Tuesday, January 31, 2017

बेटी काश तेरा घर बस जाता: मार्मिक कहानी-



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मां, वह आ गया। मैं जाऊं? 
बेटी,तेरा घर तो बस जाएगा? मुझे बहुत चिंता हो रही है।
मां, चिंता न कर।
बेटी, चिंता हो जाती है। परिवार में किसी को ही मालूम नहीं है कि तूं रवाना हो रही है। मैं तेरी मां हूं। गाजे बाजे के साथ तुझे रवाना करते। रीति रिवाज कोड करते। नाच गाने होते। मैं तेरे दुल्हे का तिलक कर स्वागत करती। चंवरी मंडती। दुल्हे संग फेरे होते।
 तू अकेली जा रही है।किसी को मालूम नहीं।



चिंता तो होनी है। मेरा दिल धड़क रहा है,मेरे से पूछ रहा है। किसके साथ भेज रही है बेटी को? मैंने तुझे कैसे पाला पोसा? न रात देखी न सर्दी गर्मी बरसात देखी। कितने देवी देवताओं के पूजा पाठ किए थे।
तेरे को पढ़ाने के लिए क्या नहीं किया? हमारे बचपन में तो कुछ भी नहीं थे। तुझे  तो गांव के स्कूल और आगे कॉलेज तक भेजा। तेरे पिता के कितने अरमान थे। मेरी बेटी पढ़ लिख कर आगे बढ़ेगी और अच्छे से अच्छा वर चुनकर उसका ब्याह रचाएंगे। बेटी यह सपने ही होते हैं । हर मां  बाप के, बुड्ढे दादा दादी के।  तेरी नानी तेरे नाना तेरी तेरे मामा मामी कितना प्यार करते रहे ।अब तो किसी को भी मालूम नहीं  कि तेरी विदाई आधी रात को हो रही है।किसी को खबर नहीं।
 बेटी, बस मुझे एक ही चिंता है। तेरा घर तो बस जाएगा? बेटी में बार-बार यह बात इसलिए कह रही हूं कि घर में किसी को मालूम नहीं कि तेरा वर कैसा है?
बस यही चिंता खाए जा रही है कि तेरा घर तो बस जाएगा?तुने  खुद ने अपना वर चुन लिया। तेरे पिता को मालूम नहीं। तेरे ताई ताया को मालूम नहीं। तेरी सहेलियों को भी मालूम नहीं। बस तुमने मुझे बताया,और मैं बावळी तेरी बातों में खो गई। ना जाने मेरा दिल क्यों धड़क रहा है? बेटी एक वह फिर सोच ले?
लड़की का अकेले घर से विदा होना। गांव में न जाने कितनी बातें बनाएगा?
 बस, मैं मां हूं ना इसलिए पूछ रही हूं।
बेटी की शादी की बात तय होती है,उस दिन से मां की रोटी आधी हो जाती है।बेटी की विदाई होने तक मां रातों को सो नहीं पाती। घर परिवार अच्छा ढूंढा हो तब भी चिंता सताती रहती है  कि न जाने बेटी  की किस्मत में क्या है?बेटी उस घर में जाकर कैसे रहेगी?कितना प्यार मिलेगा? यह चिंता मुझ अकेली को  ही नहीं हर मां को होती है।
बस इसलिए मेरा दिल धड़क रहा है।
तेरा घर तो बस जाएगा न? तूने लड़के से अच्छी तरह बात तो करली है? उसके घर वाले तेरे को परोट तो लेंगे? मैं  बहुत चिंता में हूं। मेरे दिल की धड़कन रुक नहीं रही है। दिल में बार-बार खड़का हो रहा है। मेरी कसम खा कर के कह कि तैने लड़के से बात तो सही सही करली है,तेरा घर तो बस जाएगा ना? लड़के पर भरोसा तो है? मां ने बेटी को अपनी छाती में चिपका लिया। वह रो पड़ी।
बेटी बोली मां तूं नाहक चिंता कर रही। वह मुझे बहुत प्यार करता है। मेरे को उस पर पूरा भरोसा है। कसम वसम लेने देने,खाने खिलाने की बातें पुरानी हो गई है।
मैं कहती हूं ना कि मेरा घर बस जाएगा। तेरे को विश्वास नहीं आता है तो चल तूं मेरे साथ ही चल पड़। देख लेना मेरा बसता घर।फिर तेरे को भरोसा हो जाएगा।
मां बेटी की बात पूरी हुई।
बेटी के मोबाइल में घुर्र घुर्र हुई।
 बेटी ने मोबाइल कान के लगाया।
मां मैं जाऊं? वह सड़क पर गाड़ी लिए खड़ा है।
मां चुप।
बेटी घर से अकेली विदा हो रही थी।
दूल्हा घर के आगे खड़ा था। बेटी के बाप को मालूम नहीं। सब सोए हुए थे।
बेटी विदा होती है तो घर परिवार ही नहीं पूरा मोहल्ला जागता है। लेकिन यहां तो एकदम उलट स्थिति थी।
बेटी ने अपना दूल्हा चुना और अपना निर्णय केवल अपनी मां से सांझा किया।
कसम वसम न मानने वाली बेटी ने ही मां को यह कसम भी दे दी कि वह इस बात को किसी को भी नहीं बताएगी। मां को कसम थी कि वह यह बात पिता के सामने भी नहीं करेगी।
मां बेटी के निर्णय पर सोच-सोच कर आधी हो रही थी। ना जाने आगे क्या होगा?
कल घर और परिवार के लोग उसी को  मां को ही बार-बार पूछेंगे।
एक एक बात के सौ सौ अर्थ निकालेंगे। सारी जिम्मेवारी उसी पर डाली जाएगी। तूं कैसी मां है? लड़की की नजरों को कैसे नहीं पहचाना? उसकी नजरें बदल रही थी तो तुझे उसकी बदलती हुई नजरें मालूम क्यों नहीं पड़ी?
बेटी का एक-एक कदम मां को तो मालूम हो जाता है,फिर तेरे को कैसे मालूम नहीं हुआ?
बेटी गुपचुप बिना बतलाए कैसे चली गई? कहां चली गई? किसके साथ चली गई?

