Sunday, December 25, 2016

किसान आँदोलन के साथ खड़ा है हनुमानगढ़ और श्री गंगानगर जिले का मीडिया

- करणीदान सिंह राजपूत  -

श्री गंगानगर हनुमानगढ़ इलाके का मीडिया आंदोलनकारी किसानों के साथ में खड़ा हो गया। यह स्थिति सत्ताधारी पार्टी और इलाके में उसकी डुगडुगी बजाने वाले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को देख लेनी चाहिए। राजस्थान सरकार के मंत्री और विधायक इस संपूर्ण बदली हुई स्थिति को समझें कि उनकी हालत इन दोनों जिलों में कितनी अधिक पतली हो चुकी है।

 

 मंत्री और विधायक आज किसान और गांव वालों के बीच में पहुंच कर माफी मांगे तब जाकर कोई बात बनने वाली हो सकती है। इलाके का किसान इलाके का मजदूर और इलाके का व्यापारी सभी कृषि से जुडे़ हैं। उनके सारे कारोबार काम धंधे कृषि से चलते हैं। राजस्थान सरकार उसके मंत्री उसके विधायक और उनके प्रशासनिक अधिकारी सभी किसानों को तबाह करने की नीति पर चल रहे हैं। ऐसी हालत में आम जनता भी आज किसानों के साथ उनके दुख और दर्द में शामिल है।

 ऐसी परिस्थिति में इलाके के मीडिया यानी पत्रकार सच के साथ खड़े हैं। हनुमानगढ़ और श्री गंगानगर जिले से प्रकाशित होने वाले दैनिक अखबारों किसान आंदोलन के समाचारों से सचित्र भरे हुए हैं।इलेक्ट्रॉनिक मीडिया भी किसान आंदोलन के समाचार देने में आगे हैं। सरकारी न्यूज़ को लोग झूठी समझते हैं।

लोगों का मानना है कि किसानों को पानी चाहिए और मंत्री सांसद विधायक बार-बार कहते हैं कि वे पंजाब का दौरा करेंगे स्थिति देखेंगे और पिछले काफी महीनों से स्थिति देख देख कर के आ रहे हैं, मगर नतीजे में किसानों के लिए एक बाल्टी पानी नहीं है। गौर करें जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सूरतगढ़ में मृदा कार्ड का लोकार्पण करने आए थे तब इस समारोह में राजस्थान की मुख्यमंत्री ने पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से पानी का आग्रह किया था। लेकिन उस वक्त बादल ने कोई आश्वासन नहीं दिया और इस विषय पर प्रधानमंत्री ने भी कोई बात नहीं की एक शब्द तक नहीं बोला।
 राजस्थान में केंद्र में और पंजाब में भाजपा की सरकारें हैं और ऐसी स्थिति में  राजस्थान का किसान पानी की एक एक बूंद के लिए तड़प रहा है। राजस्थान सरकार अपने तीन सालों के कार्यकाल  को बेमिसाल बताते हुए समारोहों में लाखों रुपए जनता का पैसा पानी की तरह बहा रही है। मगर किसानों को एक बाल्टी पानी नहीं है। खेत प्यासे हैं। किसान प्यासा है। राजस्थान सरकार के मंत्री विधायक निश्चित होकर बैठे हैं। वे अहंकार में कह रहे हैं की अगले विधान सभा  चुनाव में जीतेंगे और सरकार बनाएंगे। इन हालात और परिस्थितियों में जब आम जनता नाराज हो रही है, तब भाजपा 2018 के चुनाव में राजस्थान में फिर से कैसे सत्ता हासिल कर पाएगी?

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