रविवार, 26 मई 2019

देश भर में चुनावआचार संहिता हटाई गई:सभी काम हो सकेंगे

दि. 26 मई 2019 भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019,व कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों की संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बाद आचार संहिता हटाने का आदेश जारी कर दिया है। 


हार के बाद कांग्रेस में हड़कंप-काफी उलट पलट की संभावना राहुल गांधी गुस्सा -


* गहलोत, कमलनाथ, चिदंबरम ने पार्टी से ज्यादा बेटों को दी तरजीह*

* कांग्रेस कार्य समिति सदस्यों द्वारा राहुल का इस्तीफा नामंजूर*


**कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राहुल ने कहा कि उन्होंने बीजेपी ओर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उठाए थे, पार्टी के नेता उसे जनता के पास ले जाने में असफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने खास तौर पर राफेल डील मामले और 'चौकीदार चोर है' नारे का जिक्र किया।**

26 मई 2019.


आम चुनाव 2019 में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व अपनी गलतियों की समीक्षा करने के लिए शनिवार को इकट्ठा हुआ। कांग्रेस वर्किंग कमेटी में हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन सीडब्ल्यूसी सदस्यों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। 

चुनाव नतीजों को लेकर नाराज राहुल गांधी ने कुछ सीनियर कांग्रेसी नेताओं को आड़े हाथ लिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने चुनाव में अपने बेटों को पार्टी से ज्यादा तरजीह दी। राहुल के मुताबिक, इन नेताओं ने अपने बेटों को टिकट देने में सारा जोर लिया दिया। राहुल गांधी ने ऐसी बात तब कही, जब इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मजबूत स्थानीय नेता खड़े करने का सुझाव दिया।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, राहुल ने इस बात का जिक्र किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी, वहां भी पार्टी ने बेहद खराब प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने अपने बेटों को टिकट देने के लिए दबाव बनाया, जबकि वह इसके पक्ष में नहीं थे। राहुल ने इसी संदर्भ में सीनियर कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम का भी नाम लिया। राहुल ने यह भी कहा कि उन्होंने बीजेपी ओर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उठाए थे, पार्टी के नेता उसे जनता के पास ले जाने में असफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने खास तौर पर राफेल डील मामले और ‘चौकीदार चोर है’ नारे का जिक्र किया।

खबर के मुताबिक, राहुल ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस हार के लिए जिम्मेदारी तय की जाए इसलिए वह अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके ऐसा ऐलान करते ही सीनियर पार्टी नेताओं ने इसका विरोध किया। सीनियर नेताओं का तर्क था कि राहुल गांधी ने आगे बढ़कर कांग्रेस की अगुआई की और उन्हें इस हार से दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है। खबरों के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की राय थी कि अगर राहुल इस्तीफा दे देते हैं तो बीजेपी की चाल सफल हो जाएगी। वहीं, पी चिदंबरम ने आशंका जताई की राहुल के इस्तीफे से आहत बहुत सारे कार्यकर्ता आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं।



मोदी की जीत का जश्न मनाएं:चित्रों की झलक






देश में और देश के बाहर भी मनाया जा रहा है नरेन्द्र मोदी का दूसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुने जाने का जश्न।

- करणीदानसिंह राजपूत - 

नरेन्द्र मोदी के आह्वान में बहुत बड़ी शक्ति रही थी कि 2019 के लोकसभा आमचुनाव में जनतांत्रिक गठबंधन को भारी जीत मिली। 353 सीटें मिली जिसमें अकेले भाजपा को 303 सीटें मिली।
मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया है। मोदी की जीत पर भारत को विश्व में शक्ति शाली राष्ट्र के रूप में पहचान मिली है।

मोदी ने आतंकवाद के विरूद्ध संसार को जगाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है तथा भारत को एक महत्वपूर्ण मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। इस वजह से विश्व के अन्य देशों की सोच बदल गई है।
मोदी ने बलूचिस्तान के आजादी मांग रहे लोगों को एक संबल प्रदान किया है तथा पाकिस्तान को उसकी हैसियत का एक नमूना दिया है। पाकिस्तान  कश्मीर की स्वायतता के राग अलापता रहा है उसे यह बता दिया है कि उसके कब्जे में जो कश्मीर का हिस्सा है वह भी भारत का हिस्सा है। उसको वापस भारत में शामिल किए जाने का ईशारा देकर भी अपने देश सहित दुनिया को भी ताकत का एहसास करा दिया है।

मोदी मोदी के ही नारों का जयघोष चारों ओर सुनाई पड़ रहा है।
करणी प्रेस इंडिया संग मनाएं मोदी की जीत का जश्न।

शनिवार, 25 मई 2019

हवन कुंड में जिंदा समाधि ले लूंगा’का दावा करने वाले मिर्ची बाबा पर कार्रवाई


25 मई 2019.मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार का समर्थन में मिर्ची यज्ञ  कराने वाले महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा को बड़ा झटका लगा है। मिर्ची बाबा को दिग्विजय सिंह की हार के बाद जिंदा समाधि लेने वाले बयान पर निरंजनी अखाड़ा ने निष्कासित कर दिया गया है।

निरंजनी अखाड़ा के मुख्य पंच रविंद्र पुरी महाराज ने वैराग्यानंद की तरफ से दिए गए बयान को आपत्तिजनक माना। रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि उनका बयान अखाड़े की मर्यादा के विरुद्ध है। इस लिए उन्हें अखाड़े से निष्कासित करने का निर्णय लिया है। मुख्य पंच ने कहा कि उनका अब अखाड़े से कोई संबंध नहीं है।

इससे पहले महामंडलेश्वर ने दिग्विजय सिंह की जीत के लिए भोपाल में 5 क्विंटल मिर्ची से यज्ञ कराया। दिग्विजय खुद भी इस यज्ञ में शामिल हुए थे। वैराग्यानंद ने मीडिया से बातचीत में भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा पर भी खूब निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि प्रज्ञा संत नहीं ढोंगी।


महामंडलेश्वर ने दिग्विजय सिंह के लिए प्रचार करने की भी घोषणा की थी। उनका कहना था कि यदि दिग्विजय सिंह नहीं जीते तो मैं नतीजों केबाद जिंदा समाधि ले लूंगा। दूसरी तरफ चुनाव नतीजों के आने के बाद सोशल मीडिया पर मिर्ची बाबा को खोज रहे हैं। लोग कह कर रहे कि बाबा कहां चले गए हैं। क्या वह समाधि की तैयारी कर रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया पर बाबा का नंबर डालते हुए कह रहे हैं कि बाबा का नंबर बंद आ रहा है। उन्हें जल्द से जल्द ढूंढा जाए।

दिग्विजय के पक्ष में कम्प्यूटर बाबा ने किया था हठ योगः 

दिग्विजय के समर्थन में मिर्ची यज्ञ के साथ हट योग भी किया गया था। इस यज्ञ को मध्य प्रदेश की सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वाले कम्प्यूटर बाबा ने किया था। कम्प्यूटर बाबा ने कहा था कि मंदिर का निर्माण नहीं होने पर मोदी को वोट नहीं मिलेगा।


गुरुवार, 23 मई 2019

दुनिया की बड़ी खबर-जनता ने चलादी मोदी फिल्म-* करणीदानसिंह राजपूत *



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बायोपिक फिल्म को प्रतिपक्ष ने रुकवा दिया था कि इससे मोदी को लोकसभा आम चुनाव में लाभ होगा।

आश्चर्य जनक रहा है कि डिब्बाबंद फिल्म पड़ी रही और देश की जनता ने असली फिल्म को चला दिया। ऐसा प्रदर्शित कर दिया कि पुरानी अन्य फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ नया कीर्तिमान रच दिया। 

यह फिल्म चुनाव के दौरान प्रदर्शित हो जाती तो प्रतिपक्ष का आरोप होता कि इससे भारतीय जनता पार्टी को प्रचार मिला। घटनाक्रम ऐसे हुए की यह फिल्म प्रदर्शित नहीं हो पाई लेकिन भारतीय जनता पार्टी रिकॉर्ड तोड़ जीत प्राप्त कर गई। यह रिकॉर्ड जीत का जो नया बना वह केवल नरेंद्र मोदी के नाम से बना। भाजपा में फूट डालने के लिए लोगों ने यहां तक कहा कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी तक को खुडे लाइन लगा दिया है और अब यह एक व्यक्ति के नाम से चुनाव लड़ा जा रहा है।  प्रतिपक्ष ने और अनेक पत्रकारों अखबार और चैनल वालों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी, मगर उनका दुष्प्रचार बेअसर रहा। जनता ने बिना देखे ही मोदी फिल्म को मोदी के नाम पर चला दिया और दिल से चलाया। 

