सोमवार, 26 अक्तूबर 2020

कोयला घोटाला: पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दिलीप रे को 3 साल की कैद,बाजपेयी मंत्री मंडल में थे. अभी जमानत दी गई।


* 21 साल पुराना केस*

* करणीदानसिंह राजपूत *

सीबीआइ अदालत ने आज 26 अक्टुबर 2020 को कोयला खान आवंटन में हुए भ्रष्टाचार में फैसला सुनाया है जिससे बाजपेयी मंत्री मंडल के मंत्री रहे दिलीप रे संकट में हैं। दिलीप रे को अपील के लिए समय दिया गया है। इससे एक बार राजनीति में गर्मी आएगी।


केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने कोयला घोटाला मामले में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दिलीप रे को 3 साल की जेल की सजा सुनाई। 

*1999 में हुआ था कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला*

दिलीप रे समेत तीन दोषियों को तीन साल की सजा सुनाई गई है साथ में तीनों दोषियों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। 

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने कोयला घोटाला मामले में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दिलीप रे को 3 साल की जेल की सजा सुनाई है. इसके साथ ही घोटाले से जुड़े अन्य दो दोषियों को भी तीन साल की सजा सुनाई गई है. साथ ही तीनों पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सीबीआई कोर्ट ने दिलीप रे समेत सभी तीनों दोषियों को एक-एक लाख रुपये के बांड पर जमानत दे दी. इसके साथ ही फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील के लिए 25 नवंबर तक की मोहलत दी गई है. 

सीबीआई की विशेष अदालत ने दिलीप रे के अलावा कोयला मंत्रालय के तत्कालीन दो वरिष्ठ अधिकारी, प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्या नंद गौतम, कैस्ट्रोन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (सीटीएल), इसके निदेशक महेंद्र कुमार अग्रवाल और कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटेड (सीएमएल) को भी दोषी ठहराया था. कोर्ट ने सीटीएल पर 60 लाख तो सीएमएल पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.


गौरतलब है कि बीते दिनों ही विशेष अदालत ने कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में दिलीप रे को दोषी करार दिया था. उनका ये मामला 1999 में झारखंड कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनियमितता से जुड़ा है. विशेष न्यायाधीश भरत पराशर ने दिलीप रे को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी पाया, जबकि अन्य को धोखाधड़ी और साजिश रचने का दोषी पाया गया.


कौन हैं दिलीप रे बीजू जनता दल (बीजेडी) के संस्थापक सदस्य रहे दिलीप रे, बीजू पटनायक के काफी करीबी थे. हालांकि बाद में रे ने पार्टी बदल ली और भाजपा में शामिल हो गए. 2014 में वह बीजेपी के टिकट पर राउरकेला से विधायक चुने गए. रे ने 2019 के चुनाव से पहले बीजेपी छोड़ दी और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास पर अपना वादा नहीं निभाया है. 


दिलीप रे के भाजपा छोड़ने के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह अपनी पूर्व पार्टी बीजेडी में शामिल हो सकते हैं और बीजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि, दिलीप रे राजनीति से दूर रहे. अब उनको कोयला घोटाले में तीन साल की सजा मिली है.००


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