शुक्रवार, 31 मई 2019

सूरतगढ़ में कोचिंग ले रही युवती से गैंगरेप-6 के विरुद्ध मुकदमा

*महिला को कार में लिफ्ट देकर किया गैंगरेप, मुख्य आरोपी सहित 6 के खिलाफ मामला दर्ज*

*चूरू के सांडवा थाना क्षेत्र के ग्राम बैरासर की एक 25 वर्षीय विवाहिता ने मुख्य आरोपी सहित 6 आरोपियों पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करावाया है, जिसमें एक महिला भी शामिल है.*


28 मई 2019.

सूरतगढ़ में कोचिंग ले रही गैंगरेप की शिकार पीड़िता ने सांडवा पुलिस को दी रिर्पोट मे आरोप लगाया है कि 29 अप्रैल को वह सूरतगढ कोचिंग के लिए जाने वास्ते सांडवा के बस स्टैंड पर खड़ी थी। 

वहां गजेन्द्र शर्मा निवासी सांडवा आया और उसे यह कहकर गाड़ी मे बैठा लिया कि वह भी सूरतगढ़ जा रहा है, उसे भी छोड़ देगा। आरोपी गजेंन्द्र ने पीड़िता को शीतल पेय पिलाया जिससे वह बेहोश हो गई। उसके बाद आरोपी युवती को श्रीगंगानगर ले गया, जहां एक मकान में उसके साथ दुष्कर्म किया व अश्लील वीडियो बना लिया।बाद में आरोपी ने अपने साथियों के साथ रेप किया।
अगली रात उस मकान में शिवशंकर, उमेश निवासी श्रीगंगानगर, आशीष निवासी डेलवा ने बलात्कार किया। 
एक हफ्ते बाद उसे बीकानेर लेकर आए वहां एक बंद मकान में 10-11 दिनों तक बंद रखा और बलात्कार किया। फिर जयपुर ले गए वहां पर राजेंद्र तिवाड़ी ने उसके साथ रेप किया। बाद में 26 मई को गजेंद्र उसे सांडवा छोड़ गया। उसने घर जाकर परिजनों को घटना के बारे में बताया।

पीएम नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों को विभाग बांटे




नई दिल्ली 31म 2019.
प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद आज मंत्रियों को उनके विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। मोदी कैबिनेट के 57 मंत्रियों में किसके पास कौनसा मंत्रालय होगा।


कैबिनेट मंत्री को मिले मंत्रालयों की सूची


1.नरेन्द्र मोदी - प्रधानमंत्री
2.राजनाथ सिंह- रक्षा मंत्री
3.अमित शाह-गृह मंत्री
4.नितिन गडकरी- रोड, ट्रांसपोर्ट, राजमार्ग एवं MSME मंत्री
5.सदानंद गौड़ा-कैमिकल एंड फर्टिलाइजर
6.निर्मला सीतारमण-वित्त मंत्री
7.रवि शंकर प्रसाद-कानून, एवं कम्युनिकेशन
8.राम विलास पासवान- उपभोक्ता मामले एवं खाद्य
9.नरेंद्र सिंह तोमर-कृषि मंत्री
10.हरसिमरत कौर बादल-फूड प्रोसेसिंग
11.थावर चंद गहलोत-सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
12.एस जयशंकर-विदेश मंत्री
13.रमेश पोखरियाल निशंक-मानव संसाधन विकास मंत्री
14.स्मृति ईरानी-महिला एवं बाल विकाल
15.अर्जन मुंडा-आदिवासी मामले
16.हर्ष वर्धन-स्वास्थ एवं परिवार कल्याण
17.प्रकाश जावड़ेकर-पर्यावरण
18.पीयूष गोयल-रेलवे मंत्री
19.धर्मेंद्र प्रधान-पेट्रोलियम मंत्री
20.मुख्तार अब्बास नकवी- अल्पसंख्यक मामले
21. प्रह्लाद  जोशी-संसदीय मामलों के मंत्री


22.महेंद्र नाथ पांडेय-स्किल डेवल्पमेंट
23.अरविंद सावंत-भारी उद्योग
24.गिरिराज सिंह-एनिमल हसबेंडरी
25.गजेंद्र सिंह शेखावत-जल संशाधन


राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मंत्रियों को मिले मंत्रालय 


संतोष कुमार गंगवार-श्रम मंत्री
राव इंद्रजीत सिंह- सांख्यिकी एवं योजना
श्रीपद नायक-आयूष मंत्रालय
डॉ जीतेंद्र सिंह-पीएमओ
किरण रिजिजू-खेल एवं युवा मामले
प्रहलात पटेल-पर्यटन एवं सांस्कृति
आरके सिंह-ऊर्जा मंत्रई
हरदीप सिंह पुरी-हाउसिंग एवं अर्बन डेवल्पमेंट
मनसुख मांडविया-शिपिंग

राज्यमंत्रियों को मिले मंत्रालयों की सूची

फग्गन सिंह कुलस्ते-स्टील मंत्रालय में राज्य मंत्री
अश्विनी कुमार चौबे-स्वास्थ्य मंत्रालय में राज्य मंत्री
अर्जुन राम मेघवाल-संसदीय मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
कृष्णपाल गुर्जर-सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
जनरल वीके सिंह-सड़क, ट्रांस्पोर्ट एवं राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री
राव साहेब दानवे-उपभोक्ता मंत्रालय में राज्य मंत्री
किशन रेड्डी-गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री
पुरुषोत्तम रुपाला-कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री
रामदास आठवले-सामाजिक न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री
साध्वी निरंजन ज्योति-ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री
बाबुल सुप्रियो-पर्यावरण मंत्रालय में राज्य मंत्री
संजीव बालियान-एनिमल हसबेंडरी मंत्रालय में राज्य मंत्री
धोत्रे संजय शामराव-मानव संसाधन मंत्रालय में राज्य मंत्री
अनुराग सिंह ठाकुर-वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री
आंगड़ी सुरेश-रेलवे मंत्रालय में राज्य मंत्री
नित्यानंद राय-गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री
रतन लाल कटारिया-जल संसाधन मंत्रालय में राज्य मंत्री
वी मुरालीधरन-विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री
रेणुका सिंह सरुता-आदिवासी मंत्रालय में राज्य मंत्री
सोम प्रकाश-वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
रामेश्वर तेली-फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री
प्रताप चंद्रा सारंगी-MSME मंत्रालय में राज्य मंत्री
कैलाश चौधरी-कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री
देबाश्री चौधरी-महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री
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गुरुवार, 30 मई 2019

नरेंद्र मोदी समेत 58 मंत्रियों ने शपथ ली. 25 कैबिनेट, 9 स्वतंत्र प्रभार और 24 राज्यमंत्री


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^^ करणीदानसिंह राजपूत ^^

राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में नरेंद्र मोदी ने विदेशी देशी मेहमानों के बीच गुरुवार (30 मई) को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। मोदी के शपथ ग्रहण के बाद राजनाथ सिंह ने शपथ ली। उनके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। माना जा रहा है कि राजनाथ सिंह इस सरकार में भी नंबर दो होंगे। इन दोनों के अलावा नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, रामविलास पासवान, रविशंकर प्रसाद, स्मृति इरानी ने भी कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। 
समारोह में पीएम समेत कुल 58 मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली है, जिसमें पीएम समेत कुल 25 कैबिनेट मंत्री, जबकि 9 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और 24 राज्यमंत्रियों ने शपथ ली।

*मोदी सरकार की नई टीम इस प्रकार है-*
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
राजनाथ सिंह
अमित शाह
नितिन गडकरी
सदानंद गौड़ा
निर्मला सीतारमण
रामविलास पासवान
नरेंद्र सिंह तोमर
रवि शंकर प्रसाद
हरसिमरत कौर बादल
थावरचंद गहलोत
एस जयशंकर (पूर्व विदेश सचिव)
रमेश पोखरियाल निशंक
अर्जुन मुंडा
स्मृति ईरानी
हर्ष वर्धन
प्रकाश जावड़ेकर
पीयूष गोयल
धर्मेंद्र प्रधान
मुख्तार अब्बास नकवी
प्रहलाद जोशी
महेंद्र नाथ पांडेय
अरविंद सावंत
गिरिराज सिंह
गजेंद्र सिंह शेखावत

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) :
संतोष गंगवार
राव इंद्रजीत सिंह
श्रीपद नाइक
जितेंद्र सिंह
किरेन रिजीजू
प्रहलाद सिंह पटेल
राज कुमार सिंह
हरदीप सिंह पुरी
मनसुख मांडविया
राज्यमंत्री
फग्गन सिंह कुलस्ते
अश्विनी कुमार चौबे
अर्जुन राम मेघवाल
जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह
कृष्णपाल गुर्जर
रावसाहिब पाटिल दानवे
जी किशन रेड्डी
पुरुषोत्तम रूपाला
रामदास अठावले
साध्वी निरंजन ज्योति
बाबुल सुप्रियो
संजीव बालियान
संजय धोत्रे
अनुराग ठाकुर
सुरेश अंगाड़ी
नित्यानंद राय
रतनलाल कटारिया
वी मुरलीधरन
रेणुका सिंह
सोम प्रकाश
रामेश्वर तेली
प्रताप सारंगी
कैलाश चौधरी
देबश्री चौधरी
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श्रीगंगानगर-नांदेड नई साप्ताहिक ट्रेन का शुभारंभ 31मई को-सांसद निहालचंद झण्डी दिखाएंगे


श्रीगंगानगर, 30 मई 2019.

