गुरुवार, 30 मई 2019

श्रीगंगानगर-नांदेड नई साप्ताहिक ट्रेन का शुभारंभ 31मई को-सांसद निहालचंद झण्डी दिखाएंगे


श्रीगंगानगर, 30 मई 2019.

श्रीगंगानगर से वाया सादुलशहर, हनुमानगढ, संगरिया, मंडी डबवाली, बठिण्डा, नई दिल्ली होते हुए  हुजुर साहिब नांदेड के लिये नई साप्ताहिक रेल 31 मई 2019 शुक्रवार को श्रीगंगानगर स्टेशन से रवाना होगी। सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री निहालचंद रेलवे स्टेशन पर आयोजित समारोह में इस गाडी को दोपहर 1.35 बजे झण्डी दिखाकर रवाना करेगें। 

जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य श्री भीम शर्मा ने बताया कि गाडी संख्या 12439/12440 श्रीगंगानगर-नांदेड-श्रीगंगानगर साप्ताहिक सुपरफास्ट ट्रेन शुक्रवार को दोपहर 1.35 बजे श्रीगंगानगर से रवाना होकर 1.58 बजे सादुलशहर, 2.35 बजे हनुमानगढ जंक्शन, 3.08 बजे संगरिया, 3.35 बजे मण्डी डबवाली व 4.30 बजे बठिण्डा होते हुए शनिवार रात नांदेड पहुंचेगी। इस गाडी के लिये हनुमानगढ, सादुलशहर व संगरिया की सिख संगतों ने मांग रखी थी। इसके लिये सांसद श्री निहालचंद विगत जुलाई माह में रेलवे बोर्ड के सदस्य यातायात श्री गिरीश पिल्लई से मिले थे। इस गाडी के शुरू होने से सादुलशहर सहित उक्त स्टेशनों के रेल यात्रियों को अब रामपुरा फूल, तपा, बरनाला, धूरी, संगरूर, जाखल जंक्शन, जीन्द जंक्शन, रोहतक जंक्शन, नई दिल्ली, मथुरा जंक्शन, आगरा केन्ट, ग्वालियर जंक्शन, बीना जंक्शन, भोपाल जंक्शन, इटारसी जंक्शन, खण्डवा, मलकापुर, अकोला जंक्शन, वाशिम, हिंगोली डकन व पूर्णा स्टेशनों के लिये सीधी रेल सेवा की सुविधा मिल जायेगी। श्रीगंगानगर से शुक्रवार 1.35 बजे रवाना होने के बाद यह ट्रेन शनिवार रात्रि 11.45 बजे नांदेड़ पहुंचेगी व वापसी में गाड़ी संख्या 12439 नांदेड़-श्रीगंगानगर साप्ताहिक सुपरफास्ट प्रत्येक रविवार को सुबह 11 बजे नांदेड़ से रवाना होकर सोमवार की रात्रि 11.25 बजे श्रीगंगानगर पहुंचा करेगी। 

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सोमवार, 27 मई 2019

इस्तीफे पर अड़े हैं राहुल गांधी- कर्नाटक व राजस्थान की सरकारें डगमग दिखने लगी

 

नई दिल्ली 27 May 2019

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस गहरे आंतरिक संकट से गुजर रही है। यही नहीं कर्नाटक और राजस्थान में उसकी सरकारें डगमगाती दिख ही हैं। पार्टी की करारी शिकस्त के बाद से अब तक कुल 13 इस्तीफे हो चुके हैं। इनमें पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, झारखंड के अजय कुमार और असम के प्रदेश अध्यक्ष निपुन बोरा का भी इस्तीफा शामिल हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी अब भी इस्तीफे पर अड़े हुए हैं और उन्होंने कई नेताओं से कहा है कि यह वह वक्त है, जब पार्टी को नए चीफ की तलाश करनी चाहिए।


चर्चा से कांग्रेस परेशान


542 सीटों पर हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को महज 52 सीटें ही मिली हैं। 2014 के आम चुनावों के बाद यह लगातार दूसरा मौका है, जब कांग्रेस पार्टी की सीटें दोहरे अंकों पर ही सिमट गई हैं। यही नहीं लगातार दूसरी बार वह नेता विपक्ष का पद हासिल करने लायक सीटें भी नहीं ला पाई है। 2014 में कांग्रेस को 44 सीटें ही मिली थीं। कांग्रेस का 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खाता भी नहीं खुला।

राहुल ने सीनियर नेताओं पर लगाया बेटों को तवज्जो देने का आरोप

शनिवार को हुई कांग्रेस की वर्किंग कमिटी की मीटिंग में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि कांग्रेस की शीर्ष निर्णायक संस्था के सदस्यों ने एकमत से उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। यही नहीं कहा जा रहा है कि इस मीटिंग के दौरान राहुल गांधी ने पी. चिदंबरम, अशोक गहलोत और कमलनाथ जैसे सीनियर नेताओं पर पार्टी से ज्यादा बेटों को तवज्जो देने का भी आरोप लगाया था। कांग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग में सीनियर नेताओं के अलावा सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं।

पार्टी में आंतरिक संघर्ष के साथ ही कर्नाटक और राजस्थान में उसकी सरकारें भी दांव पर लगी हैं। इन दोनों ही राज्यों से बीजेपी के सक्रिय होने की खबरें हैं। कहा जा रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस विधायकों रमेश जरकिहोली और डॉ. सुधाकर ने बीजेपी नेता एस.एम कृष्णा से हाल ही में मुलाकात की थी। इस दौरान बीजेपी के अन्य नेता भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक ऐसे विधायकों की बड़ी संख्या है, जो लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन से नाखुश हैं।


राजस्थान में मंत्रियों की मांग, हार की तय हो जवाबदेही


राजस्थान में भी आतंरिक लड़ाई तेज है और ऐसे कई मंत्री हैं, जिनका कहना है कि इस करारी हार के लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। कर्नाटक में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका है। बीजेपी ने राज्य की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की है। यही नहीं पिछले साल मई में ही कर्नाटक में जेडीएस संग सराकर बनाने वाली कांग्रेस को सूबे की 28 में से महज एक सीट पर ही जीत मिली है।


पानी को तरसते लोग एसडीएम से मिले-सूरतगढ़ वार्ड नंबर 5 में पेयजल का गंभीर संकट-


- करणीदानसिंह  राजपूत- 

सूरतगढ 27 मई 2019.भयानक गर्मी में पानी की कमी को लेकर वार्ड नं 5 के अनेक लोग उपखण्ड अधिकारी रामावत  से मिले और समस्या सामने  रखी। नागरिकों की शिकायत थी कि जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने नई बनी टंकी को शुरू नहीं किया है।  वार्ड में पानी की गंभीर समस्या है।  कुछ मोहल्लों में पाइपलाइन भी नहीं डाली हुई है।

उपखंड अधिकारी रामावतार कुमावत ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की सहायक अभियंता से फोन पर बात कर इस परेशानी से नागरिकों को मुक्त कराने का निर्देश दिए हैं। पानी को तरसते लोग 28 मई को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता से मिलेंगे।

रविवार, 26 मई 2019

देश भर में चुनावआचार संहिता हटाई गई:सभी काम हो सकेंगे

दि. 26 मई 2019 भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019,व कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों की संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बाद आचार संहिता हटाने का आदेश जारी कर दिया है। 


हार के बाद कांग्रेस में हड़कंप-काफी उलट पलट की संभावना राहुल गांधी गुस्सा -


* गहलोत, कमलनाथ, चिदंबरम ने पार्टी से ज्यादा बेटों को दी तरजीह*

* कांग्रेस कार्य समिति सदस्यों द्वारा राहुल का इस्तीफा नामंजूर*


**कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राहुल ने कहा कि उन्होंने बीजेपी ओर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उठाए थे, पार्टी के नेता उसे जनता के पास ले जाने में असफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने खास तौर पर राफेल डील मामले और 'चौकीदार चोर है' नारे का जिक्र किया।**

26 मई 2019.