पूछने वाले सौ होंगे और जवाब देने वाली एक मां होगी।
उसका रोटी टुकड़ा सब छूट जाएगा। वह तो रोती ही रहेगी। सुबक-सुबक कर कर जवाब देती रहेगी। किसी को भी उसके जवाबों पर विश्वास नहीं होगा। पति की खारी निगाहें अलग से पीड़ित करेंगी।
कोई भी यह नहीं सोचेगा कि यह लड़की की मां है। इसने अपनी कोख में पाला। उसे पाल पोस कर इतना बड़ा किया। वह अपनी लड़की के बारे में अच्छा ही सोचेगी। गलत-सलत नहीं सोचेगी,लेकिन उसके बाद भी कोई विश्वास नहीं करेगा। वह बता भी नहीं पाएगी। सभी उसे फांसी के फंदे पर चढ़ाने वाले होंगे। उसको सूली पर चढ़ाने वाले होंगे।
तूं कैसी मां है जो लड़की चली गई और तुझको मालूम नहीं पड़ा? सारा दोष तेरा है। लड़की के ऊपर नजर रखना उसके हावभाव पर नजर रखना मां का काम है।
तू क्या करती रही?
घर का काम, खेत का काम, डांगर पशुओं का काम तो सभी घरों में होता है। तू ये सब ।कर रही थी तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है? सभी घरों में होता है। सभी औरतें करती हैं।
उसके पास कोई उत्तर नहीं होगा। चारों तरफ सवालों के घेरे होंगे। लोग उनमें आग तो लगाएंगे मगर उस आग को बुझाने वाला कोई नहीं होगा। एक तरफ बेटी के जाने का गम होगा और दूसरी तरफ सवालों की आग में वह झुलसती रहेगी।
मां यही सोच रही थी कि आने वाला कल कितना कहर बरपाने वाला होगा।
 बेटी जाने को तत्पर थी।
 मां का दिल मान नहीं रहा था।
 उसने एक बार फिर पूछ लिया।
बेटी तेरा घर तो बस जाएगा? बेटी को थोड़ी झुंझलाहट सी हुई।
मां,मैं कितनी बार कहूं? वह मुझे बहुत प्यार करता है।मेरा घर बस जाएगा। तेरे को विश्वास नहीं होता तो फिर तूं मेरे साथ चल ही पड़।