"मैं भी चौकीदार"और "इस बार फिर से मोदी सरकार" के नारे पूरे देश में लोकप्रिय हुए। मैं भी चौकीदार नारे का इतना अधिक प्रभाव हुआ कि चप्पे चप्पे में चौकीदार पैदा हो गए और करोड़ों की संख्या में हो गए। 

नरेंद्र मोदी पर चुनावी सभाओं में भद्दे से भद्दे शब्दों में आरोप लगाए गए। सारी मर्यादा तोड़ दी गई मगर जनता है यह सिद्ध कर दिया कि देश को ऐसे ही चौकीदार की जरूरत है जिसकी लाठी में इतना दम हो कि देश के गद्दार भ्रष्टाचारी तो डरें साथ में दुश्मन भी डरता रहे। 

नरेंद्र मोदी कि यह फिल्म चुनाव के वक्त दिखाई जाती तो चुनाव के बाद लोग भूल जाते। उसके बाद उसकी आवश्यकता ही नहीं होती,लेकिन अब 5 साल तक नरेंद्र मोदी की फिल्म चलती रहेगी।

 पहले घोषणाएं भाषण हुए थे कि विपक्ष 2019 को भूल जाए व 2024 की तैयारी करे क्योंकि 2019 में तो भाजपा गठबंधन की ही सरकार बनेगी।  ये भाषण घोषणाएं और ललकार सब सच साबित हुई। नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों को जनता ने सराहा और एकदम चुप रहते हुए भी जबरदस्त वोटिंग नरेंद्र मोदी के पक्ष में की। 

भारत के इस लोकसभा आमचुनाव पर देश के साथ विश्व की निगाहें भी लगी हुई थी। इस चुनाव से संपूर्ण विश्व में भारत शक्तिशाली प्रधानमंत्री वाले शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित हुआ है।

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बुधवार, 22 मई 2019

बलराम वर्मा की सूरतगढ़ पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ने में दिलचस्पी

^^ करणीदानसिंह राजपूत ^^

सूरतगढ़ 22 मई 2019.

कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष बलराम वर्मा नगर पालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे। 

बलराम वर्मा ने आज रात्रि एक शादी समारोह  में बताया कि आगामी नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में वे खड़े होंगे। पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कुछ महीने ही शेष हैं।

बलराम वर्मा पूर्व में यहां नगरपालिका पार्षद रह चुके हैं।बलराम वर्मा के पुत् एडवोकेट वेद वर्मा भी पार्षद रह चुके हैं। वर्तमान में पुत्र वधू अलका वर्मा पार्षद हैं।  बलराम वर्मा पूर्व में सरपंच पद पर भी रह चुके हैं। पिछले करीब 1 वर्ष से कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष पद पर हैं। नगरपालिका सूरतगढ़ का अध्यक्ष पद विधायक पद के बराबर माना जाता है।






एक लाख रुपए की रिश्वत लेते एईएन सुरेन्द्र कुमार गिरफ्तार- करोड़ों की संपत्ति का मालिक है एईएन।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 22 मई 2019 को बड़ी कार्यवाही करते हुए अजमेर जलदाय विभाग के किशनगढ़ में तैनात एईएन सुरेन्द्र कुमार को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सुरेन्द्र कुमार के साथ विभाग के वरिष्ठ सहायक नवरत्न सोलंकी को भी गिरफ्तार किया गया है। ब्यूरो ने यह कार्यवाही अजमेर के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के दिशा निर्देश में की है। ब्यूरो के डीएसपी महिपाल चौधरी ने बताया कि ठेकेदार मंगलाराम ने रेलवे में डीएफसीसी में पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया था। हालांकि भुगतान ठेकेदार को डीएफसीसी से ही मिलना था, लेकिन भुगतान से पहले किशनगढ़ के जलदाय विभाग की एनओसी जरूरी थी। इस एनओसी को देने की एवज में ही दो लाख रुपए की मांग की गई। ठेकेदार मंगलाराम ने एक लाख रुपए की राशि पहले ही दे दी थी। ब्यूरो की योजना के अनुरूप 22 मई को जब ठेकेदार मंगलाराम एक लाख रुपए की रिश्वत देने पहुंचा तो ब्यूरो की टीम ने एईएन सुरेन्द्र कुमार और वरिष्ठ सहायक नवरात्न सोलंकी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। चौधरी ने बताया कि अब दोनों रिश्वतखोरों के घरों की तलाश ली जा रही है। एक लाख रुपए की रिश्वत का मामला अपने आप में बड़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलदाय विभाग में किस स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। 

करोड़ों की संपत्ति

एसीबी के सूत्रों के अनुसार सुरेन्द्र कुमार पिछले कई वर्षों से किशनगढ़ में ही नियुक्त है। अब तक की जानकारी के अनुसार तीन-तीन बंगलों का मालिक है तािा वह एशोआराम की जिन्दगी व्यतीत करता है। एईएन के बेटों के पास डेढ़ लाख रुपए की कीमत वाली मोटर साइकिल है। 

दझ

राजस्थान में बड़ा सवाल- हारे तो किसकी होगी जिम्मेदारी? वैभव गहलोत हारा तो क्या होगा?

लोकसभा चुनाव की मतगणना से एक दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत का दावा किया है। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों से उनकी फोन पर बात हुई है। सभी उम्मीदवार उत्साहित है। सीएम के दावे अपनी जगह है, लेकिन न्यूज चैनलों का जो सर्वे आया है उसमें कांग्रेस को 2-4 सीटेें ही मिलने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि हार हुई तो राजस्थान में किस नेता की जिम्मेदारी होगी? सब जानते हैं कि पांच माह पहले विधानसभा के चुनाव में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही माना गया कि कांग्रेस को बहुमत मिलने पर पायलट ही मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन कांगे्रस आला कमान ने गहलोत को सीएम बनवा दिया। यही वजह है कि अब लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनावी राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि यदि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार होती तो पूरी जिम्मेदारी पायलट की ही बनती। लेकिन अब जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अशोक गहलोत बैठे हैं तो हार की जिम्मेदारी भी गहलोत की ही बनेगी। हालांकि लोकसभा चुनाव में गहलोत और पायलट ने एक साथ प्रचार किया, लेकिन सब जानते हैं कि यह प्रचार किस प्रकार कर रहा। सवाल यह भी है कि क्या संभावित हार की जिम्मेदारी सचिन पायलट लेंगे? जब पायलट को जीत का ईनाम नहीं मिला तो वे हार की जिम्मेदारी क्यों लेंगे?

पायलट के समर्थक अभी गहलोत के सीएम बनने को पचा नहीं पाए हैं। ऐसे समर्थकों को कहना है कि लोकसभा चुनाव की मतगणना में गुर्जर बहुल्य मतदान केन्द्र पर कांग्रेस को मिले वोट से अंदाजा लगाया जा सकता है। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में गुर्जर बहुल्य मतदान केन्द्रों के मतों का मिलान किया जाएगा तो हार के कारणों का पता चल जाएगा। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री होने के नाते गहलोत हार की जिम्मेदारी लेंगे? गहलोत के लिए एक मुसीबत जोधपुर का परिणाम भी है। जोधपुर से गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। यदि वैभव की भी हार होती है तो गहलोत का मुख्यमंत्री के पद पर टिका रहना मुश्किल होगा। यह भी देखना होगा कि लोकसभा चुनाव के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कैसे संबंध रहते हैं?

एस.पी.मित्तल) (22-05-19) साभार



नरेन्द्र मोदी की संभावित जीत पर इतना बवाल क्यों?


