सोमवार, 16 मई 2016

वसुंधरा के भतूळिये के बाद देखना:उड़े हुए नेता कोई झाड़ में कोई नाल में गिरे मिलेंगे:



सामयिक टिप्पणी- करदानसिंह राजपूत:

वसुंधरा राजे की सुराज संकल्प यात्रा ने राजस्थान के मरणासन्न भाजपा नेताओं में जान डाल दी  और कल्याण भूमि की ओर जाता हुआ मरता मरता नेता भी एक बार अंतिम ईच्छा में विधायक बनने के लिए टिकट मांगने को आतुर हो उठा । बस कैसे भी हो। एक बार टिकट मिल जाए। टिकट मांगने वालों के हर जगह टोले बन गए ।

वसुंधरा के नजदीक से नजदीक दिखलाने को सब कुछ करने को तैयार होते हुए सबने अपनी अपनी अंटी ढ़ीली कर लाखों लाखों रूपए लगा दिए । बड़े बड़े होर्डिंग्स,बैनर,फ्लैक्स बोर्ड,अखबारों में रंगीन विज्ञापन। शहर और कस्बे सब भरे कोई सडक़ कोई चौराहा खाली नहीं बचा।

     सब में नेता की फोटो वसुंधरा की फोटो के साथ साथ। कोई वसुंधरा की यात्रा को आंधी बतला रहा  तो कोई तूफान बतला रहा ।

वसुंधरा की  यात्रा को नेता आंधी और तूफान बतला रहे ,ना जाने इसके बाद क्या क्या हो जाएगा?

मैं इस आंधी और तूफान को भतूळिया बतला रहा हूं। रेगिस्तान में रहने वाला हर नर नारी बालक बालिका जानता है कि भतूळिया क्या होता है? किसे कहते हैं भतूळिया? गर्मियों में ऊंची ऊंची रेत की बहुत तेज गति से घूमती आकाश छूती धूल भरी चोटी सी दिखाई देती है और आसपास से निकलती है तो उसके घेरे में कागज पत्तर कपड़े और सामान तक उड़ कर दूर दूर जा गिरते हैं। ये सामान उड़ते हुए दिखलाई भी पड़ते हैं। हम सभी ये नजारे देखते हैं। भतूळिये में उड़ा सामान बाद में दूर दूर किसी झाड़ में अटका हुआ या कांटों में फंसा हुआ मिलता है या फिर किसी खड्डे नाले या खाळ में गिरा हुआ मिलता है। किस बदसूरती में मिलता है,उसका वर्णन मैं यहां नहीं करता। कारण कि आगे बात नेताऔ की है और  जो दशा

नेताओं होने वाली है। वो छिपाए तो भी छिपने वाली नहीं होगी।

वसुंधरा के भतूळिये में जो ये नेता उड़ रहे हैं। बड़ी शान समझ रहे हैं। इतरा रहे हैं। किसी को कुछ समझना नहीं चाहते। बस एक ही ध्येय है कि वसुंधरा राजे एक बार देखले। एक बार निहार ले। किसने कितनी मेहनत की है। वसुंधरा राजे के राज को वापस लाने के लिए। बस जैसे तैसे टिकट मिल जाए। यात्रा के प्रभारियों की जी हजूरी करके जैसे तैसे भतूळिये में उड़ जाएं। बस भगवान यह ईच्छा पूरी करदे। वसुंधरा के भतूळिये में उड़ा दे। बस उड़ता हुआ लोग देखलें।

नेता लगे हुए हैं। उडऩे दो नेताओं को। करने दो ईच्छा पूरी। भतूळिया समझदार है और पूरा समझदार। यह मैं लिख रहा हूं कि भतूळिया समझदार है। वो किसको कहां गिराना है। वहीं गिराएगा। किसको झाड़ में गिराना है। किसको नाळे में गिराना है। किसको खाळे में गिराना है।बस भतूळिया निकल जाए तब देख लेना कौन कौन कहां कहां गिरा हुआ मिलता है। बस। मेरा एक निवेदन है। किसी कि हालत पर हंसना मत।

कौन कौन कहां कहां गिरा हुआ है।

 

update 16-5-2016


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