शनिवार, 6 अप्रैल 2024

मील भाजपा में नं 2 पर ही रहेंगे.भाजपा में आएंगे तब हालात ये होंगे।

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

मील के भाजपा में आने की चर्चा हो रही है मगर उनका ओहदा भाजपा में नं 2 पर रहेगा। जिनकी अभी चल रही है और नं 1 पर हैं वे नं 1 ही रहेंगे। मील उनके बराबर भी  स्थापित नहीं हो सकते सो उनसे ऊपर की सोचना और मील की चलेगी जैसी बातें सोचना पागलपन होगा। 

अभी जितनी चल रही है वह पराजित विधायक रामप्रताप कासनिया की चल रही है जैसी मील की 2018 से 2023 तक चली। मील हारे हुए थे मगर सरकार कांग्रेस की थी। अब कासनिया हारे हुए हैं मगर सरकार भाजपा की है।

* 2023 में हनुमान मील को कांग्रेस का टिकट नहीं मिला तब मील परिवार के चार जनों ने कांग्रेस प्रत्याशी डुंगरराम गेदर को हराने के लिए भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया का समर्थन किया। कासनिया और गंगाजल मील के रवैये से जनता दुखी और परेशान थी। मील का समर्थन कासनिया को ले डूबा। मील और कासनिया एक हुए तब जनता ने और अधिक गुस्सा किया जो वोटों में फूटा।

कासनिया जी 50 हजार से अधिक वोटों से हार गये। मील के पास वोट होते तो कासनिया को जरूर मिलते। कासनिया के पास अभी भी वोट नहीं है और मील के पास भी अभी वोट नहीं है। मतलब यह है कि लोकसभा के भाजपा प्रत्याशी प्रियंका बेलाण को सूरतगढ़ से कुछ भी लाभ मील कासनिया के मेल से मिलने वाला नहीं है। कासनिया से नाराजगी और मील से नाराजगी जुड़ कर डबल हो जाएगी और यह प्रियंका बेलाण के लिए खतरा ही बनेगी।

मील के भाजपा में आने से पहले ही विरोध के स्वर उभरने लगे हैं। मील भाजपा में आने के बाद भी घर पर बैठेंगे, लगता नहीं है कि उनको मंच पर कहीं कुर्सी मिल जाए। मील को बुलाया ही नहीं जाएगा तब बिन बुलाए तो किसी कार्यक्रम में कैसे जाएंगे? काम भी करवाना होगा तो जिनकी चलती है उनसे ही कहना मजबूरी होगी।

* गंगाजल मील ने 2003 में पीलीबंगा से भाजपा टिकट कबाड़ ली लेकिन भाजपा टिकट के दावेदार रामप्रताप कासनिया ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और मील को हराया। 2008 में पीलीबंगा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई तब सभी योद्धा सूरतगढ़ आ गये। मील ने 2008 में पत्रकार वार्ता आयोजित की जिसमें भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए भाजपा छोड़दी। 2008 में मील ने कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ा और भाजपा के रामप्रताप कासनिया को हराया। 2013 में कांग्रेस के मील को भाजपा के राजेंद्र सिंह भादु ने हराया। 2018 में हनुमान मील को भाजपा के रामप्रताप कासनिया ने हराया। 2023 में हनुमान मील को कांग्रेस ने टिकट ही नहीं दी। कांग्रेस ने डुंगरराम गेदर को टिकट दी और भाजपा ने रामप्रताप कासनिया को टिकट दी। जनता कासनिया से नाराज थी और ऊपर से मील ने कासनिया का समर्थन किया। डुंगरराम गेदर ने 50 हजार से अधिक वोटों से कासनिया को हरा दिया। मील परिवार के 4 जनों को कांग्रेस ने 6 साल के लिए पार्टी की सदस्यता से बाहर कर दिया। अब मील कांग्रेस को सबक सिखलाने के लिए भाजपा में आते है तो  स्तरीय हालात नं 2 के रहेंगे। ०0० 6 अप्रैल 2024.

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