श्रीगंगानगर से वाया सादुलशहर, हनुमानगढ, संगरिया, मंडी डबवाली, बठिण्डा, नई दिल्ली होते हुए  हुजुर साहिब नांदेड के लिये नई साप्ताहिक रेल 31 मई 2019 शुक्रवार को श्रीगंगानगर स्टेशन से रवाना होगी। सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री निहालचंद रेलवे स्टेशन पर आयोजित समारोह में इस गाडी को दोपहर 1.35 बजे झण्डी दिखाकर रवाना करेगें। 

जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य श्री भीम शर्मा ने बताया कि गाडी संख्या 12439/12440 श्रीगंगानगर-नांदेड-श्रीगंगानगर साप्ताहिक सुपरफास्ट ट्रेन शुक्रवार को दोपहर 1.35 बजे श्रीगंगानगर से रवाना होकर 1.58 बजे सादुलशहर, 2.35 बजे हनुमानगढ जंक्शन, 3.08 बजे संगरिया, 3.35 बजे मण्डी डबवाली व 4.30 बजे बठिण्डा होते हुए शनिवार रात नांदेड पहुंचेगी। इस गाडी के लिये हनुमानगढ, सादुलशहर व संगरिया की सिख संगतों ने मांग रखी थी। इसके लिये सांसद श्री निहालचंद विगत जुलाई माह में रेलवे बोर्ड के सदस्य यातायात श्री गिरीश पिल्लई से मिले थे। इस गाडी के शुरू होने से सादुलशहर सहित उक्त स्टेशनों के रेल यात्रियों को अब रामपुरा फूल, तपा, बरनाला, धूरी, संगरूर, जाखल जंक्शन, जीन्द जंक्शन, रोहतक जंक्शन, नई दिल्ली, मथुरा जंक्शन, आगरा केन्ट, ग्वालियर जंक्शन, बीना जंक्शन, भोपाल जंक्शन, इटारसी जंक्शन, खण्डवा, मलकापुर, अकोला जंक्शन, वाशिम, हिंगोली डकन व पूर्णा स्टेशनों के लिये सीधी रेल सेवा की सुविधा मिल जायेगी। श्रीगंगानगर से शुक्रवार 1.35 बजे रवाना होने के बाद यह ट्रेन शनिवार रात्रि 11.45 बजे नांदेड़ पहुंचेगी व वापसी में गाड़ी संख्या 12439 नांदेड़-श्रीगंगानगर साप्ताहिक सुपरफास्ट प्रत्येक रविवार को सुबह 11 बजे नांदेड़ से रवाना होकर सोमवार की रात्रि 11.25 बजे श्रीगंगानगर पहुंचा करेगी। 

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बुधवार, 29 मई 2019

मोदी राजस्थान सरकार को जुलाई तक करवा देंगे भंग-कांग्रेस नेता रामनारायण मीणा का दावा,


जयपुर 29 मई 2019

राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रामनारायण मीणा ने प्रदेश में गहलोत सरकार के गिरने का दावा किया है। मीणा के अपनी ही पार्टी की सरकार के गिरने का दावा करके राजनैतिक  गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। फिलहाल कांग्रेस नेता के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। गौरतलब है कि मीणा हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में 'कोटा-बूंदी'सीट से कांग्रेस प्रत्याशी थे। वे अपने प्रतिद्वंदी भाजपा के ओम बिड़ला से ये चुनाव हार गए थे।


 रामनारायण मीणा ने मीडिया को दी अपनी प्रतिक्रिया के दौरान एक सवाल के जवाब में ये दावा किया है। उन्होंने साफ़ कहा कि आने वाले दिनों यदि कांग्रेस पार्टी ने एकजुटता नहीं रखी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी संवैधानिक शक्तियों को काम में लेकर राजस्थान की सरकार को भंग कर सकते हैं। मीणा ने दावा किया कि मोदी गहलोत सरकार को गिराने की इस कवायद को जुलाई में अंजाम दे सकते हैं। वहीं मीणा ने लोकसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस पार्टी का सूपड़ा साफ़ होने को नेतृत्व कर रहे नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराया।


ये कहा रामनारायण मीणा ने 


साम-दाम-दंड भेद से वो सत्ता में आना चाहते हैं... उनका देश की मज़बूती से कोई लेना देना नहीं है... उनको तो खुद की मजबूती चाहिए.. विचारधारा की मजबूती चाहिए... मैं तो कांग्रेस के नेता हैं उनको सलाह देता हूँ... कि आप आपसी लड़ाई छोड़िये... आज मेरा जैसा व्यक्ति कार्यकारिणी का सदस्य भी नहीं है... तो देख लीजिये इससे राजस्थान की जनता के सामने क्या मैसेज जा रहा है... कांग्रेस की लीडरशिप जो स्टेट की है.. वो लीडरशिप अपने स्वार्थ को छोड़े.. और अभी भी राहुल गांधी के नेतृत्व में संगठित होने की बात करे... ईमानदारी से नेताओं और कार्यकर्ताओं को सेलेक्ट करे... तभी कांग्रेस बची रहेगी, नहीं तो नरेंद्र मोदी संविधान की धारा 356 के तहत ऐसे स्थान में बैठे हैं कि वो राजस्थान की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं.. और यदि हम नहीं सुधरे तो जुलाई तक निश्चित तौर पर मोदीजी यहां दौरा करेंगे... इसे भंग करेंगे.. कॉन्स्टिट्यूशन प्रोविजन्स के तहत भंग करना चाहेंगे... क्योंकि उनको देश से कोई मतलब नहीं है, विकास से कोई मतलब नहीं है...


... इधर आज बंद कमरे में कांग्रेस करेगी मंथन


लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद बुधवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बैठक में हार के कारणों पर मंथन किया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ बैठक में प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे तथा सह प्रभारी विवेक बंसल व तरुण कुमार भी मौजूद रहेंगे। पिछले तीन दिनों से गहलोत-पायलट समर्थकों के बीच छिड़ी बयानबाजी के चलते बैठक में हंगामा होने के आसार हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक में पहले एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बने रहने का अनुरोध किया जाएगा। इसके बाद पार्टी हार के कारणों की समीक्षा करेगी। इस दौरान प्रदेश कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों के इस्तीफे दिए जाने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।


बैठक में सीएम गहलोत के अलावा राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों व विधायकों को भी बुलाया गया है। इनके अलावा पार्टी के अग्रिम संगठनों के प्रदेश प्रमुख, सभी जिलाध्यक्षों व लोकसभा चुनाव लडऩे वाले सभी प्रत्याशियों को भी बुलाया गया है।


मीडिया को रखा दूर


हंगामे की आशंका को भांपते हुए पार्टी के शीर्ष नेताओं ने बैठक से मीडिया को दूर रखा है। बैठक में प्रत्याशियों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। इस दौरान मंत्री व विधायक भितरघात व सहयोग न मिलने के आरोपों के साथ निशाने पर रह सकते हैं। हार के बाद एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही बयानबाजी के कारण भी हंगामे की आशंका जताई जा रही है।


इसलिए है हंगामे की आशंका

पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक का मुख्य एजेंडा तो हार के कारणों की समीक्षा करना है, लेकिन जिस तरह पिछले तीन दिन से मंत्री और पदाधिकारियों की बयानबाजी सामने आई है, उससे बैठक में हंगामा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं अपनी हार से दुखी कई प्रत्याशियों ने भी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भितरघात को जिम्मेदार बताया है। ऐसे में नेताओं को प्रत्याशियों की नाराजगी का सामना भी करना पड़ सकता है।

 

राजस्थान में पायलट को सीएम बनाने की मांग-कांग्रेस में भारी हलचल

May 29, 2019.

लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पार्टी में हलचल काफी तेज है। पार्टी आलाकमान बड़े स्तर पर परिवर्तन की तैयारी में है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में तो मौजूदा मुख्यमंत्री को पद से हटाने के चर्चा जोरों पर है। राजस्थान में उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को सीएम बनाने की मांग हो रही है तो वहीं मध्य प्रदेश में मंत्रियों ने मांगा की है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी की कमान सौंपनी चाहिए।

मध्य प्रदेश में महिला और बाल विकास मंत्री इमरती देवी और खाद्य मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर और रेवन्यू मिनिस्टर गोविंद सिंह राजपूत ने यह मांग की है। राज्य में पार्टी ने लोकसभा की 29 सीटों में से मात्र एक सीट ही जीती है। ऐसे में पार्टी में मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। जिस एक सीट पर जीत मिली है वह मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ ने हासिल की है। उन्होंने छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ा था। लेकिन सिंधिया के करीबी मंत्री उनके समर्थन में खड़े हो चुके हैं। बता दें कि 48 वर्षीय सिंधिया ने गुना से चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गए।

गोविंद सिंह राजपूत ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा ‘अगर पार्टी हारे या जीते इसकी जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष की होती है। चुनाव के बाद अलग-अलग राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों ने इस्तीफा सौंप दिया है। ऐसे में कमलनाथ को भी ऐसा ही करना चाहिए। उन्होंने एक पद छोड़ना ही होगा।’

