सोमवार, 16 मई 2016

देश का असली हकदार कौन? 25 वर्ष पहले गंगा में छपा:आज भी यह सवाल जिंदा है- प्रस्तुतकर्ता- करणीदानसिंह राजपूत:


यह लेख दिल्ली से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका गंगा में जून 1987 में प्रकाशित हुआ था। 

लेख में जो सवाल यानि कि प्रश्र थे वे आज भी उसी हालत में पड़े हैं। संपूर्ण देश को लूटने वाले अधिक प्रभावशाली ही हुए हैं। यह पत्रिका मेरे रिकार्ड में थी। प्रबुध पाठकों के लिए यह महत्वपूर्ण लेख प्रस्तुत किया जा रहा है। इसे पढ़ कर तथा अन्य को बता कर पढ़ा कर इस पर चर्चा और गोष्ठियां आयोजित कराने का कार्य शुरू किया जा सकता है। सच तो यह है कि उस समय भी इस विषय पर देश में गोष्ठियां आयोजित हुई थी और जन मानस को जगाने वाले विचार आते रहे थे। इतने वर्षों के बाद दूसरी तीसरी पीढ़ी के नौ जवान और नवयुवतियां आ चुके हैं। उनको तो इस सवाल पर दिन रात एक कर देना चाहिए। वैसे यह विषय हर उम्र के लोगों के लिए है और उनको सजगता से यह सवाल उठाना ही नहीं चाहिए बल्कि असली हकदार को देश मिले इस का पूरा प्रयास करना चाहिए।
up date 16-5-1016

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