शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

राजा ने फिर मांग लिया ताज:कासनिया तैयार:जनता पूरे बदलाव मूड में


- भादू के सिर से ताज हटा कर कासनिया के सिर पर ताज रखने का मतलब?



- भादू और कासनिया एक सिक्के के दो पहलू है,जनता इस सिक्के को ही बदलना चाहती है-

* करणी दान सिंह राजपूत  *

विरोध की बढ़ती आवाजें और उठते सवालों के बीच विधायक राजेंद्र सिंह भादू ने 5 साल के लिए फिर से  ताज और राज मांग लिया है। विधायक राजेंद्र सिंह भादू ने सीवरेज सिस्टम के उद्घाटन पर 30 सितंबर के समारोह में जनता के बीच विकास के दावे गिनाते हुए नरेंद्र मोदी और वसुंधरा राजे के गीत गाते हुए अपने लिए भी राज और ताज फिर से मांग लिया।

 विधायक का कहना था कि सूरतगढ़ क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के करोड़ों रुपए लगा कर के विकास कार्य करवाए गए हैं और उनसे अनेक प्रकार की समस्याओं को दूर किया गया है लेकिन सूरतगढ़ इलाके में अभी भी समस्याएं कायम है जिन्हें दूर करने के कार्य शुरू किए जा चुके है,उन्हें पूरा करने के लिए और बहुत से कार्य जो  अभी शुरु नहीं हो पाए हैं उन्हें भी शुरू करना है,इसलिए निरंतरता के वास्ते भारतीय जनता पार्टी को फिर से राजस्थान में विजय बनाएं। उनका कथन खुद के लिए भी था कि वे इस इलाके को पूर्ण विकसित करने के लिए अभी और वक्त चाहते हैं,एक मौका और मिलना चाहिए। 

अब यह अलग निर्णय जनता के हाथ में है कि वह विधायक राजेंद्र सिंह भादू को  कोसते हुए भी एक मौका देगी या नहीं देगी? अभी तो भारतीय जनता पार्टी की टिकट मिलने पर ही आगे कहानी बढ सकेगी। उसके बाद जनता का निर्णय चुनाव में होगा कि वह भादू को फिर से ताज सौंपना चाहती है या नहीं चाहती? 

फिलहाल बात करें  सूरतगढ़ की राजनीति की तो भारतीय जनता पार्टी की टिकट के लिए पूर्व राज्य मंत्री रामप्रताप कसनिया भी  प्रबल दावेदार हैं। उन्होंने 10 अक्टूबर को नयी धानमंडी में महा जन पंचायत बुलाई है जिसमें  उनके द्वारा शक्ति प्रदर्शन होगा की टिकट उन्हें मिले। अगर टिकट रामप्रताप कसनिया को मिलती है तो भादू का दुबारा राज और  ताज मांगने का मौका ही हाथ से चला जाएगा। फिलहाल यह सोच है कि सीटिंग एमएलए की टिकट  पार्टियां नहीं काटती इसलिए दोबारा राजेंद्र सिंह भादू को भाजपा की टिकट मिल सकती है लेकिन संपूर्ण इलाके में विरोध के उठते स्वर और सवाल भादू की टिकट के लिए खतरा बन रहे हैं। ये सवाल और आवाजें  तेज और अधिक तेज होती जा रही हैं ।  जो पार्टी का टिकट का निर्णय बदलने में प्रभावी हो सकती है। यह टिकट भादू को नहीं मिले तो फिर किसको मिले?भारतीय जनता पार्टी सूरतगढ़ सीट को अपने कब्जे में रखने के लिए यहां पर भारतीय जनता पार्टी के विकास दूत कहलाए जाने वाले मगर विवादों में आलोचनाओं का शिकार हो रहे राजेंद्र सिंह भादू के अलावा किसी दूसरे चेहरे को मैदान में उतारे तो दूसरा चेहरा भी राजनीतिक होना जरूरी है। 

चूंकि यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए पुराने खिलाड़ी राम प्रताप कासनिया को भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव में  उतारा जाना संभव हो सकता है। रामप्रताप कसनिया काफी समय से गांव और शहर में अपने पक्ष में प्रचार करने के लिए अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए प्रयत्नशील है।

 फिलहाल जनता के बीच भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई है तो केवल 2 चेहरे राजेंद्र सिंह भादू और रामप्रताप कासनिया ही हैं।

भारतीय जनता पार्टी अपनी सीट को बचाने के लिए जनता के रुख, गुप्त रिपोर्टों को, पार्टी रिपोर्टों  को ध्यान में रखकर कोई निर्णय ले सकेगी। 

अभी राजेंद्र सिंह भादू का दावा बहुत मजबूत है मगर जनता का विरोध भी मजबूत है। 

 जनता इस बार भाजपा का विरोध भी कर रही है। ऐसी स्थिति में भाजपा का कोई भी खिलाड़ी इस सीट पर आसानी से चुनाव जीत लेने की सोच भी नहीं सकता। 

भाजपा ने बहुत से विकास कार्य किए हैं मगर कार्यकर्ताओं के सही कार्य भी नहीं हो पाए। कार्यकर्ता चक्कर लगा लगा कर थकते रहे। उनकी सुनवाई स्थानीय स्तर से लेकर पार्टी के जयपुर मुख्यालय तक नहीं हुई। प्रशासन को जितने प्रकरण कार्यकर्ताओं ने दिए उनमें से किसी का निस्तारण सही नहीं हो पाया। सूरतगढ़ में कार्यकर्ताओं को सबसे अधिक परेशानी हुई है तो वह नगर पालिका और राजस्व तहसील स्तर पर हुई है। इसके अलावा सार्वजनिक रूप से पुलिस विभाग जिसके चार थाने  सूरतगढ़, सूरतगढ़ सदर,राजियासर और जैतसर में आम जनता किसी न किसी मामले में पीड़ा हुई और उसकी सुनवाई विधायक स्तर पर नहीं हुई।पार्टी संगठन और टिकटार्थियों की ओर से भी पीड़ित लोगों के आंसू पौंछने का साथ देने का कोई प्रयास कभी नहीं किया गया।

आम जनता के बीच जब बात चलती है टिकट और ताज की  तब एक ही सोच का उत्तर मिलता है की राजेंद्र भादू के सिर से  ताज हटाकर कासनिया के सिर पर ताज रखने का क्या मतलब है?

 यह तो  एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। एक तरफ भादू और दूसरी ओर कासनिया है।  जनता इस संपूर्ण सिक्के को ही ही चलन से बाहर करना चाहती है। अब देखना यह है कि भारतीय जनता पार्टी का निर्णय क्या होता है और नया सिक्का कौन हो सकता है?

 



 

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