वहीं प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा ‘मुझे लगता है कि हमारे संगठन में राज्य का नेतृत्व करने और पार्टी का नेतृत्व करने के लिए अलग-अलग नेता होने चाहिए


राजस्थान में पायलट को सीएम बनाने की मांग


राजस्थान में सीएम गहलोत के खिलाफ पार्टी के भीतर ही आवाजें उठने लगी है। पार्टी नेताओं का मानना है सचिन पायलट को सीएम पद की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सेक्रेटरी सुशील असोपा ने कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष पायलट को सत्ता की कमान सौंपी जानी चाहिए। वहीं अपनी हार के लिए जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल ने कमजोर बूथ मैनेजमेंट को जिम्मेदार बताते हुए शीर्ष पद पर बदलाव की बात कही है।

बता दें कि मंगलवार को सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से उनके आवास पर मुलाकात भी की है। राजस्थान में पार्टी ने एक भी सीट हासिल नहीं की है। वह भी तब जब कांग्रेस ने कुछ महीने पहले ही विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है।

सुशील असोपा ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए कहा ‘आप राजस्थान में जहां पर जाएंगे आपको सिर्फ कांग्रेस ही सुनने को मिलेगा। अगर पार्टी सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाती तो चुनाव परिणाम कुछ और ही होते। जो कि उनकी पिछले पांच साल की कड़ी मेहनत को दर्शाते।’

उन्होंने कहा ‘पार्टी ने विधानसभा चुनाव में इसलिए बेहतर किया क्योंकि उन्होंने बीते कुछ सालों में पार्टी के लिए कड़ी मेहनत की। इसी का नतीजा है कि हमें विधानसभा चुनाव में जीत हासिल हुई। युवा सोचते हैं कि एक युवा को ही सीएम पद मिलना चाहिए।

बता दें कि कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में महज 52 सीटों पर जीत हासिल की है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में परिणाम उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। कांग्रेस अध्यक्ष पार्टी के प्रदर्शन ने बेहद नाराज हैं। उन्होंने इस्तीफे तक की पेशकेश कर दी थी।

जनसत्ता ऑनलाइन



नोएडा व मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर रडार बेस्ड कैमरे से कट रहा चालान


नोएडा में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए के लिए पुलिस अत्याधुनिक तकनीक लेकर आई है. देश का पहला रडार बेस्ड कैमरे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और नोएडा में लगाए गए हैं. दुबई और कुछ यूरोपीय देशों की तरह नोएडा में भी यातायात विभाग ने रडार बेस्ड ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (एएमपीआर) कैमरे लगाए हैं. यह उपकरण खंभानुमा है जो रात में भी वाहनों के नंबर प्लेट पढ़ सकता है.


नोएडा में एएमपीआर कैमरे का एक सप्ताह से प्रयोग कर रहा है. एसपी (ट्रैफिक) अनिल कुमार झा ने बताया कि यह तकनीक भारत में पहली बार नोएडा से शुरू हुई है. रडार ने 20 मई को काम करना शुरू किया था और यह सात दिनों में 1200 वाहनों को ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ चुका है. रडार बेस्ड कैमरे महामाया फ्लाईओवर के पास लगाया गया है....

29-5-2019.
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पत्रिका में बहुत बड़ी खबर-राजस्थान की सभी सीटें हारने का जवाब मांगा गया-क्लिक करें पढें


गहलोत और पायलट से पूछा हार का जिम्मेदार कौन? हार के बाद हलचल: प्रियंका ने संभाला मोर्चा, 

29 मई 2019.

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के भीतर खासतौर पर राजस्थान कांग्रेस में उठापटक चरम पर पहुंच गई।

जयपुर/नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद मंगलवार को कांग्रेस के भीतर खासतौर पर राजस्थान कांग्रेस में उठापटक चरम पर पहुंच गई। एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपने इस्तीफे पर अड़े रहे। उन्होंने फौरी तौर पर एक महीने या कार्य समिति की अगली बैठक तक पार्टी का काम चलाने का प्रस्ताव रखा है। इसके बाद चुना जाने वाला नया अध्यक्ष गांधी परिवार से नहीं होगा, इस पर वे अडिग रहे। हालांकि वे पार्टी के संसदीय दल के नेता बनने को तैयार हैं।
महासचिव प्रियंका ने राहुल की जगह मुलाकातों का मोर्चा संभाला। उन्होंने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट से पूछा कि राजस्थान की सभी 25 सीट हारने की जिम्मेदारी किसकी है? दोनों ने अपनी-अपनी सफाई भी दी, लेकिन वे संतुष्ट नहड्डीं हुईं। प्रियंका ने पूछा कि पंजाब में 3 साल से सत्ता होने के बावजूद पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया तो राजस्थान में 5 महीनों में ऐसा क्या बदल गया? प्रियंका ने अब दोनों को हार की जिम्मेदारी तय करके आने का निर्देश दिया।
इससे पहले राहुल गांधी ने अलग-अलग पहुंचे गहलोत और पायलट से मिलने से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार उन्होंने साफ कर दिया है कि जब टिकट राज्य के बड़े नेताओं की सिफारिश पर दिए गए तो प्रत्याशी की हार का जिम्मा भी बड़े नेताओं को उठाना होगा। राजस्थान में अब तक सीएम, डिप्टी सीएम और प्रदेश प्रभारी में से किसी ने भी हार की जिम्मेदारी नहीं ली है। राहुल नवनिर्वाचित सांसदों से भी नहीं मिले। केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला भी उनसे नहीं मिल सके।
पहले पायलट पहुंचे फिर गहलोत
सचिन पायलट सुबह करीब 11:15 बजे तुलगक लेन पहुंचे। उनकी 35 मिनट तक प्रियंका से बातचीत हुई। ज्यों ही पायलट 11:50 पर राहुल के घर से निकले जोधपुर हाउस से गहलोत का काफिला चल दिया। वे करीब 12 बजे राहुल के घर पहुंचे। उन्होंने 45 मिनट प्रियंका से बातचीत की।
सिर्फ वायनाड जाने को हुए तैयार
राहुल ने अभी सिर्फ अपने नए लोकसभा क्षेत्र वायनाड के कार्यक्रम पर सहमति दी है। वह इस सप्ताह के अंत या अगले हफ्ते की शुरुआत में वायनाड के मतदाताओं का आभार व्यक्त करने जा सकते हैं।
सिंधिया को राहुल ने दिल्ली में रोका
मप्र कांग्रेस में बदलाव की चर्चा के बीच राहुल ने पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिल्ली में रोका है।
 वहीं, हॉर्स ट्रेडिंग से बचाने को कमलनाथ को विधायकों पर नजर रखने को कहा है। कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर राहुल के इस्तीफे पर अड़े होने की बात से इनकार किया है।
प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि कार्यसमिति ने उनके इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया है। बाकी अटकलें हैं। वहीं, वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोईली ने ट्वीट किया कि 2014 में जब हर कोई पार्टी छोडऩे को तैयार था तब राहुल ने अकेले दम कांग्रेस को संभाला। उन्हें अध्यक्ष बने रहना चाहिए।

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सोमवार, 27 मई 2019

इस्तीफे पर अड़े हैं राहुल गांधी- कर्नाटक व राजस्थान की सरकारें डगमग दिखने लगी

 

नई दिल्ली 27 May 2019

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस गहरे आंतरिक संकट से गुजर रही है। यही नहीं कर्नाटक और राजस्थान में उसकी सरकारें डगमगाती दिख ही हैं। पार्टी की करारी शिकस्त के बाद से अब तक कुल 13 इस्तीफे हो चुके हैं। इनमें पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, झारखंड के अजय कुमार और असम के प्रदेश अध्यक्ष निपुन बोरा का भी इस्तीफा शामिल हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी अब भी इस्तीफे पर अड़े हुए हैं और उन्होंने कई नेताओं से कहा है कि यह वह वक्त है, जब पार्टी को नए चीफ की तलाश करनी चाहिए।


चर्चा से कांग्रेस परेशान


542 सीटों पर हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को महज 52 सीटें ही मिली हैं। 2014 के आम चुनावों के बाद यह लगातार दूसरा मौका है, जब कांग्रेस पार्टी की सीटें दोहरे अंकों पर ही सिमट गई हैं। यही नहीं लगातार दूसरी बार वह नेता विपक्ष का पद हासिल करने लायक सीटें भी नहीं ला पाई है। 2014 में कांग्रेस को 44 सीटें ही मिली थीं। कांग्रेस का 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खाता भी नहीं खुला।

राहुल ने सीनियर नेताओं पर लगाया बेटों को तवज्जो देने का आरोप

शनिवार को हुई कांग्रेस की वर्किंग कमिटी की मीटिंग में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि कांग्रेस की शीर्ष निर्णायक संस्था के सदस्यों ने एकमत से उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। यही नहीं कहा जा रहा है कि इस मीटिंग के दौरान राहुल गांधी ने पी. चिदंबरम, अशोक गहलोत और कमलनाथ जैसे सीनियर नेताओं पर पार्टी से ज्यादा बेटों को तवज्जो देने का भी आरोप लगाया था। कांग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग में सीनियर नेताओं के अलावा सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं।

