Saturday, November 30, 2013

चुनाव प्रचार:अजब गजब तरीके

रपट-करणीदानसिंह राजपूत

सिर के केश अजब कटवाए
सूरतगढ़, 30 नवम्बर 2013. लोगों ने चुनाव प्रचार और मत मांगने तथा समर्थन के अजब गजब तरीके निकाले हैं कि पार्टियां,प्रत्याशी और लोग आश्चर्य चकित हो रहे हैं।
राजस्थान पत्रिका दिनांक 30 नवम्बर श्रीगंगानगर  संस्करण में एक फोटो समाचार छपा है। बहुजन समाज पार्टी यानि कि बसपा के लिए समर्थन की घोषणा सिर की अनोखी हजामत करवा कर की जा रही है। केश इस तरह से काटे गए हैं कि उनमे बसपा का चुनाव चिन्ह हाथी और अग्रेजी में बीएसपी लिखा हुआ साफ नजर आता है।




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मूढ़े नए लगाने हैंसूरतगढ़: यहां संदेश चल रहे हैं कि मूढ़े बदलने नहीं हैं,मूढ़े नए लगवाने हैं।
यहां पर कांग्रेस की तरफ से विधायक चौधरी गंगाजल मील दुबारा चुनाव लड़  रहे हैं तथा भाजपा ने चौधरी राजेन्द्र भादू को चुनाव में उतारा है। बसपा की ओर से डूंगर राम गेधर चुनाव में हैं।
मूढ़े बदलने का अर्थ यह है कि कांग्रेस के चौधरी के मूढ़े पर बैठना बंद कर भाजपा के चौधरी के मूढ़े पर बैठना है।
मूढ़े नए लगवाना या नए मूढ़े पर बैठना है का मतलब है कि इन दोनों चौधरियों को साथ नहीं देना है। मतलब है कि ना मूढ़े यानि कि बसपा के साथ चलना है और डूंगर राम गेधर को वोट देना है।
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Thursday, November 21, 2013

राजा की इक तरफा हवा नहीं डूंगर गेधर से टक्कर है

भाजपा के राजा की और बसपा के डूंगर गेधर की टक्कर बतलाई जा रही है तो इक तरफा हवा कैसे हुई?
पिता चौधरी बीरबल भादू और ताऊ चौधरी मनफूलसिंह भादू के वक्त भी कभी नहीं थी इक तरफा हवा

पिछले चुनाव में गंगाजल मील साहेब की हवा बहाने वाले बतलाएं कि उनकी स्थिति कौनसे पायदान पर है?
 

