Wednesday, May 3, 2017

जोहड़ व आबादी की 25 करोड़ की जमीन पर कब्जे:सत्ता की दादागिरी:प्रशासन की लाचारी:

 

सूरतगढ़ तहसील:भैरूंपुरा ग्राम पंचायत क्षेत्र:127 बीघा पर कब्जा:
उपखंड कार्यालय पर क्रमिक अनशन शुरू:
विशेष रिपोर्ट-करणीदानसिंह राजपूत-
सूरतगढ़, 24 मार्च 2015.
अपडेट  3 मई 2017
सूरतगढ़ तहसील में भैरूंपुरा ग्राम पंचायत क्षेत्र में जोहड़ पायतन की 127 बीघा करीब 15 करोड़ से अधिक बेशकीमती जमीन पर प्रभावशाली लोगों ने कब्जे कर रखे हैं तथा सत्ता की दादागिरी से लाखों रूपए की उपज पैदा करते हैं और प्रशानिक अधिकारी सब जानते हुए इतने लाचार हैं कि दबंगता के आगे चुप हैं। 


उच्च न्यायालय का आदेश है कि जोहड़ों आदि पर से अतिक्रमण हटवाए जाएं। ऐसी सूरत में राजस्व तहसीलदार को पूर्ण अधिकार है कि वे कब्जे को हटवाएं, फसल को सरकारी हक में कुर्क करें तथा अतिक्रमणकारी भू माफिया लोगों को गिरफ्तार कर उचित सजा दें।
भू माफिया वर्तमान विधायक राजेन्द्र भादू के खेमे में घुसे हुए हैं इसलिए प्रशासन मांगपत्र और धरना क्रमिक अनशन के बावजूद कोई कदम नहीं उठा रहा है। जोहड़ पायतन पर से कब्जे हटाने की मांग करने वालों ने 12 मार्च को प्रशासन को मांगपत्र दिया जिसमें साफ साफ आरोप लगाया है कि स्थानीय विधायक राजेन्द्र भादू का समर्थन है। राजेन्द्र भादू को इस बाबत अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और वे माफिया के साथ नहीं हैं तो जोहड़ के जमीन को अविलंब मुक्त कराने के लिए प्रशासन को कहना चाहिए।

जोहड़ पायतन की जमीन 15 एसएलडी,15 एसएलडी ए,16 एसएलडी,16 एसएलडी ए में चकों में है। प्रभावशाली लोग कई सालों से लाखों रूपए की फसलें उठाते हैं। वर्तमान मांग में साफ लिखा गया है कि फसलें सरकार अपने कब्जे में ले और उनको नीलाम कर रकम को सरकारी खजाने में जमा करे।

इसके अलावा प्रभावशाली लोगों ने आबादी भूमि पर भी अतिक्रमण कर कास्त कर रखी है। उनको भी मुक्त कराने की मांग है।
यह जमीन चक 14 एसएलडी,5 एसएलडी,16 एसएलडी ए की आबादी में करीब 67 बीघा करीब 7 करोड़ रूपए से अधिक की बेशकीमती जमीन पर खेती की जा रही है।
 अमरपुरा ग्राम में जल निकासी डिग्गी की जमीन पर भी प्रभावशाली लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है।
बताया जाता है कि ये सारी जमीनें करीब 25 करोड़ रूपए से अधिक कीमत की हैं।
घोर आश्चर्य यह भी है कि प्रभावशाली लोग अपनी फसलों के लिए एसएलडी नहर में पानी भी अधिक छुड़़वा लेते हैं जिससे नहर टूटती रहती है। नहर में 30 से 40 फुट तक की चौड़ाई में कटाव होते रहे हैं लेकिन उसकी जांच नहीं होती।
मांग करने वालों ने कब्जे हटवाने की मांग में 3 चकों 4 एसएलडी, 5 एसएलडी एवं 5 एसएलडी को राजस्व चक घोषित करने की मांग भी कर रखी है।
प्रशासन को 12 मार्च को धरने के साथ मांगपत्र दिया गया था तथा उसमें 22 मार्च तक का समय दिया गया था। प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं की जाने पर 23 मार्च से उपखंड कार्यालय के आगे क्रमिक अनशन शुरू किया गया है।




पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु व पूर्व विधायक गंगाजल मील ने आरोप लगाया है कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बावजूद जोहड़ पायतन की जमीनों पर भू माफियों के कब्जे सरकार के नुमांइदों की शह व स्थानीय प्रशासन की वजह से कायम हैं। सरकार व स्थानीय प्रशासन की ईच्छा शक्ति हो तो यह मांगें 1 दिन में पूरी की जाने वाली हैं। 
तहसीलदार से जोहड़ पायतन की खड़ी फसल जब्त करने की मांग
किसान मजदूर जागरुक मंच ने 25 मार्च को राजस्व तहसीलदार सूरतगढ़ को प्रदर्शन के साथ मांग पत्र दिया है कि जोहड़ पायतन पर खड़ी फसल की गिरदावरी करवा कर सरकारी हक में कब्जे में ली जाए।



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