पार्टी में आंतरिक संघर्ष के साथ ही कर्नाटक और राजस्थान में उसकी सरकारें भी दांव पर लगी हैं। इन दोनों ही राज्यों से बीजेपी के सक्रिय होने की खबरें हैं। कहा जा रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों रमेश जरकिहोली और डॉ. सुधाकर ने बीजेपी नेता एस.एम कृष्णा से हाल ही में मुलाकात की थी। इस दौरान बीजेपी के अन्य नेता भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक ऐसे विधायकों की बड़ी संख्या है, जो लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से नाखुश हैं।


राजस्थान में मंत्रियों की मांग, हार की तय हो जवाबदेही


राजस्थान में भी आतंरिक लड़ाई तेज है और ऐसे कई मंत्री हैं, जिनका कहना है कि इस करारी हार के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। कर्नाटक में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका है। बीजेपी ने राज्य की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की है। यही नहीं पिछले साल मई में ही कर्नाटक में जेडीएस संग सराकर बनाने वाली कांग्रेस को सूबे की 28 में से महज एक सीट पर ही जीत मिली है।


करारी हार के बाद कांग्रेस में इस्तीफों का दौर अब तक 13 नेताओं ने भेजा इस्तीफा


लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की करारी हार के बाद से कांग्रेस में एक के बाद एक इस्तीफों की पेशकश का दौर चल रहा है। पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस्तीफे की पेशकश की और अब राज्य प्रदेश प्रभारी इस्तीफा ऑफर कर रहे हैं। 

असम से लेकर पंजाब और मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक के दिग्गज नेता पद से इस्तीफे की बात कर चुके हैं। 

अब तक विभिन्न प्रदेशों के 13 वरिष्ठ नेताओं ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष के पास भेज दिया है। उधर, राहुल को लेकर तरह-तरह की अटकलें चल रही हैं। हालांकि राहुल के इस्तीफे की पेशकश के बाद कांग्रेस पार्टी ने अभी चुप्पी साध रखी है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल अभी भी अपने इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। खबरें तो यहां तक है कि राहुल ने कांग्रेस को दो वरिष्ठ नेताओं से मिलकर अपना रिप्लेसमेंट खोजने तक को कह दिया है।


अब तक 13 बड़े नेताओं ने की इस्तीफे की पेशकश


कांग्रेस अध्यक्ष के रास्ते पर चलते हुए अब तक 13 बड़े नेताओं ने इस्तीफे की पेशकश की है। महाराष्ट्र में पार्टी के प्रभारी अशोक चव्हाण ने लोकसभा चुनाव नतीजों के अगले ही दिन इस्तीफा देने की बात कही थी। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष को भेजा है। जाखड़ ने गुरदासपुर उपचुनाव में जीत मिली थी, लेकिन इस बार वह सनी देओल से हार गए। इससे पहले राज बब्बर और कमलनाथ ने भी नैतिक जिम्मेदारी कहते हुए इस्तीफा देने की बात कही थी। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा ने भी निराशाजनक प्रदर्शन के बाद अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष को भेजा है। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों से भी पार्टी के विभिन्न पदों से कांग्रेस नेताओं ने निराशाजनक प्रदर्शन के कारण इस्तीफे दिए हैं।


कांग्रेस में मंथन का दौर जारी, कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात


करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है। ऐसे वक्त में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मुलाकात की है। आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के सी वेणुगोपाल और अहमद पटेल ने राहुल से मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष जल्द ही राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत से भी मुलाकात कर सकते हैं। विधानसभा चुनावों में जीत के बाद भी कांग्रेस को प्रदेश से एक भी सीट नहीं मिली।


प्रियंका और सोनिया के साथ भी राहुल की हुई चर्चा


सूत्रों का कहना है कि इस्तीफा देने की बात पर राहुल गांधी से मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी ने भी मुलाकात की। दोनों के साथ कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी की भावी रणनीति को लेकर चर्चा की है। कांग्रेस में आनेवाले दिनों में बड़े संगठनात्मक बदलाव और पार्टी नेतृत्व को लेकर बड़े बदलाव हो सकते हैं।

पंजाब कांग्रेस चीफ का भावुक संदेश

गुरदासपुर में अभिनेता एवं बीजेपी उम्मीदवार सनी देओल से लोकसभा चुनाव हारने वाले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। इस्तीफे में, उन्होंने अपनी सीट हारने और कांग्रेस शासित राज्य में पार्टी का उत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं रहने की नैतिक जिम्मेदारी ली। कांग्रेस ने पंजाब में 13 में से आठ सीटें जीती हैं। अकाली दल और बीजेपी ने दो-दो सीटें, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) ने एक सीट जीती है। अपने पत्र में, जाखड़ ने कहा कि वह कांग्रेस अध्यक्ष, महासचिव प्रियंका गांधी और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा पूरा समर्थन मिलने के बावजूद अपनी सीट बरकरार नहीं रख पाए। 77,000 से अधिक वोटों से हारे जाखड़ ने कहा, ‘सभी ने मेरा पूरा समर्थन किया और मेरे लिए अपना सर्वश्रेष्ठ समय दिया लेकिन मैं अपनी सीट को बचाने में नाकामयाब रहा, ऐसे में मैं पार्टी के राज्य प्रमुख पद पर नहीं रह सकता। मैं नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ता हूं।’

(साभार नवभारतटाइम्स : 27 May 2019.नई दिल्ली)

पानी को तरसते लोग एसडीएम से मिले-सूरतगढ़ वार्ड नंबर 5 में पेयजल का गंभीर संकट-


- करणीदानसिंह  राजपूत- 

सूरतगढ 27 मई 2019.भयानक गर्मी में पानी की कमी को लेकर वार्ड नं 5 के अनेक लोग उपखण्ड अधिकारी रामावत  से मिले और समस्या सामने  रखी। नागरिकों की शिकायत थी कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने नई बनी टंकी को शुरू नहीं किया है।  वार्ड में पानी की गंभीर समस्या है।  कुछ मोहल्लों में पाइपलाइन भी नहीं डाली हुई है।

उपखंड अधिकारी रामावतार कुमावत ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की सहायक अभियंता से फोन पर बात कर इस परेशानी से नागरिकों को मुक्त कराने का निर्देश दिए हैं। पानी को तरसते लोग 28 मई को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता से मिलेंगे।

रविवार, 26 मई 2019

देश भर में चुनावआचार संहिता हटाई गई:सभी काम हो सकेंगे

दि. 26 मई 2019 भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019,व कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों की संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बाद आचार संहिता हटाने का आदेश जारी कर दिया है। 


हार के बाद कांग्रेस में हड़कंप-काफी उलट पलट की संभावना राहुल गांधी गुस्सा -


* गहलोत, कमलनाथ, चिदंबरम ने पार्टी से ज्यादा बेटों को दी तरजीह*

* कांग्रेस कार्य समिति सदस्यों द्वारा राहुल का इस्तीफा नामंजूर*


**कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राहुल ने कहा कि उन्होंने बीजेपी ओर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उठाए थे, पार्टी के नेता उसे जनता के पास ले जाने में असफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने खास तौर पर राफेल डील मामले और 'चौकीदार चोर है' नारे का जिक्र किया।**

26 मई 2019.


आम चुनाव 2019 में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व अपनी गलतियों की समीक्षा करने के लिए शनिवार को इकट्ठा हुआ। कांग्रेस वर्किंग कमेटी में हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन सीडब्ल्यूसी सदस्यों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। 

चुनाव नतीजों को लेकर नाराज राहुल गांधी ने कुछ सीनियर कांग्रेसी नेताओं को आड़े हाथ लिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने चुनाव में अपने बेटों को पार्टी से ज्यादा तरजीह दी। राहुल के मुताबिक, इन नेताओं ने अपने बेटों को टिकट देने में सारा जोर लिया दिया। राहुल गांधी ने ऐसी बात तब कही, जब इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मजबूत स्थानीय नेता खड़े करने का सुझाव दिया।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, राहुल ने इस बात का जिक्र किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी, वहां भी पार्टी ने बेहद खराब प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने अपने बेटों को टिकट देने के लिए दबाव बनाया, जबकि वह इसके पक्ष में नहीं थे। राहुल ने इसी संदर्भ में सीनियर कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम का भी नाम लिया। राहुल ने यह भी कहा कि उन्होंने बीजेपी ओर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उठाए थे, पार्टी के नेता उसे जनता के पास ले जाने में असफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने खास तौर पर राफेल डील मामले और ‘चौकीदार चोर है’ नारे का जिक्र किया।

खबर के मुताबिक, राहुल ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस हार के लिए जिम्मेदारी तय की जाए इसलिए वह अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके ऐसा ऐलान करते ही सीनियर पार्टी नेताओं ने इसका विरोध किया। सीनियर नेताओं का तर्क था कि राहुल गांधी ने आगे बढ़कर कांग्रेस की अगुआई की और उन्हें इस हार से दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है। खबरों के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की राय थी कि अगर राहुल इस्तीफा दे देते हैं तो बीजेपी की चाल सफल हो जाएगी। वहीं, पी चिदंबरम ने आशंका जताई की राहुल के इस्तीफे से आहत बहुत सारे कार्यकर्ता आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं।



मोदी की जीत का जश्न मनाएं:चित्रों की झलक






देश में और देश के बाहर भी मनाया जा रहा है नरेन्द्र मोदी का दूसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुने जाने का जश्न।

