Tuesday, December 19, 2017

गुजरात का 2019 वास्ते संदेश ! कांग्रेस मुक्त भारत संभव नहीं!!



सामयिक लेख-रमेश छाबड़ा


जनता ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपना फैसला दे दिया है।दोनों प्रदेशों में बीजेपी की जीत हुई है।जहाँ तक हिमाचल का सवाल है वहां पिछले तीस साल से बीजेपी व कांग्रेस बारी बारी से सरकार में आते रहे हैं व इस बार वहां वीरभद्र के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी जिसके स्थान पर अब बीजेपी दो तिहाई बहुमत से 44 सीटों पर कब्ज़ा करके सरकार में आ रही है जबकि कांग्रेस को 21 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। हालांकि इस चुनाव में बीजेपी के मुख्यमंत्री के चेहरे पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल व बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती खुद अपना चुनाव हार गए है । बीजेपी के दो प्रमुख चेहरों की हार के बाद भले ही पार्टी ने चुनाव जीत लिया हो पर वहां जश्न जैसा माहौल नहीं है। दूसरी तरफ गुजरात में बीजेपी जो 150 सीट जीतने का दावा कर रही थी व अधिकांश एग्जिट पोल उसे 120 के आसपास सीट दे रहे थे वो प्राप्त परिणाम में 99 पर सिमट कर रह गयी है जबकि कांग्रेस 80 सीटों तक आ कर कड़ी टक्कर दे सकी है। भले ही बीजेपी ने जीत हासिल कर ली होै पर पिछले 22 वर्षों में उसकी ये सीटें सबसे कम रही है और विपक्ष के पास इतनी सीटें आज़ादी के बाद आज तक कभी नहीं रही। परिणाम ये तो बताता है कि मोदी का करिश्मा अभी बरक़रार है पर जिस तरह से सीट घटी हैं वो भविष्य की ओर इशारा भी है कि 2019 का कुछ तय नहीं हैं। बीजेपी ये दावा कर रही है कि इस बार उसकी सीट कम हो गयी हैं पर उनका मत प्रतिशत 2012 के मुकाबले 2 प्रतिशत बढ़ा है उसे यह भी याद रखना चाहिए कि 2014 के चुनाव में उसका मत प्रतिशत जो 60 तक हो गया था अब वो मात्र साढ़े तीन साल में घट कर 49.5 प्रतिशत रह गया है।2014 चुनाव में बीजेपी को 165 विधान सभा सीटों में बढ़त हासिल थी जो अब घटकर सिर्फ 99 सीटों में सिमट गयी है।इसके विपरीत कांग्रेस की सीट और मत प्रतिशत दोनों में इजाफा हुआ है।कुल मिला कर ये एक ऐसा परिणाम है जिसमे जीतने व हारने वाले दोनों खुश हो सकते हैं। मोदी इस जीत को जातिवाद पर विकास की जीत बता रहे हैं जबकि अन्य इसे चुनाव के अंतिम चरण में किये गए ध्रुवीकरण का प्रभाव बता रहे हैं।चुनाव प्रचार जिस तरह चला और मोदी जी ने प्रधान मंत्री रहते हुए इस बार विकास  का नाम छोड़ कर कभी हाफिज सईद, पाकिस्तान  व कभी गुजरात का बेटा जैसे भावनात्मक और ध्रुवीकरण के मुद्दों पर ज्यादा बात की।यही नहीं उन्होंने प्रचार के दौरान पूर्व पीएम मनमोहनसिंह ,पूर्व उपराष्ट्रपति व पूर्व सेनाध्यक्ष दीपक कपूर सहित बहुत लोगों पर षड्यंत्र करने के आरोप भी लगा दिए उससे लगता है कि चुनाव प्रचार में पीएम अपने पद की गरिमा तक का ख्याल रखना भूल जाते  हैं।इसके विपरीत पूरे चुनाव में राहुल ने प्रचार में शालीनता बनाये रक्खी।उनके दल के एक वरिष्ठ सदस्य ने जब पीएम के खिलाफ गलत टिपण्णी की तो उसे तुरंत बाहर का रास्ता दिखाने में देरी नहीं की।ये सभी मानते हैं कि जो लोग राहुल को अब तक हल्के में लेते थे इसबार उन्होंने उन्हें परिपक्व मान कर गंभीरता से सुना।कुल मिला करअगर प्रचार में कही गयी बातों को देखा जाय तो इस बार राहुल का कद बढ़ा है  जबकि इस मामले में मोदी का कद कुछ कम हुआ है।चुनाव परिणामो ने बीजेपी को जीत तो दी है पर दोनों जगह मजबूत विपक्ष भी दिया है । जो लोग कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे उन्हें समझा दिया है कि ऐसा फ़िलहाल संभव नहीं है।


रमेश छाबड़ा

मो 09928831763



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