** विपक्षी दलों की मांग खारिज। मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं। **

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22 मई को चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की उस मांग को खारिज कर दिया है। जिसमें ईवीएम के मतों की गणना से पहले विधानसभा वार पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों से मिलान कराने की बात कही गई थी। मांग को लेकर 21 मई को 22 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने आयोग को ज्ञापन दिया था। 22 मई को आयोग के फुल कमिशन की बैठक हुई। बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि 23 मई को देशभर में होने वाली मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। अब पहले के दिशा निर्देशों के अनुरूप वीवीपेट की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों की गणना के बाद होगा। एक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केन्द्रों की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों से करना है। जिन पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों का मिलान होगा, उन केन्द्रों का चयन रेंडम पद्धति से होगा। मिलान के बाद ही परिणाम की अधिकृत घोषणा हो सकेगी। लेकिन निर्वाचन विभाग राउंडवार मतगणना की जानकारी सार्वजनिक करता रहेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ईवीएम में किसी भी प्रकार से गड़बड़ी नहीं हो सकती है। ईवीएम सिर्फ बैट्री पर संचालित है। इंटरनेट तकनीक का ईवीएम में कोई उपयोग नहीं है, इसलिए हैक की आशंकाएं निर्मूल हैं। 

जीत पर बवाल क्यों?: 

अधिकृत तौर पर तो 23 मई को ही पता चलेगा कि लोकसभा चुनाव में किसकी जीत हुई है, लेकिन मतगणना से पहले जो रुझान सामने आए हैं उसमें नरेन्द्र मोदी की जीत मानी जा रही है। मोदी की जीत की संभावना पर बिहार के एक नेता ने खून खराबे की आशंका जताई है। विपक्षी नेता का यह बयान देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक संदेश हैं। दुनिया के कई देशों में देखा गया कि सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति बने व्यक्ति मतदान में धांधली कर वर्षों तक सत्ता में बने रहते हैं। कई बार ऐसे तानाशाह शासकों के विरुद्ध संबंधित देश की जनता सड़कों पर आ जाती है और राष्ट्रपति भवन या संसद के बाहर धरना दिया जाता है। ऐसे धरनों से तख्ता पलट भी हो जाता है। लेकिन भारत में उल्टा हो रहा है जिस नेता को जनता ने वोट दिया है उस नेता के चुनाव पर अंगुली उठाई जा रही है। विपक्षी दलों के नेता भी मानते हैं कि इस बार का लोकसभा का चुनाव मोदी बनाम अन्य हुआ है। एनडीए में शामिल राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मोदी के चेहरे को आगे रख कर वोट मांगे हैं। कांग्रेस सहित तमाम विपक्ष ने अपने प्रचार अभियान में मोदी को ही निशाना बनाया। विपक्ष का मकसद सिर्फ मोदी को हटाना रहा। मोदी को हटाने के लिए विपक्षी दल जो कुछ भी कर सकते थे वो किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो अपनी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीताने के लिए पूरी सरकार को ही दांव पर लगा दिया। पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तो टीएमसी के कार्यकर्ता की भूमिका निभाई। गुंडातत्वों ने टीएमसी के उम्मीदवारों के लिए मतदान करवाया। इतना सब कुछ करने के बाद भी विपक्षी दलों को चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि परिणाम से पहले ही देश का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। यदि मोदी की जीत होती है तो चुनाव प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की जाएगी। यदि पश्चिम बंगाल में मोदी को 15 से 20 सीटें मिल गई तो हो सकता है कि ममता बनर्जी लाख दो लाख लोगों को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठ जाएं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पहचान तो धरना सीएम से ही है। दिल्ली में धरना देंगे तो दुनिया भर में भारत की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। असल में विपक्षी दल मोदी की जीत को पचाने की स्थिति  में नहीं है। लाख कोशिश के बाद भी जब मोदी हारते नजर नहीं आ रहे हैं तो खून खराबे, धरना प्रदर्शन आदि की नीति अमल में लाई जा रही है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)



राजस्थान में भाजपा की बड़ी जीत पर भी अशोक गहलोत को खतरा नहीं।

फस्र्ट इंडिया न्यूज चैनल के हैड  की 

चुनाव परिणाम से पहले खास विश्लेषण*

इंनडिया न्यूज चैनल के हैड जगदीश चन्द्रा ने 22 मई को राजस्थान की राजनीति के संदर्भ में अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया है। राजनीतिक घटनाओं का सटीक आंकलन करने वाले जगदीश चन्द्रा का यह विश्लेषण चैनल पर 22 मई को दोपहर तब प्रसारित हुआ, जब 23 मई को प्रात:8 बजे से लोकसभा चुनाव में मतों की गणना होनी है। फस्र्ट इंडिया न्यूज चैनल के दस से भी ज्यदा तेजतर्रार एंकरों के सवालों का जवाब देते हुए जगदीश चन्द्रा ने कहा कि राजस्थान में भाजपा को भले ही बड़ी सफलता मिल जाए लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कोई खतरना नहीं है। जहां तक डिप्टी सीएम सचिन पायलट का सवाल है तो पायलट हमेशा कांग्रेस के प्रति वफादार रहेंगे। कुछ लोगों का मानना है कि पायलट को सीएम पद का लालच देकर भाजपा अशोक गहलोत की सरकार को गिरा सकती है। चन्द्रा ने कहा कि जहां तक मेरी जानकारी में ऐसा प्रस्ताव विधानसभा चुनाव के बाद पायलट को तब भी दिया था जब कांगे्रस आला कमान ने गहलोत को सीएम बनाने का फैसला किया। चन्द्रा ने कहा कि पायलट को सीएम नहीं बनाने से उनके समर्थक और जाति विशेष के लोग मायूस तो हुए, लेकिन पायलट ने कभी भी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे कांग्रेस कमजोर हो। लोकसभा चुनाव में भी पायलट ने गहलोत के साथ मतभेद की खबरों को नकारा और राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे के साथ मिल कर तीनों ने प्रचार किया। चन्द्रा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा चाहे कितनी भी सीट जीत ले, लेकिन गहलोत सरकार के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। परिणाम के बाद कांग्रेस की राजनीति में बदलाव की संभावना नजर नहीं आती है। उन्होंने कहा कि गहलोत हमेशा गांधी परिवार के प्रति वफादार रहे हैं और राजनीति में भी गहलोत की छवि साफ-सुथरी है। यही वजह है कि कई मौकों पर गहलोत कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हो जाते हैं। जहां तक भाजपा की राजनीति में बदलाव की बात है तो मुझे नहीं लगता की राजस्थान में कोई बदलाव होगा। पूरा चुनाव नरेन्द्र मोदी के नाम पर लड़ा गया, यहां तक कि भाजपा के उम्मीदवारों ने मोदी का चेहरा सामने रखकर वोट मांगे। राजस्थान की राजनीति में अब वो ही होगा, जो नरेन्द्र मोदी और अमितशाह चाहेंगे। मंत्रिमंडल में भी मोदी और शाह की राय को ही तवज्जों मिलेगी। राजस्थान में अब ऐसा कोई नेता नहीं है जो आला कमान के समक्ष दबाव की राजनीति कर सके। जहां तक भाजपा और कांग्रेस को सीट मिलने का सवाल है तो दोनों ने ही अपने अपने दावे किए हैं। भाजपा ने जहां सभी 25 सीटों पर जीत की बात कही है, वहीं कांग्रेस के अनेक नेताओं का मानना है कि यदि दस सीटे भी मिल जाएगी तो राजस्थान में कांग्रेस मजबूत स्थिति में खड़ी होगी। चूंकि 2014 में एक सीट भी कांग्रेस को नहीं मिली। ऐसे में अब जो सीटें मिलेंगी उसका फायदा कांग्रेस को होगा। चन्द्रा ने कहा कि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी इस पर मेरा कोई आंकलन नहीं है। 

अमेठी में राहुल फंसे हैं, जबकि बनारस और अहमदाबाद में आसान जीत:

चन्द्रा ने कहा कि अमेठी में कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का भाजपा उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री स्मृति इरानी से कड़ी मुकाबला है। इसमें कोई दो राय  नहीं कि भाजपा की फायर ब्रांड नेता ईरानी ने अमेठी में भाजपा की मजबूत जमीन तैयार की है। चन्द्र का मानना रहा कि बनारस से नरेन्द्र मोदी और अहमदाबाद से अमितशाह की जीत आसान है। प्रियंका गांधी ने अपनी उम्मीदवार वापस लेकर मोदी को पहले ही वॉक ऑवर दे दिया, जबकि अहमदाबाद सीट पर अमितशाह के सामने कोई मुकाबला ही नहीं है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)

ईवीएम में छेड़छाड़ की बातें, खबरें सब झूठी-साजिश-क्लिक करें -पूरा पढें

- भारी पहरे और सीलबन्द कमरे, सीसीटीवी कैमरे- हो ही नहीं सकती गड़बड़


राजनैतिक पार्टियों द्वारा,ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की बात फैला कर एक बड़े दंगे की साजिश की जा रही है। हकीकत ये है कि जिस स्ट्रांग रूम में ईवीएम रखे गये हैं उनके सामने सीआरपीएफ के जवानों,पुलिस का सख्त पहरा है। और परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनको किसी भी पार्टी का प्रतिनिधि लाइव देख सकने की व्यवस्था है।कई बीएसफ के जवान भी तैनात किये गये हैं। वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। लेकिन ईवीएम बदलने को लेकर एक बड़ा भ्रम फैलाया जा रहा है। अगर इन बातों की सच्चाई पर गौर नहीं किया गया तो हम सब के बीच के ही कई साथी इस साजिश की जद में आ सकते हैं। इसलिए जरूरी ये है कि आप सच्चाई से वाकिफ़ रहें। 

