Monday, June 8, 2015

वंदेमातरम् का नारा और मंचों पर आरोपी हों अतिथि तो कैसे बनेगा मोदी का भारत?


- करणीदानसिंह राजपूत -
वंदे मातरम् मुंह से और भारत माता का पूजन करवाएं उन लोगों से जिन पर किसी न किसी रूप में भ्रष्टाचार की कालिख लगी हो तो मोदी का भारत कैसे बनेगा? भ्रष्टाचार दुराचार के गंभीर आरोपों और करोड़ों रूपयों के गोलमाल करने वालों तथा सरकार की विकास की योजनाओं को घपलों में डालने वालों को मंचों पर सुशोभित करने से वंदे मातरम् का महान नारा केवल मुंह से बोल देने मात्र से तो सफल नहीं हो पाएगा। सीधी और दो टूक बात है कि समाजसेवी संस्थानों में पदाधिकारी अपने किसी न किसी व्यक्तिगत हित को ध्यान में रख कर आरोपियों को मुख्य अतिथि या विशिष्ट अतिथि बनाते हैं या अध्यक्षता करवाते हैं। जनता से इस प्रकार की बातें और राज छुपे हुए नहीं रह पाते। सामाजसेवी संस्थानों से सीधा सवाल है कि जो कार्यकर्ता आपके और धन भी आपका तब आरोपियों को मंचों पर लाने से कुछ कालिख तो लगेगी ही और आरोपों के घेरों में संस्था भी आएगी।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को महान बनाने के लिए कितने ही मंचों से दिल खोल कर अपने वक्तव्य दिए हैं लेकिन लगता है कि आपने आप को भारतीयता का प्रतीक कहलाने वाले संस्थाओं के पदाधिकारियों को उनकी बात समझ में नहीं आ रही है।
संस्थाएं कालिख लगे चेहरों को मंचों पर कैसा भी स्थान दें स्वागत करें लेकिन जो लोग ईमानदारी से भ्रष्टाचार खत्म करने पर लगे हुए हैं उनके कदम आगे बढ़ते रहेंगे। कालिख लगे चेहरे संस्थाओं के कार्यक्रम में सम्मानित होने से सफेद नहीं हो पाऐंगे। उन पर मुकद्दमे बनते रहेंगे और चलते भी रहेंगे। लेकिन कालिख लगे चेहरों को मंचों पर लाए जाने से संस्थाओं के उद्देश्य और संकल्प सफल नहीं हो सकते। इसे इस तरह से भी कहा जा सकता है कि संस्था पदाधिकारी अपने संकल्पों से ही गद्दारी कर रहे हैं। इस प्रकार के दोगले व्यवहार से भारत महान कैसे बन पाएगा?
भ्रष्टाचारियों को मंचों पर बुलाने वाली और रिबन कटवाने वाली संस्थाओं के पदाधिकारियों की कुंडली भी जब बनने लगेगी तब उनके चेहरे भी बेनकाब होने लगेंगे। संस्थाओं को अपने आपको सुधारना ही होगा। भ्रष्टाचार से लडऩे वालों की नजर तो सब पर रहेगी।
वंदेमातरम् का नारा लगाओ तो पूरी ईमानदारी से लगाओ। भारत को महान बनाने का संकल्प है और समाजसेवा का संकल्प है तो समाज का खून चूंसने वालों का सत्कार बंद करो।
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