Sunday, September 10, 2017

गुरमीत राम रहीम मानसिक रोगी हुए तो जेल और नई सजाओं से बच जाएंगे




-  करणी दान सिंह राजपूत -


‌ बाबा गुरमीत राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में अजीबोगरीब हरकतें करने लगे हैं। यह समाचार आ रहे हैं कि बाबा के विचित्र बीमारी लगी है जिससे उनका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है। दो साध्वियों  से बलात्कार यौन शोषण के अपराध में   20 साल की सश्रम कैद की सजा भुगत रहे बाबा 25 अगस्त 2017 से जेल में बंद है। बाबा को सीबीआई अदालत पंचकूला ने 28अगस्त  2017 को सजा सुनाई थी।

‌ बाबा अपनी खास युवती हनीप्रीत का नाम लेकर बैरक में जोर जोर से चिल्लाते रहते हैं। बाबा से कोई भी परिजन मिलने नहीं पहुंचा। बाबा बार बार पूछते हैं कि कोई उनसे मिलने आया?  बाबा किसी मिलने वाले के नहीं आने के कारण भी बेचैन हैं।

‌9 सितंबर को बाबा ने अपने शरीर को खुजलाना शुरू किया और उसके बाद उनका मेडिकल चेकअप हुआ। जेल के डॉक्टरों ने मामले को गंभीर देखते हुए पीजीआई में उपचार की सिफारिश की। 

‌ पीजीआई के डॉक्टरों की टीम ने रोहतक की सुनारिया जेल में पहुंचकर बाबा का चेकअप किया है। फिलहाल बाबा का मानसिक संतुलन ठीक बताया जा रहा है लेकिन डॉक्टरों और पुलिस प्रशासन सभी की ओर से खबरें आ रही है कि बाबा राम रहीम की हालत अधिक न बिगड़े इसलिए उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया जाए। पीजीआई रोहतक के निदेशक राकेश गुप्ता के अनुसार 4 डॉक्टरों की टीम जेल में गुरमीत राम रहीम का उपचार करने के लिए गई थी। राम रहीम के शारीरिक व मानसिक स्थिति के बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया और कहा कि रिपोर्ट जिला प्रशासन और जेल प्रशासन को भेज दी गई है।  खबरों के मुताबिक लगता है कि बाबा गुरमीत राम रहीम को किसी भी समय पीजीआई रोहतक में इलाज के लिए स्थानांतरित किया जा सकता है भारतीय कानून के मानसिक रोगी को जेल में बंद नहीं रखा जाकर चिकित्सालय में उपचार के लिए रखना होता है इसके अलावा अगर बाबा मानसिक रोगी घोषित हो जाते हैं और मानसिक रोगी के रूप में इलाज शुरू होता है तब वह जेल में नहीं रखे जा सकते। वे चिकित्सालय में रखे जाएंगें।  मानसिक रोगी होने के कारण अन्य विचाराधीन मुकदमों में उन पर न तो कोई मुकदमा चलाया जा सकता हैं और न मानसिक रोगी को सजा हो सकती है। बाबा गुरमीत राम रहीम मानसिक रोगी घोषित किए जाने के बाद जेल के बजाय चिकित्सालय में रहेंगे और अन्य मुकदमों में सजाएं नहीं सुनाई जा सकेंगी। 

‌ वरिष्ठ एडवोकेट सरदार हरचंद सिंह सिद्धू से इस बाबत कानूनी जानकारी प्राप्त की गई तब सिद्धु ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति मानसिक रोगी हो और मुकदमें और सजा के बारे में समझ ही नहीं रखता हो तब ऐसी स्थिति में उस मानसिक रोगी पर न तो मुकदमा चलाया जा सकता है और ना ही उसे सजा सुनाई जा सकती है। सरकार को उसका इलाज करवाना होता है।

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