होता ये है कि जिस समय मतदान कराने के लिए पोलिंग पार्टियां रवाना होती हैं उनके साथ सेक्टर लेवल पर कई एक्स्ट्रा ईवीएम भेजी जाती हैं। जिससे मतदान के दौरान ईवीएम के खराब होने की शिकायत पर तत्काल दूसरे ईवीएम से मतदान कराया जा सके। कई बार ऐसा होता है कि कुछ एक बूथ पर ईवीएम में गड़बडी के बाद कुछ मिनट के भीतर स्टोर किये हुए ईवीएम का उपयोग कर लिया जाता है। अब होता ये है कि जिस ईवीएम से मतदान हुआ उसे जमा करके सील कर दिया जाता है। स्ट्रांग रूम  के सामने पैरामिलीट्री फोर्स की तैनाती कर दी जाती है। साथ ही जो  एक्स्ट्रा ईवीएम भेजी गई होती है। वो भी लौटकर आती है तो इसी परिसर के कोने में इन्हे भी जमा कर दिया जाता है। इनकी संख्या अधिकत 50 से 100 के बीच होती है। चुनाव ड्यूटी में लगे लोग इसे जमा कर लिखा पढ़ी करने के बाद अपने घर को लौट जाते हैं। अब राजनीतिक पार्टियां ईवीएम बदलने का आरोप प्रशासन पर लगा रही हैं। प्रदर्शन की कई तस्वीरें और वीडियोज शेयर किये जा रहे हैं। कृपया इनसे आप प्रभावित न हों और खुद को सुरक्षित रखें आप नेताओं के लिए बस विवाद का साधन हो सकते हैं, पर अपने परिवार की रोशनी हैं आप।।

हकीकत यह है कि evm के साथ tampering नही की जा सकती, न फिक्स किया जा सकता है,

हर स्तर पर सिक्योरिटी है, पोलिंग से पहले भी मॉक पोल् कर दर्शित किया जाता है कि मशीन में कोई वोट नही है और सबको समान वोट जा  रहे हैं।

हर स्टेज के पहले मशीनों का ऑब्ज़र्वर की उपस्थिति में randmisation किया जाता है, मशीन की सीलिंग से पूर्व राजनैतिक दलों की उपस्तिथि में 05 % मशीनों में  1000 वोट डालकर, vvpat की स्लिप्स से मिलान किया जाता है, अतः यह कहना भी कि, 50-100 वोट बाद किसी विशेष पार्टी को वोट जाते हैं मूर्खता की बात है, साथ ही काउंटिंग के समय भी रेंडमली सेलेक्ट मशीनों की स्लिप का evm के वोट से मिलान किया जाता है।

*Evms के दोनो randmisation के समय राजनैतिक दल उपस्थिति रहते हैं, तथा, मशीनों की पूरी detail मय नंबरों के इन दलों को दी जाती है और नेट पर डाली जाती है, और काउंटिंग के समय सबसे पहले evm मशीन के नम्बरों का मिलान और सील काउंटिंग एजेंट्स को दिखाया जाता है, अतः यह भी कहना कि, वोटिंग के बाद मशीने बदल कर हैक्ड मशीने रखी जाती है,, यह भी निहायत शरारतपूर्ण और धृष्टता ही है।*


चुनाव प्रक्रिया में, केंद्रीय *चुनाव आयोग के आब्जर्वर* जो IAS या allied IAS होते हैं, साथ ही माइक्रो आब्जर्वर, काउंटिंग आब्जर्वर, वीडियोग्राफर, जो हर कदम पर वीडियोग्राफी करते हैं,

साथ ही *जिले के कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, SDM, तहसीलदार, पटवारी, गिरदावर, विभिन्न विभागों के राजपत्रित अधिकारी, बाबू, शिक्षकगण, पुलिस के आला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिले के पुलिस के अन्य अधिकारी, विभिन्न पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवान और अफसर*, सभी लोग *भारत* देश मे निष्पक्ष मतदान कराने के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ लगते हैं।

मेरा अनुरोध है कि दूषित और विक्षिप्त मानसिकता के राजनेता अपने हार के भय से evm में गड़बड़ी के आरोप लगाकर भारत के निष्ठावान अधिकारियों कर्मचारियों, जो उनके घर परिवार में भी होंगे, साथ ही, महिला कार्मिक जिन्होंने इतनी गर्मी में भी बेहतरीन कार्य किया, जिनकी तस्वीरे भी आपके द्वारा वायरल की गई, उन सब का *घोर अपमान* है।।

अतः यदि कोई भी राजनीतिक दल evm में गड़बड़ी का आरोप लगा रहा है तो सरकार के जिम्मेदार कर्मचारियों, अधिकारियों, पुलिस के जवानों, भारतीय पैरामिलिट्री फ़ोर्स, महिला कार्मिको की सत्यनिष्ठा पर आरोप लगा रहा है, जो कतई असहनीय है, हम इसे सीधा सीधा इन सभी की सत्यनिष्ठा का अपमान समझेंगे, क्यों कि हमने 43 डिग्री तापमान में पूरे ढाई महीने काम करके चुनाव करवाए हैं। यह हमारा अपमान है।

* यदि यह पोस्ट आपको सही लगती है तो कृपया इसे फारवर्ड कर सत्यनिष्ठा की रक्षा करें। आम जनता में फैलाई जा रही अफवाहों पर रोक लगाने के दायित्व का भी निर्वहन करें।*

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(वाट्सअप से)



अटल काल में जेल से बचे-मोदी काल में जेल में ठूंसे जाने का भय- बडे़ घोटालेबाज नेता भयभीत