आम चुनाव 2019 में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व अपनी गलतियों की समीक्षा करने के लिए शनिवार को इकट्ठा हुआ। कांग्रेस वर्किंग कमेटी में हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन सीडब्ल्यूसी सदस्यों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। 

चुनाव नतीजों को लेकर नाराज राहुल गांधी ने कुछ सीनियर कांग्रेसी नेताओं को आड़े हाथ लिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने चुनाव में अपने बेटों को पार्टी से ज्यादा तरजीह दी। राहुल के मुताबिक, इन नेताओं ने अपने बेटों को टिकट देने में सारा जोर लिया दिया। राहुल गांधी ने ऐसी बात तब कही, जब इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मजबूत स्थानीय नेता खड़े करने का सुझाव दिया।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, राहुल ने इस बात का जिक्र किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी, वहां भी पार्टी ने बेहद खराब प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने अपने बेटों को टिकट देने के लिए दबाव बनाया, जबकि वह इसके पक्ष में नहीं थे। राहुल ने इसी संदर्भ में सीनियर कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम का भी नाम लिया। राहुल ने यह भी कहा कि उन्होंने बीजेपी ओर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उठाए थे, पार्टी के नेता उसे जनता के पास ले जाने में असफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने खास तौर पर राफेल डील मामले और ‘चौकीदार चोर है’ नारे का जिक्र किया।

खबर के मुताबिक, राहुल ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस हार के लिए जिम्मेदारी तय की जाए इसलिए वह अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके ऐसा ऐलान करते ही सीनियर पार्टी नेताओं ने इसका विरोध किया। सीनियर नेताओं का तर्क था कि राहुल गांधी ने आगे बढ़कर कांग्रेस की अगुआई की और उन्हें इस हार से दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है। खबरों के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की राय थी कि अगर राहुल इस्तीफा दे देते हैं तो बीजेपी की चाल सफल हो जाएगी। वहीं, पी चिदंबरम ने आशंका जताई की राहुल के इस्तीफे से आहत बहुत सारे कार्यकर्ता आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं।



मोदी की जीत का जश्न मनाएं:चित्रों की झलक






देश में और देश के बाहर भी मनाया जा रहा है नरेन्द्र मोदी का दूसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुने जाने का जश्न।

- करणीदानसिंह राजपूत - 

नरेन्द्र मोदी के आह्वान में बहुत बड़ी शक्ति रही थी कि 2019 के लोकसभा आमचुनाव में जनतांत्रिक गठबंधन को भारी जीत मिली। 353 सीटें मिली जिसमें अकेले भाजपा को 303 सीटें मिली।
मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया है। मोदी की जीत पर भारत को विश्व में शक्ति शाली राष्ट्र के रूप में पहचान मिली है।

मोदी ने आतंकवाद के विरूद्ध संसार को जगाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है तथा भारत को एक महत्वपूर्ण मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। इस वजह से विश्व के अन्य देशों की सोच बदल गई है।
मोदी ने बलूचिस्तान के आजादी मांग रहे लोगों को एक संबल प्रदान किया है तथा पाकिस्तान को उसकी हैसियत का एक नमूना दिया है। पाकिस्तान  कश्मीर की स्वायतता के राग अलापता रहा है उसे यह बता दिया है कि उसके कब्जे में जो कश्मीर का हिस्सा है वह भी भारत का हिस्सा है। उसको वापस भारत में शामिल किए जाने का ईशारा देकर भी अपने देश सहित दुनिया को भी ताकत का एहसास करा दिया है।

मोदी मोदी के ही नारों का जयघोष चारों ओर सुनाई पड़ रहा है।
करणी प्रेस इंडिया संग मनाएं मोदी की जीत का जश्न।

गुरुवार, 23 मई 2019

दुनिया की बड़ी खबर-जनता ने चलादी मोदी फिल्म-* करणीदानसिंह राजपूत *



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बायोपिक फिल्म को प्रतिपक्ष ने रुकवा दिया था कि इससे मोदी को लोकसभा आम चुनाव में लाभ होगा।

आश्चर्य जनक रहा है कि डिब्बाबंद फिल्म पड़ी रही और देश की जनता ने असली फिल्म को चला दिया। ऐसा प्रदर्शित कर दिया कि पुरानी अन्य फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ नया कीर्तिमान रच दिया। 

यह फिल्म चुनाव के दौरान प्रदर्शित हो जाती तो प्रतिपक्ष का आरोप होता कि इससे भारतीय जनता पार्टी को प्रचार मिला। घटनाक्रम ऐसे हुए की यह फिल्म प्रदर्शित नहीं हो पाई लेकिन भारतीय जनता पार्टी रिकॉर्ड तोड़ जीत प्राप्त कर गई। यह रिकॉर्ड जीत का जो नया बना वह केवल नरेंद्र मोदी के नाम से बना। भाजपा में फूट डालने के लिए लोगों ने यहां तक कहा कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी तक को खुडे लाइन लगा दिया है और अब यह एक व्यक्ति के नाम से चुनाव लड़ा जा रहा है।  प्रतिपक्ष ने और अनेक पत्रकारों अखबार और चैनल वालों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी, मगर उनका दुष्प्रचार बेअसर रहा। जनता ने बिना देखे ही मोदी फिल्म को मोदी के नाम पर चला दिया और दिल से चलाया। 

"मैं भी चौकीदार"और "इस बार फिर से मोदी सरकार" के नारे पूरे देश में लोकप्रिय हुए। मैं भी चौकीदार नारे का इतना अधिक प्रभाव हुआ कि चप्पे चप्पे में चौकीदार पैदा हो गए और करोड़ों की संख्या में हो गए। 

नरेंद्र मोदी पर चुनावी सभाओं में भद्दे से भद्दे शब्दों में आरोप लगाए गए। सारी मर्यादा तोड़ दी गई मगर जनता है यह सिद्ध कर दिया कि देश को ऐसे ही चौकीदार की जरूरत है जिसकी लाठी में इतना दम हो कि देश के गद्दार भ्रष्टाचारी तो डरें साथ में दुश्मन भी डरता रहे। 

नरेंद्र मोदी कि यह फिल्म चुनाव के वक्त दिखाई जाती तो चुनाव के बाद लोग भूल जाते। उसके बाद उसकी आवश्यकता ही नहीं होती,लेकिन अब 5 साल तक नरेंद्र मोदी की फिल्म चलती रहेगी।

 पहले घोषणाएं भाषण हुए थे कि विपक्ष 2019 को भूल जाए व 2024 की तैयारी करे क्योंकि 2019 में तो भाजपा गठबंधन की ही सरकार बनेगी।  ये भाषण घोषणाएं और ललकार सब सच साबित हुई। नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों को जनता ने सराहा और एकदम चुप रहते हुए भी जबरदस्त वोटिंग नरेंद्र मोदी के पक्ष में की। 

भारत के इस लोकसभा आमचुनाव पर देश के साथ विश्व की निगाहें भी लगी हुई थी। इस चुनाव से संपूर्ण विश्व में भारत शक्तिशाली प्रधानमंत्री वाले शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित हुआ है।

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बुधवार, 22 मई 2019

बलराम वर्मा की सूरतगढ़ पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ने में दिलचस्पी

^^ करणीदानसिंह राजपूत ^^

सूरतगढ़ 22 मई 2019.

कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष बलराम वर्मा नगर पालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे। 

बलराम वर्मा ने आज रात्रि एक शादी समारोह  में बताया कि आगामी नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में वे खड़े होंगे। पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कुछ महीने ही शेष हैं।

बलराम वर्मा पूर्व में यहां नगरपालिका पार्षद रह चुके हैं।बलराम वर्मा के पुत् एडवोकेट वेद वर्मा भी पार्षद रह चुके हैं। वर्तमान में पुत्र वधू अलका वर्मा पार्षद हैं।  बलराम वर्मा पूर्व में सरपंच पद पर भी रह चुके हैं। पिछले करीब 1 वर्ष से कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष पद पर हैं। नगरपालिका सूरतगढ़ का अध्यक्ष पद विधायक पद के बराबर माना जाता है।






एक लाख रुपए की रिश्वत लेते एईएन सुरेन्द्र कुमार गिरफ्तार- करोड़ों की संपत्ति का मालिक है एईएन।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 22 मई 2019 को बड़ी कार्यवाही करते हुए अजमेर जलदाय विभाग के किशनगढ़ में तैनात एईएन सुरेन्द्र कुमार को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सुरेन्द्र कुमार के साथ विभाग के वरिष्ठ सहायक नवरत्न सोलंकी को भी गिरफ्तार किया गया है। ब्यूरो ने यह कार्यवाही अजमेर के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के दिशा निर्देश में की है। ब्यूरो के डीएसपी महिपाल चौधरी ने बताया कि ठेकेदार मंगलाराम ने रेलवे में डीएफसीसी में पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया था। हालांकि भुगतान ठेकेदार को डीएफसीसी से ही मिलना था, लेकिन भुगतान से पहले किशनगढ़ के जलदाय विभाग की एनओसी जरूरी थी। इस एनओसी को देने की एवज में ही दो लाख रुपए की मांग की गई। ठेकेदार मंगलाराम ने एक लाख रुपए की राशि पहले ही दे दी थी। ब्यूरो की योजना के अनुरूप 22 मई को जब ठेकेदार मंगलाराम एक लाख रुपए की रिश्वत देने पहुंचा तो ब्यूरो की टीम ने एईएन सुरेन्द्र कुमार और वरिष्ठ सहायक नवरात्न सोलंकी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। चौधरी ने बताया कि अब दोनों रिश्वतखोरों के घरों की तलाश ली जा रही है। एक लाख रुपए की रिश्वत का मामला अपने आप में बड़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलदाय विभाग में किस स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। 

करोड़ों की संपत्ति

एसीबी के सूत्रों के अनुसार सुरेन्द्र कुमार पिछले कई वर्षों से किशनगढ़ में ही नियुक्त है। अब तक की जानकारी के अनुसार तीन-तीन बंगलों का मालिक है तािा वह एशोआराम की जिन्दगी व्यतीत करता है। एईएन के बेटों के पास डेढ़ लाख रुपए की कीमत वाली मोटर साइकिल है। 

दझ

राजस्थान में बड़ा सवाल- हारे तो किसकी होगी जिम्मेदारी? वैभव गहलोत हारा तो क्या होगा?

लोकसभा चुनाव की मतगणना से एक दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत का दावा किया है। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों से उनकी फोन पर बात हुई है। सभी उम्मीदवार उत्साहित है। सीएम के दावे अपनी जगह है, लेकिन न्यूज चैनलों का जो सर्वे आया है उसमें कांग्रेस को 2-4 सीटेें ही मिलने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि हार हुई तो राजस्थान में किस नेता की जिम्मेदारी होगी? सब जानते हैं कि पांच माह पहले विधानसभा के चुनाव में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही माना गया कि कांग्रेस को बहुमत मिलने पर पायलट ही मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन कांगे्रस आला कमान ने गहलोत को सीएम बनवा दिया। यही वजह है कि अब लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनावी राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि यदि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार होती तो पूरी जिम्मेदारी पायलट की ही बनती। लेकिन अब जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अशोक गहलोत बैठे हैं तो हार की जिम्मेदारी भी गहलोत की ही बनेगी। हालांकि लोकसभा चुनाव में गहलोत और पायलट ने एक साथ प्रचार किया, लेकिन सब जानते हैं कि यह प्रचार किस प्रकार कर रहा। सवाल यह भी है कि क्या संभावित हार की जिम्मेदारी सचिन पायलट लेंगे? जब पायलट को जीत का ईनाम नहीं मिला तो वे हार की जिम्मेदारी क्यों लेंगे?

पायलट के समर्थक अभी गहलोत के सीएम बनने को पचा नहीं पाए हैं। ऐसे समर्थकों को कहना है कि लोकसभा चुनाव की मतगणना में गुर्जर बहुल्य मतदान केन्द्र पर कांग्रेस को मिले वोट से अंदाजा लगाया जा सकता है। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में गुर्जर बहुल्य मतदान केन्द्रों के मतों का मिलान किया जाएगा तो हार के कारणों का पता चल जाएगा। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री होने के नाते गहलोत हार की जिम्मेदारी लेंगे? गहलोत के लिए एक मुसीबत जोधपुर का परिणाम भी है। जोधपुर से गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। यदि वैभव की भी हार होती है तो गहलोत का मुख्यमंत्री के पद पर टिका रहना मुश्किल होगा। यह भी देखना होगा कि लोकसभा चुनाव के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कैसे संबंध रहते हैं?

एस.पी.मित्तल) (22-05-19) साभार



नरेन्द्र मोदी की संभावित जीत पर इतना बवाल क्यों?


