के लिए 6:00 बजे के बाद 7:00 बजे से लेकर 9:00 बजे तक बाजारों में भ्रमण करके देखें की क्या की क्या देखें की क्या की क्या स्थिति है?

मोहल्लों में 6:00 बजे के बाद भी 8:00 बजे तक सब्जियों फलों की रैलियां कैसे घूम रही है? क्यों नहीं रोका जा रहा? 7:00 बजे के बाद जब घरों से बाहर निकलना बंद है तब अनेक मोहल्लों में सड़कों के किनारों पर 5 से अधिक लोग बतियाते हुए बिना मास्क के दिखाई देते हैं। इनको अपनी परवाह नहीं है मगर शहर में दूसरे लोग जो नियमों का पालन कर रहे हैं उन पर भी अनहोनी घटित हो सकती है। 

गाइडलाइन में 10 वर्ष तक के बच्चों का घरों से बाहर निकलना,बाजार में निकलना बंद है, मगर मोहल्लों से निकलकर छोटे बच्चे भयानक दोपहरी में बाहर घूमते दिखाई देते हैं या फिर शाम के 6:07 बजे बाजारों में भी घूमते दिखाई देते हैं। इनके लिए कोई रोक-टोक क्यों नहीं है?यह बच्चे मोहल्लों से निकलकर बाजार तक पहुंचते हैं। इन्हें मोहल्लों में ही रोका जाना चाहिए लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। जिन घरों से यह बच्चे निकलते हैं उनके आसपास के समझदार लोग भी मोहल्लों के अंदर इनके मां-बाप को को इसलिए नहीं समझाना चाहते कि अनावश्यक विवाद हो जाएगा। सभी जानते हैं कि अड़ोस पड़ोस के लोगों से समझाइश नहीं हो सकती। 

कुछ हद तक कानून का डंडा ही समझा सकता है।ऐसी स्थिति में पुलिस का बाजारों में गलियों में गश्त करना जरूरी है और केवल गस्त ही नहीं कार्यवाही भी की जानी चाहिए। बिना कार्यवाही के लोग मानने वाले नहीं हैं। पुलिस के बीट कांस्टेबल को भी मोहल्लों में भेजा जाना चाहिए ताकि किन-किन स्थानों पर लोग बाहर निकलते हैं बिना मास्क के  निकलते हैं,शाम के 7:00 बजे से सुबह 7:00 बजे के बीच में निकलते हैं,यह मालूम करके और वहां पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

कुछ लोगों की सुख सुविधा के लिए पूरे शहर के जनता के लिए नियमों का पालन करवाया जाना जरूरी है। जो लोग अपने को बड़ा समझते हैं,कानून तोड़ते हैं,कानून को मजाक समझते हैं, उनको सही स्थान यानी कानून के पास पहुंचाया जाना बहुत जरूरी है।** करणी दान सिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़।

( ब्लॉस्ट की आवाज दि 25 मई 2020.कापी नहीं करें। ( ब्लॉस्ट की आवाज नेट पर भी उपलब्ध है)




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