** करणी दान सिंह राजपूत **
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई  विनम्रता सहज भाव और अनेक कारणों से कांग्रेस जनों व कई बड़े लोगों द्वारा याद किये जा रहे हैं।अटलजी की विनम्रता का हर समय गुणगान करते हैं वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की जाती रही है। आखिर इसका कारण क्या है?
इस राजनीति को बहुत गहराई में जाकर समझा जा सकता है या समझने की आवश्यकता है।
अटल बिहारी वाजपेई को याद करने के पीछे,बार बार उनकी विनम्रता की याद दिलाने के पीछे कुछ कांग्रेस नेता और कुछ बड़े लोगों का खास मकसद है।
अटल बिहारी वाजपेई के काल में कुछ भी करते रहे बचते रहे बचाए जाते रहे। असल मे वाजपेयी कवि हृदय थे,शायद उनके मन में यह रहा हो कि लोग सुधर जाएंगे, लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त  लोग पनपते रहे। अब उनको भय सता रहा है नरेंद्र मोदी के काल में उनके विरुद्ध दबे हुए और दबाए हुए मामले खुलेंगे,चलेंगे और वे जेल में डाल दिये जाएंगे।
अटल बिहारी बाजपेई काल में विदेशी हवाई अड्डे पर जांच में ड्रग मिलने के आरोप में पकड़े गए कांग्रेसी नेता को विदेश में जेल जाने से बचाया था।
नरेंद्र मोदी के काल में बड़े लोगों में भय है कि जेल में ठूंस दिये जाएंगेऔर उसके बाद में बाहर निकलना मुश्किल होगा तथा राजनीति किसी और के हाथ में चली जाएगी।
बस, ऐसे ही कारण है कि अटल जी के काल को याद किया जा रहा है बार-बार प्रचारित किया जा रहा है कि अटल जी जैसा विनम्र होना चाहिए। मतलब अपराध करते पकड़े जाओ तो विनम्र प्रधानमंत्री जैसे काल में तिकड़म लगा जेल जाने से बच जाएं।
अच्छी तरह  से मालूम है कि विदेशी हवाई अड्डे पर पकड़े जाने और वाजपेई काल में फोन पर छोड़ दिए जाने के समाचार छपे। समाचारों में यह भी था की मां ने अटल जी से वार्ता की जिस पर बेटा जेल जाने से बच गया। ड्रग के मामले में विदेश की धरती पर गिरफ्तारी होने पर कितने साल की सजा होती? भारत की धरती पर राजनीति कोई और करता।
अब जितने भी बड़े नेता और उनके परिवारजन  किसी न किसी भ्रष्टाचार में दुराचार में लिप्त हैं उन्हें यह भय सता रहा है कि मोदी काल में जेल में डाल दिए गए तो फिर न जाने कितने साल तक जेलों में बीत जाएंगे। और जब बाहर निकलेंगे तब तक उनकी राजनीति का खेल खत्म हो चुका होगा।
प्रमुख रूप से बेटा और मां दोनों अंग्रेजी समाचार पत्र के भवन भूमि संपत्ति के मामले में फंसे हुए हैं, और बहुत कुछ होना बाकी है।
मीडिया के लोगों ने और खुद बेटे ने अनेक बार टीवी चैनलों पर बार बार दोहराया है कि मोदी जी प्रश्नों का जवाब नहीं देते। मोदी जी से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल किए गए। मीडिया का आरोप है कि उनका उत्तर नहीं दिया गया।
मीडिया किस का पक्ष ले रहा है या नहीं ले रहा है वह अपनी अपनी कार्यप्रणाली में खोजें।
मीडिया ने कभी मां और बेटे से प्रश्न किया?
विदेश में ड्रग के साथ गिरफ्तार किए जाने के प्रकरण पर क्या कभी उत्तर मांगा।
राहुल के विदेशी कंपनी में पार्टनरशिप में भी उस देश की नागरिकता के बारे में राहुल से सीधा सवाल मीडिया ने क्यों नहीं किया?
नेशनल हेराल्ड संपत्ति के मामले में मीडिया ने सीधा सवाल क्यों नहीं किया।अनेक मौके आए। उन मौकों पर मीडिया सवाल कर सकता था,लेकिन चुप्पी धारण की गई। एक चैनल पर रवीश  कुमार ही बोलते हैं। लोग सच्चा मानते हैं कि वे ही सही सच्चे पत्रकार हैं। क्या रवीश कुमार ने भी राहुल से इन प्रश्नों का उत्तर जानने की कोशिश की? मीडिया पूछता तो सही।
अब सभी को लग रहा है कि नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 5 वर्ष के लिए फिर शुरू होने वाला है और इन 5 सालों में बहुत कुछ हो सकता है इसलिए बार बार अटल बिहारी बाजपेई की विनम्रता को बखान किया जा रहा है, लेकिन मोदी वाजपेयी नहीं बन सकते।
अटल बिहारी वाजपेई और नरेंद्र मोदी की कार्य पद्धति में बहुत अंतर है।
एक बात और भी है कि हर प्रधानमंत्री ने अपने काल में विभिन्न घटनाओं व परिस्थितियों के बीच फैसले लिए। 
नरेंद्र मोदी के काल में 2014 से 2019 के बीच में भी घटनाओं परिस्थितियों के साथ ही फैसले लिए गए।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काल 2019-2024 फिर शुरू होने वाला है।मोदी काल सख्त माना जाता है। बड़े नेताओं को अपने अपराधों के कारण भय सता रहा है कि उनको गड़बड़ घोटालों की कानूनी प्रक्रियाओं के अंदर से गुजरना पड़ सकता है।


एनडीए के मोदी ही नेता- नरेन्द्र मोदी पर भरोसा जताया; मोदी को सम्मानित किया

NDA के डिनर में पहुंचे 36 सहयोगी दल, पीएम मोदी के नेतृत्व पर सबने जताया भरोसा: राजनाथ

नई दिल्ली 21 May 2019, 

चुनाव नतीजों से पहले मंगलवार को बीजेपी द्वारा आयोजित NDA की डिनर बैठक में 36 घटक दलों के नेता शामिल हुए। 

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता राजनाथ सिंह ने बताया कि 3 सहयोगी दल इस डिनर में नहीं पहुंच सके तो उन्होंने लिखित में अपना समर्थन दिया है।

 खास बात यह है कि एनडीए की मीटिंग और डिनर डिप्लोमेसी के बाद एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न सिर्फ अपना नेता चुनने की बात कही गई बल्कि उनके नेतृत्व की तारीफ भी की गई। सभी दलों ने पीएम मोदी के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया।


राजनाथ सिंह ने बताया कि NDA की बैठक में रामविलास पासवान के द्वारा प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया। इसमें कहा गया कि NDA सच्चे अर्थों में भारत के सपनों और आकांक्षाओं का अलायंस है। प्रस्ताव में पीएम और उनके मंत्रियों को उल्लेखनीय कार्यों के लिए बधाई दी है। साथ ही भारत को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सरकार के कार्यों की सराहना की गई।


गृह मंत्री ने बताया कि पीएम और दूसरे नेताओं ने ईवीएम पर उठ रहे सवालों को लेकर चिंता व्यक्त की। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए राजनाथ ने बताया कि NDA ने संकल्प लिया है कि आनेवाले वर्षों में हम प्रगति की गति को और आगे लेकर जाएंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर में 100 लाख करोड़ का निवेश करेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास में 25 लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में किसानों की आय को दोगुना करने, अंतरराष्ट्रीय जगत पर बढ़ी साख, आतंकवाद की भी प्रस्ताव में चर्चा की गई। पश्चिम बंगाल और केरल में हुई राजनीतिक हिंसा की प्रस्ताव में निंदा की गई।


राजनाथ ने कहा कि पिछले 5 साल लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरे करने वाले थे, अब NDA ने तय किया है कि आनेवाले 5 वर्षों में लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जाएगा। पीएम ने विकास के संदर्भ में क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने पर भी प्रतिबद्धता जताई। पीएम ने कहा कि एनडीए भारत की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला अलायंस है। आपको बता दें कि NDA की बैठक में अगले पांच वर्षों में विकास कार्यों पर चर्चा ऐसे समय में हुई है जब अभी चुनाव नतीजे आने बाकी है।

मीटिंग के बाद रामविलास पासवान ने विपक्ष की ओर से परिणाम से पहले ही चुनाव पर उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि 'टिट फॉर टैट' होगा। 

मीटिंग में रामविलास पासवान ने ही मोदी के पक्ष में प्रस्ताव रखा जिसका सभी दलों ने अनुमोदन किया।

पासवान ने बताया कि पीएम ने कहा कि हमारा लक्ष्य कभी सत्ता पाना नहीं रहा है, हमारा लक्ष्य नए भारत का निर्माण है। हमने पांच वर्षों में वोट के हिसाब से कोई फैसला नहीं लिया। उन्होंने कहा कि एनडीए के सभी नेताओं ने अपने-अपने तरीके से पीएम का स्वागत किया।

मंगलवार, 21 मई 2019

मेडिकल स्टुडेंट अभिषेक सोनी सूरतगढ़ की सड़क हादसे में मृत्यु- 3 छात्रों व 1 छात्रा की मौत-


^अभिषेक सोनी पुत्र संजय सोनी पौत्र सत्यनारायण सोनी पड़पौत्र श्री टीकू राम सोनी की मृत्यु के समाचार ने सभी को गम में डूबो दिया। सत्यनारायण सोनी व्यापार मंडल के अध्यक्ष रह चुके हैं।

अभिषेक का अंतिम संस्कार  22/5/19 को सुबह किया जाएगा।


-- ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी की एक छात्रा व 3 छात्रों व 1 छात्रा की मौत --

दि.21 मई 2019.मंगलवार की सुबह बागपत में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसे में ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी की एक छात्रा और तीन छात्रों की मृत्यु हो गई।

ग्राम सरफाबाद के निकट एक कैंटर खड़ा हुआ था। तभी हरियाणा की ओर से तेज रफ्तार कार कैंटर के नीचे घुस गए। कार की छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। तेज आवाज होने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और थाना चांदीनगर पुलिस को सूचना दी। एक छात्रा घायल हो गई। पांचों मेडिकल के तृतीय वर्ष के विद्यार्थी हैं। 


*घायल छात्रा को अस्पताल में भर्ती कराया* 

पुलिस मौके पर पहुंची और कार को क्रेन से बाहर निकाला। 

पुलिस के मुताबिक कार में सवार तीन छात्र व एक छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई,जबकि एक युवती गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल युवती को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल युवती की पहचान मुरादाबाद के आशियाना हरिथला निवासी आंचल राणा पुत्र बिजेन्द्र पाल के रूप में हुई। आंचल की हालत गंभीर होने पर दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।  