** विपक्षी दलों की मांग खारिज। मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं। **

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22 मई को चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की उस मांग को खारिज कर दिया है। जिसमें ईवीएम के मतों की गणना से पहले विधानसभा वार पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों से मिलान कराने की बात कही गई थी। मांग को लेकर 21 मई को 22 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने आयोग को ज्ञापन दिया था। 22 मई को आयोग के फुल कमिशन की बैठक हुई। बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि 23 मई को देशभर में होने वाली मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। अब पहले के दिशा निर्देशों के अनुरूप वीवीपेट की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों की गणना के बाद होगा। एक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केन्द्रों की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों से करना है। जिन पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों का मिलान होगा, उन केन्द्रों का चयन रेंडम पद्धति से होगा। मिलान के बाद ही परिणाम की अधिकृत घोषणा हो सकेगी। लेकिन निर्वाचन विभाग राउंडवार मतगणना की जानकारी सार्वजनिक करता रहेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ईवीएम में किसी भी प्रकार से गड़बड़ी नहीं हो सकती है। ईवीएम सिर्फ बैट्री पर संचालित है। इंटरनेट तकनीक का ईवीएम में कोई उपयोग नहीं है, इसलिए हैक की आशंकाएं निर्मूल हैं। 

जीत पर बवाल क्यों?: 

अधिकृत तौर पर तो 23 मई को ही पता चलेगा कि लोकसभा चुनाव में किसकी जीत हुई है, लेकिन मतगणना से पहले जो रुझान सामने आए हैं उसमें नरेन्द्र मोदी की जीत मानी जा रही है। मोदी की जीत की संभावना पर बिहार के एक नेता ने खून खराबे की आशंका जताई है। विपक्षी नेता का यह बयान देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक संदेश हैं। दुनिया के कई देशों में देखा गया कि सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति बने व्यक्ति मतदान में धांधली कर वर्षों तक सत्ता में बने रहते हैं। कई बार ऐसे तानाशाह शासकों के विरुद्ध संबंधित देश की जनता सड़कों पर आ जाती है और राष्ट्रपति भवन या संसद के बाहर धरना दिया जाता है। ऐसे धरनों से तख्ता पलट भी हो जाता है। लेकिन भारत में उल्टा हो रहा है जिस नेता को जनता ने वोट दिया है उस नेता के चुनाव पर अंगुली उठाई जा रही है। विपक्षी दलों के नेता भी मानते हैं कि इस बार का लोकसभा का चुनाव मोदी बनाम अन्य हुआ है। एनडीए में शामिल राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मोदी के चेहरे को आगे रख कर वोट मांगे हैं। कांग्रेस सहित तमाम विपक्ष ने अपने प्रचार अभियान में मोदी को ही निशाना बनाया। विपक्ष का मकसद सिर्फ मोदी को हटाना रहा। मोदी को हटाने के लिए विपक्षी दल जो कुछ भी कर सकते थे वो किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो अपनी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीताने के लिए पूरी सरकार को ही दांव पर लगा दिया। पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तो टीएमसी के कार्यकर्ता की भूमिका निभाई। गुंडातत्वों ने टीएमसी के उम्मीदवारों के लिए मतदान करवाया। इतना सब कुछ करने के बाद भी विपक्षी दलों को चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि परिणाम से पहले ही देश का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। यदि मोदी की जीत होती है तो चुनाव प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की जाएगी। यदि पश्चिम बंगाल में मोदी को 15 से 20 सीटें मिल गई तो हो सकता है कि ममता बनर्जी लाख दो लाख लोगों को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठ जाएं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पहचान तो धरना सीएम से ही है। दिल्ली में धरना देंगे तो दुनिया भर में भारत की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। असल में विपक्षी दल मोदी की जीत को पचाने की स्थिति  में नहीं है। लाख कोशिश के बाद भी जब मोदी हारते नजर नहीं आ रहे हैं तो खून खराबे, धरना प्रदर्शन आदि की नीति अमल में लाई जा रही है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)



राजस्थान में भाजपा की बड़ी जीत पर भी अशोक गहलोत को खतरा नहीं।

फस्र्ट इंडिया न्यूज चैनल के हैड  की 

चुनाव परिणाम से पहले खास विश्लेषण*

इंनडिया न्यूज चैनल के हैड जगदीश चन्द्रा ने 22 मई को राजस्थान की राजनीति के संदर्भ में अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया है। राजनीतिक घटनाओं का सटीक आंकलन करने वाले जगदीश चन्द्रा का यह विश्लेषण चैनल पर 22 मई को दोपहर तब प्रसारित हुआ, जब 23 मई को प्रात:8 बजे से लोकसभा चुनाव में मतों की गणना होनी है। फस्र्ट इंडिया न्यूज चैनल के दस से भी ज्यदा तेजतर्रार एंकरों के सवालों का जवाब देते हुए जगदीश चन्द्रा ने कहा कि राजस्थान में भाजपा को भले ही बड़ी सफलता मिल जाए लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कोई खतरना नहीं है। जहां तक डिप्टी सीएम सचिन पायलट का सवाल है तो पायलट हमेशा कांग्रेस के प्रति वफादार रहेंगे। कुछ लोगों का मानना है कि पायलट को सीएम पद का लालच देकर भाजपा अशोक गहलोत की सरकार को गिरा सकती है। चन्द्रा ने कहा कि जहां तक मेरी जानकारी में ऐसा प्रस्ताव विधानसभा चुनाव के बाद पायलट को तब भी दिया था जब कांगे्रस आला कमान ने गहलोत को सीएम बनाने का फैसला किया। चन्द्रा ने कहा कि पायलट को सीएम नहीं बनाने से उनके समर्थक और जाति विशेष के लोग मायूस तो हुए, लेकिन पायलट ने कभी भी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे कांग्रेस कमजोर हो। लोकसभा चुनाव में भी पायलट ने गहलोत के साथ मतभेद की खबरों को नकारा और राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे के साथ मिल कर तीनों ने प्रचार किया। चन्द्रा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा चाहे कितनी भी सीट जीत ले, लेकिन गहलोत सरकार के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। परिणाम के बाद कांग्रेस की राजनीति में बदलाव की संभावना नजर नहीं आती है। उन्होंने कहा कि गहलोत हमेशा गांधी परिवार के प्रति वफादार रहे हैं और राजनीति में भी गहलोत की छवि साफ-सुथरी है। यही वजह है कि कई मौकों पर गहलोत कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हो जाते हैं। जहां तक भाजपा की राजनीति में बदलाव की बात है तो मुझे नहीं लगता की राजस्थान में कोई बदलाव होगा। पूरा चुनाव नरेन्द्र मोदी के नाम पर लड़ा गया, यहां तक कि भाजपा के उम्मीदवारों ने मोदी का चेहरा सामने रखकर वोट मांगे। राजस्थान की राजनीति में अब वो ही होगा, जो नरेन्द्र मोदी और अमितशाह चाहेंगे। मंत्रिमंडल में भी मोदी और शाह की राय को ही तवज्जों मिलेगी। राजस्थान में अब ऐसा कोई नेता नहीं है जो आला कमान के समक्ष दबाव की राजनीति कर सके। जहां तक भाजपा और कांग्रेस को सीट मिलने का सवाल है तो दोनों ने ही अपने अपने दावे किए हैं। भाजपा ने जहां सभी 25 सीटों पर जीत की बात कही है, वहीं कांग्रेस के अनेक नेताओं का मानना है कि यदि दस सीटे भी मिल जाएगी तो राजस्थान में कांग्रेस मजबूत स्थिति में खड़ी होगी। चूंकि 2014 में एक सीट भी कांग्रेस को नहीं मिली। ऐसे में अब जो सीटें मिलेंगी उसका फायदा कांग्रेस को होगा। चन्द्रा ने कहा कि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी इस पर मेरा कोई आंकलन नहीं है। 

