सोमवार, 15 जनवरी 2018

मोदी सरकार दम घोंटू-इंदिरा शासन था लोकतांत्रिक मानवीय-शिव सेना


शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना के एक संपादकीय में कहा कि देश का दम घुट रहा था और न्यायाधीशों के आवाज उठाने के बाद अब वह आसानी से सांस ले पा रहा है।

उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीशों द्वारा मामलों के चुनिंदा तरीके से आवंटन का मुद्दा उठाए जाने के बाद शिवसेना ने केंद्र पर निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि जो लोग लोकतंत्र की दुहाई देते हैं असल में वही उसे कमजोर कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि जो लोग पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर न्यायिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाते थे, वे आज सत्ता में हैं। साथ ही पार्टी ने कहा कि उनका (इंदिरा) शासन ज्यादा मानवीय और लोकतांत्रिक लगता था। शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना के एक संपादकीय में कहा कि देश का दम घुट रहा था और न्यायाधीशों के आवाज उठाने के बाद अब वह आसानी से सांस ले पा रहा है। भारत की न्यायापालिका को लेकर पिछले शुक्रवार से खलबली मची हुई है जब उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीश- न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर मामलों के आवंटन का मुद्दा उठाया था।

सामना ने कहा कि यह चार न्यायाधीशों द्वारा लोकतंत्र की मजबूती के लिए उठाया गया एक साहसी कदम है। राजग की इस सहयोगी पार्टी ने सवाल उठाया, ‘‘क्या यह प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के दवाब में आने और इन चार निष्पक्ष न्यायाधीशों को चुनिंदा सुनवाईयों से दूर रखने के संबंध में है?’’ 

पार्टी ने कहा कि जो लोग इंदिरा गांधी पर न्यायिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते थे, वे अब सत्ता में हैं। और अगर कई संवैधानिक पदों पर उठ रहे सवालों को देखा जाए तो इंदिरा का शासन ज्यादा मानवीय और लोकतांत्रिक मालूम होता है।

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शिवसेना ने कहा, ‘‘आप (केंद्र) लोकतंत्र की बात करते हैं लेकिन असल में आप इसे कमजोर कर रहे हैं और देश में फिलहाल यही हो रहा है।’’ बता दें कि कुछ दिनों पहले ही पार्टी प्रमुख उद्भव ठाकरे ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा और न्याय प्रणाली में अनियमितताओं के खिलाफ हुंकार भरने को लेकर जस्टिस जे.चेलामेश्वर समेत चार वरिष्ठ जजों की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि कानून को गूंगा और बहरा बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार को इस मामले में दखल नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा था, “उन जजों (चारों की) के फैसले की सराहना की जानी चाहिए। उन चारों के खिलाफ जांच बिठाए जाने की संभावना है। हालांकि, यह जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।”

जन।सत्ता _15.1.2018.

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