*मेडिकल के तृतीय वर्ष विद्यार्थी* 

सीओ खेकड़ा आरपी सिंह ने बताया कि कार से मिले कागजों व मोबाइल के आधार पर पता चला है कि कार में सवार तीनों युवक व दोनों युवती ग्रेटर नोएडा में स्थित शारदा यूनिवर्सिटी के मेडिकल के तृतीय वर्ष के विद्यार्थी हैं। 

इसमें मरने वालों में पंजाब के लुधियाना के कांत ढींगरा पुत्र कृष्ण ढींगरा, करिश्मा ढींगरा, राजस्थान के सूरतगढ़ निवासी अभिषेक सोनी व रामपुर निवासी मोहम्मद शोएब के रूप में पहचान हुई है।

  

-परिजनों को अवगत कराया-


शारदा यूनिवर्सिटी के अधिकारियों व विद्यार्थियों के परिजनों को अवगत करा दिया गया है। मरने वाले विद्यार्थियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में स्थित मोर्चरी में भेज दिया गया।  एक्सप्रेस वे पर खड़े कैंटर के चालक व परिचालक फरार हो गए है। सीओ खेकड़ा आरपी सिंह ने बताया कि ये स्टुडेंट हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से घूमकर वापस लौट रहे थे।


सोमवार, 20 मई 2019

क्या राजस्थान में भाजपा फिर सभी 25 सीटें जीत लेगी?


**श्रीगंगानगर सिरमोर-राजस्थान की 25 सीटों पर मतदान में वृद्धि**


* करणीदान सिंह राजपूत  * 


लोकसभा आम चुनाव 2019 में राजस्थान की समस्त 25 लोकसभा सीटों पर सन 2014 के मुकाबले अधिक मतदान हुआ है।

राजस्थान में बेहद गर्मी होने के बावजूद 2019 चुनाव का मतदान 2014 के मुकाबले अधिक होने को लेकर भाजपा में अधिक प्रसन्नता है। भाजपा कार्यकर्ता मानते हैं कि 'फिर इस बार मोदी सरकार " के नारे की अपील को मतदाताओं ने दिल से स्वीकार किया और पूरे देश में मोदी मय वातावरण हो गया। यही वातावरण राजस्थान में छा गया। 

राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2018 के बाद सरकार कांग्रेस की जरूर बनी लेकिन भाजपा भी ताकतवर बनी रही।

लोकसभा चुनाव 2014 में राजस्थान की 25 सीटों पर भाजपा का परचम लहराया था,लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18 या 20 सीटों के मिलने की संभावना मानी जा रही थी।

लेकिन अब बदले वातावरण में 25 सीटों पर नई संभावना हुई है कि भाजपा अपनी सभी सीटें सुरक्षित रखने में कामयाब हो सकती है।

( नागौर की सीट समझौते मेंं हनुमान बेनीवाल को दी हुई है, मगर गणना मेंं एक साथ मान लेते हैं)

दि. 7-5-2019
अपडेट 20-5-2019.

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राजस्थान में कांग्रेस की सीटें 3-4 आई तो किस तरह के हालात होंगे?

* पूर्वानुमानों से एक खेमे में हलचल तो एक गंभीर*
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अपडेट 20-5-2019.

राजस्थान में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस तीन चार सीटों पर ही सिमट कर रह जाने के लगातार आ रहे आकलन और अनुमान के कारण पार्टी में हलचल पैदा हो रही है।
अशोक गहलोत येन केन सचिन पायलट  को मुख्यमंत्री की दौड़ में पछाड़ कर मुख्यमंत्री तो बन गये थे मगर अब लोकसभा चुनावों में हार का ठीकरा भी उन्हीं के सर फूटेगा, इसलिए कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व पर राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने के लिए दबाव बनाया जायेगा । 


इस हालत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत की कमजोर मानी जा रही सीट नहीं जीती जा सकी तो अशोक गहलौत पर  नैतिकता  के नाम मुख्यमंत्री पद छोड़ देने के लिए भी दबाव पड़ना निश्चित होगा। 


सभी जानते हैं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट ने हरकदम पर जोर लगाया और इस वजह से अशोक गहलौत को देरी से सीएम घोषित किया गया लेकिन इससे पहले सचिन को उपमुख्यमंत्री तय किया गया।
विधानसभा चुनाव में टिकटों की सिफारिश में भी सचिन का पूरा दबाव रहा था। इसके बाद भी चुनावी हलचल पर गौर करें कि अशोक गहलौत जहां जहां गए,वहां सचिन छाया के रूप में साथ रहे। ये सभी हालात प्रमाण हैं कि राजस्थान में अशोक गहलौत से सचिन पायलट बराबर की पावर में हैं। 
अशोक गहलौत ने लोकसभा की समस्त 25 सीटें जिताने का दावा किया था और इसमें हालात 3-4 तक ही सिमट जाएं तो पद छोड़ने का दबाव कितना अधिक होगा? 
जब आम जनता चुनाव के परिणाम का अनुमान लगा रही है तो कांग्रेस के भीतर भी सुगबुगाहट शुरू है। मुख्यमंत्री बदला जा सकने की सुगबुगाहट हो तो ऐसी स्थिति में नया मुख्यमंत्री कौन होगा?
(अगर कांग्रेस के पूर्व अनुमान से आधी सीटे यानि की 12 से 15 के बीच भी कांग्रेस जीत जाती है तो मुख्यमंत्री बदलने जैसा कदम नहीं होगा। इस स्थिति में भी मुख्यमंत्री बदलने की मांग तो उठेगी मगर कांग्रेस केन्द्रीय नेतृत्व को जोर आयेगा व परिवर्तन आसान नहीं होगा।)

पूर्व अनुमान और परिवर्तन के अनुमान कुछ भी हों,मगर सही स्थिति तो चुनावी परिणाम के बाद ही पता चलेगी। 
राजस्थान में 13 सीटों पर 29-4-2019 के मतदान के बाद शेष 12 सीटों के चुनाव की तैयारी रही जिसमें सभी व्यस्त रहे। 


पहले 13 सीटों और बाद मेंं जब शेष 12 सीटों पर हुए मतदान की हवा और वातावरण का मालूम हुआ तब समस्त 25 सीटों की सुगबुगाहट शुरू हो गई। 
संपूर्ण राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2013 के बाद कहीं नजर ही नहीं आता कि राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलौत की सरकार का राज है। कोई परिवर्तन नहीं और अपराधियों में कोई भय नहीं।



ऐसी हालत और उसमें कमजोर परिणाम आने की संभावना से एक खेमें में हलचल और एक में गंभीरता की चर्चाएं हैं। **
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लेखन 9-5-2019.
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रविवार, 19 मई 2019

श्रीगंगानगर-निहाल चंद की जीत पक्की- क्यों और कैसे-


-- करणीदानसिंह राजपूत --

श्रीगंगानगर संसदीय क्षेत्र में 2014 से 2019 की अवधि में सांसद निहाल चंद द्वारा अनेक विकास कार्य करवाने, रेलों  का विस्तार करवाने के बावजूद अनेक लोग नाराज रहे। सन 2019 के चुनाव में विरोध के बावजूद भाजपा की टिकट मिली और अब जीत पक्की होने की उम्मीद भी पक्की मानी जा रही है। अखबारों में समाचार और अनेक वरिष्ठ पत्रकारों ने भी जीत पक्की मानली। निहालचंद के नजदीकी पूरी पक्की जीत एक लाख वोटों से मान रहे हैं लेकिन साथ में यह चर्चा भी जोड़ते हैं कि जीत इससे कहीं अधिक वोटों से होगी।

एक और पकायत मानी जा रही है और खास नजदीकी लोगों द्वारा खास खास लोगों को चर्चा में बताया जा रहा है कि इस बार जीत के साथ मंत्री मंडल में भी आना फिर से होगा।

निहालचंद खुद अपनी जीत के लिए पूर्ण आश्वस्त हैं। चुनाव परिणाम से पहले किसी की भी जीत की घोषणा करना खांडे की धार पर चलना होता है। प्रत्याशी और उसकी पार्टी जीत की घोषणा करती है तो वह अलग बात होती है, लेकिन चुनाव की स्थिति से आकलन किया जाता है। श्री गंगानगर सीट पर भी जो अनुमान हैं वह भाजपा के निहाल चंद की जीत के हैं।

निहाल चंद की जीत 1 लाख से अधिक की मानी जा रही है, लेकिन वह और अधिक ही होगी।


सन 2014 में भाजपा के निहाल चंद को  6,58,130 वोट 38 % इंडियन नेशनल कांग्रेस के भंवरलाल मेघवाल को 3,66,389 वोट 21% मिले और जीत का अंतर 2,91,741 का रहा था। उस चुनाव में शिमला देवी नायक को भी 1,06,585 वोट 6% मिले थे।


इस बार 2019 के चुनाव में मोटे तौर पर 14,44,000 वोट डाले गए हैं। कुल 9 प्रत्याशी हैं जिनमें मुख्य टक्कर भाजपा और इंडियन नेशनल कांग्रेस के बीच ही रही है। निहाल चंद के विरुद्ध आवाजें तो चंद लोगों ने लगाई मगर उनमें अधिक दम नहीं था। वैसे भी चुनाव में निहाला कम मोदी ही हावी रहे। लोग कहते भी रहे की मोदी को फिर से पीएम बनाना है। भाजपा भी कहती रही और देश में भी यही प्रचारित किया गया कि कमल चिन्ह पर दिया वोट सीधा मोदी के खाते में जाएगा।इसलिए यह जीत मोदी की होगी। लोगों का अनुमान 1 लाख से अधिक का है, लेकिन यह जीत पिछली जीत जैसी हो सकती है।***

19-5-2019( मतदान 6-5-2019.)


