Monday, June 13, 2016

श्रीगंगानगर के झांकी वाले बालाजी । सब की सुनते है झांकी वाले बाबा

 
प्रस्तुतकर्ता-करणीदानसिंह राजपूत
 कहते है कि भगवान कण-कण में विद्यमान है। जहां देखो, जिस रूप में देखो और जैसे ही सुमिरो, उसी रूप में भक्तों को मिलते हैं। श्रीबालाजी भजन मंडल ने लकड़ी से बनी झांकी में बालाजी को ढूंढ़ा और उन्हें खोज लिया। नाम रख दिया झांकी वाले बालाजी। पुरानी आबादी सिद्ध श्री झांकी वाले बालाजी मंदिर की कुछ ऐसी ही महिमा है।

 हर वर्ष पांच दिन तक राम नाम संकीर्तन की गूंज, रोजाना सुबह राम नाम संकीर्तन, शनिवार व मंगलवार को अद्र्धरात्रि जागगरण तथा रोजाना 108 सुंदरकांड पाठ से मंदिर ऐसा सिद्ध हो गया है कि इसे अब भक्तों ने इसे सिद्धपीठ बना दिया है और नाम का विस्तार करते हुए पुकारने लगे हैं सिद्ध पीठ श्री झांकी वाले बालाजी मंदिर।
मंदिर से जुड़े श्रीबालाजी भजन मंडल की ओर से झांकी (बालाजी दरबार) के साथ पिछले 35 वर्षों से राम नाम की गंगा प्रवाहित की जा रही है। मंगलवार व शनिवार को इसी झांकी के साथ ही श्रद्धालुओं के घर अद्र्धरात्रि जागरण किया जाता है। मंदिर पुनरूद्वार से पूर्व यह मंदिर शिव हनुमान मंदिर के नाम से जाना जाता था। भजन मंडल की ओर से संकीर्तन के बाद झांकी इसी मंदिर में रखी जाती थी। झांकी से राम नाम की गूंज गली-गली में हुई तो भक्तों ने इस मंदिर को भव्य रूप देने का निर्णय किया और इस मंदिर का पुनरुद्धार हुआ और मंदिर को नया रूप दिया गया।
- बालाजी के बुलावे पर आते है भक्त
सिद्धपीठ श्रीझांकीवाले बालाजी मंदिर के प्रमुख सेवादार प्रेम अग्रवाल 'गुरूजीÓ बताते हैं कि किसी के घर यह अद्र्धरात्रि जागरण हो तो इस मंडल के पांच सौ सदस्यों व्यक्तिगत निमंत्रण पर नहीं आते। हर जागरण में आगामी जागरण का पता बोल दिया जाता है और मंडल सदस्यों का जत्था उसी आधार पर उस पते पर भजनों का आनन्द लेने के लिए पहुंच जाता है।
- पांच वर्ष की अग्रिम बुकिंग
वहीं मंदिर के प्रधान सुरेन्द्र चौधरी ने बताया कि मंदिर की महिमा का आंकलन इससे भी लगाया जा सकता है कि प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को होने वाले अद्र्धरात्रि जागरण की बुकिंग दिसम्बर 2015 तक हो चुकी है। अब यदि कोई श्रद्धालु जागरण बुक करवाना चाहें तो उसका जागरण वर्ष 2016 में बुक होगा। इसके साथ-साथ भजन मंडल की ओर से रोजना सुबह होने वाला आधा घंटे का राम नाम संकीर्तन के लिए पांच माह की बुकिंग चल रही है। मंडल के अधिकांश सदस्य अपने किसी परिवार के सदस्य का जन्मदिन, शादी की सालगिरह, गृह प्रवेश या अन्य कोई खुशी के समय यह संकीर्तन करवाना पसंद करते हैं।
- भाव से श्रद्धालु भावविभोर
वहीं शनिवार व मंगलवार को होने वाले जागरण में गायकी में आवाज से अधिक भावों का समावेश अधिक होता है। मंडल के सदस्य सुरेन्द्र सिंगल 'पुजारीÓ  कृष्ण सुदामा, नरसी की हुंडी, नानी बाई को मायरो, धन्ना जाट, कृष्ण लला, करमा बाई को खीचड़ो प्रसंग सुनाते हैं तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो जाते हैं। प्रेम अग्रवाल की भावपूर्ण प्रस्तुतियां व मदनगोपाल अग्रवाल की हारमोनियम पर संगत श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है।
- राम नाम संकीर्तन, सुंदरकांड के पाठ
जिस तरह भागीरथी जलरूपी गंगा आई, उसी तरह भजन मंडल भजन रूपी गंगा प्रवाहित कर रहा है। मंडल की ओर से अद्र्धरात्रि जागरण के साथ-साथ रोजाना सुबह आधा घंटे का राम नाम संकीर्तन श्रद्धालुओं के घर नि:शुल्क किया जाता है। इसके साथ-साथ मंदिर में रोजाना 108 सुंदरकांड के पाठ व जय-जय हनुमान जय-जय सियाराम के जाप होते हैं। इसके साथ-साथ मंदिर में हनुमान चालीसा व हनुमानाष्ठक के पाठ भी निरंतर चलते रहते हैं। इसके अलावा हर पूर्णिमा को श्रीबालाजी बगीची में हवन होता है। इसमें मंडल कार्यकर्ता और यजमान भाग लेते हैं।
- जरूरतमंदों की सेवा में अग्रणी
झांकी वाले बालाजी मंदिर जरूरतमंद व गरीबों की सेवा में भी अग्रणी रहता है। शहर में किसी प्रकार की आपदा या विपत्ति आ जाए तो मंदिर के मंडल के सदस्य अनूठी भूमिका निभाते हैं। जागरण के दौरान दरबार में आने वाले चढ़ाना जरूरतमंदों की सेवा में लगाया जाता है। गरीब कन्याओं के विवाह में भी सहायता देकर मंडल ने अनूठी भ्ूामिका निभाई है। मंदिर के श्रीबालाजी भजन मंडल व श्रीझांकी वाले बालाजी सेवा समिति की ओर से समय-समय पर समाजसेवी कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। पिछले दिनों रक्तदान शिविर व घुटना एवं रक्तजांच शिविर में अनेक लोग लाभान्वित हुए।
- पांच सौ सदस्यों का संगठित परिवार
कुछ वर्ष पूर्व मंडल का नया नाम श्रीबालाजी भजन मंडल रखा गया तो इसमें बहुत कम सदस्य थे। ज्यों-ज्यों संकीर्तन होता रहा, आगे से आगे सदस्य इससे जुड़ते गए। आज मंडल के सदस्यों की संख्या पांच सौ से ऊपर चली गई है। मंडल के प्रधान श्रीबालाजी महाराज ही हैं। मंडल के सदस्य व्यवस्था के लिए मंडल के पुराने सदस्य सुरेन्द्र चौधरी को प्यार से प्रधानजी के नाम से पुकारते हैं। मंडल में शामिल होने के लिए कोई पंजीयन नहीं करवाना पड़ता। हर मंगलवार व शनिवार को जागरण में आने वाला ही मंडल का सदस्य है और बालाजी दरबार से उन्हें दुपट्टे के रूप में सुरक्षा कवच मिला हुआ है। इसी सुरक्षा कवच के साथ वे संकीर्तन व जागरण में आते हैं और भजनों का आनंद लेते हैं। मंडल के कार्यकर्ता गरिमा में रहना पसंद करते हैं।

प्रस्तुतकर्ता-करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़ । राजस्थान। भारत।
94143 81356
:::::::::::::::::::::::::


No comments:

Post a Comment

Search This Blog