अमेठी में राहुल फंसे हैं, जबकि बनारस और अहमदाबाद में आसान जीत:

चन्द्रा ने कहा कि अमेठी में कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का भाजपा उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री स्मृति इरानी से कड़ी मुकाबला है। इसमें कोई दो राय  नहीं कि भाजपा की फायर ब्रांड नेता ईरानी ने अमेठी में भाजपा की मजबूत जमीन तैयार की है। चन्द्र का मानना रहा कि बनारस से नरेन्द्र मोदी और अहमदाबाद से अमितशाह की जीत आसान है। प्रियंका गांधी ने अपनी उम्मीदवार वापस लेकर मोदी को पहले ही वॉक ऑवर दे दिया, जबकि अहमदाबाद सीट पर अमितशाह के सामने कोई मुकाबला ही नहीं है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)

अटल काल में जेल से बचे-मोदी काल में जेल में ठूंसे जाने का भय- बडे़ घोटालेबाज नेता भयभीत

** करणी दान सिंह राजपूत **
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई  विनम्रता सहज भाव और अनेक कारणों से कांग्रेस जनों व कई बड़े लोगों द्वारा याद किये जा रहे हैं।अटलजी की विनम्रता का हर समय गुणगान करते हैं वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की जाती रही है। आखिर इसका कारण क्या है?
इस राजनीति को बहुत गहराई में जाकर समझा जा सकता है या समझने की आवश्यकता है।
अटल बिहारी वाजपेई को याद करने के पीछे,बार बार उनकी विनम्रता की याद दिलाने के पीछे कुछ कांग्रेस नेता और कुछ बड़े लोगों का खास मकसद है।
अटल बिहारी वाजपेई के काल में कुछ भी करते रहे बचते रहे बचाए जाते रहे। असल मे वाजपेयी कवि हृदय थे,शायद उनके मन में यह रहा हो कि लोग सुधर जाएंगे, लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त  लोग पनपते रहे। अब उनको भय सता रहा है नरेंद्र मोदी के काल में उनके विरुद्ध दबे हुए और दबाए हुए मामले खुलेंगे,चलेंगे और वे जेल में डाल दिये जाएंगे।
अटल बिहारी बाजपेई काल में विदेशी हवाई अड्डे पर जांच में ड्रग मिलने के आरोप में पकड़े गए कांग्रेसी नेता को विदेश में जेल जाने से बचाया था।
नरेंद्र मोदी के काल में बड़े लोगों में भय है कि जेल में ठूंस दिये जाएंगेऔर उसके बाद में बाहर निकलना मुश्किल होगा तथा राजनीति किसी और के हाथ में चली जाएगी।
बस, ऐसे ही कारण है कि अटल जी के काल को याद किया जा रहा है बार-बार प्रचारित किया जा रहा है कि अटल जी जैसा विनम्र होना चाहिए। मतलब अपराध करते पकड़े जाओ तो विनम्र प्रधानमंत्री जैसे काल में तिकड़म लगा जेल जाने से बच जाएं।
अच्छी तरह  से मालूम है कि विदेशी हवाई अड्डे पर पकड़े जाने और वाजपेई काल में फोन पर छोड़ दिए जाने के समाचार छपे। समाचारों में यह भी था की मां ने अटल जी से वार्ता की जिस पर बेटा जेल जाने से बच गया। ड्रग के मामले में विदेश की धरती पर गिरफ्तारी होने पर कितने साल की सजा होती? भारत की धरती पर राजनीति कोई और करता।
अब जितने भी बड़े नेता और उनके परिवारजन  किसी न किसी भ्रष्टाचार में दुराचार में लिप्त हैं उन्हें यह भय सता रहा है कि मोदी काल में जेल में डाल दिए गए तो फिर न जाने कितने साल तक जेलों में बीत जाएंगे। और जब बाहर निकलेंगे तब तक उनकी राजनीति का खेल खत्म हो चुका होगा।
प्रमुख रूप से बेटा और मां दोनों अंग्रेजी समाचार पत्र के भवन भूमि संपत्ति के मामले में फंसे हुए हैं, और बहुत कुछ होना बाकी है।
मीडिया के लोगों ने और खुद बेटे ने अनेक बार टीवी चैनलों पर बार बार दोहराया है कि मोदी जी प्रश्नों का जवाब नहीं देते। मोदी जी से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल किए गए। मीडिया का आरोप है कि उनका उत्तर नहीं दिया गया।
मीडिया किस का पक्ष ले रहा है या नहीं ले रहा है वह अपनी अपनी कार्यप्रणाली में खोजें।
मीडिया ने कभी मां और बेटे से प्रश्न किया?
विदेश में ड्रग के साथ गिरफ्तार किए जाने के प्रकरण पर क्या कभी उत्तर मांगा।
राहुल के विदेशी कंपनी में पार्टनरशिप में भी उस देश की नागरिकता के बारे में राहुल से सीधा सवाल मीडिया ने क्यों नहीं किया?
नेशनल हेराल्ड संपत्ति के मामले में मीडिया ने सीधा सवाल क्यों नहीं किया।अनेक मौके आए। उन मौकों पर मीडिया सवाल कर सकता था,लेकिन चुप्पी धारण की गई। एक चैनल पर रवीश  कुमार ही बोलते हैं। लोग सच्चा मानते हैं कि वे ही सही सच्चे पत्रकार हैं। क्या रवीश कुमार ने भी राहुल से इन प्रश्नों का उत्तर जानने की कोशिश की? मीडिया पूछता तो सही।
अब सभी को लग रहा है कि नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 5 वर्ष के लिए फिर शुरू होने वाला है और इन 5 सालों में बहुत कुछ हो सकता है इसलिए बार बार अटल बिहारी बाजपेई की विनम्रता को बखान किया जा रहा है, लेकिन मोदी वाजपेयी नहीं बन सकते।
अटल बिहारी वाजपेई और नरेंद्र मोदी की कार्य पद्धति में बहुत अंतर है।
एक बात और भी है कि हर प्रधानमंत्री ने अपने काल में विभिन्न घटनाओं व परिस्थितियों के बीच फैसले लिए। 
नरेंद्र मोदी के काल में 2014 से 2019 के बीच में भी घटनाओं परिस्थितियों के साथ ही फैसले लिए गए।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काल 2019-2024 फिर शुरू होने वाला है।मोदी काल सख्त माना जाता है। बड़े नेताओं को अपने अपराधों के कारण भय सता रहा है कि उनको गड़बड़ घोटालों की कानूनी प्रक्रियाओं के अंदर से गुजरना पड़ सकता है।


सोमवार, 20 मई 2019

क्या राजस्थान में भाजपा फिर सभी 25 सीटें जीत लेगी?


