गुरुवार, 26 जनवरी 2017

तेज सतर्क दिमाग..तेज सतर्क दृष्टि..तेज सतर्क काया..


काव्य शब्द व छायाचित्र- करणीदानसिंह राजपूत:



तेज सतर्क दिमाग हो तो सुगंध मिल जाती है।
तेज सतर्क दृष्टि हो तो जानकारी मिल जाती है।
तेज सतर्क काया हो तो शिखर तक पहुंच हो जाती है।
चींटी पहाड़ पर चढ़ जाती है।
मकड़ी दीवार पर चढ़ जाती है।
चूहा दो पैरों पर खड़ा हो सब कुछ पा जाता है।
बस,
जीव जन्तु पक्षी,
जलचर नभचर थलचर,
कोई भी आलसी नहीं होते।
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गणतंत्र दिवस 27 जनवरी 2017 को दोपहर बाद करीब 4 बजे चीकू यह संसार  छोड़ गया। परिवार का सदस्य चला  गया- करणीदानसिंह राजपूत 
up date 26-1-2017.



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