रविवार, 10 जून 2018

विधायक राजेंद्र भादू जमानत भो नहीं बचा पाएंगे! चर्चा का सच्च क्या है?


सूरतगढ सीट पर भादू के विरुद्ध क्यों फूट रहा है गुस्सा?

 विपक्षी माहौल बना रहे हैं या सच्च में ऐसे हालात हो गए हैं

* विधायक कब बोलेंगे?*


*  करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ़ की राजनीति में विधान सभा चुनाव से पांच महीने पहले विधायक विरोधी माहौल गर्म हुआ है।

सूरतगढ़ सीट राजस्थान में सदा से अहम रही है।

पहले अचानक आया तूफान चर्चाएं शहर और गांव तक आम चल रही है कि विधायक को फिर से टिकट मिली तो जमानत भी बच नहीं पाएगी।

यह चर्चाओं का तूफान एक दम से आया है। कौन फैला रहा है यह बातें या सच में ऐसा माहौल सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र का बन गया गया है?

विधायक राजेंद्र सिंह भादू ने कांग्रेस के मील राज से बहुत ज्यादा काम करवाए हैं। ये काम गांव और शहर के वार्डो में  दिख भी रहे हैं मगर इसके बावजूद विधायक की जमानत भी नहीं बचने जैसी चर्चाएं आखिर क्यों हो रही है?

 इसके पीछे कोई राजनीति है? किसी का षड्यंत्र हैै या सच में लोग नाराज़ हैं? अगर काम कराने की संख्या और गति को देखा परखा जाए जाए तो यह लगता है कि विधायक ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं। तो फिर इस प्रकार की स्थिति में जब खूब सारे काम हुए हैं तब विधायक के विरुद्ध शहर और गांव में ऐसा माहौल क्यों बन रहा है या कोई बना रहा है?

ग्रामीण क्षेत्र में  देहात मंडल अध्यक्ष पेप सिंह राठौड़ और सूरतगढ़ शहर में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा, नगरपालिका के उपाध्यक्ष पवन कुमार ओझा, नगर मंडल के अध्यक्ष महेश कुमार सेखसरिया और विधायक भादू  के सुपुत्र अमित भादू  दिन में रात रात भादू के कार्यों को प्रचारित-प्रसारित करने में लगे हुए हैं। 

राजनीति में कोई साधु नहीं नहीं होता। सभी की महत्वाकांक्षाएं किसी न किसी पद के लिए बनी हुई रहती हैं तथा प्रयास भी रहता है उस पद पर पहुंचना।

अब विधानसभा चुनाव को केवल पांच साढे पांच महीने बाकी हैं।




 इस बीच अचानक राजनीति के मौसम में विधायक के विरुद्ध माहौल यानि कि एकदम  विपरीत  उलटी दिशा में चलने लगा है।क्या राजनीतिक दृष्टि से भारतीय जनता पार्टी के अन्य टिकटार्थी और उनके समर्थक यह माहौल बना रहे हैं?

 क्या विरोधी पार्टी जिसमें प्रमुख रूप से कांग्रेस पार्टी बहुजन समाज पार्टी ताकतवर माने जा रहे हैं वे यह माहौल बना रहे हैं?उन पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि

विधायक के विरोध वे माहौल खड़ा कर रहे हैं?

राजनीति में जब तक सत्ताधारी के विरुद्ध माहौल बनाया नहीं जाता तब तक चुनाव में विजय प्राप्त नहीं हो सकती?

 क्या भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी टिकट मांगने वाले यह माहौल बना रहे हैं की भादू टिकट कट जाए और चाहने वाले अन्य भाजपा नेता को टिकट प्राप्त हो जाए?