**श्रीगंगानगर सिरमोर-राजस्थान की 25 सीटों पर मतदान में वृद्धि**


* करणीदान सिंह राजपूत  * 


लोकसभा आम चुनाव 2019 में राजस्थान की समस्त 25 लोकसभा सीटों पर सन 2014 के मुकाबले अधिक मतदान हुआ है।

राजस्थान में बेहद गर्मी होने के बावजूद 2019 चुनाव का मतदान 2014 के मुकाबले अधिक होने को लेकर भाजपा में अधिक प्रसन्नता है। भाजपा कार्यकर्ता मानते हैं कि 'फिर इस बार मोदी सरकार " के नारे की अपील को मतदाताओं ने दिल से स्वीकार किया और पूरे देश में मोदी मय वातावरण हो गया। यही वातावरण राजस्थान में छा गया। 

राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2018 के बाद सरकार कांग्रेस की जरूर बनी लेकिन भाजपा भी ताकतवर बनी रही।

लोकसभा चुनाव 2014 में राजस्थान की 25 सीटों पर भाजपा का परचम लहराया था,लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 18 या 20 सीटों के मिलने की संभावना मानी जा रही थी।

लेकिन अब बदले वातावरण में 25 सीटों पर नई संभावना हुई है कि भाजपा अपनी सभी सीटें सुरक्षित रखने में कामयाब हो सकती है।

( नागौर की सीट समझौते मेंं हनुमान बेनीवाल को दी हुई है, मगर गणना मेंं एक साथ मान लेते हैं)

दि. 7-5-2019
अपडेट 20-5-2019.

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राजस्थान में कांग्रेस की सीटें 3-4 आई तो किस तरह के हालात होंगे?

* पूर्वानुमानों से एक खेमे में हलचल तो एक गंभीर*
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अपडेट 20-5-2019.

राजस्थान में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस तीन चार सीटों पर ही सिमट कर रह जाने के लगातार आ रहे आकलन और अनुमान के कारण पार्टी में हलचल पैदा हो रही है।
अशोक गहलोत येन केन सचिन पायलट  को मुख्यमंत्री की दौड़ में पछाड़ कर मुख्यमंत्री तो बन गये थे मगर अब लोकसभा चुनावों में हार का ठीकरा भी उन्हीं के सर फूटेगा, इसलिए कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व पर राजस्थान में मुख्यमंत्री बदलने के लिए दबाव बनाया जायेगा । 


इस हालत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत की कमजोर मानी जा रही सीट नहीं जीती जा सकी तो अशोक गहलौत पर  नैतिकता  के नाम मुख्यमंत्री पद छोड़ देने के लिए भी दबाव पड़ना निश्चित होगा। 


सभी जानते हैं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट ने हरकदम पर जोर लगाया और इस वजह से अशोक गहलौत को देरी से सीएम घोषित किया गया लेकिन इससे पहले सचिन को उपमुख्यमंत्री तय किया गया।
विधानसभा चुनाव में टिकटों की सिफारिश में भी सचिन का पूरा दबाव रहा था। इसके बाद भी चुनावी हलचल पर गौर करें कि अशोक गहलौत जहां जहां गए,वहां सचिन छाया के रूप में साथ रहे। ये सभी हालात प्रमाण हैं कि राजस्थान में अशोक गहलौत से सचिन पायलट बराबर की पावर में हैं। 
अशोक गहलौत ने लोकसभा की समस्त 25 सीटें जिताने का दावा किया था और इसमें हालात 3-4 तक ही सिमट जाएं तो पद छोड़ने का दबाव कितना अधिक होगा? 
जब आम जनता चुनाव के परिणाम का अनुमान लगा रही है तो कांग्रेस के भीतर भी सुगबुगाहट शुरू है। मुख्यमंत्री बदला जा सकने की सुगबुगाहट हो तो ऐसी स्थिति में नया मुख्यमंत्री कौन होगा?
(अगर कांग्रेस के पूर्व अनुमान से आधी सीटे यानि की 12 से 15 के बीच भी कांग्रेस जीत जाती है तो मुख्यमंत्री बदलने जैसा कदम नहीं होगा। इस स्थिति में भी मुख्यमंत्री बदलने की मांग तो उठेगी मगर कांग्रेस केन्द्रीय नेतृत्व को जोर आयेगा व परिवर्तन आसान नहीं होगा।)

पूर्व अनुमान और परिवर्तन के अनुमान कुछ भी हों,मगर सही स्थिति तो चुनावी परिणाम के बाद ही पता चलेगी। 
राजस्थान में 13 सीटों पर 29-4-2019 के मतदान के बाद शेष 12 सीटों के चुनाव की तैयारी रही जिसमें सभी व्यस्त रहे। 


पहले 13 सीटों और बाद मेंं जब शेष 12 सीटों पर हुए मतदान की हवा और वातावरण का मालूम हुआ तब समस्त 25 सीटों की सुगबुगाहट शुरू हो गई। 
संपूर्ण राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2013 के बाद कहीं नजर ही नहीं आता कि राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलौत की सरकार का राज है। कोई परिवर्तन नहीं और अपराधियों में कोई भय नहीं।



ऐसी हालत और उसमें कमजोर परिणाम आने की संभावना से एक खेमें में हलचल और एक में गंभीरता की चर्चाएं हैं। **
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लेखन 9-5-2019.
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रविवार, 19 मई 2019

श्रीगंगानगर-निहाल चंद की जीत पक्की- क्यों और कैसे-


-- करणीदानसिंह राजपूत --

श्रीगंगानगर संसदीय क्षेत्र में 2014 से 2019 की अवधि में सांसद निहाल चंद द्वारा अनेक विकास कार्य करवाने, रेलों  का विस्तार करवाने के बावजूद अनेक लोग नाराज रहे। सन 2019 के चुनाव में विरोध के बावजूद भाजपा की टिकट मिली और अब जीत पक्की होने की उम्मीद भी पक्की मानी जा रही है। अखबारों में समाचार और अनेक वरिष्ठ पत्रकारों ने भी जीत पक्की मानली। निहालचंद के नजदीकी पूरी पक्की जीत एक लाख वोटों से मान रहे हैं लेकिन साथ में यह चर्चा भी जोड़ते हैं कि जीत इससे कहीं अधिक वोटों से होगी।

एक और पकायत मानी जा रही है और खास नजदीकी लोगों द्वारा खास खास लोगों को चर्चा में बताया जा रहा है कि इस बार जीत के साथ मंत्री मंडल में भी आना फिर से होगा।

निहालचंद खुद अपनी जीत के लिए पूर्ण आश्वस्त हैं। चुनाव परिणाम से पहले किसी की भी जीत की घोषणा करना खांडे की धार पर चलना होता है। प्रत्याशी और उसकी पार्टी जीत की घोषणा करती है तो वह अलग बात होती है, लेकिन चुनाव की स्थिति से आकलन किया जाता है। श्री गंगानगर सीट पर भी जो अनुमान हैं वह भाजपा के निहाल चंद की जीत के हैं।

निहाल चंद की जीत 1 लाख से अधिक की मानी जा रही है, लेकिन वह और अधिक ही होगी।


सन 2014 में भाजपा के निहाल चंद को  6,58,130 वोट 38 % इंडियन नेशनल कांग्रेस के भंवरलाल मेघवाल को 3,66,389 वोट 21% मिले और जीत का अंतर 2,91,741 का रहा था। उस चुनाव में शिमला देवी नायक को भी 1,06,585 वोट 6% मिले थे।


इस बार 2019 के चुनाव में मोटे तौर पर 14,44,000 वोट डाले गए हैं। कुल 9 प्रत्याशी हैं जिनमें मुख्य टक्कर भाजपा और इंडियन नेशनल कांग्रेस के बीच ही रही है। निहाल चंद के विरुद्ध आवाजें तो चंद लोगों ने लगाई मगर उनमें अधिक दम नहीं था। वैसे भी चुनाव में निहाला कम मोदी ही हावी रहे। लोग कहते भी रहे की मोदी को फिर से पीएम बनाना है। भाजपा भी कहती रही और देश में भी यही प्रचारित किया गया कि कमल चिन्ह पर दिया वोट सीधा मोदी के खाते में जाएगा।इसलिए यह जीत मोदी की होगी। लोगों का अनुमान 1 लाख से अधिक का है, लेकिन यह जीत पिछली जीत जैसी हो सकती है।***

19-5-2019( मतदान 6-5-2019.)


 







शुक्रवार, 17 मई 2019

एसीबी ने अधिशाषी अभियंता को 55 सौ रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया


जयपुर,17 मई 2019.

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) हनुमानगढ़ टीम ने शुक्रवार 17-5-2019 को कार्यवाही करते हुए जलदाय विभाग कार्यालय जिला हनुमानगढ़ में कार्यरत अधिशाषी अभियंता मेजर सिंह ढिल्लन को 55 सौ रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।


    भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि परिवादी ने एसीबी में यह शिकायत दी कि उसके द्वारा की गई कार्य  के पेंडिंग बिलों को पास करने की एवज में अधिशासी अभियंता 55 सौ रुपए की रिश्वत की राशि की मांग कर रहा है।


       भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हनुमानगढ़ श्री गणेश नाथ के नेतृत्व में उक्त मांग का सत्यापन करवा कर आज अधिशाषी अभियंता मेजर सिंह ढिल्लन को 55 सौ रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया एवं अग्रिम कार्रवाई जारी है।

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सूरतगढ़ की बड़ी खबर-मनोज स्वामी को साहित्य अकादमी सम्मान पुरस्कार 50 हजार रू.अगरतल्ला समारोह में प्रदान होगा: - - करणीदानसिंह राजपूत --



सूरतगढ़ 17 मई 2019.

राजस्थानी साहित्यकार एवं पत्रकार मनोज कुमार स्वामी को केन्द्रीय साहित्य अकादमी की ओर से 'नाव अर जाळ' राजस्थानी अनुवाद  पर  वर्ष 2018 के पुरस्कारों में यह पुरस्कार  जनवरी 2019 में घोषित हुआ था। इसमें स्वामी को 50,000 की राशि का चैक व सम्मान 14 जून 2019 को अगरतल्ला में आयोजित समारोह में अकादमी अध्यक्ष प्रदान करेंगे।

मनोज कुमार स्वामी ने मलयालम भाषा के नामी लेखक तकष़ी शिव  शंकर पिल्लेे के उपन्यास 'चेम्मीन' ( जिसका हिन्दी मतलब होता है मछुआरे का राजस्थानी भाषा में अनुवाद किया जो 'नाव अर जाळ' नाम से अकादमी की ओर से 2014 में प्रकाशित कराया गया था। 

 चेम्मीन को केन्द्रीय साहित्य अकादमी ने  सन 1957 में पुरस्कार. प्रदान किया था और 61 साल बाद राजस्थानी अनुवाद 'नाव अर जाळ' को सन 2018 का अनुवाद पुरस्कार प्रदान होगा।  


' नाव अर जाळ' एक रोचक प्रेम गाथा है। इसकी समीक्षा राजस्थानी भाषा में पत्रकार लेखक करणीदानसिंह राजपूत की ओर से की गई जो राजस्थानी भाषा एवं साहित्य अकादमी बीकानेर की पत्रिका 'जागती जोत' में प्रकाशित हुई है। 

समारोह स्थल अगरतला भारत के त्रिपुरा प्रान्त की राजधानी है। अगरतला की स्थापना 1850 में महाराज राधा कृष्ण किशोर माणिक्य बहादुर द्वारा की गई थी। बांग्लादेश से केवल दो किमी दूर स्थित यह शहर सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध है। अगरतला त्रिपुरा के पश्चिमी भाग में स्थित है और हरोआ नदी शहर से होकर गुजरती है। 



मंगलवार, 14 मई 2019

चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ देवीय कर्तव्य* - करणीदानसिंह राजपूत.

चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ की ड्रेस की अपनी शान है। पवित्र ड्रेस है,मगर अनेक ड्यूटी समय में पहने हुए नहीं होते। बिना ड्रेस के कैसे मालूम हो की कौन ड्यूटी पर है?

यह भी कैसे मालूम हो कि कौन चिकित्सा कर्मी है और कौन ईलाज कराने वाला है और साथ में आया हुआ है।

एक और बात कि सरकारी चिकित्सालयों में उपलब्ध दवाएं दे रहे हैं?

क्या निशुल्क जांचे कर रहे हैं? क्या सभी उपकरण सही हैं?

हम जो सेवाएं दे रहे हैं,क्या उससे संतुष्ट हैं, या उपलब्ध सेवाएं देने में कमी रह गई, जो अब आगे नहीं रहने देंगे।

अपने मन मंदिर में विचार करें।


मातृदिवस पर वीरा केन्द्र सूरतगढ़ का कार्य (संपूर्ण सचित्र रिपोर्ट)


महावीर इंटरनेशनल वीरा केंद्र सूरतगढ़ ने मातृत्व  दिवस पर आज सोमवार को वार्ड नं,24 के आंगनबाड़ी केंद्र में 15 गर्भवती महिलाओं को पोषक पदार्थ बांटे।एक स्वस्थ माँ ही स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है इस उद्देश्य को लेकर वीरा बहनो ने हर 15 दिनों से इन बहनो को पोषक पदार्थ देना निश्चित किया था।आज यह दूसरी बार वितरण किया गया।प्रत्येक गर्भवती महिला को एक एक पैकेट दिया गया जिसमें निम्न सामग्री दी गई:चावल,दलिया,भुने चने,गुड़,दूध,तरबूज,पालक,ककड़ी आदि।


वीरा अनुजा सारड़ा ने अपने बेटे माधव के जन्मदिन के उपलक्ष्य पर संस्था को ये सामग्री भेंट की। अध्यक्षा वीरा नीतू बैद एवं ममता सारड़ा ने गर्भकाल में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए एवं क्या क्या खाना चाहिए ताकि स्वस्थ शिशु का जनम हो सके इसकी जानकारी दी।उन्हें साफ सफाई की भी जानकारी दी गई।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता विमलेश देवी तथा आशा सहयोगिनी शारदा,उषा ने केंद्र का आभार व्यक्त किया।


इसके साथ ही आज इसी आंगनबाड़ी में वीरा प्रीती मूंधड़ा की और से सिंटेक्स की टंकी लगवाई गई तथा वाटर वर्क्स के पानी की सप्लाई शुरू की गई।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने इस कार्य की बहुत सराहना की ।उन्होंने कहा कि गर्मियों में पानी की कमी की वजह से सभी को बहुत परेशानी हो रही थी।केंद्र ने यह बहुत ही अच्छा कार्य किया है।


इस पुरे प्रकल्प में वीरा नीतू बैद, सचिव अंजना सिंह,प्रीती मूंधड़ा,ममता सारड़ा,अनुजा सारड़ा,नेहा बैद,चंदा नवलखा, अनीशा नवलखा, सारिका रांका, माधव आदि ने सहयोग दिया।



शुक्रवार, 10 मई 2019

बिना टिकट ट्रेन में सवार यात्रियों से 6.91 करोड़ की वसूली


* बीकानेर रेल मंडल प्रशासन की मेहनत लाई रंग*

** करणीदानसिंह राजपूत **

सूरतगढ़/श्रीगंगानगर, 10 मई 2019.