 







शुक्रवार, 17 मई 2019

श्रीगंगानगर लोकसभा- मतगणना को लेकर लेटेस्ट दिशा निर्देश-सभी जानें


* वीवीपेट पर्ची की गणना ईवीएम गणना के बाद होगी* 

श्रीगंगानगर, 17 मई 2019.

लोकसभा आम चुनाव 2019 के अंतर्गत संसदीय क्षेत्र गंगानगर की 8 विधानसभाओं की मतगणना 23 मई को एसजीएन खालसा शिक्षण संस्थान में होगी। मतगणना के लिये मतगणना कक्षों का निर्धारण करने के साथ-साथ अन्य व्यवस्थाओं के आदेश जारी किये गये है। 

जिला कलक्टर एवं रिटर्निंग अधिकारी शिवप्रसाद मदन नकाते ने बताया कि 1.सादुलशहर विधानसभा के मतों की गणना कॉलेज के केन्द्रीय हॉल में, 2.गंगानगर विधानसभा के मतों की गणना कॉलेज के केटींन हॉल में, 3.करणपुर विधानसभा के मतों की गणना स्कूल के भौतिक प्रयोगशाला में, 4.सूरतगढ विधानसभा के मतों की गणना कॉलेज के कम्प्यूटर लेब में, 5.रायसिंहनगर विधानसभा के मतों की गणना कॉलेज के रीडिंग हॉल में, 6.संगरिया विधानसभा के मतों की गणना स्कूल के मुख्य हॉल पूर्वी भाग में, 7.हनुमानगढ विधानसभा के मतों की गणना स्कूल के मुख्य हॉल पश्चिमी भाग, 8.पीलीबंगा विधानसभा के मतों की गणना कॉलेज के केन्द्रीय हॉल पूर्वी भाग तथा * डाकमतपत्र के मतों की गणना कॉलेज के लाईब्रेरी हॉल में होगी। 


ईवीएम स्ट्रांग रूम एवं निर्वाचन परिणाम तेयार करने हेतु कार्मिकों की व्यवस्था

ईवीएम स्ट्रांग रूम में कार्मिकों की व्यवस्था हेतु संबंधित सहायक रिटर्निंग अधिकारी का उतरदायित्व होगा। सहायक रिटर्निग अधिकारी स्ट्रांग रूम में नायब तहसीलदार या उससे उपर के अधिकारी को प्रभारी अधिकारी नियुक्त कर उसके साथ प्रत्येक टेबल के लिये एक-एक अनुभवी कार्मिक की नियुक्ति की व्यवस्था कर अपने स्तर पर सूचित करेंगे। 


*मतगणना कक्ष में मतगणना टेबल पर कार्मिकों की व्यवस्था*


विधानसभा क्षेत्रवार निर्धारित संख्या में मतगणना टेबल्स पर मतगणना सम्पन्न करवाने के लिये गणन पर्यवेक्षक, गणन सहायक व गणन ऑबर्जवर की डयूटी प्रभारी अधिकारी मतगणना दल प्रकोष्ठ द्वारा आयोग, निर्वाचन विभाग के निर्देशानुसार समुचित आदेशजारी करवाकर लगवाई जायेगी। मतगणना पर्यवेक्षक, सहायक, मतगणना ऑबर्जवर के लिये निर्धारित प्रवेश पत्र  पास प्रभारी अधिकारी मतदान दल गठन प्रकोष्ठ द्वारा जारी किये जायेगे। इन गणन कार्मिकों का रेण्डमाईजेशन एवं प्रशिक्षण प्रभारी अधिकारी नियुक्त एक प्रशिक्षण मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद श्रीगंगानगर द्वारा किया जायेगा।


*मतगणना कमरों में कम्प्यूटर आदि की व्यवस्था*


निर्वाचन विभाग द्वारा सुविधा मतगणना एप्लीकेशन बाबत प्राप्त दिशा निर्देशानुसार व्यवस्थाएं प्रभारी अधिकारी आईटी प्रकोष्ठ एवं अतिरिक्त प्रभारी एडीआईओ, एनआईसी कलेक्ट्रेट गंगानगर द्वारा तथा प्रभारी अधिकारी सामान्य व्यवस्था द्वारा समस्त मतगणना कक्षों एवं रिटर्निंग अधिकारी कक्ष में तत्काल सुनिश्चित की जावे ताकि निर्वाचन परिणाम आयोग के निर्देशानुसार सुगमता से तैयार  हो सके एवं विभाग को सूचना समयानुसार प्रेषित होती रहे। सुविधा पोर्टल पर राउण्डवार फीडिंग इत्यादि का ड्राई रन 21 मई 2019 को प्रातः 8 बजे से होना प्रस्तावित है। समस्त व्यवस्थाएं उससे पूर्व की जाये। 


डाकमतपत्र एवं ईटीपीबीएस गणना

डाक मतपत्रों की गणना हेतु 8 टेबल लगाई जायेगी। प्रत्येक टेबल पर एक सुपरवाईजर तथा दो मतगणना सहायक होगें। जो सभी राजपत्रित अधिकारी होगे। प्रत्येक ऐसी टेबल पर माईक्रो ओबर्जवर भी लगाया जायेगा। इनकी नियुक्ति के आदेश प्रभारी अधिकारी मतदान दल गठन प्रकोष्ठ द्वारा किये जायेंगे। चुनाव लडने वाले अभ्यर्थी डाक मतपत्रों के लिये लगाये जाने वाले उक्त टेबलों पर अपने मतगणना अभिकर्ता नियुक्त कर सकते है। इस हेतु 8 सहायक रिटर्निंग अधिकारी होगें, जो कर्मवार टेबल पर बेठेगे, जो निर्धारित प्रक्रिया अनुसार पोस्टल बैलेट की गणना करवाकर रिकार्ड की सीलिंग करवायेंगे। 

*ईटीपीबीएस*


सेवानियोजित मतदाताओं से प्राप्त होने वाले पोस्टल बैलेट की गणना हेतु चार टेबल होगें। प्रत्येक टेबल पर अनुमानित 300 से 500 मतपत्र जारी कर एक राउण्ड में मतगणना पूरी करवाई जायेगी। प्रत्येक टेबल पर तकनीकी स्टॉफ सहित गणन स्टॉफ लगाया जावे। ईटीपीबीएस प्रभारी उपनिदेशक सूचना प्रोद्योगिकी एवं संचार विभाग तथा श्री राहुल छिम्पा प्रोगामर होंगे। 


*वीवीपेट पर्ची की गणना*


निर्वाचन विभाग जयपुर के साथ भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के निर्देशों की समस्त सहायक रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा अनुपालना सुनिश्चित की जावे। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में रैण्डमली चयनित पांच मतदान केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों की गणना संबंधित सहायक रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा वीसीबी पर की जायेगी। इस हेतु गणन कक्ष की अंतिम टेबल को वीसीबी के रूप में तैयार किया जावेगा। इसे कैशियर कक्ष की तरह वायरमैस से तैयार किया जावे। वीवीपेट पर्ची की गणना ईवीएम गणना पूर्ण हो जाने के बाद की जायेगी। 