------    खास टिप्पणी-----करणीदानसिंह राजपूत
 
सूरतगढ़ का विधान सभा चुनाव 2013.
बड़ा मजेदार। हर आदमी औरत में समझदारी घुस गई। समझो अक्लदाढ़ आ गई। पिछले चुनाव में मील साहेब की हवा बनाने वाले लोगों में और मीडिया के भी कुछ लोगों में इस बार राजा की फूंक का असर हो गया। दिन रात मील मील बोलने वाले और रात को मील साहेब का सपना लेने वालों ने एकदम  यू टर्न ले लिया। ये यू टर्न मीडिया की अखबार की भाषा है। सीधे सादे शब्दों में कहें कि पलटा मार गए। सडक़ पर कोई वाहन कार जीप ट्रक पलटा तार जाए तो नुकसान हो जाता है। इस पलटा मारने में नुकसान तो होने वाले का होता है। पलटा मारने वालों को लाभ ही लाभ हो जाता है। फूटे भाग उसके जो छूट गया। अब वे ही लोग राजा की हवा बनाने में लगे हैं।
दिन रात मील साहेब के यहां रोटी मोडऩे वाले अब कहते हैं- राजा की इक तरफा हवा है।
अब इन चाटुकारों को इतनी भी अक्ल नहीं है कि यह इक तरफा हवा वाली बात माने जाने वाली नहीं है।
राजा के पिता चौघरी बीरबल और ताया चौधरी मनफूलसिंह भादू के वक्त भी कभी इकतरफा हवा नहीं बही थी। उस वक्त तो केवल भादू ही भादू थे। तब भी इक तरफा नहीं बही। चालीस सालों तक नहीं बही और उनके किसी भी चुनाव में इक तरफा हवा नहीं बही। अभी पुराने लोग जिंदा हैं।  वो बतला सकते हैं और रिकार्ड से मालूम हो सकता है कि ताया मनफूलसिंह तो चुनाव में जरूर जीतते हारते रहे,लेकिन बीरबल भादू सीधे जनता के चुनाव में कभी भी जीत नहीं पाए थे। जनता ने उनको कभी नहीं जिताया। वे जीते केवल सरपंचों के बल पर। जब ग्राम पंचायतों के चुनाव हो जाते तब उन जीते हुए सरपंचों के बहुमत से प्रधान चुने जाते रहे। जहां तक इस टिप्पणीकार को याद है वे जब जब सीधे चुनाव में खड़े हुए तब तब जनता ने उनको पटखनी दी।
यह बात इसलिए बतानी जरूरी हुई है कि भादू के परिवार में जब भी किसी ने चुनाव लड़ा,चाहे कांग्रेस से चाहे निर्दली,कभी भी इक तरफा  हवा नहीं चली। जब इलाके में उनके अलावा कांग्रेस में कोई बड़ा नेता नहीं होता था तब भी इक तरफा हवा नहीं बही।
इस बार भी इक तरफा हवा नहीं है। इक तरफा हवा का मतलब होता है कि सामने जो कोई भी है,उसके पल्ले में कुछ भी नहीं है,या जो उसके पास है वो इतना कम है कि उसकी गिनती नहीं हो सकती।
इन अक्लवान लोगों का ही कथन आगे होता है कि-भाजपा और बसपा की टक्कर है। राजा और डूंगर की टक्कर है। मील के गीत गाने वालों के मुंह से और ना जाने कहां कहां से यह ना मानने वाली बात आ रही है कि राजा की इक तरफा हवा है। जब इक तरफा हवा है तो बसपा से टक्कर कैसे है?
सोचने समझने वाली बात यह है कि पिछले चुनाव में बसपा चौथे क्रम पर थी और अब वह टक्कर में बताई जा रही है। बसपा ने कितनी प्रोग्रेस कर ली है। यह सोचने समझ लेने वाली बात है। और उसकी यह प्रोग्रेस अभी भी दिन रात चल रही है। सूरतगढ़ शहर में और ग्रामों चकों में भी तथा अब हर जाति वर्ग में भी। राजा की जो इक तरफा हवा की बात करते हैं वे ना जाने राजा से कौनसा बैर निकाल रहे हैं। अच्छा होगा कि राजा को असलियत में चुनाव लडऩे दिया जाए।
इक तरफा हवा बतलाने वालों से यह तो पूछा ही जाना चाहिए कि जब राजा की टक्कर डूंगर से बतलाई जा रही है तब इस हालत में कांग्रेस के विधायक गंगाजल मील साहेब की स्थिति किस पायदान पर है?

Monday, November 11, 2013

पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया ने भाजपा प्रत्याशी राजेन्द्र भादू को समर्थन दिया:



 

खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत       फोटो- रमेश स्वामी

सूरतगढ़, 11 नवम्बर। भाजपा में मनुहार के बाद रामप्रताप कासनिया व उनके समर्थकों ने प्रत्याशी राजेन्द्र भादू का साथ देने की घोषणा करदी। करीब 10 बजे कासनिया, प्रधान सुभाष भूकर, गोपाल लेघा,विजय गोयल व अन्य सैंकड़ों लोग राजेन्द्र के साथ हुए। भाजपा प्रत्याशी राजेन्द्र भादू आज सुबह कासनिया निवास पहुंचे और बातचीत की। इसके बाद कासनिया जिंदाबाद के नारे लगाए गए। आम सभा में भाजपा के नेताओं ने हाथों में हाथ डाल ऊंचे उठा कर एकता प्रदर्शित की।
भाजपा की चुनावी सभा में पुरानी धानमंडी में लोगों की उत्साहित भीड़ थी। ऐसी भीड़ इस चुनाव में पहली बार देखी गई। 