उतर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल में बिना टिकट ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों से चैकिंग के दौरान वर्ष 2018-19 में 6.91 करोड़ रूपये की वसूली कर विशेष स्थान प्राप्त किया गया है। विगत वर्ष में 2.006 लाख केस पकड़ कर यह उपलब्धि हासिल की गई, जो कि विगत वर्ष की अपेक्षा 19.45 प्रतिशत अधिक है। मंडल द्वारा विगत वर्ष में 1.85 लाख पेनेल्टी मामलों (वर्ष 2017-18 की 1.54 लाख की तुलनात्मक 17.12 प्रतिशत अधिक ) से अतिरिक्त किराया व अतिरिक्त चार्ज सहित 6.72 करोड़ (वर्ष 2017-18 की 5.41 करोड की तुलना में 19.55 प्रतिशत अधिक), बिना बुक सामान से संबंधित 15362 मामलों से 1.93 करोड़ सहित कुल 2.006 लाख यात्रियों के केस बनाकर यह राजस्व प्राप्त किया गया। यह वितिय वर्ष के टारगेट 1.82 लाख मामलों से भी 10.26 प्रतिशत अधिक है। टिकट चैकिंग में अधिक प्रयास कर मंडल द्वारा यह उपलब्धि प्राप्त की गई। 

रेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर टिकट चैकिंग अभियान चलाये जाते है, जिसमें बिना टिकट यात्रा सहित अन्य अवैधानिक यात्रा के तरीको पर रोक लगाई जा सकें। वरिष्ठ वाणिज्य मंडल प्रबंधक श्री जितेन्द्र मीणा ने इस उपलब्धि के लिये अपने स्टॉफ की प्रशंसा करते हुए बिना टिकट यात्रा करने वालों को चेताया है कि वे उचित टिकट लेकर ही निर्धारित श्रेणी में यात्रा करें। अन्यथा यात्रा के दौरान बिना टिकट पाये जाने पर परेशानी का सामना करना पड सकता है। 

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मंगलवार, 7 मई 2019

कांग्रेस में गांधी परिवार का अस्तित्व चार पांच साल में खत्म हो जाएगा-2013 में विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी बेजान दारूवाला ने कहा था

खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़। जी चैनल पर 28 सितम्बर 2013 की रात में विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषी बेजान दारूवाला का इंटरव्यू चल रहा था।
एंकर को दारूवाला ने कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। कांग्रेस में गांधी परिवार का अस्तित्व चार पांच साल में खत्म हो जाएगा। दारूवाला ने एक पुस्तक दिखलाते हुए कहा कि यह आज नहीं कह रहा हूं कई साल पहले लिख चुका हूं।
दारूवाला ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के चांस ज्यादा हैं।
( 2014 में नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए)
दारूवाला ने यह भी कहा कि कांग्रेस से भाजपा का भविष्य बेहतर है।
नरेन्द्र मोदी के सामने चल रहे प्रधानमंत्री उम्मीदवार के नाम के बारे में कहा कि नरेन्द्र मोदी टाइगर की पावर है सो मुकाबला हो ही नहीं सकता।
कोई किसी टाइगर यानि कि किसी शेर का मुकाबला कैसे कर सकता है?
एंकर ने कहा कि आप तो बहुत खुले बोलते हो। हालांकि एंकर ने अपने वाक्यों में सुधारते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी में अधिक ताकत है और सामने वाले में कम ताकत है
30.9.2013 से यह खबर करणी प्रेस इंडिया पर है।
सन 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने।
सबसे बड़ी बात यह है कि भविष्य वाणी से कुछ होगा या नहीं, मगर गांधी परिवार के राहुल गांधी ने  कुछ नहीं किया तो कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

रविवार, 5 मई 2019

इंदिरा गांधी के योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी को हथियार बनाने का लाइसेंस कैसे मिला था?



 ** करणीदानसिंह राजपूत **


राफेल और अंबानी पर सवाल उठाने वालों को यह मालूम होना चाहिए कि इंदिरा गांधी के योग गुरू धीरेंद्र ब्रह्मचारी को बंदूकें बनाने का लायसेंस मिला था। वे हथियार विशेषज्ञ नहीं थे। उनको यह लायसेंस इंदिरा गांधी के सत्ता के नजदीक रहने से ही मिला होगा।


धीरेंद्र ब्रह्मचारी की शिव गन फैक्ट्री जम्मू के औद्योगिक क्षेत्र में थी। जहाँ पर  एक नाली और दुनाली बंदूक बनाते थे। सन 1981- 82 में 3-3 हजार बंदूके बनाने की अनुमति थी। एक नाली बंदूक उस समय ₹800 और दो नाली बंदूक 15 सो रुपए में बेची जाती थी। उस समय फर्म का टर्न ओवर करीब 37 लाख रूपये प्रति वर्ष था।

कांग्रेसी या अन्य कह रहे हैं कि अंबानी से राफेल की डील कैसे हुई है वह हथियार निर्माण का विशेषज्ञ नहीं है।


 कांग्रेस जनों को यह मालूम होना चाहिए कि इंदिरा गांधी के योग गुरु कहलाने वाले धीरेंद्र ब्रह्मचारी को बंदूके बनाने का लाइसेंस कैसे दिया गया? इंदिरा गांधी के नजदीकी होने का लाभ धीरेंद्र ब्रह्मचारी को मिला। 

धीरेंद्र ब्रह्मचारी और इंदिरा गांधी को लेकर बहुत कुछ मैटर छपता रहा। चूंकि यह बात करीब 36 साल पुरानी हो चुकी है इसलिए लोगों को याद नहीं है। 

 यहां तक की भारतीय जनता पार्टी के दिग्गजों को भी याद नहीं है। अगर इनको याद होता तो निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी के लोग भी चुनाव प्रचार में इसका कहीं ना कहीं इस्तेमाल जरूर करते।

 लेकिन यह सवाल तो है कि इंदिरा गांधी के योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी को बंदूक बनाने का लाइसेंस कैसे मिला?

राजपूत क्षत्रिय संघ महाराणा प्रताप की जयंती 6 जून को विशेष रूप में मनाएगा



* करणीदानसिंह राजपूत*

आगामी महाराणा प्रताप जयंती विशेष रूप से मनाने का विचार राजपूत क्षत्रिय संस्था सूरतगढ़  की 5 मई की मासिक बैठक में किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष मलसिंह भाटी ने। आपसी विचार में इसके विस्तृत कार्यक्रम के लिए  एक बैठक 19 मई को सुबह 10:00 बजे करणी माता मंदिर प्रांगण में करना तय हुआ। आज की मासिक बैठक में धर्मशाला निर्माण की राशि, नई सदस्यता और नवीनीकरण पर भी विचार किया गया।


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