Sunday, March 15, 2015

पालिका बोर्ड अध्यक्षों की धौंस-90 दिनों में संचालन समितियों का गठन नहीं किया:

नगरपालिकाओं में संचालन समितियां गठित करने की पावर राज्य सरकार के पास:
पालिका बोर्ड अध्यक्षों की धौंस-चुनाव के 90 दिनों में संचालन समितियों का गठन नहीं किया:
विशेष रिपोर्ट - करणीदानसिंह राजपूत -

राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 में धारा 55 में स्पष्ट निर्देश है कि संचालन समितियां बोर्ड के गठन के 90 दिनों के भीतर गठित कर दी जानी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर राज्य सरकार इन समितियों का गठन करने को सक्षम है।
राजस्थान की 46 नगरपालिकाओं में 22 नवम्बर 2014 को चुनाव हुए और 25 को परिणाम घोषित हुए। इसके अगले दिन अध्यक्षों व उसके अगले दिन उपाध्यक्षों के चुनाव हुए। इसके बाद 90 दिनों में यानि कि 25 फरवरी 2015 तक 90 दिनों में प्रत्येक नगरपालिका बोर्ड में कार्य संचालन समितियों का गठन कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन अधिनियम में स्पष्ट निर्देश होते हुए भी समितियों का गठन नहीं किया गया तथा जहां पर मांग हुई वहां भी अध्यक्ष की धींगामस्ती के निजी पावर चलाए जाने के कारण मांग को ठुकरा दिया गया।
नियम की अवहेलना इतनी हुई कि जिला कलक्टर ने अधिशाषी अधिकारी को निर्देश दिया तब भी पालना नहीं की गई।
ऐसी सूरत में नगरपालिकाओं में कार्य संचालन समितियां गठित कराने का कानून के साथ प्रथम दायित्व सरकार का बन जाता है तथा सरकार को इसके बाद कोई देरी नहीं करनी चाहिए।
सच्चाई यह है कि नगरपालिकाओं में अध्यक्ष व अधिशाषी अधिकारी दोनों ही तथा वहां के चुने हुए जन प्रतिनिधि तक इन संचालन समितियों के गठन को उत्सुक नहीं होते। काय्र संचालन समितियों के गठन के बाद अध्यक्ष व अधिशाषी अधिकारी अपनी मनमानियां नहीं कर पाते। नगरपालिकाओं में इन समितियों के नहीं होने पर खुल कर भ्रष्टाचार होने की व करने की संभावना रहती है। सालों का अनुभव यही बतलाता है कि करोड़ों रूपयों का भ्रष्टाचार होता है। नगरपालिकाओं में भ्रष्टाचार न हो सके व कार्य तेजी से भी हो सके इसलिए इन समितियों के गठन का कानून बनाया हुआ है।
नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 55 के अनुसार निम्र समितियां बनाई जानी चाहिए।

कार्यपालक समिति-
इसमें निम्र शामिल होंगे।
1.नगरपालिका का अध्यक्ष,
2. नगरपालिका का उपाध्यक्ष,
3.विपक्ष का नेता,
4.नगरपालिका बोर्ड के निर्वाचित सदस्य जिनकी संख्या 5 से अधिक ना हो।
5.नगर परिषद व नगर निगम के मामले में चुनी हुई 2 महिला सदस्यों सहित संख्या 7 हो।
इसके अलावा नगरपालिका में निम्र समितियों का गठन भी होगा।
1.वित्त समिति
2.स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति
3.भवन अनुज्ञा एवं संकर्म समिति
4.गंदी बस्ती सुधार समिति
5.नियम और उप नियम समिति
6. अपराधों का शमन और समझौता समिति
इनके अलावा भी समितियों का गठन किया जा सकता है।
इन समितियों की अलग से बैठक होने व निर्णय लेने का नियम है जो बोर्ड को सामान्य रूप से बोर्ड के हित में मानना ही पड़ता है।
वित्त,भवन,कच्ची बस्ती सुधर आदि समितियां काफी पावर फुल होती है और इसलिए अध्यक्ष वा अधिशाषी अधिकारी समितियों गठन को टालते रहते हैं।
इसलिए अधिनियम में स्पष्ट उल्लेख है कि बोर्ड द्वारा 90 दिनों में गठन नहीं किए जाने पर राज्य सरकार समितियों का गठन कर सकती है।
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