सोमवार, 12 जनवरी 2015

रेल पटरी को कोई नुकसान नहीं है मकानों को हटाना अनुचित


विशेष टिप्पणी- करणीदानसिंह राजपूत
बीकानेर संभाग में रेलवे द्वारा अपनी सीमा के पास सालों से बने हुए तथा आबाद मकानों को अपनी सीमा में बतलाते हुए हटाने के नोटिस और कार्यवाही की जा रही है। सूरतगढ़ में भी ऐसे नोटिस जारी हुए हैं। मेरा सीधा सा तर्क है कि इन मकानों से क्या रेल पटरियों पर कोई असर पड़ रहा है? रेलवे गाडिय़ों के आवागमन पर कोई बुरा असर पड़ रहा है? रेलें चलाई नहीं जा सकती या कोई बाधा बा रही है?
इन सभी सवालों का उत्तर है कि रेल गाडिय़ों के संचालन में कोई बाधा नहीं आ रही है और ना रेलवे पटरी को कोई नुकसान पहुंच रहा है। आने वाले सालो में भी रेल पटरी कों किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचने की सुभावना नहीं है।
जब कोई नुकसान रेल पटरी को नहीं है और न रेल संचालन में कोई बाधा है तो फिर इन मकानों को हटाने की कोशिश कर लोगों को बरबाद करने का निर्णय क्यों किया गया है?
एक सूरतगढ़ में ही नहीं अन्य स्थानों पर भी यही हालात हैं।
मकान एकदम से नहीं बने तथा तीस चालीस साल पहले बने। इतने सालों तक रेल अधिकारी अपनी भूमि संपत्ति की सुरक्षा क्यों नहीं कर पाए? इतना ही नहीं अनेक मकानों के तो नगरपालिका ने अपनी भूमि मानते हुए पट्टे तक जारी कर दिए थे।
अब इतने सालों बाद रेलवे को भूमि चाहिए तो वहां से रेल पटरी तो निकाली नहीं जा रही है,सो जरूरी नहीं कि वही भूमि ली जाए। रेलवे नगरपालिका से उतनी ही भूमि रेल सीमा के पास में अन्यत्र ले सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें