Thursday, November 3, 2016

संघ की राजस्थान सरकार का आचरण नैतिकता और गुरुशरण छाबड़ा का शराबबंदी को लेकर बलिदान

- करणीदान सिंह राजपूत -
संघ के प्रमुख सदा नैतिकता और शुद्ध आचरण पर सीख देते रहे हैं। मैं उनकी किसी भी सीख पर कोई कटाक्ष नहीं करना चाहता लेकिन जहां जहां संघ के सहयोग से  सरकारें बनी हैं

उन सरकारों का आचरण शुद्ध नहीं रहा और नैतिकता के कार्यों में सरकारें कभी खरी नहीं उतरी। गुरुशरण छाबड़ा की प्रथम पुण्यतिथि पर आज 3 नवंबर 2016 को मैं बड़ेदुख और आक्रोश के साथ संघ के प्रमुख कार्यकर्ताओं को कहना चाहता हूं कि राजस्थान सरकार शराब पीने पिलाने का अनुचित ओछा कार्य कर धन कमाने में विश्वास रखती है। इस सरकार से कैसे आशा की जाए कि वह आम जनता के सुख और स्वास्थ्य की रक्षा करेगी तथा अपराधों को रोकने में आगे रहेगी। सबसे अधिक दुख तो इस बात को लेकर है कि राजस्थान में मुख्यमंत्री एक महिला है और उसे राजस्थान की महिलाओं की न फिक्र है न चिंता है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को राजस्थान की महिलाओं की चिंता होती तो वह राजस्थान में शराब बेचने के बजाए संपूर्ण शराब बंदी का निर्णय लेती। राजस्थान की सरकार संपूर्ण शराब बंदी का निर्णय लेती तो एक देशभक्त क्रांतिकारी स्वाभिमानी समाजसेवक गुरुशरण छाबड़ा के प्राण जाने से बच सकते थे। राजस्थान की संघ निष्ट सरकार की प्रमुख वसुंधरा राजे ने तो आमरण अनशनकारी गुरुशरण छाबड़ा से मिलने और बात करने के लिए भी समय नहीं निकाला। आश्चर्य है कि छाबड़ा जी की मृत्यु के चौथे दिन वसुंधरा राजे उनके निवास पर शोक व्यक्त करने पहुंची और कहा कि उनको छाबड़ा जी के अनशन का मालूम नहीं था

अगर राजस्थान की सरकार को गुरुशरण जी छाबड़ा के जयपुर में आमरण अनशन करने का मालूम नहीं था तो एक बहुत बड़ा सवाल पैदा होता है कि  इस सरकार पर कैसा भरोसा किया जाए किस तरह से यह सरकार चल रही है जिसे जयपुर का पता नहीं तो वह पूरे राजस्थान का हालचाल कैसे मालूम करती होगी?  संघनिष्ठ कहलाने वाली सरकार  ने गुरुशरण छाबड़ा जी से जो समझोता हुआ था वह भी लागू नहीं किया। छाबड़ा जी के बलिदान के बाद उनकी पुत्रवधू पूजा छाबड़ा के आमरण अनशन पर जो समझोता किया वह भी लागू नहीं किया। पूजा छाबड़ा के अनशन समाप्त करवाने के बाद करीब 1 साल की अवधि बीत रही है लेकिन सरकार ने अपने वादों को पूरा नहीं किया। छाबड़ा जी के बलिदान के वक्त राजस्थान सरकार के मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ और अरुण चतुर्वेदी मौजूद थे। उन्होंनेपूर्ण घटनाक्रम को देखा लेकिन ये दोनों आज चुप हैं। छाबड़ा जी के नजदीक माने जाने वाले छाबड़ा जी के जीवन को जानने वाले गृहमंत्री गुलाब चंद जी कटारिया भी आज अपना मुंह खोलने से पीछे हट रहे हैं। संघ हमेशा आचरण पर अपना वक्तव्य शुरू करता है और आचरण पर अपना वक्तव्य समाप्त करता है जिसमें देशभक्ति और नारी कल्याण की बातें होती है। मैं यह कहना चाहता हूं कि नैतिकता आचरण और महिला कल्याण के कार्य भारत देश में अच्छे तरीके से लागू करने के लिए संपूर्ण शराबबंदी की आवश्यकता है। संघ ने  सरकारें तो बनाई मगर सरकारों के प्रमुखों को स्पष्ट रुप से शराबबंदी करने का आदेश और निर्देश नहीं दिया। हमारे देश में शराब के कारण हर प्रकार के अपराध होते हैं जिनके कारण महिलाओं को दुख दर्द और पीड़ाएं सहन करनी पड़ती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड रखने वाली संस्था ने ताजा रिपोर्ट में बताया है कि महिलाओं के साथ रेप के अपराध में दिल्ली के बाद राजस्थान का नंबर आता है राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए यह तथ्य शोभायमान नहीं कहा जा सकता। सच में राजस्थान की सरकार संघ के दिशा निर्देशों पर चलने का कहती है तो उसे अपराधों के बारे में आने वाली तथ्यात्मक रिपोर्ट्स पर ध्यान देना होगा और हर हालत में शराबबंदी का निर्णय लागू करना होगा। राजस्थान सरकार जनता के स्वास्थ्य का दावा और संघ के दिशा निर्देशों पर चलने का दावा भी करे साथ में शराब भी बेचे तो यह बात किसी भी हालत में उचित नहीं कहीं जा सकती। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र जी मोदी गुजरात के मुख्य मंत्री से पीएम बन दिल्ली पहुंचे। गुजरात में शराबबंदी काफी सालों से लागू है वहां की सरकार शराब के बिना हर प्रकार का बजट बनाती है और देश में सर्वश्रेष्ठ राज्य की सरकार कहलाती है। गुजरात  की सरकार बिना शराब की आमदनी के चल सकती है तब राजस्थान की सरकार बिना शराब के पैसे के क्यों नहीं चल सकती? शहीद गुरुशरण छाबड़ा ने अपने आमरण अनशन के दिनों में यह सवाल उठाया था की जब गुजरात की सरकार बिना शराब के पैसों से चल सकती है तो राजस्थान की सरकार शराब के पैसों के बिना क्यों नहीं चलाई जा सकती? राजस्थान में या अन्य राज्यों में जहां कहीं भी शराब के पैसे से बजट प्राप्त किया जाता है तब संघ के उद्बोधनों वक्तव्यों पर विचार करना पड़ता है कि राज प्राप्त करने के लिए संघ के भाषण अलग होते हैं और राज मिलने के बाद बदल जाते हैं।

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