रविवार, 20 दिसंबर 2020

सूरतगढ़ के जानलेवा सड़क मोड़ों पर संकेत जरूरी- दुर्घटनाओं में वंश खत्म हो चुके हैं

 


* करणीदानसिंह राजपूत *


तेज गति के वाहन और सूरतगढ़ की सड़कों के जानलेवा सड़क मोड़ हर माह दो चार जीवन का भख ले लेते हैं। पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाए तो जान जाने की संख्या 100 से ऊपर पहुंच चुकी है। 

सूरतगढ़ शहर से सटा मानकसर हनुमानगढ़ बाईपास का करणीमाता मंदिर के पास का मोड़। राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 62 पर श्री गंगानगर जाते आने वाला केन्द्रीय पशु प्रजनन केन्द्र के पास का मोड़ बहुत ही खतरनाक है और इस पर पचासों दुर्घटनाएं और मौतें हो चुकी है। 

इसी मार्ग पर सूरतगढ़ से बीकानेर जाते हैं तब करीब चार किमी पर हनुमानजी मंदिर के पास का मोड़ जो दोनों ओर है। राजपुरा पीपेरन गांव में मोड़। आगे खतरनाक ह़िदौर फांटा तथा राजियासर श्री बिजयनगर सड़क फांटा पर भी आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है और लोगों के प्राण जाते हैं। सूरतगढ़ शहर में से राष्ट्रीय राज मार्ग नं 62 निकलता है जो आबादी की क ई सड़कों को जोड़ता है,यह सारी लंबाई ही खतरे वाली है और सभी स्थानों पर संकेतक चाहिए। गुरूशरण छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय के पास सड़क पर संकेत लगाने की मांग  तो वर्षों से है।

इन स्थानों पर हुई दुर्घटनाओं में हुई मौतें अनेक परिवारों के वंश खत्म कर चुकी हैं।00







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