Thursday, January 26, 2012

कवि सम्मेलन में राजनेताओं की खूब उतारी गई आरती-रिपोर्ट: करणीदानसिंह राजपूत-




गुलाब से स्वागत और शॉल ओढ़ा कर किया गया सम्मान:
जय हिन्द लगाओ नारा:इतनी मिली आजादी कि कॉलर पकड़ कर नेताओं से होते हैं सवाल:
आज गधे भी मिलेंगे सरकार में:
सूरतगढ़, 26 जनवरी, 2012. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर महाराजा में हुए कवि सम्मेलन में राजनेताओं जम कर आरती उतारी गई औा किसी को भी सूखा नहीं रहने दिया गया। कवियों ने प्रतातंत्र के गुणगान किए मगर देश की आजादी में जो कुछ हो रहा है, उसका चित्रण भी जम कर किया।
    संदेश त्यागी की कविताओं का रंग खूब जमा.....आज गधे भी मिलेंगे सरकार में। कविता यह थी कि विदेशों में कहीं कुत्तों को प्यार किया जाता है तो कहीं किसी और जानवर से। कवि ने बताया कि हिन्दुस्तान में सबसे अधिक प्यार किया जाता है कि गधे भी सरकार में मिलते हैं।
    रूपसिंह राजपुरी जिन्हें हास्य का कवि कहा जाता है। राजपुरी ने कहा कि पहले हर कवि सम्मेलन में उनको रात के बारह बजे ही बुलाया जाता था। उन्होंने कहा कि सरदार के आगे अ लगा दिया जाए तो वह असरदार हो जाता है। उन्होंने अध्यापक,महिलाओं, छात्रों, पुलिस व ग्रामीणों व राजनैतिक पार्टियों को खूब उछाला। दावे से कहा कि उनको पाजामा खेंच कर नीचे नहीं बैठाया जा सकता क्यों कि उन्होंने पाजामा ही नहीं पहना है।
    वरिष्ठ कहे जाने वाले कवि मोहन आलोक ने तीर तुकों पर बनी अपनी तीस साल पुरानी विधा राजस्थानी डांखले सुनाए। आलोंक ने पंजाबी में भी खूब डके तोड़े।
लाज पुष्प ने जय हिन्द लगाओ नारा से समा बांधा।
    राजेश चड्ढा के संयोजन में चले कवि सम्मेलन में दीनदयाल हास्य कवि ने भी खूब रंग जमाया। ओम पुरोहित कागद,सुरेन्द्र सुन्दरम, जनकराज पारीक,डा. अरूण सोहरिया,नन्द किशोर सोमानी ने अपनी रचनाएं सुनाई।
महाराजा मल्टीपलेक्स सिनेमा के शानदार हॉल में प्रशाशन की ओर से कवियों कर ही नहीं हर श्रोता का सवागत गुलाब के फूल भेंट कर स्वागत किया गया। कवियों का सम्मान श्रीफल व शॉल ओढ़ाकर किया गया।
इस अवसर पर विधायक गंगाजल मील, पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल,प्रशासन की ओर से एडीएम एस.के.बुडानिया,एसडीएम मदनलाल सिहाग,तहसीलदार कुंजबिहारी शर्मा, अधिशाषी अधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता व शहर की सामाजिक संस्थाओं व राजनैतिक सगठनों के पदाधिकारी कार्यकर्ता मौजूद थे। कवि सम्मेलन में शौर्य, श्रंगार,हास्य आदि सभी रसों को परोसा गया जिसमें गीत,कविताएं गजलें परोसी गई।
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