- करणीदानसिंह राजपूत - 

नरेन्द्र मोदी के आह्वान में बहुत बड़ी शक्ति रही थी कि 2019 के लोकसभा आमचुनाव में जनतांत्रिक गठबंधन को भारी जीत मिली। 353 सीटें मिली जिसमें अकेले भाजपा को 303 सीटें मिली।
मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया है। मोदी की जीत पर भारत को विश्व में शक्ति शाली राष्ट्र के रूप में पहचान मिली है।

मोदी ने आतंकवाद के विरूद्ध संसार को जगाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है तथा भारत को एक महत्वपूर्ण मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। इस वजह से विश्व के अन्य देशों की सोच बदल गई है।
मोदी ने बलूचिस्तान के आजादी मांग रहे लोगों को एक संबल प्रदान किया है तथा पाकिस्तान को उसकी हैसियत का एक नमूना दिया है। पाकिस्तान  कश्मीर की स्वायतता के राग अलापता रहा है उसे यह बता दिया है कि उसके कब्जे में जो कश्मीर का हिस्सा है वह भी भारत का हिस्सा है। उसको वापस भारत में शामिल किए जाने का ईशारा देकर भी अपने देश सहित दुनिया को भी ताकत का एहसास करा दिया है।

मोदी मोदी के ही नारों का जयघोष चारों ओर सुनाई पड़ रहा है।
करणी प्रेस इंडिया संग मनाएं मोदी की जीत का जश्न।

शनिवार, 25 मई 2019

हवन कुंड में जिंदा समाधि ले लूंगा’का दावा करने वाले मिर्ची बाबा पर कार्रवाई


25 मई 2019.मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार का समर्थन में मिर्ची यज्ञ  कराने वाले महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा को बड़ा झटका लगा है। मिर्ची बाबा को दिग्विजय सिंह की हार के बाद जिंदा समाधि लेने वाले बयान पर निरंजनी अखाड़ा ने निष्कासित कर दिया गया है।

निरंजनी अखाड़ा के मुख्य पंच रविंद्र पुरी महाराज ने वैराग्यानंद की तरफ से दिए गए बयान को आपत्तिजनक माना। रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि उनका बयान अखाड़े की मर्यादा के विरुद्ध है। इस लिए उन्हें अखाड़े से निष्कासित करने का निर्णय लिया है। मुख्य पंच ने कहा कि उनका अब अखाड़े से कोई संबंध नहीं है।

इससे पहले महामंडलेश्वर ने दिग्विजय सिंह की जीत के लिए भोपाल में 5 क्विंटल मिर्ची से यज्ञ कराया। दिग्विजय खुद भी इस यज्ञ में शामिल हुए थे। वैराग्यानंद ने मीडिया से बातचीत में भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा पर भी खूब निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि प्रज्ञा संत नहीं ढोंगी।


महामंडलेश्वर ने दिग्विजय सिंह के लिए प्रचार करने की भी घोषणा की थी। उनका कहना था कि यदि दिग्विजय सिंह नहीं जीते तो मैं नतीजों केबाद जिंदा समाधि ले लूंगा। दूसरी तरफ चुनाव नतीजों के आने के बाद सोशल मीडिया पर मिर्ची बाबा को खोज रहे हैं। लोग कह कर रहे कि बाबा कहां चले गए हैं। क्या वह समाधि की तैयारी कर रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया पर बाबा का नंबर डालते हुए कह रहे हैं कि बाबा का नंबर बंद आ रहा है। उन्हें जल्द से जल्द ढूंढा जाए।

दिग्विजय के पक्ष में कम्प्यूटर बाबा ने किया था हठ योगः 

दिग्विजय के समर्थन में मिर्ची यज्ञ के साथ हट योग भी किया गया था। इस यज्ञ को मध्य प्रदेश की सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वाले कम्प्यूटर बाबा ने किया था। कम्प्यूटर बाबा ने कहा था कि मंदिर का निर्माण नहीं होने पर मोदी को वोट नहीं मिलेगा।


गुरुवार, 23 मई 2019

दुनिया की बड़ी खबर-जनता ने चलादी मोदी फिल्म-* करणीदानसिंह राजपूत *



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बायोपिक फिल्म को प्रतिपक्ष ने रुकवा दिया था कि इससे मोदी को लोकसभा आम चुनाव में लाभ होगा।

आश्चर्य जनक रहा है कि डिब्बाबंद फिल्म पड़ी रही और देश की जनता ने असली फिल्म को चला दिया। ऐसा प्रदर्शित कर दिया कि पुरानी अन्य फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ नया कीर्तिमान रच दिया। 

यह फिल्म चुनाव के दौरान प्रदर्शित हो जाती तो प्रतिपक्ष का आरोप होता कि इससे भारतीय जनता पार्टी को प्रचार मिला। घटनाक्रम ऐसे हुए की यह फिल्म प्रदर्शित नहीं हो पाई लेकिन भारतीय जनता पार्टी रिकॉर्ड तोड़ जीत प्राप्त कर गई। यह रिकॉर्ड जीत का जो नया बना वह केवल नरेंद्र मोदी के नाम से बना। भाजपा में फूट डालने के लिए लोगों ने यहां तक कहा कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी तक को खुडे लाइन लगा दिया है और अब यह एक व्यक्ति के नाम से चुनाव लड़ा जा रहा है।  प्रतिपक्ष ने और अनेक पत्रकारों अखबार और चैनल वालों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी, मगर उनका दुष्प्रचार बेअसर रहा। जनता ने बिना देखे ही मोदी फिल्म को मोदी के नाम पर चला दिया और दिल से चलाया। 

"मैं भी चौकीदार"और "इस बार फिर से मोदी सरकार" के नारे पूरे देश में लोकप्रिय हुए। मैं भी चौकीदार नारे का इतना अधिक प्रभाव हुआ कि चप्पे चप्पे में चौकीदार पैदा हो गए और करोड़ों की संख्या में हो गए। 

नरेंद्र मोदी पर चुनावी सभाओं में भद्दे से भद्दे शब्दों में आरोप लगाए गए। सारी मर्यादा तोड़ दी गई मगर जनता है यह सिद्ध कर दिया कि देश को ऐसे ही चौकीदार की जरूरत है जिसकी लाठी में इतना दम हो कि देश के गद्दार भ्रष्टाचारी तो डरें साथ में दुश्मन भी डरता रहे। 

नरेंद्र मोदी कि यह फिल्म चुनाव के वक्त दिखाई जाती तो चुनाव के बाद लोग भूल जाते। उसके बाद उसकी आवश्यकता ही नहीं होती,लेकिन अब 5 साल तक नरेंद्र मोदी की फिल्म चलती रहेगी।

 पहले घोषणाएं भाषण हुए थे कि विपक्ष 2019 को भूल जाए व 2024 की तैयारी करे क्योंकि 2019 में तो भाजपा गठबंधन की ही सरकार बनेगी।  ये भाषण घोषणाएं और ललकार सब सच साबित हुई। नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों को जनता ने सराहा और एकदम चुप रहते हुए भी जबरदस्त वोटिंग नरेंद्र मोदी के पक्ष में की। 

भारत के इस लोकसभा आमचुनाव पर देश के साथ विश्व की निगाहें भी लगी हुई थी। इस चुनाव से संपूर्ण विश्व में भारत शक्तिशाली प्रधानमंत्री वाले शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित हुआ है।

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बुधवार, 22 मई 2019

बलराम वर्मा की सूरतगढ़ पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ने में दिलचस्पी

^^ करणीदानसिंह राजपूत ^^

सूरतगढ़ 22 मई 2019.

कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष बलराम वर्मा नगर पालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे। 

बलराम वर्मा ने आज रात्रि एक शादी समारोह  में बताया कि आगामी नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में वे खड़े होंगे। पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कुछ महीने ही शेष हैं।

बलराम वर्मा पूर्व में यहां नगरपालिका पार्षद रह चुके हैं।बलराम वर्मा के पुत् एडवोकेट वेद वर्मा भी पार्षद रह चुके हैं। वर्तमान में पुत्र वधू अलका वर्मा पार्षद हैं।  बलराम वर्मा पूर्व में सरपंच पद पर भी रह चुके हैं। पिछले करीब 1 वर्ष से कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष पद पर हैं। नगरपालिका सूरतगढ़ का अध्यक्ष पद विधायक पद के बराबर माना जाता है।






एक लाख रुपए की रिश्वत लेते एईएन सुरेन्द्र कुमार गिरफ्तार- करोड़ों की संपत्ति का मालिक है एईएन।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 22 मई 2019 को बड़ी कार्यवाही करते हुए अजमेर जलदाय विभाग के किशनगढ़ में तैनात एईएन सुरेन्द्र कुमार को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सुरेन्द्र कुमार के साथ विभाग के वरिष्ठ सहायक नवरत्न सोलंकी को भी गिरफ्तार किया गया है। ब्यूरो ने यह कार्यवाही अजमेर के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के दिशा निर्देश में की है। ब्यूरो के डीएसपी महिपाल चौधरी ने बताया कि ठेकेदार मंगलाराम ने रेलवे में डीएफसीसी में पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया था। हालांकि भुगतान ठेकेदार को डीएफसीसी से ही मिलना था, लेकिन भुगतान से पहले किशनगढ़ के जलदाय विभाग की एनओसी जरूरी थी। इस एनओसी को देने की एवज में ही दो लाख रुपए की मांग की गई। ठेकेदार मंगलाराम ने एक लाख रुपए की राशि पहले ही दे दी थी। ब्यूरो की योजना के अनुरूप 22 मई को जब ठेकेदार मंगलाराम एक लाख रुपए की रिश्वत देने पहुंचा तो ब्यूरो की टीम ने एईएन सुरेन्द्र कुमार और वरिष्ठ सहायक नवरात्न सोलंकी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। चौधरी ने बताया कि अब दोनों रिश्वतखोरों के घरों की तलाश ली जा रही है। एक लाख रुपए की रिश्वत का मामला अपने आप में बड़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलदाय विभाग में किस स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। 

करोड़ों की संपत्ति

एसीबी के सूत्रों के अनुसार सुरेन्द्र कुमार पिछले कई वर्षों से किशनगढ़ में ही नियुक्त है। अब तक की जानकारी के अनुसार तीन-तीन बंगलों का मालिक है तािा वह एशोआराम की जिन्दगी व्यतीत करता है। एईएन के बेटों के पास डेढ़ लाख रुपए की कीमत वाली मोटर साइकिल है। 

दझ

राजस्थान में बड़ा सवाल- हारे तो किसकी होगी जिम्मेदारी? वैभव गहलोत हारा तो क्या होगा?

