बुधवार, 25 दिसंबर 2019

धूप में खिली सुंदरता..कहानी- करणीदानसिंह राजपूत


तेज चटख धूप में केश सुखा रही मौनटी का चेहरा लाल सुर्ख होकर बेहद सुंदर बन रहा था। 

उसके कपोल सेब की तरह लाल हो रहे थे। कपोल और ओष्ठ की सुंदरता से वह इन्द्र के राज्य स्वर्ग से उतरी परी लग रही थी।

मैं देख रहा था मगर उसका ध्यान कहीं और खोया था। वह अपने केशों को उलट पलट करती रही। 

कुछ दिनों के भयानक सर्द और धुंध के बाद सूरज निकला था। मौनटी ने मौसम को इतना पलटा देख कर केश धोऐ और सुखाने को छत पर कुर्सी लगाकर बैठ गई। 

चटख तेज धूप में सुंदरता में लाजवाब मोंटी का चेहरा कपोल एकदम लाल सेव हो रहे थे। लाल हो रहे मुखड़े की सुंदरता को खुले केश कई गुणा बढा रहे थे। 

बस, जी कर रहा था सुंदरता को छूने का और बात करने का। 

हरेक का जी करता ही है और सुंदरता एकदम पास कुछ कदम पर ही हो तो भाग्यशाली। 

भगवान तो बनाने वाला मगर ऐसी सुंदरता को तो छूने का उसका भी जी करता है।

मैं ऐसी सुंदरता का पुजारी प्रशंसक। बड़ाई करने वाला। 

सुंदरता मेरे एकदम पास ही थी। 


बस,मुसकान बिखेरते इतना ही कहना था, 'सो स्वीट!' ' बहुत सुंदर'। और उसके केशों को हाथ में लेते कहना था।

वह किसी ध्यान में थी,मगर उसे मालूम पड़ गया था कि मैं उसे देख रहा हूं।

मैंने मोबाईल निकाला और झट से सुंदरता को कैमरे में उतार लिया ताकि बाद में जी भर कर देख सकूँ या जब जी चाहे देखलूं। 

उसने मेरी ओर झांका। वाह!गजब की सुंदर। प्यारा मुखड़ा। एक पल ही लगा। मेरे मोबाईल कैमरे ने झप से उस सुंदर मुख को चूम लिया। 

उसको मालूम पड़ गया की मैंने फोटो ली है। 

वह खड़ी हुई। 

केशों को गालों से हटा पीछे करती मुस्कुराते हुए कुर्सी से उठी। मुस्कुराते हुए पास आई और मुसकराते बोली,-फोटो मेरे मोबाईल पर सेंड करदें। मैं भी देखलूं मेरी तस्वीर। मैंने तत्काल ही तस्वीर उसको सेंड करदी। सुंदरता के फोन नं तो बहुत दिनों से मेरे मोबाईल में सेव थे।

बहुत खूब- इतनी सुंदर फोटोग्राफी। वह बोली। उसके मुंह से फूल झड़ रहे थे। सुंदरता के मुंह से सुंदरता ओढे शब्द। 

मैं तो निहाल हो गया। वह एकदम पास। दो फुट दूर । नहीं केवल हाथ बढाकर छू लूं इतनी सी दूर।

मेरे मुंह से निकल पड़े शब्द।

"आप सच्च में सुंदर हैं, बहुत सुंदर।"

वह हंस पड़ी।

उसका मुंह लग रहा था, मानों कह रहा हो,"आई लव यू"

वह बिना बोले ही आंखों आंखों में कह गई,'आई लव यू'

मैं नहीं कह पाया'आई लव यू'।

मैं जागा। ओह यह तो सपना था। बहुत सुंदर सपना। 

कहते हैं कि सपना सुंदर भोर में आए तो फिर नींद नहीं लेनी चाहिए। भोर का सपना सच्च होता है।

अब भोर के इस सपने के सच्च होने के इंतज़ार में हूं।**


-- करणीदानसिंह राजपूत.

विजयश्री करणी भवन, सूर्यवंशी स्कूल के पास, मिनि मार्केट,सूर्योदय नगरी.

सूरतगढ़ ( राजस्थान) भारत.

94143 81356.

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