रविवार, 15 अगस्त 2021

75 वां स्वतंत्रता दिवस: प्रशासन व पुलिस पर भ्रष्टाचारियों के दबदबे से पीड़ाएं सहते लोग व कर्मी

 



* करणीदानसिंह राजपूत *


देश की आजादी का 75 वां समारोह तिरंगा फहराते हुए देशभर में मनाया गया।

अनेक स्थानों पर नेताओं ने भी ध्वजारोहण किया जिनमें कई गंभीर आरोपों में तो कई मुकदमों में फंसे हैं।अंग्रेज देश से चले गए मगर उनके बनाए कानून और उनके आम जनता को पीड़ित करने वाले तौर तरीके अभी कायम हैं।    

स्वतंत्र देश के अंदर साधारण नागरिक अंग्रेजों के राज से भी ज्यादा पीड़ा देश के भ्रष्ट नेताओं के दबदबे में झेल रहा है। भ्रष्टाचारी नेताओं का भ्रष्टाचारी कारोबारियों का शासन और प्रशासन पर जबरदस्त दबाव है। दबाव के चलते हुए आम नागरिक हो या साधारण कर्मचारी,उसे  पीड़ा जनक स्थिति में रहना पड़ रहा है। 

भ्रष्ट नेताओं का गलत काम जब कर्मचारी नहीं करता तब  कर्मचारियों के विरुद्ध झूठी शिकायतें शासन और प्रशासन को करते रहते 

हैं। 

शासन और प्रशासन अपने कर्मचारी से और नागरिक से पूछता नहीं और न जांच करता है। है। नेता जो कहता है या मौखिक जानकारी देता है,उसी पर तुरंत दंडित करना शुरू कर दिया जाता है। 

भ्रष्ट नेताओं के कहने मात्र से नागरिक व कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू हो जाती है उसे गलत मान लिया जाता है। भ्रष्ट नेताओं का दबदबा इतना अधिक होता है कि नागरिक और साधारण कर्मचारी की सुनवाई नहीं होती। सत्ता को खुश रखने का नजरिया होता है।


भ्रष्टाचार में लिप्त ठगीठोरी करने वाले गैरकानूनी नशे का व्यापार करने वाले लोगों का दबदबा बहुत अधिक है कि वह जब तब पुलिस व  सिविल विभाग आदि में केवल फोन करते हैं। 

अधिकतर जिला पुलिस अधीक्षक व  जिला कलेक्टर कार्यालयों में नेताओं के फोन काल से ही नागरिकों का और कर्मचारियों का दमन शुरू हो जाता है। सरकारी विभागों में अनुशासन के नाम पर अत्याचार होने की पीडा़एं बढती ही जा रही हैं। जिले में तो कलेक्टर और एसपी ही सरकारी माईबाप अगर किसी की नहीं सुने तो नागरिक व कर्मचारी कहां जाकर के रोए? 

नेता का गलत काम नहीं होता तो वह कलेक्टर के यहां से कर्मचारी का स्थानांतरण करवा देता है या फिर प्रमोशन रुकवा देता है। शराब का अवैध कारोबार करने वाले,नशे का व्यापार करने वाले नेता के अपराधिक कार्य जो पुलिस कर्मी या अधिकारी पकड़ते हैं तो उस पुलिस वाले की खैर नहीं। ईमानदारी से कार्य करने की सजा मिलती है। 

 देश की आजादी के 75 में स्वतंत्रता दिवस पर शासन और प्रशासन के सर्वे सर्वा अधिकारी और नेता अपने दिलों पर हाथ रखकर कसम खा कर सोचे कि उन्होंने केवल नेताओं के इशारे पर कितने नागरिकों को बेवजह परेशान किया। उनके काम रोके और कोई सुनवाई नहीं की। कितने कर्मचारियों के जानबूझकर स्थानांतरण किए और कितनों को पदोन्नति देने से रोकी।


 देश की आजादी के 75 वें साल पर अपने मन को टटोलकर देखें कि कितना बड़ा गुनाह उनके हाथों से किया जा रहा है। 

कहने को सरकारें अपने आप को गांधीवादी बताती हैं लेकिन उनके कर्तव्य मैं कहीं गांधीवाद नजर नहीं आता। यही हाल जिला स्तर के संभाग स्तर के अधिकारियों का है। एक तरफ देश की आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और दूसरी तरफ अपने ही नागरिकों का अपने ही कर्मचारियों को बिना वजह केवल भ्रष्ट नेताओं के कहने से दंडित कर रहे हैं। ऐसा हो रहा है कि भ्रष्ट लोग शासन प्रशासन चला रहे हैं और शिक्षित प्रशिक्षित अधिकारी आंख कान बंद कर पालन कर रहे हैं।

यह कैसी आजादी है जिसमें हम किसी को न्याय नहीं दे सकते। किसी की पीड़ा को दूर नहीं कर सकते बल्कि उसे अत्याचार सहने को मजबूर कर रहे हैं।

हमारे भाषण हमारी योजनाएं जिनमें दावे किए जाते हैं कि जीवन को खुशहाल बना रहे हैं वे सब झूठे हैं। 

कभी शासन चलाने वालों को प्रशासन चलाने वालों को विचार करना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई शिकायत आए कोई नेता बात कहे तो उसके जांच पड़ताल जरूर की जाए।

किसी गरीब के साथ अन्याय होने पर वह बड़े अधिकारी का सत्ताधारी का मुकाबला तो नहीं कर सकता लेकिन उसकी हाय जरूर लगती है। जब हाय लगती है तो कोई नेता बचाने नहीं आता। ०0०

75 वां स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2021.




* करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़. (राजस्थान)

94143 81356.

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प्रकाशन की छूट है।

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