Saturday, July 15, 2017

सीता के मन भाए गौरी पुत्र गणेश-गणेश की सज्जा से मिलता है आत्मसुख और समाज को प्रेरणा




प्रेरणा नई दिशा:सड़कें साफ और शुद्ध पर्यावरण


- करणीदानसिंह राजपूत -

 गणेश की सज्जा से मिलता है आत्मसुख और समाज को प्रेरणा ताकि  पर्यावरण रह सके शुद्ध और सभी को मिलें साफ सुथरे मार्ग और शुद्ध वातावरण-

गणेश छपे निमंत्रण पत्र ही नहीं कोई भी निमंत्रण पत्र सड़कों पर न फेंके। उनको विभिन्न रूप देकर घर को सजाएं।
     बीकानेर के जूनागढ़ के सामने मुख्य डाक घर के पीछे पुरबिया राजपूत मोहल्ले में रहने वाली सेवा निवृत अध्यापिका सीता देवी जनवार को पिछले कुछ वर्षों से एक अजीब लगन लगी है। वे ब्याह शादियों में बांटे जाने वाले निमंत्रण पत्रों को एकत्रित करती हैं और उनको कार्ड शीट पर चिपका कर सजा कर नयनाभिराम नया रूप प्रदान कर देती हंै। कितनी ही फाईलें बनाई जा चुकी हैं जिनमें कितने ही रूप रंग के गणेश सजाए हुए हैं। दीवारों पर टांगने वाली झालरें भी आकर्षक लगती हैं।
सीता देवी इसे कला का ही एक रूप मानती हैं, जो आत्म सुख प्रदान करता है व अन्य लोगों को साफ सुथरे जीवन की प्रेरणा देता है।
शादियों व अन्य समारोहों में बांटे जाने वाले निमंत्रण पत्रों पर गणेश की तस्वीर प्राय: होती है। लोग कुछ दिन तक इन निमंत्रण पत्रों को संभाल कर रखते हैं और बाद में सड़कों पर या कचरे में फेंक देते हैं।
सीता देवी के सामने निमंत्रण पत्र सड़क पर फेंके जाने की एक घटना हुई। उन्होंने जिस खिड़की से निमंत्रण फेंका गया था उधर देखा लेकिन वह बंद हो चुकी थी। उन्होंने निमंत्रण पत्र उठाया और अपने मस्तक से लगाया तथा अपने घर ले आई। उसको आदर के साथ रखा। यह आध्यात्मिक पक्ष था। प्रथम पूज्य गणेश छपे कार्ड को फेंका क्यों जाए?
सीतादेवी ने विचार किया कि गणेश की तस्वीर को सजाया जाए और शीट पर नाना रूप दिए जाएं। बस। जब यह विचार आया तब वे शिक्षिका थी और जूनून में लग गई समाज को नई दिशा देने में। ज्यों ज्यों यह कार्य आगे बढ़ता गया त्यों त्यों मालूम पड़ता गया कि गणेश छपे कार्डों ïïको सड़कों पर फेंके जाने से बचाने के पीछे तो अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
सीतादेवी का अनुभव बताता है कि अध्यापिका सेवानिवृति के बाद के जीवन में गणेश के कार्ड एकत्रित करने में टहलने से और सजाने के कार्य में लगे रहने से उनका स्वास्थ्य ठीक ठाक है। किसी प्रकार की चिंता नहीं। मन में विचार आते हैं तो गणेश छपे कार्डों को सड़कों से उठाने के आते हैं।


देश भर में स्वच्छता का अभियान चल रहा है। उसमें इसका लाभ मिल सकता है कि लोग किसी भी प्रकार का निमंत्रण पत्र सड़कों पर नहीं फेंके और उनसे सजावट की वस्तुएं बनाएं।
सीता देवी का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को प्रेरित किया जाए तो वे कितनी ही प्रकार की सामग्री बना सकेंगे।
सीतादेवी ने पेंसिल तराशने से बनते छिलकों से और चूडिय़ों से भी गणेश की तस्वीरें बनाकर घर में सजा रखी हैं।


 

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