मतगणना प्रशिक्षण एवं रेण्डेमाईजेशन

मतगणना दलों का प्रथम रेण्डेमाईजेशन 14 मई 2019 को किया जा चुका है। द्वितीय रेण्डेमाईजेशन मतगणना तिथि से 24 घंटे पूर्व 22 मई को सामान्य पर्यवेक्षक की उपस्थिति में किया जायेगा। तृतीय रेण्डेमाईजेशन 23 मई 2019 को प्रातः 5 बजे खालसा कॉलेज परिसर में किया जायेगा। मतगणना दलों में सीयू के मतगणना दल, पीबी के मतगणना दल एवं अधिकारी तथा ईटीपीबीस के मतगणना दलों को उनके विषय से संबंधित गहन प्रशिक्षण दिया जायेगा। 


*सांख्यिकी सूचना संकलन*


मतगणना कक्ष में एक सांख्यिकी कर्मी तकनीकी टीम के साथ कम्प्यूटर पर बैठकर फीडिंग करवायेंगे। मैन्युअल फीडिंग हेतु जिला साख्यिंकी अधिकारी प्रत्येक गणना कक्ष हेतु 2-2 टीमें गठित करेगे। टीमों के कार्य की निगरानी जिला सांख्यिकी अधिकारी करेंगे। आरओ स्तर पर संकलन एवं इकजाई हेतु दो टीमें (एक कम्प्यूटर एवं एक मेन्युअल) रखी जायेगी। जो विधानसभा क्षेत्र से प्राप्त राउण्डवार सूचना संकलित कर आरओ को पेश करेगे तथा आरओ की अनुमति के बाद सुविधा पोर्टल पर अपडेशन कर उद्घोषक कक्ष को उपलब्ध करवायेंगे। 


*मतगणना स्थल की सुरक्षा व्यवस्था*


मतगणना स्थल की सम्पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था का उतरदायित्व जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर का होगा। मतगणना स्थल पर विधानसभा क्षेत्रावार ईवीएम के स्ट्रॉग रूम, काउंटिंग हॉलस, एवं विभिन्न कांउटरर्स पर एवं सम्पूर्ण परिसर में अन्य स्थानों पर निर्देशानुसार आवश्यक सुरक्षा घेरो की व्यवस्था एवं मतगणना के दिन मतगणना केन्द्र में अनाधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश रोकने की व्यवस्था एवं मतगणना केन्द्रों की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर के स्तर पर सुनिश्चित की जायेगी। नियुक्त आरओ एवं वरिष्ठ अधिकारियों हेतु एक, काउंटिग स्टॉफ हेतु दूसरा तथा मतगणना अभिकर्ताओं के लिये पृथक-पृथक प्रवेश द्वार बनाया जाये। आयोग एवं आरओ द्वारा अनुमत व्यक्तियों, अधिकारियों के अलावा किसी व्यक्ति को मोबाईल के साथ प्रवेश नही दिया जावे। अधिकारी एवं स्टॉफ अम्बेडकर राजकीय महाविद्यालय की तरफ से प्रवेश करेगे। जहां दो प्रवेश द्वार होगें , वही मतगणना एजेंट, अभ्यर्थी इत्यादि खालसा कॉलेज के मुख्य द्वार से प्रवेश करेगे। 

*पार्किंग व्यवस्था*

मतगणना स्थल पर मतगणना से संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिकों के वाहन की पार्किंग व्यवस्था डॉ. भीमराव अम्बेडकर राजकीय महाविधालय में रहेगी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर द्वारा आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जावेगी, जिससे वाहनों का आवागमन सुगमता से हो सकें। इस व्यवस्था हेतु प्रभारी अधिकारी पुलिस कार्मिकों की डयूटी लगाकर कार्यवाही सुनिश्चित करें। मतगणना ऐजेंट एवं गणन कर्मियों हेतु पृथम-पृथक एनक्लोजर बनाये जावे। पार्क वाहनों की सुरक्षा की व्यवस्था भी रहें। 

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एसीबी ने अधिशाषी अभियंता को 55 सौ रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया


जयपुर,17 मई 2019.

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) हनुमानगढ़ टीम ने शुक्रवार 17-5-2019 को कार्यवाही करते हुए जलदाय विभाग कार्यालय जिला हनुमानगढ़ में कार्यरत अधिशाषी अभियंता मेजर सिंह ढिल्लन को 55 सौ रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।


    भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि परिवादी ने एसीबी में यह शिकायत दी कि उसके द्वारा की गई कार्य  के पेंडिंग बिलों को पास करने की एवज में अधिशासी अभियंता 55 सौ रुपए की रिश्वत की राशि की मांग कर रहा है।


       भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हनुमानगढ़ श्री गणेश नाथ के नेतृत्व में उक्त मांग का सत्यापन करवा कर आज अधिशाषी अभियंता मेजर सिंह ढिल्लन को 55 सौ रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया एवं अग्रिम कार्रवाई जारी है।

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सूरतगढ़ की बड़ी खबर-मनोज स्वामी को साहित्य अकादमी सम्मान पुरस्कार 50 हजार रू.अगरतल्ला समारोह में प्रदान होगा: - - करणीदानसिंह राजपूत --



सूरतगढ़ 17 मई 2019.

राजस्थानी साहित्यकार एवं पत्रकार मनोज कुमार स्वामी को केन्द्रीय साहित्य अकादमी की ओर से 'नाव अर जाळ' राजस्थानी अनुवाद  पर  वर्ष 2018 के पुरस्कारों में यह पुरस्कार  जनवरी 2019 में घोषित हुआ था। इसमें स्वामी को 50,000 की राशि का चैक व सम्मान 14 जून 2019 को अगरतल्ला में आयोजित समारोह में अकादमी अध्यक्ष प्रदान करेंगे।

मनोज कुमार स्वामी ने मलयालम भाषा के नामी लेखक तकष़ी शिव  शंकर पिल्लेे के उपन्यास 'चेम्मीन' ( जिसका हिन्दी मतलब होता है मछुआरे का राजस्थानी भाषा में अनुवाद किया जो 'नाव अर जाळ' नाम से अकादमी की ओर से 2014 में प्रकाशित कराया गया था। 

 चेम्मीन को केन्द्रीय साहित्य अकादमी ने  सन 1957 में पुरस्कार. प्रदान किया था और 61 साल बाद राजस्थानी अनुवाद 'नाव अर जाळ' को सन 2018 का अनुवाद पुरस्कार प्रदान होगा।  


' नाव अर जाळ' एक रोचक प्रेम गाथा है। इसकी समीक्षा राजस्थानी भाषा में पत्रकार लेखक करणीदानसिंह राजपूत की ओर से की गई जो राजस्थानी भाषा एवं साहित्य अकादमी बीकानेर की पत्रिका 'जागती जोत' में प्रकाशित हुई है। 

समारोह स्थल अगरतला भारत के त्रिपुरा प्रान्त की राजधानी है। अगरतला की स्थापना 1850 में महाराज राधा कृष्ण किशोर माणिक्य बहादुर द्वारा की गई थी। बांग्लादेश से केवल दो किमी दूर स्थित यह शहर सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध है। अगरतला त्रिपुरा के पश्चिमी भाग में स्थित है और हरोआ नदी शहर से होकर गुजरती है। 



हरियाणवी डांसर सपना चौधरी ने मोदी के दुबारा पीएम बनने की प्रार्थना की-विश्व नाथ मंदिर में।

मशहूर हरियाणवी डांसर और एक्टर सपना चौधरी  गुरुवार (16 मई) को पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचीं। यहां उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन पूजन किया। इस दौरान सपना ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ से नरेंद्र मोदी को दोबारा पीएम बनाने की प्रार्थना की है। 

इस बीच प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार के बारे में सपना ने कहा कि वह प्रचार कर रही हैं लेकिन वह कितना सफल होंगी, यह तो वह ही जाने। उंन्होने कहा कि जनता अच्छे बुरे में फर्क जानती है और मोदी जी ही पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएंगे।

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गुरुवार, 16 मई 2019

सूरतगढ़ भोजेवाला सड़क पर बस शुभारंभ:पूर्व विधायक राजेन्द्रसिंह भादू द्वारा उदघाटन

सूरतगढ़ - भोजेवाला सड़क पर  पहली बार बस सेवा का शुभारंभ पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह भादू ने किया। इस अवसर पर काफी संख्या में उपस्थित लोगों ने खुशी प्रगट की। इस सड़क पर बस सेवा शुरू होने से समय और पैसा दोनों की बचत होगी। लोगों की महत्वपूर्ण मांग पूरी हुई है।

ग्रामीणों की खुशी के मानो चार चांद लग गए,

टिब्बा क्षेत्र के कई गांव वासियों को दूरी कम होने के साथ साथ धन व पैसों की बचत होगी।

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