लोकसभा चुनाव की मतगणना से एक दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत का दावा किया है। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों से उनकी फोन पर बात हुई है। सभी उम्मीदवार उत्साहित है। सीएम के दावे अपनी जगह है, लेकिन न्यूज चैनलों का जो सर्वे आया है उसमें कांग्रेस को 2-4 सीटेें ही मिलने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि हार हुई तो राजस्थान में किस नेता की जिम्मेदारी होगी? सब जानते हैं कि पांच माह पहले विधानसभा के चुनाव में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही माना गया कि कांग्रेस को बहुमत मिलने पर पायलट ही मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन कांगे्रस आला कमान ने गहलोत को सीएम बनवा दिया। यही वजह है कि अब लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनावी राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि यदि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार होती तो पूरी जिम्मेदारी पायलट की ही बनती। लेकिन अब जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अशोक गहलोत बैठे हैं तो हार की जिम्मेदारी भी गहलोत की ही बनेगी। हालांकि लोकसभा चुनाव में गहलोत और पायलट ने एक साथ प्रचार किया, लेकिन सब जानते हैं कि यह प्रचार किस प्रकार कर रहा। सवाल यह भी है कि क्या संभावित हार की जिम्मेदारी सचिन पायलट लेंगे? जब पायलट को जीत का ईनाम नहीं मिला तो वे हार की जिम्मेदारी क्यों लेंगे?

पायलट के समर्थक अभी गहलोत के सीएम बनने को पचा नहीं पाए हैं। ऐसे समर्थकों को कहना है कि लोकसभा चुनाव की मतगणना में गुर्जर बहुल्य मतदान केन्द्र पर कांग्रेस को मिले वोट से अंदाजा लगाया जा सकता है। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में गुर्जर बहुल्य मतदान केन्द्रों के मतों का मिलान किया जाएगा तो हार के कारणों का पता चल जाएगा। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री होने के नाते गहलोत हार की जिम्मेदारी लेंगे? गहलोत के लिए एक मुसीबत जोधपुर का परिणाम भी है। जोधपुर से गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। यदि वैभव की भी हार होती है तो गहलोत का मुख्यमंत्री के पद पर टिका रहना मुश्किल होगा। यह भी देखना होगा कि लोकसभा चुनाव के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कैसे संबंध रहते हैं?

एस.पी.मित्तल) (22-05-19) साभार



नरेन्द्र मोदी की संभावित जीत पर इतना बवाल क्यों?


** विपक्षी दलों की मांग खारिज। मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं। **

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22 मई को चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की उस मांग को खारिज कर दिया है। जिसमें ईवीएम के मतों की गणना से पहले विधानसभा वार पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों से मिलान कराने की बात कही गई थी। मांग को लेकर 21 मई को 22 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने आयोग को ज्ञापन दिया था। 22 मई को आयोग के फुल कमिशन की बैठक हुई। बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि 23 मई को देशभर में होने वाली मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। अब पहले के दिशा निर्देशों के अनुरूप वीवीपेट की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों की गणना के बाद होगा। एक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केन्द्रों की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों से करना है। जिन पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों का मिलान होगा, उन केन्द्रों का चयन रेंडम पद्धति से होगा। मिलान के बाद ही परिणाम की अधिकृत घोषणा हो सकेगी। लेकिन निर्वाचन विभाग राउंडवार मतगणना की जानकारी सार्वजनिक करता रहेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ईवीएम में किसी भी प्रकार से गड़बड़ी नहीं हो सकती है। ईवीएम सिर्फ बैट्री पर संचालित है। इंटरनेट तकनीक का ईवीएम में कोई उपयोग नहीं है, इसलिए हैक की आशंकाएं निर्मूल हैं। 

जीत पर बवाल क्यों?: 

अधिकृत तौर पर तो 23 मई को ही पता चलेगा कि लोकसभा चुनाव में किसकी जीत हुई है, लेकिन मतगणना से पहले जो रुझान सामने आए हैं उसमें नरेन्द्र मोदी की जीत मानी जा रही है। मोदी की जीत की संभावना पर बिहार के एक नेता ने खून खराबे की आशंका जताई है। विपक्षी नेता का यह बयान देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक संदेश हैं। दुनिया के कई देशों में देखा गया कि सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति बने व्यक्ति मतदान में धांधली कर वर्षों तक सत्ता में बने रहते हैं। कई बार ऐसे तानाशाह शासकों के विरुद्ध संबंधित देश की जनता सड़कों पर आ जाती है और राष्ट्रपति भवन या संसद के बाहर धरना दिया जाता है। ऐसे धरनों से तख्ता पलट भी हो जाता है। लेकिन भारत में उल्टा हो रहा है जिस नेता को जनता ने वोट दिया है उस नेता के चुनाव पर अंगुली उठाई जा रही है। विपक्षी दलों के नेता भी मानते हैं कि इस बार का लोकसभा का चुनाव मोदी बनाम अन्य हुआ है। एनडीए में शामिल राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मोदी के चेहरे को आगे रख कर वोट मांगे हैं। कांग्रेस सहित तमाम विपक्ष ने अपने प्रचार अभियान में मोदी को ही निशाना बनाया। विपक्ष का मकसद सिर्फ मोदी को हटाना रहा। मोदी को हटाने के लिए विपक्षी दल जो कुछ भी कर सकते थे वो किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो अपनी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीताने के लिए पूरी सरकार को ही दांव पर लगा दिया। पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तो टीएमसी के कार्यकर्ता की भूमिका निभाई। गुंडातत्वों ने टीएमसी के उम्मीदवारों के लिए मतदान करवाया। इतना सब कुछ करने के बाद भी विपक्षी दलों को चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि परिणाम से पहले ही देश का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। यदि मोदी की जीत होती है तो चुनाव प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की जाएगी। यदि पश्चिम बंगाल में मोदी को 15 से 20 सीटें मिल गई तो हो सकता है कि ममता बनर्जी लाख दो लाख लोगों को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठ जाएं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पहचान तो धरना सीएम से ही है। दिल्ली में धरना देंगे तो दुनिया भर में भारत की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। असल में विपक्षी दल मोदी की जीत को पचाने की स्थिति  में नहीं है। लाख कोशिश के बाद भी जब मोदी हारते नजर नहीं आ रहे हैं तो खून खराबे, धरना प्रदर्शन आदि की नीति अमल में लाई जा रही है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)



