गुरुवार, 19 नवंबर 2015

इन पेड़ों की पुकार:हमें बचाओ-हमें बचाओ:कौन सुनेगा?सूरतगढ़ में हजारों पेड़ों का सफाया:


 




सूरतगढ़  सूर्योदय नगरी के मशान और पास के टिब्बों को खोद डाला:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 19 नवमबर 2015.
रेतीले धरोहर टिब्बों को हरियाला स्वरूप देने के लिए वन विभाग ने कुछ सालों पहले शहर के पास के टिब्बों पर पौधारोपण करवाया और जब वे पेड़ों का रूप लेने लगे तब से उन पर मौत मंडराने लगी तथा हजारों पेड़ काट डाले गए और रेत उठाने वालों द्वारा टिब्बों की खुदाई में उखाड़ दिए गए।
पेड़ों पर अभी भी मौत मंडरा रही है तथा रोजाना ही किसी न किसी क्षेत्र में पेड़ उखाड़े रहे हैं।
सूरतगढ़ से बडोपल रोड पर बने हुए सूर्योदय नगरी के मशान और पास के टिब्बों को मिट्टी ले जाने वालों ने खोद डाला है जिसके कारण कितने ही पेड़ वहां मौत के शिकार हो गए। उनके अंश वहां पर देखने को अब नहीं मिलेंगे। 



मिट्टी माफिया को शासन प्रशासन से भय नहीं लगता। वे इतने खुले हैं कि मशान के मुख्यद्वार में से ट्रैक्टर ट्रोलियों को लाते हैं तथा रेत काट कर भरी हुई ट्रैक्टर ट्रोलियों को वहीं से वापस ले जाते हैं। मशान के भीतर समाधियों पर बनाई चौकियों तक उनकी खुदाई पहुंच गई। मशान के साथ के टिब्बों को बुरी तरह से खोद डाला गया है तथा वहां लगे हुए पेड़ों की जड़ों तक खुदाई हो चुकी है। इससे पहले कितने पेड़ गिरे होंगे? इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता। पिछले कितने सालों से सूरतगढ़ में रेतीले टिब्बों की खुदाई में बाबा रामदेव मंदिर और हनुमान खेजड़ी मंदिर व राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 के आसपास रेत उठाने वालों ने तथा अतिक्रमण कर घर बनाने वालों ने खत्म कर डाले हैं।
कई
संस्थाएं  पौधारोपण करती हैं और गंगानगर जिले को ग्रीन बनाने तक की बात होती है।
पौधारोपण करने वाली संस्थाएं और उनके प्रतिनिधि शहर के आसपास शायद नजर नहीं डाल पाते।
उनकी नजरें रेतीले टिब्बों पर जाती तो गिरते पेड़ कटते पेड़ नजरों में जरूर आते।
जोधपुर के खेजड़ली ग्राम का नाम इसलिए रखा गया कि वहां पर खेजड़ी पेड़ को काटने से बचाने के लिए सैंकड़ों लोगों ने अपने को कटवा दिया था। उस समय राजशाही थी अब राजशाही नहीं है और प्रजातंत्र में संस्थाओं व लोगों की चुप्पी खल रही है। 



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें