मंगलवार, 24 जनवरी 2017

गांधी का ब्रह्मचर्य और अन्य औरतों से संपर्क गलत: पत्नी बहुत सहनशील थीः


-  करणीदान सिंह राजपूत  -

 राजस्थान की राजधानी जयपुर में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में महात्मा गांधी का ब्रह्मचर्य और दूसरी महिलाओं से संपर्क का प्रसंग इस तरह से बयान हुआ जिसमें कहा गया कि नैतिक दृष्टि से गांधी सही नहीं थे।
 राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी पर नेताओं के बयान और किसी ने किसी कार्य पर विवाद चलता रहता है।
 गांधी का ब्रह्मचर्य व्रत अनेक लेखकों ने अच्छा नहीं बताया। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में लेखिका निलीमा डालमिया ने महात्मा गांधी के द्वारा ब्रह्मचर्य को परखने के तरीके को नैतिक दृष्टि से गलत बताया। निलीमा ने कहा कि गांधी ने अपनी पत्नी कस्तूरबा से तो दूरी बना ली लेकिन वे अन्य महिलाओं से घिरे रहते थे।
निलीमा ने इतना तक कहा कि गांधी जी नसअच्छे पिता थे और न अच्छे पति थे। निलीमा डालमिया सीक्रेट लाइफ ऑफ कस्तूरबा पुस्तक की लेखिका हैं। उनका भाषण फेस्टिवल के सेशन बिटवीन दे साइलेंसेज के दौरान दिया गया था। निलीमा ने कहा कि अहिंसा का संदेश देने वाले गांधी जी ने अपनी पत्नी और बच्चों पर ईमोशनल अत्याचार किया, इससे बड़ी हिंसा और नहीं हो सकती।
निलीमा ने कहा कि कस्तूरबा को लेकर इतिहासकारों ने भेदभाव किया। महात्मा गांधी खुद तो विदेश में कानून की पढ़ाई के लिए गए लेकिन अपने बच्चों को स्कूल नहीं जाने देते थे।
कस्तूरबा ने बहुत सहनशीलता दिखाई। कस्तूरबा की जगह  यदि आज की कोई महिला होती तो वह गांधी के प्रति विद्रोह कर देती।
 निलीमा ने यह तो कहा की आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी महिलाओं को घर की चौखट से बाहर लेकर आए जोकि उस समय का बहुत बड़ा सामाजिक बदलाव था, क्योंकि उस समय औरतें अकेले घर से बाहर नहीं निकलती थी। निलिमा ने कहा कि बापू को महात्मा बनाने में कस्तूरबा का योगदान बहुत बड़ा है।
डालमिया परिवार के आर के डालमिया गांधी जी के बहुत नजदीक थे। निलीमा डालमिया के इस बयान से कस्तूरबा पर लिखी गई पुस्तक को पढने की उत्सुकता अधिक रहेगी।



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें