Saturday, July 9, 2016

भ्रष्ठ जननेताओं से लगाव:अधिकारियों से ईमानदारी की उम्मीद:



साधु संत महात्मा सच्च बोलने पर लगाते हैं रोक तो कैसे रूकेगा भ्रष्टाचार? 

जय हो- आजाद हिन्दुस्तान:


- करणीदानसिंह राजपूत -


 आज हर आदमी के पास सच्च है लेकिन फिर भी आजादी के बाद भी देश भ्रष्टाचार दुराचार निकम्मेपन से उभर नहीं पाया है। आदमी सच्चा है और सच्चे होने का बखान भी बात बात पर करता है मगर जिसे चुनता है वह भ्रष्ठ क्यों निकलता है और सरकार भ्रष्ठ क्यों निकल जाती है? जन नेता भ्रष्ठ होंगे तब अधिकारियों व कर्मचारियों से ईमानदारी की उम्मीद आखिर क्यों की जाती है? जन नेता भी
अपने भाषणों में ईमानदारी का आह्वान करते नहीं शर्माते। कोई भी नेता यह नहीं कहता कि वह और उसका परिवार पूर्ण रूप से ईमानदार है तथा उसकी परीक्षा कभी भी ली जा सकती है? नेता और सरकार यह कहती रहती है कि उसके काल में भ्रष्टाचार कम हुआ या नहीं हुआ,भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा। देश में कहीं भी भ्रष्टाचार हो,रोजाना कहीं न कहीं मामला पकड़ा जाता हो फिर भी सर्वाेच्च नेता दावा करता रहेगा कि उसकी सरकार पर मंत्रियों पर भ्रष्टाचार का आरोप तक नहीं लगा है। देश में मामले पकड़े जाते रहें तो उनसे कैसे बच सकते हैं? पार्टियां एक दूसरे की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रहती है। तो कैसे माने कि देश से हरामखोरी चली गई है। अपने घर में आता धन हराम का नहीं लगता लेकिन दूसरे के घर में जाता हुआ हराम का लगता है। अपने भाई बंधु संतान सभी ईमानदार चाहे कितनी लूट खसोट करते रहें लेकिन दूसरे की छोटी सी घटना भी बतंगड़ बना दी जाती है। इस प्रकार के जन नेता हों तब ईमानदार अधिकारी हों जंचता नहीं,लेकिन ऐसे नेता जिंदा रहें इसलिए हिन्दुस्तान की जय बोलने का जी करता रहता है।
भ्रष्ट नेता अपने कार्य क्षेत्र में चुनाव क्षेत्र में मर्जी से चुन कर अधिकरियों को लगाता है और उनसे पहले ही हिस्सा पांति का अलिखित अनुबंध हो जाता है। इस तरह से जो अधिकारी लाया जाता है वह ईमानदार रह भी नहीं सकता। नेता को मंथली देने के लिए लाखों रूपए की वसूली करनी पड़ती है। अधिकारी कर्मचारी की अपने घर के पास आने की या फिर ऊपरी कमाई की आशा होती है तब वह भी अनुबंध कर लेता है। अधिकारी पर जब करोड़ों रूपए के भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं तब यह तो मान कर चलना चाहिए कि उतने ही करोड़ों रूपए इलाके के जन नेता ने भी कमाए हैं। बस अंतर इतना होता है कि नेता अपने यहां का होता है सो उस पर वार नहीं करते,आरोप नहीं लगाते और अधिकारी पर आरोपों की झड़ी लगाते हैं तथा उसे फंसाने के लिए जाल भी बुनते हैं। अनेक बार नेता ही जाल बुन कर अधिकारी को फंसवाते हैं जब किसी बात पर या लेनदेन के हिस्से पर अनबन हो जाती है। ऐसे कितने ही किस्से घटनाएं हमारे आसपास होती रहती हैं। जब कोई घटना होती है तब अधिकारी भ्रष्ट कहलाता है तथा नेता दूध का धुला बना रहता है।
इसलिए हिन्दुस्तान की जय बोलने का जी करता है कि नेता और अधिकारी के बीच के अनुबंध का पता भ्रष्टचार निरोधक ब्यूरो को नहीं लगता और न सीबीआई को। वैसे भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या सीबीआई जैसे संगठन भी अधिकारी के पकड़ में आने पर या शिकायतें होने पर नेता व अधिकारी के बीच के अनुबंध को खोजने का प्रयास नहीं करते। अपने आसपास की घटनाओं पर नजर डालें सच्च में मालूम पड़ जाएगा।
    साधु संतो महात्माओं का देश हमारा। इनके उपदेश और कथाएं यत्र तत्र होती ही रहती है। पुराने महापुरूषों के देवी देवताओं के बखान होते हैं। सच्च सदाचार पर उपदेश होते हैं। सच्च की सदा विजय का सार कथा प्रसंगो में बतलाया जाता है। लेकिन साधु संत महात्मा उपदेश में कहते हैं कि ऐसा सच्च न बोलो जिससे किसी को पीड़ा हो या नुकसान पहुंचे। वाह। इसलिए इन संतो की जय बोलने का जी करता है। भ्रष्टाचारी दुराचारी अपराधी के विरूद्ध सच्च बोला जाएगा तभी तो उसका और उसके कारनामों का अंत होगा। सच्च बोलना या उसके विरूद्ध लिखना मुकद्दमा दर्ज करवाना,अपराधी के लिए तो अप्रिय नुकसान देह होगा ही।
यह जो सीख दी जाती रही है कि ऐसा सच्च न बोलो जिससे किसी को पीड़ा पहुंचे और नुकसान हो,इसीलिए तो भ्रष्ट नेता जीवित रहते हैं तथा उनका कुछ भी बिगड़ नहीं पाता। एक नेता गया तो दूसरा आ गया और बाप गया तो बेटा आ गया।
बस इसलिय हिन्दुस्तान की जय बोलने का जी करता है कि एक तरफ सच्च न बोलने की सीख चलती रही है और साथ में हजारों वर्षों से सत्यम् शिवम् संदरम् तथा सत्यमेव जयते के मंत्र संदेश भी चलते रहे हैं।

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- करणीदानसिंह राजपूत- 
सूचना एवं जनसंपर्क सचिवालय राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार, 
50 वर्षों से पत्रकारिता व लेखन:
 राजस्थान पत्रिका में  35 वर्ष सेवा। अनेक पुरस्कार सम्मान:
23 करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ।
मोबाइल नं. 94143 81356.

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