मंगलवार, 11 अक्तूबर 2016

सूरतगढ़ सनसनी: अपके गहनों में कितना सोना कितना तांबा है?


बड़े बैंक के 3 कांट्रेक्ट पारखी सुनार नकली गहने,असली बता कर लोगों के माध्यम से बैंक में जमा करवाते रहे:
सोना जमा करवा कर लाखों रूपए लोन /ऋण उठाया:


सूरतगढ़ 11 अक्टूबर।
एक बड़े बैंक की स्थानीय शाखा में सोने पर लोन देने की कार्यवाही में परख के लिए नियुक्त तीन बड़े ज्वैलर्स ने अपराधिक दिमाग लगाया और बैंक में  लोगों के माध्यम से नकली गहने जमा करवा कर लाखों रूपए निकलवा लिए। यह सनसनी खेज खबर पिछले कई दिनों से चुल रही है और सुनार दबे दबे रूप में बात तो करते हैं लेकिन बड़े ज्वैलर्स के विरूद्ध कुछ भी खुलासा नहीं करना चाहते।
जिस प्रकार की चर्चा है उसके अनुसार बैंक एकबार अपने रूपए कब्जे में करना चाहता है और इसी कारण गुपचुप सब चल रहा है।
सोने के आभूषण अमानती रख कर उनके बदले में कर्ज दिए जाने की कार्यवाही में कमाई मान कर या नई नीति चला कर बैंक धंधा करने लगा। लोगों के गहने असली हैं इसकी परख करने के लिए सूरतगढ़ के नामी तीन ज्वैलर्स को कांटे्रक्ट से बैंक से जोड़ा। सुनार की रिपोर्ट पर बैंक गहने रखता और अपनी नीति के अनुरूप रकम तय कर कर्ज दे देता।
चर्चा के अनुसार पारखी ज्वैलर्स के पास से लोन लेने वाले अपने गहनों की परख की तस्दीक करवा कर बैंक को देते। ज्वैलर्स ने अपना दिमाग लगाया कि इस प्रकार वे बैंक से रूपए उठा सकते हैं। ज्वैलर्स नकली गहने तैयार करते और किसी अन्य को बैंक भेजते। बैंक पारख करवाता तो ज्वैलर्स गहनों की असली होने की रिपोर्ट दे देते।
नकली गहनों से ऋण लेने वाले रूपया लेने के बाद बैंक में नहीं गए। बैंक ने जब जमा गहनों को निपटाने की कार्यवाही शुरू की तब यह राज उजागर हुआ कि गहने नेकली हैं और बैंक के पारखी ज्वैलर्स ने असली गहने की रिपोर्ट देकर बैंक को लुटवाया है। सोने के बदले बैंक से लाखों रूपए निकला दिए गए जो बहुत बड़ी रकम बनती है। बैंक ने कार्यवाही शुरू की तब दो पारखियों ने तो रूपए जमा करवा दिए बताए जाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह पैदा हुआ है कि सूरतगढ़ में इन ज्वैलर्स शॉपों से हर साल लोग करोड़ों रूपए के गहने बनवाते हैं। जब ये बैंक से नहीं चूके तब लोगों को तो धोखा जरूर दिया होगा। इनमें से एक ज्वैलर्स तो पहले भी मिलावटी गहने बनाने में शहर में बदनाम हो चुका है लेकिन बाद में लोग भूल भाल गए।
अब एक सवाल और उठ रहा है कि लोग किससे गहने बनवाएं और किससे परख करवाएं। इन सुनारों में से एक सुनार का बाप तो सामाजिक सेवाओं में भी शामिल रहता है। अब किस पर करें भरोसा किस पर करें ऐतबार। ये तीन ज्वैलर्स कौन हैं? यह थोड़ा सा प्रयास करें तो मालूम पड़ जाएगा,लेकिन पहले अपने गहने जरूर जांच करवालें।
यहां और आसपास के ग्रामों के लोग तो जाँच भी करवा लेंगे लेकिन जो अधिकारी कर्मचारी सूरतगढ़ में आते हैं और अपनी कमाई के धन से गहने बनवा कर अपने प्रांत में चले जाते हैं उनको तो मालूम ही नहीं पड़ेगा।
बीस तीस साल बाद परिवार का सदस्य गहने नए बनवाने की सोचेगा तब उसका सिर घूम जाएगा।
सुना जाता है कि सुनार पचीस तीस प्र्र्र्रतिशत तो मिलावट करते हें और यह आम बात है।
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