 इन सबके अलावा एक चर्चा बहुत समय से चल रही है कि भादू से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता छिटक रहे हैं, दूर जा रहे हैं। 

 वर्तमान में जो आरोप भादू पर लगाए जा रहे हैं कि वह चुनाव में अपनी जमानत भी खो देगें। इसके पीछे कार्यकर्ताओं का रोल भी  गरमाया हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के मूल कार्यकर्ता अपनी पूछ नहीं होने से विधायक राजेंद्र भादू के विरुद्ध अंदर ही अंदर  संघर्ष चलाए हुए हैं। उनकी नाराजगी से विधायक भादू के विरुद्ध यह माहौल खड़ा होने का एक अंदेशा है। भारतीय जनता पार्टी के मोर्चे के कार्यकर्ता विधायक भादू से बेहद नाराज हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से एक आवाज आ रही है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी का साथ नहीं दिया जाएगा। जिसमें खासकर भादू का नाम लिया जा रहा है। अन्य कोई भाजपा नेता आए तो क्या परिस्थिति रहेगी पर ग्रामीण क्षेत्रों से आवाज उठ रही है कि उसके लिए समय बताएगा।  भाजपा के अन्य प्रत्याशी का साथ दिया जाए या नहीं दिया जाए? मतलब यह है कि विधायक राजेंद्र सिंह भादू के विरुद्ध अभियान या चर्चाएं करने वाले दूसरे प्रत्याशी पर अपनी जबान खोलने को तैयार नहीं है। 

भारतीय जनता पार्टी में वर्तमान में सूरतगढ़ सीट के लिए दो अन्य दावेदारों के नाम सामने हैं। पहले पूर्व राज्य मंत्री रामप्रताप कासनिया और दूसरे हैं पूर्व विधायक अशोक नागपाल। 

रामप्रताप कासनिया ने गांवों और ढाणियों के निवासियों का मानस खंगालने के लिए यात्राएं शुरू कर रखी हैं। वे गांवों से भा ज पा के वर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भादू की स्थिति और खुद के लिए फीडबैक ले रहे हैं।  आने वाले चुनाव में क्या स्थिति रहेगी।

इन दिनों में भयानक गर्मी 48 डिग्री में उमस और लू  के थपेड़ों में रामप्रताप कासनिया का गांव और ढाणियों में पहुंचना राजनीतिक दृष्टि से बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि पेड़ों के नीचे और चौपाल में गर्मी में उपस्थिति कम मिलती है मगर गांव की दैनिक चर्चाओं में जो बातें निकलती है वह सच्चाई के साथ प्रगट होती है।अब चुनाव के ठीक पांच साढे 5 महीने पहले लोग अपना मुंह खोलने लगे हैं।

एक प्रमुख बात सामने आ रही है कि विधायक काम चाहे  करवाएं ना करवाएं   मगर लोगों के होते हुए कामों में रोड़ा न अटकाएं।

यह आरोप सीधे रूप से विधायक की कार्यशैली पर हथौड़े के रूप में माना जाना चाहिए।

 विधायक अपने ऊपर लग रहे आरोपों का खंडन या स्पष्टीकरण पत्रकार वार्ता में खोल सकता है लेकिन यह एक ऐसा सत्य है कि किसी का मुंह जबरन नहीं खुलवाया जा सकता। प्रेस वार्ता  जबरदस्ती नहीं करवाई जा सकती। करीब 1 महीने से पहले विधायक ने ग्रामीण क्षेत्र के बारे में विधायक सेवा केंद्र पर पत्रकार वार्ता आयोजित की थी जिसमें भूमि आवंटन के बारे में भी विचार प्रकट किए थे लेकिन भूमि आवंटन और पट्टे संबंधी कार्य में कोई विशेष प्रगति नहीं हो पाई है। उस समय पत्रकारों ने शहर के बारे में प्रश्न उठाने चाहे तब विधायक ने कहा था कि शहर के बारे में अलग से प्रेस वार्ता जल्दी ही आयोजित कर के जानकारी दी जाएगी लेकिन काफी समय व्यतीत होने के बावजूद विधायक की शहर के बारे में पत्रकार वार्ता आयोजित नहीं की गई।


सूरतगढ़ शहर इस समय बहुत अधिक पीड़ित है और हर गली के लोग विधायक से नाराजगी प्रकट कर रहे हैं तथा खुद को विधायक से दूर बताने में लग रहे हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। 

