Sunday, October 4, 2015

वर्कशॉप के प्लॉट नं 174 व 175 के टुकड़े करना कानूनी गलत:जाँच रिपोर्ट में माना:


विधि सलाहकार की राय भी नहीं मानी गई:
उप निदेशक स्वायत शासन विभाग बीकानेर ने जाँच रिपोर्ट में माना:

पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने की थी शिकायत:
- स्पेशल रिपोर्ट  करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु ने दो वर्ष पूर्व मई 2013 में मुख्य सचिव व स्वायत्त शासन विभाग को अनेक मुद्दों पर नगरपालिका की शिकायत की थी। जिसमें वर्कशॉप ट्रक ट्रांसपोर्ट योजना के प्लॉट नं 174 व 175 के  खरीदारों द्वारा टुकड़े करना कानूनी गलत बताते हुए ईओ राकेश मेंहदी रत्ता और पृथ्वीराज जाखड़,पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल पर आरोप गलाए गए थे। सिद्धु ने आरोप में लिखा था कि इससे सरकारी कोष को भी हानि पहुंचाई गई।
उप निदेशक स्वायत्त शासन विभाग बीकानेर ने 31 मई 2013 को मौके पर पहुंच कर जांच की और उसकी रिपोर्ट बना कर 10 जून 2013 को शासन उप सचिव ,स्वायत्त शासन विभाग विभाग जयपुर को भेज दी। वह रिपोर्ट वहां पर 12 जून 2013 को पहुंच गई। इसके बाद नगरपालिका को भी यह मिली। नगरपालिका सूरतगढ़ में तो हाथी जैसे मैटर तक गायब हो जाते हैं सो यह रिपोर्ट भी दब गई। अब यह रिपोर्ट हाथ लगी है।/ सिद्धु ने यह शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में अलग से दी हुई है।/
रिपोर्ट में लिखा गया है कि उक्त विभाजन व नामान्तरण किए जाने से ट्रक ट्रांसपोर्ट योजना के उक्त भूखंड संख्या 174 व 175 का उपयोग  प्रयोजन एवं ले आऊट विचलित हो गया है। नगरपालिका की पत्रावलियों के अवलोकन से स्पष्ट है कि नगरपालिका के विधि सलाहकार द्वारा स्पष्ट रिपोर्ट लिखी गई कि उक्त उपविभाजन राज्य सरकार शहरी क्षेत्र /उप विभाजन पुनर्गठन सुधार/ नियम 1975 व राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धरा 171 के अध्यधीन परिपत्र दिनांक 19-2-2010 के तहत कार्यवाही की जाए। 
लेकिन नगरपालिका सूरतगढ़ ने उक्त अधिनियम व परिपत्रों की अवहेलना करते हुए उप विभाजन की कार्यवाही की। राजस्थान सरकार के नगरीय विकास विभाग के परिपत्र क्रमांक प.10/65/न.वि.वि.3/04 दिनांक 19 फरवरी 2010 का पूर्णत: उल्लंघन करते हुए नगरपालिका ने उक्त भूखंडों का उप विभाजन किया है। भूखंडों का उपविभाजन करने से नीलामी में बेचे भूखंडों का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया है। इस कारण से उक्त क्षेत्र का लैंड यूज /भू उपयोग भी प्रभावित हुआ है। इसके लिए भूमि शाखा के लिपिक व अधिषाषी अधिकारी स्पष्ट रूप से दोषी हैं।
इस प्रकरण का मुकद्दमा भ्रष्आचार निरोधक ब्यूरो में भी दर्ज हो गया है तथा जाँच तेजी से चल रही है। जिन लोगों को लाभ हुआ है उनको भी आरोपी माना गया है। ब्यूरो में सभी के बयान भी होने की सूचना है। एक संजय धुआ के बयान नहीं होने की सूचना कुछ दिन पहले तक थी।
एक सूचना यह भी है कि प्रभावित व्यक्तियों में से किसी ने राजस्थान उच्च न्यायालय में निगरानी याचिका भी सीआरसीपी धारा 482 के तहत लगा दी है जिसकी तारीख 16 अक्टूबर बताई जा रही है। उधर शिकायतकर्ता स.हरचंदसिंह सिद्धु ने बताया उक्त सीआरसीपी धारा 482 के तहत दायर की गई याचिका में शिकायतकर्ता को भी सुना जाने का नियम है। उनके पास अभी तक कोई सूचना नहीं है।

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