Wednesday, October 18, 2017

किसानों की कर्ज माफी लटका रही भाजपा की संवेदनहीन सरकार - पायलट



जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने किसान संगठनों से हुए समझौते के तहत गठित कमेटी में दो मंत्रियों के नदारद रहने को भाजपा सरकार की किसानों की अनदेखी की प्रवृत्ति का परिचायक बताया है।

पायलट ने कहा कि सरकार ने किसान संगठनों से 50 हजार रुपए तक की कर्ज माफी का समझौता किया था और इसके लिए कमेटी का गठन करने की बात कही गई थी, परंतु सरकार ने कुछ समय तक तो कमेटी ही गठित नहीं की थी और कांग्रेस की किसान न्याय पदयात्रा के कारण बने दबाव में आकर गत 1 अक्टूबर को 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया और कमेटी गठन के 13 दिन बाद आयोजित बैठक में दो मंत्रियों का शिरकत नहीं करना स्पष्ट करता है कि भाजपा सरकार में किसानों के प्रति संवेदनहीनता व्याप्त है। 


उन्होंने कहा कि 50 हजार रुपए का कर्जा माफ करने के लिए भी सरकार कमेटी के सदस्यों को दीपावली और विधानसभा के मानसून सत्र के बाद विभिन्न राज्यों में भेजकर कर्ज माफी का आंकलन करवाएगी, जो बेहद हास्यास्पद है। हर राज्य की अपनी परिस्थितियां होती हैं और सरकार को किसानों के हित में राज्य में उत्पन्न हालातों मसलन प्राकृतिक आपदाओं व अन्य कारकों को संज्ञान में लेकर मुआवजा, राहत व कर्ज माफी घोषित करनी चाहिए, न कि बदहाल किसानों को राहत से वंचित रखने के लिए बहाने ढूंढ़े जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि गत कांग्रेस सरकार ने किसान आयोग का गठन कर किसानों की समस्याओं को उजागर करने व प्रशासन के साथ तालमेल बिठाने का काम किया था, परन्तु चार सालों में इस क्षेत्र में कोई प्रगति नहीं हुई है, जो बताता है कि सरकार ने किसानों के हित में जारी योजनाओं व नीतियों को भी ठप कर रखा है। 


कमेटी पर होने वाला खर्चा सरकारी खजाने का दुरुपयोग

उन्होंने कहा कि कमेटी को विभिन्न राज्यों में भेजने पर जितना खर्चा आएगा, वह एक तरह से सरकारी खजाने का दुरुपयोग ही होगा। इससे बेहतर है कि सरकार बिना विलंब किए किसानों की सम्पूर्ण कर्ज माफी को लागू करे ना कि इसे लेकर आगामी विधानसभा चुनावों में किसानों के वोट हासिल करने के लिए घोषणा के रूप लम्बित रखे। उन्होंने कहा कि 80 से ज्यादा किसानों के मरने के बाद भी सरकार यह सोचती है कि यह समस्या निदान के लायक नहीं है तो यह भाजपा सरकार का किसानों के साथ सबसे बड़ा छलावा साबित होगा। भाजपा सरकार बनने के बाद किसानों की जिस स्तर पर दुर्दशा हुई है, उससे किसान सरकार द्वारा की जा रही निरन्तर अनदेखी को अब सहन करने की शक्ति खो चुके हैं।



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