गुरुवार, 9 सितंबर 2021

सूरतगढ़ की 'मुसाबी' में सभी जमीनों का है वर्णन:बीकानेर रियासत काल का जमीनी दस्तावेज

 



* करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ़ 9 सितंबर 2021.

जोहड़ पायतन जमीन पर बनी बसंत विहार और आनंद विहार कालोनियों व अन्य मकानात आदि को हटा कर जोहड़ को प्राकृतिक रूप में स्थापित कराने के एक वकील द्वारा दिए कानूनी नोटिस के बाद से लोगों में बेचैनी है कि क्या होगा? 

वकील सुभाष बिश्नोई ने नगरपालिका प्रशासन, अधिशासी अधिकारी और नगरपालिका अध्यक्ष को 19 अगस्त 2021 को यह विधिक नोटिस दो नागरिकों मालचंद जैन और प्रवीण मेघवाल की ओर से दिया जो संबंधित को मिल चुका है। उस नोटिस में दो माह का समय दिया हुआ है। जोहड़ पायतन जमीन पर जिनके आवास हैं,उनमें चिंता व्याप्त है लेकिन नगरपालिका की ओर से इस संबंध में किसी कार्यवाही की सूचना आम नहीं हुई है। 

* नगरपालिका ने अपने कानूनी सलाहकारों से कोई सलाह लेने, उच्चाधिकारियों को,जिला प्रशासन को अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में अवगत कराया हो कि खबर भी आम नहीं हुई है। 

* मामला महत्वपूर्ण है जिसमें बड़ी हलचल होगी के लिए पालिका बोर्ड की बैठक बुलालेनी चाहिए थी। लेकिन विधानसभा सत्र में वह नहीं हो सकती। 

* नोटिस में दी गई अवधि एक एक दिन करके बीत जाएगी। क्या नगरपालिका हजारों लोगों को अचानक परेशानी में डालेगी। बहुत बड़ा प्रश्न है जो चुने हुए कांग्रेस बहुमत वाले बोर्ड को जनता को जवाब देते हुए कार्यवाही करनी है। नगरपालिका की ओर से अभी कोई सार्वजनिक सूचना जारी नहीं हुई है।

* बसंत विहार और आनंद विहार आदि जोहड़ पायतन पर है या नहीं है? यह जानने का प्रमाणिक दस्तावेज मुसाबी है। सूरतगढ़ की पुरानी समस्त भूमि का नापजोख मुसाबी में दर्ज है। बीकानेर रियासत काल से मुसाबी दस्तावेज तैयार होता रहा है। मुसाबी उर्दू अरबी भाषा का शब्द है जिसका हिंदी अर्थ भूमि नापजोख वर्णन होता है। 

* यह प्रमाणिक दस्तावेज है जिससे सही सही हालात मालुम पड़ जाता है। 

* बसंत विहार कालोनी में निवास कर रहे सूरतगढ़ के पूर्व विधायक अशोक नागपाल और नगरपालिका सूरतगढ़ के पूर्व अध्यक्ष बनवारी लाल मेघवाल के लिए तो यह जानना दुर्लभ नहीं है। दोनों को बिना विलंब किए आम लोगों को सही जानकारी देनी चाहिए। ये या अन्य कानूनी नोटिस के बाद से शांत क्यों हैं? इनको सही स्थिति मालुम है या अब तक मालुम कर चुके हैं। दोनों की जिम्मेदारी भी बनती है और यह जिम्मेदारी इतनी बनती है कि सबसे आगे आकर कार्यवाही करें।

इसमें कोई एक व्यक्ति भी भ्रमित और तथ्यों से अनजान क्यों रहे? जो होगा वह तो कानूनी प्रक्रिया से ही होगा जिसमें लोगों को शामिल होना ही होगा। ०0






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