राजस्थान में भाजपा की बड़ी जीत पर भी अशोक गहलोत को खतरा नहीं।

फस्र्ट इंडिया न्यूज चैनल के हैड  की 

चुनाव परिणाम से पहले खास विश्लेषण*

इंनडिया न्यूज चैनल के हैड जगदीश चन्द्रा ने 22 मई को राजस्थान की राजनीति के संदर्भ में अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया है। राजनीतिक घटनाओं का सटीक आंकलन करने वाले जगदीश चन्द्रा का यह विश्लेषण चैनल पर 22 मई को दोपहर तब प्रसारित हुआ, जब 23 मई को प्रात:8 बजे से लोकसभा चुनाव में मतों की गणना होनी है। फस्र्ट इंडिया न्यूज चैनल के दस से भी ज्यदा तेजतर्रार एंकरों के सवालों का जवाब देते हुए जगदीश चन्द्रा ने कहा कि राजस्थान में भाजपा को भले ही बड़ी सफलता मिल जाए लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कोई खतरना नहीं है। जहां तक डिप्टी सीएम सचिन पायलट का सवाल है तो पायलट हमेशा कांग्रेस के प्रति वफादार रहेंगे। कुछ लोगों का मानना है कि पायलट को सीएम पद का लालच देकर भाजपा अशोक गहलोत की सरकार को गिरा सकती है। चन्द्रा ने कहा कि जहां तक मेरी जानकारी में ऐसा प्रस्ताव विधानसभा चुनाव के बाद पायलट को तब भी दिया था जब कांगे्रस आला कमान ने गहलोत को सीएम बनाने का फैसला किया। चन्द्रा ने कहा कि पायलट को सीएम नहीं बनाने से उनके समर्थक और जाति विशेष के लोग मायूस तो हुए, लेकिन पायलट ने कभी भी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे कांग्रेस कमजोर हो। लोकसभा चुनाव में भी पायलट ने गहलोत के साथ मतभेद की खबरों को नकारा और राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे के साथ मिल कर तीनों ने प्रचार किया। चन्द्रा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा चाहे कितनी भी सीट जीत ले, लेकिन गहलोत सरकार के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। परिणाम के बाद कांग्रेस की राजनीति में बदलाव की संभावना नजर नहीं आती है। उन्होंने कहा कि गहलोत हमेशा गांधी परिवार के प्रति वफादार रहे हैं और राजनीति में भी गहलोत की छवि साफ-सुथरी है। यही वजह है कि कई मौकों पर गहलोत कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हो जाते हैं। जहां तक भाजपा की राजनीति में बदलाव की बात है तो मुझे नहीं लगता की राजस्थान में कोई बदलाव होगा। पूरा चुनाव नरेन्द्र मोदी के नाम पर लड़ा गया, यहां तक कि भाजपा के उम्मीदवारों ने मोदी का चेहरा सामने रखकर वोट मांगे। राजस्थान की राजनीति में अब वो ही होगा, जो नरेन्द्र मोदी और अमितशाह चाहेंगे। मंत्रिमंडल में भी मोदी और शाह की राय को ही तवज्जों मिलेगी। राजस्थान में अब ऐसा कोई नेता नहीं है जो आला कमान के समक्ष दबाव की राजनीति कर सके। जहां तक भाजपा और कांग्रेस को सीट मिलने का सवाल है तो दोनों ने ही अपने अपने दावे किए हैं। भाजपा ने जहां सभी 25 सीटों पर जीत की बात कही है, वहीं कांग्रेस के अनेक नेताओं का मानना है कि यदि दस सीटे भी मिल जाएगी तो राजस्थान में कांग्रेस मजबूत स्थिति में खड़ी होगी। चूंकि 2014 में एक सीट भी कांग्रेस को नहीं मिली। ऐसे में अब जो सीटें मिलेंगी उसका फायदा कांग्रेस को होगा। चन्द्रा ने कहा कि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी इस पर मेरा कोई आंकलन नहीं है। 

अमेठी में राहुल फंसे हैं, जबकि बनारस और अहमदाबाद में आसान जीत:

चन्द्रा ने कहा कि अमेठी में कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का भाजपा उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री स्मृति इरानी से कड़ी मुकाबला है। इसमें कोई दो राय  नहीं कि भाजपा की फायर ब्रांड नेता ईरानी ने अमेठी में भाजपा की मजबूत जमीन तैयार की है। चन्द्र का मानना रहा कि बनारस से नरेन्द्र मोदी और अहमदाबाद से अमितशाह की जीत आसान है। प्रियंका गांधी ने अपनी उम्मीदवार वापस लेकर मोदी को पहले ही वॉक ऑवर दे दिया, जबकि अहमदाबाद सीट पर अमितशाह के सामने कोई मुकाबला ही नहीं है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)

ईवीएम में छेड़छाड़ की बातें, खबरें सब झूठी-साजिश-क्लिक करें -पूरा पढें

- भारी पहरे और सीलबन्द कमरे, सीसीटीवी कैमरे- हो ही नहीं सकती गड़बड़


राजनैतिक पार्टियों द्वारा,ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की बात फैला कर एक बड़े दंगे की साजिश की जा रही है। हकीकत ये है कि जिस स्ट्रांग रूम में ईवीएम रखे गये हैं उनके सामने सीआरपीएफ के जवानों,पुलिस का सख्त पहरा है। और परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनको किसी भी पार्टी का प्रतिनिधि लाइव देख सकने की व्यवस्था है।कई बीएसफ के जवान भी तैनात किये गये हैं। वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता। लेकिन ईवीएम बदलने को लेकर एक बड़ा भ्रम फैलाया जा रहा है। अगर इन बातों की सच्चाई पर गौर नहीं किया गया तो हम सब के बीच के ही कई साथी इस साजिश की जद में आ सकते हैं। इसलिए जरूरी ये है कि आप सच्चाई से वाकिफ़ रहें। 

होता ये है कि जिस समय मतदान कराने के लिए पोलिंग पार्टियां रवाना होती हैं उनके साथ सेक्टर लेवल पर कई एक्स्ट्रा ईवीएम भेजी जाती हैं। जिससे मतदान के दौरान ईवीएम के खराब होने की शिकायत पर तत्काल दूसरे ईवीएम से मतदान कराया जा सके। कई बार ऐसा होता है कि कुछ एक बूथ पर ईवीएम में गड़बडी के बाद कुछ मिनट के भीतर स्टोर किये हुए ईवीएम का उपयोग कर लिया जाता है। अब होता ये है कि जिस ईवीएम से मतदान हुआ उसे जमा करके सील कर दिया जाता है। स्ट्रांग रूम  के सामने पैरामिलीट्री फोर्स की तैनाती कर दी जाती है। साथ ही जो  एक्स्ट्रा ईवीएम भेजी गई होती है। वो भी लौटकर आती है तो इसी परिसर के कोने में इन्हे भी जमा कर दिया जाता है। इनकी संख्या अधिकत 50 से 100 के बीच होती है। चुनाव ड्यूटी में लगे लोग इसे जमा कर लिखा पढ़ी करने के बाद अपने घर को लौट जाते हैं। अब राजनीतिक पार्टियां ईवीएम बदलने का आरोप प्रशासन पर लगा रही हैं। प्रदर्शन की कई तस्वीरें और वीडियोज शेयर किये जा रहे हैं। कृपया इनसे आप प्रभावित न हों और खुद को सुरक्षित रखें आप नेताओं के लिए बस विवाद का साधन हो सकते हैं, पर अपने परिवार की रोशनी हैं आप।।

हकीकत यह है कि evm के साथ tampering नही की जा सकती, न फिक्स किया जा सकता है,

हर स्तर पर सिक्योरिटी है, पोलिंग से पहले भी मॉक पोल् कर दर्शित किया जाता है कि मशीन में कोई वोट नही है और सबको समान वोट जा  रहे हैं।

हर स्टेज के पहले मशीनों का ऑब्ज़र्वर की उपस्थिति में randmisation किया जाता है, मशीन की सीलिंग से पूर्व राजनैतिक दलों की उपस्तिथि में 05 % मशीनों में  1000 वोट डालकर, vvpat की स्लिप्स से मिलान किया जाता है, अतः यह कहना भी कि, 50-100 वोट बाद किसी विशेष पार्टी को वोट जाते हैं मूर्खता की बात है, साथ ही काउंटिंग के समय भी रेंडमली सेलेक्ट मशीनों की स्लिप का evm के वोट से मिलान किया जाता है।

*Evms के दोनो randmisation के समय राजनैतिक दल उपस्थिति रहते हैं, तथा, मशीनों की पूरी detail मय नंबरों के इन दलों को दी जाती है और नेट पर डाली जाती है, और काउंटिंग के समय सबसे पहले evm मशीन के नम्बरों का मिलान और सील काउंटिंग एजेंट्स को दिखाया जाता है, अतः यह भी कहना कि, वोटिंग के बाद मशीने बदल कर हैक्ड मशीने रखी जाती है,, यह भी निहायत शरारतपूर्ण और धृष्टता ही है।*


चुनाव प्रक्रिया में, केंद्रीय *चुनाव आयोग के आब्जर्वर* जो IAS या allied IAS होते हैं, साथ ही माइक्रो आब्जर्वर, काउंटिंग आब्जर्वर, वीडियोग्राफर, जो हर कदम पर वीडियोग्राफी करते हैं,

साथ ही *जिले के कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, SDM, तहसीलदार, पटवारी, गिरदावर, विभिन्न विभागों के राजपत्रित अधिकारी, बाबू, शिक्षकगण, पुलिस के आला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिले के पुलिस के अन्य अधिकारी, विभिन्न पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवान और अफसर*, सभी लोग *भारत* देश मे निष्पक्ष मतदान कराने के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ लगते हैं।

मेरा अनुरोध है कि दूषित और विक्षिप्त मानसिकता के राजनेता अपने हार के भय से evm में गड़बड़ी के आरोप लगाकर भारत के निष्ठावान अधिकारियों कर्मचारियों, जो उनके घर परिवार में भी होंगे, साथ ही, महिला कार्मिक जिन्होंने इतनी गर्मी में भी बेहतरीन कार्य किया, जिनकी तस्वीरे भी आपके द्वारा वायरल की गई, उन सब का *घोर अपमान* है।।

अतः यदि कोई भी राजनीतिक दल evm में गड़बड़ी का आरोप लगा रहा है तो सरकार के जिम्मेदार कर्मचारियों, अधिकारियों, पुलिस के जवानों, भारतीय पैरामिलिट्री फ़ोर्स, महिला कार्मिको की सत्यनिष्ठा पर आरोप लगा रहा है, जो कतई असहनीय है, हम इसे सीधा सीधा इन सभी की सत्यनिष्ठा का अपमान समझेंगे, क्यों कि हमने 43 डिग्री तापमान में पूरे ढाई महीने काम करके चुनाव करवाए हैं। यह हमारा अपमान है।

* यदि यह पोस्ट आपको सही लगती है तो कृपया इसे फारवर्ड कर सत्यनिष्ठा की रक्षा करें। आम जनता में फैलाई जा रही अफवाहों पर रोक लगाने के दायित्व का भी निर्वहन करें।*