पल भर में मां के दिल में  आया कि चल पड़ी लड़की के साथ।
मां और बेटी दोनों परिवार के सभी सदस्यों को सोते छोड़कर घर से निकल पड़ी। दोनों बाहर सड़क पर आ गई।
गांव में  लोग सात आठ बजे सोने लगते हैं।
अब तो रात के 11 बज रहे थे। आधी रात हो गई थी। मां बेटी दोनों बदन चीरती सर्द हवा में बाहर निकली।
सड़क पर पेड़ों के झुरमुटों के पास गाड़ी खड़ी थी। वे गाड़ी के पास पहुंचीं।
लड़का नीचे उतरा और उसने लड़की से पूछा यह कौन?
यह मेरी मां हैं साथ चलेगी। लड़के ने एक बार न जाने क्या सोचा और मां को भी गाड़ी में सवार कर लिया। गाड़ी गांव से रवाना हो गई।
लड़के के मन में उथल-पुथल होने लगी लड़की को एक बार ले जाकर चुपके चुपके कहीं रखना था लेकिन यह बला बीच में आ टपकी।
अब इससे कैसे छुटकारा पाया जाए?
आगे न जाने क्या होगा?लड़के ने चलती हुई गाड़ी के शोर में खुसरफुसर करते  हुए लड़की से बहुत कुछ कहा। मैंने तेरे से प्यार किया है और यह तूं अपनी मां को बीच में कहां से ले आई? कहां रखूंगा तेरी मां को ? तूं पढ़ी लिखी है। जरा भी नहीं सोचा। यार तेरा पढ़ना तो बेकार। लगता है कि तूं अभी स्कूल की लड़की है। तेरे मैं अभी गांव की ही सोच है। तूं खुद सोच पहले अपनी बातों में मां कहीं भी बीच में नहीं थी और अब बीच में तूं अपनी मां को ले आई। बता मैं इसे कहां रखूंगा। अभी ते अपने ठिकाने का ही मालूम नहीं।
गाड़ी में अंधेरा था।
लड़की को भी चिंता होने लगी कि अब क्या किया जाए?
 वह सोच में पड़ गई उसने लड़के को कहा ऐसा करते हैं  कि मां को गांव में वापस छोड़ आते हैं।
लड़के बोला तेरा तो दिमाग खराब हो गया है। अब इतनी दूर निकल आए फिर वापस जाएंगे।
 कोई गड़बड़ हो जाएगी तो क्या होगा? किसी तरह तो गाड़ी का प्रबंध किया। दोस्तों को इकट्ठा किया।
यहां आए। अब मामला बना हुआ है,लेकिन तेरे कारण जरूर गड़बड़ हो जाएगा।

 लड़का कुछ कुछ गरम हुआ। लड़की घबराने ली। क्या होगा?  लड़की ने लड़के से कहा, क्या करें ? जब रवाना हो रही थी मां साथ में रवाना होली। मां को विश्वास नहीं हो रहा था।
बार बार पूछ रही थी कि तेरा घर तो बस जाएगा ना?
तब मैं क्या जवाब देती? मैंने मां से कहा तूं साथ चल और मेरा घर देख लेना।
अब बता मेरा इसमें क्या कसूर है?उस पल रवानगी के वक्त एकदम से यह बात हो गई।  मां को साथ नहीं लाती तो क्या करती? घर में जाग हो जाती तो बना बनाया खेल बिगड़ जाता।
मैं फिर कैसे आती?
तू भी सोच और मैं भी सोचूं कि अब क्या करें?
दोनों ने सोचा वह संसार में बेटी के नाम को भुला देने जैसा था। बेटियों को लोग कितना प्यार करते हैं। लड़के और लड़की ने जो सोचा उसका किसी को गाड़ी में बैठे व्यक्ति को मालूम नहीं था। लड़के ने बीच में नहर पर गाड़ी रोकने का कहा। गाड़ी रुकी लड़का और लड़की बाहर निकले।
लड़की ने अपनी मां से कहा मां यहां मंदिर है। उस पर धोक लगा कर आगे रवाना होंगे।
मां बोली,बेटी आधी रात को कौन सा मंदिर खुला होगा? मां,खुला तो नहीं होगा। अपने दरवाजे की जाली में से दर्शन कर लेंगे और धोक लगा लेंगे।

बेचारी मां जिसने लड़की को 9 महीने कोख में रखा। जन्म के बाद पाला पोसा इतना बड़ा किया। ऊंची शिक्षा दिलाई। वह मां लड़की की बातों में भुलावे में आ गई।
लड़का लड़की उसको साथ लेकर अंधेरे में चले गए। दोनों  दस बारह मिनट बाद वापस लौटे। लड़की और लड़का दो ही थे।
साथियों ने पूछा वह कहां है? वह मंदिर में रहेगी।
गाड़ी आगे रवाना हो गई।

  उधर आधी रात को लड़की और लड़की की मां दोनों के घर में नहीं होने से हंगामा हो गया। कहां चली गई दोनों। बाहर शौच करने गई होंगी इंतजार हुआ। कुछ देर बाद हाका फूट गया। गड़बड़ हो गई।
शौच गई होती तो वापस लौटती। जो हुआ उसे घर परिवार वालों ने आसानी से समझ लिया।
सुबह पूरे गांव में हलचल हो गई।
मामला पुलिस में दे दिया गया।