सूरतगढ़ में सीवरेज कार्य,गौरव पथ, शहर की अन्य सड़कें,नाले नालियां का निर्माण,सफाई न होना, नगर पालिका में जनता के काम न होने से जनता नाराज है। गंदा मटमैला पानी सप्लाई होना भी लोगों को नाराज कर रहा है। सूर्योदय नगरी जिसके लिए कहा जा रहा है कि विधायक ने ओवर ब्रिज और और अंडर ब्रिज की सौगात दी है। वही लोगों की नाराजगी पानी के लिए है कि पानी  2 महीने में केवल 1 महीने आता है और बिल 2 महीने का भरना पड़ता है। वहां एक दिन छोड़ कर पानी का वितरण होता है। यह महत्वपूर्ण तथ्य विधायक से छुपा हुआ नहीं है तथा पहले से रेट भी अधिक हो चुके हैं। 

सूर्योदय नगरी में भी विधायक के पक्ष में  वातावरण कोई अच्छा नहीं है।

 विधायक को अपनी कार्यशैली पर भी ध्यान देना होगा कि आखिर लोग बेहद नाराज क्यों हो रहे हैं?

 वसुंधरा राजे का 27 मार्च को सूरतगढ़ में जनसंवाद कार्यक्रम हुआ। सीमित लोगों को सावधानी से पहुंचाया गया ताकि कोई मुंह न खोलदे। लेकिन जो मिलाए गए उन लोगों के द्वारा प्रस्तुत की गई परिवेदनाएं भी प्रशासन द्वारा दूर नहीं की गई। जिला कलेक्टर बार बार दिशा निर्देश देते रहे चेतावनी देते रहे मगर परिवेदनाओं में जो कुछ जनता ने लिखा वह दूर नहीं करवाया जा सकता। जनसंवाद पर सीधा सा आरोप है। आश्चर्यजनक है कि Facebook पर एक टिप्पणी आई जाट कन्या छात्रावास की छात्राओं की मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा थी।  संचालक ने बहुत कोशिश की की इन छात्राओं को मुख्यमंत्री से मिलवाया जाए मगर अनुमति नहीं दी गई। आरोप है कि विधायक ने यह मेल नहीं होने दिया। 

आश्चर्य जनक यह है कि सूरतगढ़ के ही कोचिंग सेंटर भाटिया आश्रम प्राइवेट लिमिटेड संस्था के छात्र छात्राओं को मुख्यमंत्री से मिलवाया गया।

उधर राजस्थान के मायड़ भाषा प्रेमी मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिए पहुंचे मगर उन्हें मिलाना तो दूर रहा अंदर भी घुसने नहीं दिया गया। बताया जाता है कि विधायक पुत्र अमित भादू का वहां कंट्रोल था उनकी अनुमति से ही कोई रिसॉर्ट में घुस सकता था। मायड़ भाषा राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के प्रदेश महामंत्री साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी खुद अगवानी करते हुए पहुंचे थे मगर मुख्यमंत्री से भेंट नहीं करवाई गई। राजस्थानी भाषा मान्यता के लिए आंदोलन चल रहा है और उनकी बड़ी इच्छा मुख्यमंत्री से बात करने की थी,मगर ऐसा नहीं नहीं हुआ।

 वे लोग भी नाराज हो गए हो गए।

अभी अनेक लोग अनेक संस्थाएं चुप हैं और अपनी आवाज बाद में खोलना चाहते हैं। अभी सामने नहीं आना चाहते।

विधायक के विरुद्ध सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में गुस्से का बादल फट गया है। विधायक के दिन बहुत खराब माने जा रहे हैं जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं के मुंह से बोल निकल निकल रहे हैं 10 और बस। विधायक को 10 हजार से ज्यादा वोट नहीं मिल पाएंगे। यह अतिशयोक्ति हो सकती है। बेहद नाराजगी में ऐसा कहा जा सकता है लेकिन राजनैतिक वातावरण में जो आरोप लग रहे हैं उनमें यह माना जा रहा है कि इस बार जितने वोट पड़ेंगे उसमें जमानत बचाने के लिए 25 से 30 हजार तक वोटों की आवश्यकता होगी। इतने वोट नहीं मिल पाएंगे। 

लोग अपना मुंह खोल ने लगे हैं जो कभी विधायक के नजदीक माने जाते थे।

अब विधायक को अपना  मुंह खोलकर बताना है कि इस माहौल की सच्चाई क्या है? यह माहौल कांग्रेस बसपा आप पार्टियों के नेताओं कार्यकर्ताओं ने बनाया है या भारतीय जनता पार्टी के नेता व कार्यकर्ता व आम लोग भी नाखुश हैं?



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