वरिष्ठ भाजपा नेता श्याम मोदी की अध्यक्षता में हुई चुनावी सभा को प्रत्याशी राजेन्द्र भादू, पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया,पूर्व विधायक अशोक नागपाल,प्रधान सुभाष भूकर,पूर्व प्रधान पंचायत समिति चंदुराम लेघा,स.शरणपालसिंह,महिला मोर्चा प्रदेश मंत्री श्रीमती राजेश सिडाना, जिलाध्यक्ष श्रीमती रजनी मोदी,हंसराज पूनिया,देहात मंडल अध्यक्ष नरेन्द्र घिंटाला,नगर मंडल अध्यक्ष गुरदर्शनसिंह सोढ़ी महामंत्री धर्मदास सिंधी,पीताम्बर दत्त शर्मा,राजेन्द्र सेतिया,किशन भार्गव, पुरूषोत्तम शर्मा,रेंवतराम मेघवाल,कृष्ण डांग महामंत्री नगर मंडल मुरलीधर पारीक आदि ने संबोधित किया।
चुनाव कार्यालय का उदघाटन रामप्रताप कासनिया ने किया।
 

सभा के बाद जूलूस के रूप में लोग उपखंड कार्यालय के आगे पहुंचे। राजेन्द्र भादू ने अपना नामांकन पेश किया।
एकजुटता का प्रदर्शन:विजेन्द्र पूनिया,गुरदर्शनसिंह सोढ़ी,अशोक नागपाल,रामप्रताप कासनिया,राजेन्द्र भादू व नरेन्द्र घिंटाला
 

चुनावी सभा में उमड़े लोग

जूलूस
नामांकन पेश करते हुए राजेन्द्र भादू

लोक सीख:डूंगर पर चढ़ लो



गांव गांव ढ़ाणी ढ़ाणी डूंडी सी पिट गई।
बरखा आवण आली है। अपणी अपणी जान माल बचालो।

 ढ़ोर जिनावरां ने बचालो।
अपणे अपणे घर बचालो। पाणी ते कच्ची बस्तियां तिरिया मिरियां भर जावैली अर कच्चे कोठे मकान ढ़ह जावेंगे। 

 नीची बस्तियां वालां की कुण सुनण वाले। टूटण बाद दुबारा बणावण में सौ सौ पंगे। जमीन खरीद ना सकै अर दुबारा तीबारा किसी एक चौधरी के पांव अर किसी दूसरे चौधरी के पावां में पडऩा पडै़।
 आच्छी आच्छी जमीन चौधरियां के कब्जे में होती जावै। गरीब तो तड़प तड़प मरण के भाग के। गरीब तो जूते खावण के भाग के।
 कोई ना कोई चौधरी झांसा दे दा के ठग ले।
अब गांव गांव डूंडी पिट री है।

 आपणै आपणै टापरै बचालो।
बुड्ढे बडेरे चौपाल चौक पर बातां करण लाग रै। घरां में लुगाईयां टाबरां जवानां में चिंता लागी।
एक बडेरा बोल्या। देखो जवानों मरदों। हम तो चालीस पचास सालां ते पिट रयां हा। कोई सुनण वाला नहीं आया। पण अबकी धरती माता ठूठी है। धरती माता वरदान देण ने अपना रूप बदल्या है। 

आपणै गांवा नेड़ै धरती फाड़ डूंगर निकल्या है। बार बार उजडऩे से बचणा है तो डूंगर ऊपर नुंवा मकान आसरा बना लो अर गांव गांव ढ़ाणी उस पर बसालो। डूंगर चढ़ जावो। डूंगर घणा ऊंचा है। बरखा कितनी आवै बाढ़ कितनी आवै। आपां आपां रा परिवार गांव सारा बस्या बस्या रह जावैगा।
बडेरा बोल्या। म्हारै टैम चालीस पचास सालां पहलै जे डूंगर निकल्या होता तो बार बार उजणना ना पड़ता। हर साल उजड़णा अर बसणा।
चौधरियां से जमीन मांगण वास्तै जाणा नहीं पड़ता। 

हाथा जोड़ी अर बेगारां में पूरी जिंनगानी बीत गई। हम तो सारा चौधरियां नै पितायोड़ा है। सारे एक सूं एक बते। जो भी नई चौधर करै वो बेसी लुटेरा ही निकल्या।
सुनण वालों ने बडेरे की सीख पर हुंकारे भरण लागे। लोग बागां ने बड़ेरे की सीख में दम लाग्या। 