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(वाट्सअप से)



अटल काल में जेल से बचे-मोदी काल में जेल में ठूंसे जाने का भय- बडे़ घोटालेबाज नेता भयभीत

** करणी दान सिंह राजपूत **
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई  विनम्रता सहज भाव और अनेक कारणों से कांग्रेस जनों व कई बड़े लोगों द्वारा याद किये जा रहे हैं।अटलजी की विनम्रता का हर समय गुणगान करते हैं वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की जाती रही है। आखिर इसका कारण क्या है?
इस राजनीति को बहुत गहराई में जाकर समझा जा सकता है या समझने की आवश्यकता है।
अटल बिहारी वाजपेई को याद करने के पीछे,बार बार उनकी विनम्रता की याद दिलाने के पीछे कुछ कांग्रेस नेता और कुछ बड़े लोगों का खास मकसद है।
अटल बिहारी वाजपेई के काल में कुछ भी करते रहे बचते रहे बचाए जाते रहे। असल मे वाजपेयी कवि हृदय थे,शायद उनके मन में यह रहा हो कि लोग सुधर जाएंगे, लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त  लोग पनपते रहे। अब उनको भय सता रहा है नरेंद्र मोदी के काल में उनके विरुद्ध दबे हुए और दबाए हुए मामले खुलेंगे,चलेंगे और वे जेल में डाल दिये जाएंगे।
अटल बिहारी बाजपेई काल में विदेशी हवाई अड्डे पर जांच में ड्रग मिलने के आरोप में पकड़े गए कांग्रेसी नेता को विदेश में जेल जाने से बचाया था।
नरेंद्र मोदी के काल में बड़े लोगों में भय है कि जेल में ठूंस दिये जाएंगेऔर उसके बाद में बाहर निकलना मुश्किल होगा तथा राजनीति किसी और के हाथ में चली जाएगी।
बस, ऐसे ही कारण है कि अटल जी के काल को याद किया जा रहा है बार-बार प्रचारित किया जा रहा है कि अटल जी जैसा विनम्र होना चाहिए। मतलब अपराध करते पकड़े जाओ तो विनम्र प्रधानमंत्री जैसे काल में तिकड़म लगा जेल जाने से बच जाएं।
अच्छी तरह  से मालूम है कि विदेशी हवाई अड्डे पर पकड़े जाने और वाजपेई काल में फोन पर छोड़ दिए जाने के समाचार छपे। समाचारों में यह भी था की मां ने अटल जी से वार्ता की जिस पर बेटा जेल जाने से बच गया। ड्रग के मामले में विदेश की धरती पर गिरफ्तारी होने पर कितने साल की सजा होती? भारत की धरती पर राजनीति कोई और करता।
अब जितने भी बड़े नेता और उनके परिवारजन  किसी न किसी भ्रष्टाचार में दुराचार में लिप्त हैं उन्हें यह भय सता रहा है कि मोदी काल में जेल में डाल दिए गए तो फिर न जाने कितने साल तक जेलों में बीत जाएंगे। और जब बाहर निकलेंगे तब तक उनकी राजनीति का खेल खत्म हो चुका होगा।
प्रमुख रूप से बेटा और मां दोनों अंग्रेजी समाचार पत्र के भवन भूमि संपत्ति के मामले में फंसे हुए हैं, और बहुत कुछ होना बाकी है।
मीडिया के लोगों ने और खुद बेटे ने अनेक बार टीवी चैनलों पर बार बार दोहराया है कि मोदी जी प्रश्नों का जवाब नहीं देते। मोदी जी से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल किए गए। मीडिया का आरोप है कि उनका उत्तर नहीं दिया गया।
मीडिया किस का पक्ष ले रहा है या नहीं ले रहा है वह अपनी अपनी कार्यप्रणाली में खोजें।
मीडिया ने कभी मां और बेटे से प्रश्न किया?
विदेश में ड्रग के साथ गिरफ्तार किए जाने के प्रकरण पर क्या कभी उत्तर मांगा।
राहुल के विदेशी कंपनी में पार्टनरशिप में भी उस देश की नागरिकता के बारे में राहुल से सीधा सवाल मीडिया ने क्यों नहीं किया?
नेशनल हेराल्ड संपत्ति के मामले में मीडिया ने सीधा सवाल क्यों नहीं किया।अनेक मौके आए। उन मौकों पर मीडिया सवाल कर सकता था,लेकिन चुप्पी धारण की गई। एक चैनल पर रवीश  कुमार ही बोलते हैं। लोग सच्चा मानते हैं कि वे ही सही सच्चे पत्रकार हैं। क्या रवीश कुमार ने भी राहुल से इन प्रश्नों का उत्तर जानने की कोशिश की? मीडिया पूछता तो सही।
अब सभी को लग रहा है कि नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 5 वर्ष के लिए फिर शुरू होने वाला है और इन 5 सालों में बहुत कुछ हो सकता है इसलिए बार बार अटल बिहारी बाजपेई की विनम्रता को बखान किया जा रहा है, लेकिन मोदी वाजपेयी नहीं बन सकते।
अटल बिहारी वाजपेई और नरेंद्र मोदी की कार्य पद्धति में बहुत अंतर है।
एक बात और भी है कि हर प्रधानमंत्री ने अपने काल में विभिन्न घटनाओं व परिस्थितियों के बीच फैसले लिए। 
नरेंद्र मोदी के काल में 2014 से 2019 के बीच में भी घटनाओं परिस्थितियों के साथ ही फैसले लिए गए।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काल 2019-2024 फिर शुरू होने वाला है।मोदी काल सख्त माना जाता है। बड़े नेताओं को अपने अपराधों के कारण भय सता रहा है कि उनको गड़बड़ घोटालों की कानूनी प्रक्रियाओं के अंदर से गुजरना पड़ सकता है।


एनडीए के मोदी ही नेता- नरेन्द्र मोदी पर भरोसा जताया; मोदी को सम्मानित किया

NDA के डिनर में पहुंचे 36 सहयोगी दल, पीएम मोदी के नेतृत्व पर सबने जताया भरोसा: राजनाथ

नई दिल्ली 21 May 2019, 

चुनाव नतीजों से पहले मंगलवार को बीजेपी द्वारा आयोजित NDA की डिनर बैठक में 36 घटक दलों के नेता शामिल हुए। 

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता राजनाथ सिंह ने बताया कि 3 सहयोगी दल इस डिनर में नहीं पहुंच सके तो उन्होंने लिखित में अपना समर्थन दिया है।

 खास बात यह है कि एनडीए की मीटिंग और डिनर डिप्लोमेसी के बाद एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न सिर्फ अपना नेता चुनने की बात कही गई बल्कि उनके नेतृत्व की तारीफ भी की गई। सभी दलों ने पीएम मोदी के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया।


राजनाथ सिंह ने बताया कि NDA की बैठक में रामविलास पासवान के द्वारा प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पास किया गया। इसमें कहा गया कि NDA सच्चे अर्थों में भारत के सपनों और आकांक्षाओं का अलायंस है। प्रस्ताव में पीएम और उनके मंत्रियों को उल्लेखनीय कार्यों के लिए बधाई दी है। साथ ही भारत को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सरकार के कार्यों की सराहना की गई।


गृह मंत्री ने बताया कि पीएम और दूसरे नेताओं ने ईवीएम पर उठ रहे सवालों को लेकर चिंता व्यक्त की। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए राजनाथ ने बताया कि NDA ने संकल्प लिया है कि आनेवाले वर्षों में हम प्रगति की गति को और आगे लेकर जाएंगे और इन्फ्रास्ट्रक्चर में 100 लाख करोड़ का निवेश करेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास में 25 लाख करोड़ का निवेश किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में किसानों की आय को दोगुना करने, अंतरराष्ट्रीय जगत पर बढ़ी साख, आतंकवाद की भी प्रस्ताव में चर्चा की गई। पश्चिम बंगाल और केरल में हुई राजनीतिक हिंसा की प्रस्ताव में निंदा की गई।


राजनाथ ने कहा कि पिछले 5 साल लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरे करने वाले थे, अब NDA ने तय किया है कि आनेवाले 5 वर्षों में लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जाएगा। पीएम ने विकास के संदर्भ में क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने पर भी प्रतिबद्धता जताई। पीएम ने कहा कि एनडीए भारत की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करने वाला अलायंस है। आपको बता दें कि NDA की बैठक में अगले पांच वर्षों में विकास कार्यों पर चर्चा ऐसे समय में हुई है जब अभी चुनाव नतीजे आने बाकी है।

मीटिंग के बाद रामविलास पासवान ने विपक्ष की ओर से परिणाम से पहले ही चुनाव पर उठाए जा रहे सवालों पर कहा कि 'टिट फॉर टैट' होगा। 

मीटिंग में रामविलास पासवान ने ही मोदी के पक्ष में प्रस्ताव रखा जिसका सभी दलों ने अनुमोदन किया।

पासवान ने बताया कि पीएम ने कहा कि हमारा लक्ष्य कभी सत्ता पाना नहीं रहा है, हमारा लक्ष्य नए भारत का निर्माण है। हमने पांच वर्षों में वोट के हिसाब से कोई फैसला नहीं लिया। उन्होंने कहा कि एनडीए के सभी नेताओं ने अपने-अपने तरीके से पीएम का स्वागत किया।

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