पिता बहुत परेशान था क्या करूं और क्या ना करूं! आखिर लड़की के दादा ने पुलिस में गुमशुदगी दर्ज करवाई।
खोजबीन हुई मगर कोई मालूम नहीं पड़ा। लड़की के पास मोबाइल था  जो घर में नहीं था।
मतलब कि मोबाइल को  लड़की अपने साथ ले गई थी

एक सप्ताह बीत गया। एक दिन हल्ला मचा कि नहर में किनारे के पास महिला की लाश पड़ी है।
पुलिस पहुंची। गांव वाले भी पहुंचे। परिवार वाले भी पहुंचे। पहचान हुई। अरे! यह तो उसकी लुगाई है। मगर  लड़की  कहां है?
लड़की का मोबाईल तो पहल् से ही ऑफ था।
 पुलिस ने उसके मोबाइल कॉल की डिटेल निकलवाई। तो मामला कुछ और निकला।
लड़की का पिता हजारों तरह की परेशानियां और दर्द लिए हुए थाने में पहुंचा।
मुकदमा दर्ज करवाया गया।यह मुकदमा लड़की और उसकी मां के अपहरण का था।

लड़के के साथी पुलिस की पकड़ में आए।
एक दिन लड़का और लड़की भी पुलिस की गिरफ्त में थे।

घटनाओं के बाद सभी कहते हैं होनी को यही मंजूर था। लेकिन यह तो अनहोनी हो गई थी।
 यह कहानी तो विधि के  विधान के भी विपरीत हो गई थी।
 बेटी अपनी मां को मार डालने का कैसे सोच सकती है?
क्या  बेटियां ऐसी होती हैं?
मां के सुई चुभ जाए,मां के कांटा लग जाए तो दर्द बेटी के होता है।
बेटी पूरे संसार को भूल जाए। अपने पिता को भी भूल जाए तो भी अपनी मां को कभी भी नहीं भूल सकती।
लेकिन यह सच सबके सामने था।
बेटी सब को भूल गई।
बेटी मां के प्यार को भूल गई।

 बेटी ने अपना घर बसाने के चक्कर में क्या कर डाला। वह अपना घर बसा नहीं पाई और आपने पिता का बसा बसाया घर उजाड़ कर रख दिया।

पिता के सामने बेटी का मुखड़ा है। बेटी का मुखड़ा बार बार सामने आता है।
बाप की आत्मा से सवाल निकलता है।
 बेटी तूने यह क्या किया?  तूझे जाना था। गुपचुप  जाना था तो तूं चली जाती। कितनी  लड़कियां चली जाती हैं। पालने-पोसने वाले मां बाप अपने दिल पर पत्थर रख लेते हैं। समय बीत जाता है और घाव भर जाते हैं।
 तूनें यह कैसा घाव दिया जो कभी भरा नहीं जाएगा।

बेटियां विदा होती हैं। गीत गाए जाते हैं।
बाबुल चिड़ियां ते धीयां एक दिन उड़ जाना।

मां और बाप लड़की की विदाई पर रोते हैं। आंसू नहीं थम पाते।
परिवार बिलखते हैं।
मां के मुंह से दुआएं निकलती है कि तू फूलों पर चले। तेरा घर संसार सदा सुखों से भरा रहे। दुख तेरे कभी नजदीक नहीं आए।
आंसुओं के बीच विदाई का एक-एक पल वर्षों तक यादगार बना रहता है।
बेटी तेरी यह कैसी विदाई?तेरी यह विदाई भी यादगार रहेगी,लेकिन दिल मर मर जाने को होगा मगर मौत भी कहां आ पाएगी?
बेटी न जाने किस जन्म का यह दुख अचानक दे दिया?  कैसे कटेगा मेरा जीवन?
पिता  के दिल में हाहाकार मचा था।
लेकिन अपनी  बेटी को बुरी आशीष नहीं दे सकता। इतना दुख सामने होने के बावजूद भी वह अपनी बेटी को दुराशीष नहीं दे सकता।
बेटी काश तूं समझ पाती?
तूंने अपना घर बसाने को बाप का बसा बसाया घर उजाड़ दिया।
बाप के दिल से एक ही आवाज रोते हुए निकलती रहेगी।
 बेटी,काश तेरा घर बस जाता।
( काल्पनिक कहानी)
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करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़ ।

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