बडेरे की सीख एक से दूजे गांव तीजे गांव अर ढ़ाणी ढ़ाणी पूंचगी।
लोगां नै अक्ल आगी। लोग लुगायां बातां करते करते नुवे मकानां बस्तियां गांवां के जोड़ तोड़ बिठावण लागै। 

सारे अपने अपने ढ़ोर डांगरा ने ले डूंगर चढ़ग्ये अर नुंवा नुंवा मकान बणावण जुट गये।
बरखा आई अर घणी तगड़ी आई। 

चौधरी तो अपने अपने घरां ने अर कोठियां नै बचावण लाग्या।
 बरखा ऐसी आई के चौधरी तो आपस में लड़ पड़्या।
 चौधरी आपस में लड़े जिका गरीबां ने कियां बसावे परोटे।
 आच्छा होया चौधरियां के भरोसे ना रिया अर डूंगर चढ़ ग्या।
 कोई गांव उज्ड़्या ना कोई घर उज्ड़्या।
सारां तै आच्छी बात आ होई कै किसी भी चौधरी के आगै हाथ ना फैलाणा पड्या। 

गरीब गुरबां नै अपणी ताकत का पैली बार मालम होया।
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Friday, November 1, 2013

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल का दुराचार प्रकरण पीडि़ता की जान को खतरा:मोबाइल पर फिर आई हत्या की धमकियां


पुलिस ने पहले की कॉल डिटेल निकलवाली मगर आरोपी के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज नहीं किया और अब नई धमकियां आ गई जिसकी अर्जी 31-10-2013 को और लगादी गई

सूरतगढ़, नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल और दो अन्यों के विरूद्ध दुराचार का मामला दर्ज कराने व लगातार लडऩे वाली पीडि़ता को जान का खतरा है।पुलिस धमकियां देने वाले के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर गिरफ्तार नहीं कर रही है और पीडि़ता को अपनी सुरक्षा के लिए रात को घर बदल बदल कर सोना पड़ रहा है।
पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,सिपाही रोहिताश व पार्षद पति ओम साबनिया के विरूद्ध अनुसूचित जाति की महिला के द्वारा बलात्कार और यौन शोषण के मामले में पुलिस ने तथ्यों को छुपाते हुए दो बार अंतिम रिपोर्ट अदालत में दी। अदालत ने दूसरी बार अंतिम रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए प्रथम दृष्टि में बलात्कार होना मानते हुए संज्ञान लिया व आगे की तारीख दी। इस अदालती कार्यवाही के बाद पीडि़ता के मोबाइल पर धमकियां आनी शुरू हुई।
पहले की अर्जी पर कॉल डिटेल में सिम हिंडौन से जारी होना पाया गया। लेकिन पुलिस ने उसका मुकद्दमा दर्ज नहीं किया।
अब दीपावली से ठीक पहले लगातार हत्या की धमकियां मिली और पहले एक मोबाइल से फिर दूसरे मोबाइल से।
पीडि़ता अपने वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु के साथ 31-10-2013 को सिटी थाने गई और सीआई रणबीर साई को लिखित में कार्यवाहीि करने की अर्जी दी जिसमें पहले वाली सिम हिंडौन का हवाला भी दिया।
अब दीपावली पर मिली नई धमकियों में जिन मोबाइल नम्बरों का इस्तेमाल हुआ है उनके नम्बर पुलिस को दी गई अर्जी में है जिसका फोटो यहां दिया जा रहा है।
पुलिस पीडि़ता के प्रकरण में तथ्यों को अनदेखा करते हुए दो बार फाइनल रिपोर्ट दे चुकी है। पीडि़ता ने दोनों बार चुनौती दी। अदालत ने संज्ञान लिया तब से पीडि़ता को धमकियां दी जाने लगी। आरोपियों में एक पुलिस का सिपाही होने के कारण पुलिस पीडि़ता की अर्जी पर कार्रूवाही नहीं करना चाहती।
अब नई अर्जी में लिखा गया है कि पीडि़ता की जान चली गई तो उसकी समस्त जिम्मेदारी पुलिस थाना सूरतगढ़ की होगी।


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