शनिवार, 23 अप्रैल 2016

डा.रामप्रताप व विधायक अपनी ड्यूटी समझेंगे?ऐटा सिंगरासर माइनर आँदोलन:


24 अप्रेल को ये इलाके में रहेंगे तो संभव है कोई टकराव न हो पाए:
आँदोलनकारियों व सरकारी अमले को छाया व पीने का पानी कैसे मिलेगा?
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़।
ऐटा सिंगरासर माइनर मांग के आँदोलन में 24 अप्रेल को थर्मल गेट के आगे घेराव की घोषणा थी जहां पर धारा 144 लगा कर प्रतिबंध लगा दिया गया है लेकिन आँदोलनकारियों की पत्रिका की खबर के अनुसार अब एक साथ विभिन्न जगहों पर लोग एकत्रित होंगे। अब 24 को तीन नए स्थान और हो गए हैं। पल्लू इलाके के लोग मेघा हाईवे पर जमा होंगे।  थर्मल फांटा टी पोइंट पर राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 को जाम करेंगे। इसके अलावा बीरधवाल हैड पर लोग पहुंचेंगे। थर्मल मुख्य द्वार पर और आसपास धारा 144 लगाने के बाद यह कदम सोचा गया है जिसके अनुसार लोगों को थर्मल गेट तक पहुंचने की समस्या नहीं रहेगी व लोग अपने अपने पास के इलाके में ही पहुंचने का प्रयास करेंगे।
वैसे इतनी भयानक गर्मी में अधिक संख्या में आँदोलनकारियों के पहुंचने की संभावना कम ही है। लेकिन अपने पास में घोषित स्थन तक संभव है लोग सुबह पहुंच भी जाएं। आँदोलनकारियों के लिए और सरकारी अमले के लिए पीने के पानी की आपुर्ति कैसे होगी? बिना छाया के लोग कैसे रहेंगे? दोनों ओर पानी तो जरूर चाहिए और चिकित्सा सेवाएं भी। आँदोलनकारियों की तरफ से बुढ़े बुजुर्गों को आने के लिए मना नहीं किया गया है। उनको गर्मी में संभालना बड़ा विकट होगा। अगर सुरक्षा बल किसी विकट हालत में लोगों को अपनी हिरासत में लेंगे तो उनके सामने भी पानी का संकट तो रहेगा। उनकी जिम्मेदारी भी होगी।
जल संसाधन मंत्री डा.रामप्रताप की अवील आज दिनांक 23 अप्रेल के समाचार पत्रों में छपी है। पानी उपलब्धता को सूझाया गया है। यह हालत तो आँदोलनकारियों को भी मालूम है कि घग्घर झीलों से निकाली गई माइनरें सालों से चली ही नहीं उनमें पानी ही नहीं पहुंचा था।
ऐटा सिंगरासर माइनर के आँदोलन से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जुड़े हुए हैं। कांग्रेस पहले सत्ता में रह चुकी है और भाजपा अब सत्ता में है। लोगों के वोटों को लेते वक्त जो कहा गया उसकी पूर्ति करना नैतिक दायित्व बनता है लेकिन घूम फिर कर वहीं पहुंचना पड़ता है कि वर्तमान में पानी नहीं है।
अब सवाल एक और हो गया है कि 24 अप्रेल को दोनों की ही जिम्मेदारी बनती है कि वे जनता की इलाके के लोगों की सुरक्षा भी करें।
भाजपा सत्ता में है इसलिए उसकी जिम्मेदारी अधिक बनती है और कहें कि उसकी अकेले ही जिम्मेदारी बनती है कि लोगों की हर हालत में सुरक्षा हो, कारण कि उसके पास ही प्रशासन और सुरक्षा बल है।
जल संसाधन मंत्री डा.रामप्रताप इसी इलाके के हैं और पूर्व में इंदिरागांधी नहर बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने एक अपील जारी की है जो आज 23 अप्रेल के समाचार पत्रों में छपी है। पानी के बारे में साफ खुलासा है कि पानी नहीं है और उसके बिना नहर बनाना संभव नहीं है। लेकिन केवल अपील छपवा देने से उनकी जिम्मेदारी इलाके के लोगों व किसानों के प्रति खत्म नहीं हो जाती। इसी तरह से जो विधायक हैं तथा भाजपा के बड़े पदों पर बैठे हैं,उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि वे इलाके में रहें। 

यह आँदोलन कब किस तरफ मुड़ जाए व भड़क जाए। इस प्रकार की हालत बन ही नहीं पाए कि जिम्मेदारी सत्ताधारी जन प्रतिनिधियों की भी है। आशा की जानी चाहिए कि वे अपने आँदोलन स्थलों के आसपास रहें और अपनी ड्यूटी निभाएं।


ऐटा सिंगरासर माइनर की पहले की बहुत सी सामग्री पढऩे देखने के लिए ऐटा सिंगरासर माइनर स्तंभ देखें।

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