शुक्रवार, 11 जून 2021

रेलकर्मी प्रादेशिक सेना से भी जुड़ना चाहें तो ये परिलाभ- प्रादेशिक सेना क्या होती है- शशि किरण

 


प्रादेशिक सेना भारतीय सेना की एक ईकाई है। इसका उद्देश्य संकटकाल में आंतरिक सुरक्षा का दायित्व लेना और आवश्यकता पड़ने पर नियमित सेना को संबल प्रदान करना है। इसके कर्मी (वे नागरिक जो नियमित सैनिक न हो कर किसी और सेवा या अन्य क्रियाकलापों मे व्यस्त रहते हुए स्वेच्छा से कुछ अवधि के लिये सैनिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं) को प्रतिवर्ष कुछ दिनों का सैनिक प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे सक्षम सैनिक बन सकें व आपातकाल और देश के अंदरूनी उथल पुथल के वक्त आवश्यकता  पड़ने पर देश की रक्षा एवं सेवा के लिये अपनी सेवायें दे सकें।

अंग्रेजों के द्वारा 01 अक्टूबर 1920 को इंडियन टेरेटोरियल फोर्स बिल पास किया गया, जिसके फलस्वरूप ’’टेरेटोरियल आर्मी‘‘ की दो विंग ंअनेक्सिलिरी फोर्स व इंडियन आर्मी की स्थापना की गई। आजादी के बाद 18 अगस्त 1948 को इसकी स्थापना भारतीय संविधान सभा द्वारा पारित प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948 के अनुसार हुई है। इस सेना का आदर्श वाक्य ’’सावधानी व शूरता‘‘ है। प्रत्येक वर्ष 09 अक्टूबर को प्रादेशिक सेना दिवस मनाया जाता है।




प्रादेशिक सेना एक स्वैच्छिक नागरिक सेवा है। नियमित भारतीय सेना के बाद यह हमारे देश की रक्षा पंक्ति की दूसरी सेना है यह भारत के आम नागरिकों के लिये जिनका सेना के प्रतिआकर्षण है, हेतु सैन्य सेवा का अनुभव लेने का जरिया है, यह नवयुवकों को नियमित सैनिक न होते हुए भी सैन्य सेवा का अवसर प्रदान करती है प्रादेशिक सेना के लिये यह अवधारणा काम करती है कि युद्ध के समय तैनाती के लिए इसका उपयोग हो सकेगा, इसे  नियमित सेना के संसाधनों के पूरक के रूप मे समाज के हर क्षेत्र से इच्छुक अनुशासित व समर्पित नागरिकों को इस सेना को तैयार किया जाता है। प्रादेशिक युद्ध के समय सेना के सहायक के रूप मे कार्य करती है चूंकि प्रादेशिक सेना का उद्देश्य संकटकाल के समय देश को आंतरिक सुरक्षा प्रदान करना है। यह विभिन्न कार्यों के संपादन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है जिसके तहत नियमित सेना को स्थैतिक कर्तव्यों से मुक्त करना और आवश्यकता पड़ने पर सिविल प्रशासन की सहायता करना, समुद्रतट की रक्षा और हवामार यूनिटों की व्यवस्था करना व आवश्यकता होने पर नियमित सेना के लिए यूनिटों की व्यवस्था करना है।

प्रादेशिक सेना विभिन्न क्षेत्रों की अनेकों गतिविधियों मे सम्मिलित हो कर देश की प्रगति मे अपना अमूल्य योगदान देती आई है व आज भी सक्रिय रूप से दे रही है। विभिन्न क्षेत्रों के अनुरूप प्रादेशिक सेना मे अलग अलग यूनिटों का गठन किया गया है जो उस संबंधित क्षेत्रा मे अपना योगदान देती हैं।

इंफेन्ट्री बट्टालियनः-ये प्रादेशिक सेना की यूनिटें आवश्यकता के वक्त नियमित सेना को स्थैतिक कर्तव्यों से मुक्त करती है व स्थानीय प्रशासन को प्राकृतिक आपदाओं के वक्त आवश्यक सेवाओं को बनाये रखने मे सहायता करती है।

इकोलाॅजीकल टास्क फोर्सः- इकोलाॅजीकल टास्क फोर्स प्रादेशिक सेना की वे यूनिटें हैं, जो पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरक्षण मे योगदान दे कर उसे और विकृत यानि बिगड़ने से रोकने मे व पर्यावरण संरक्षण मे सरकार व समाज की मदद करती हैं। इन यूनिटों के योगदान को गिनीज बुक द्वारा भी रेखांकित किया गया है। इन यूनिटों को सरकार प्रोजेक्ट गंगा के तहत गंगा नदी के शुद्धिकरण हेतु उपयोग मे लेने का विचार कर रही है।

इंजीनियर्स यूनिटः- ये यूनिटें आपात समय चाहे वो शांति या युद्ध का समय हो अपना तकनीकि  सहयोग विभिन्न कार्यों हेतु सामान्य प्रशासन व ऐसे समय तकनीकि विभागों को  सहयोग भी देती हैं। जैसे रेलवे इंजीनियर्स यूनिट आवश्यकता पड़ने पर किसी भी चिन्हित क्षेत्र मे, रेलवे हड़ताल (जैसे 1974 की हड़ताल) के दौरान व प्राकृतिक आपदाओं के वक्त रेल परिचालन को कार्यशील रखने मे मदद करती है।

आॅयल सेक्टर यूनिटः- ये प्रादेशिक सेना की यूनिटें आपात कल मे तेल की निकासी, रिफाइनिंग व वितरण मे सहायता करती हैं ताकि अर्थ व्यवस्था क्रियाशील रहे।

जनरल अस्पताल यूनिटः-प्रादेशिक सेना की ये यूनिटें आपात समय मे जैसे युद्ध, प्राकृतिक आपदा, बाढ़, भूकंप, तूफान आदि व दंगों मे स्थानीय प्रशासन के चिकित्सा तंत्र के सहयोग हेतु तत्पर रहती हैं।

पोस्ट व टेलीग्राफ यूनिटः-ये यूनिटें  आपात समय मे सामान्य डाक एवं तार विभाग का दायित्व संभालती है व जरूरी होने पर सेना की पोस्टल कोर के दायित्वों का भी निर्वहन करती हैं।

ब्रिटिश भारत मे सर्वप्रथम ब्रिटिश भारतीय रेलवे मे भी इस तरह के एक स्वयंसेवी बल की आवश्यकता महसूस हुई और इस प्रकार ईस्ट इंडियन रेलवे वाॅलंटियर राइफल काॅर्प्स को 17 जुलाई 1869 को बंगाल कमांड के तहत गठित किया गया था। इसका मुख्यालय जमालपुर में था, जो पूर्व भारतीय रेलवे की लोकोमोटिव कार्यशालाओं और संबद्ध काॅलोनी का स्थान था। इस बल का मुख्य कार्य उस वक्त स्वतंत्रता सेनानियों व असामाजिक विघटनकरी  तत्वों से रेलवे परिसम्पति की रक्षा कर परिचालन सुचारु बनाये रखना था वर्तमान मे 06 रेलवे टेरेटोरियल यूनिट कार्यशील है व इनका नाम व विवरण विभिन्न प्रकार है, जिसके तहत 969 रेलवे इंजीनियर्स रेजीमेंट मुख्यालय जमालपुर, 970  रेलवे इंजीनियर्स रेजीमेंट मुख्यालय झांसी, 1031 रेलवे इंजीनियर्स रेजीमेंट मुख्यालय कोटा, 1032 रेलवे इंजीनियर्स रेजीमेंट मुख्यालय आद्रा, 1101 रेलवे इंजीनियर्स रेजीमेंट मुख्यालय चण्डीगड़ तथा 1105 रेलवे इंजीनियर्स रेजीमेंट मुख्यालय सिकंदराबाद है। 

प्रादेशिक सेना अधिनियम 1948के अनुसार प्रादेशिक सेना मे भर्ती होने वाले रेल कर्मियों हेतु एक सीमा तक सैन्य प्रशिक्षण का प्रावधान है। इस क्रम मे नियमित एक माह की अवधि के ट्रैनिंग कैम्प आयोजित किये जाते हैं प्रादेशिक सेना मे भर्ती के लिये नियमित रूप से हर साल आवेदन मांगे जाते हैं, जो अखबारों मे प्रकाशित होते हैं। प्रादेशिक सेना मे दो स्तर पर भर्ती की जाती है, अधिकारी व जवान। रेलवे कार्मिक (जवान) जो प्रादेशिक सेना मे शामिल होना चाहते हैं, वे इसका फाॅर्म भरकर अपने संबंधित नियंत्रक अधिकारी से अग्रेषित कराकर अपनी संबंधित प्रादेशिक सेना की यूनिट मे कमांडिंग आॅफिसर के पास भिजवाना होता है फिर नियत तिथि को भर्ती चाहने वाले कर्मचारीयों को यूनिट मे उपस्थित होना होता है, जहां आवेदक को चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है, सफल होने पर कर्मचारी को प्रादेशिक सेना मे भर्ती कर लिया जाता है। रेलवे कार्मिक जो अधिकारी पद के पात्र हैं, उन्हें फाॅर्म भर कर अपने नियंत्रक अधिकारी से अग्रेषित करा कर प्रमुख  विभागाध्यक्ष के माध्यम से वरि. उप महाप्रबंधक को प्रेषित करते हैं, वरि. उप महाप्रबंधक उस फाॅर्म को संबंधित नोडल जोनल रेलवे को भेज देते हैं। वहाँ से उसे रेलवे बोर्ड के माध्यम से प्रादेशिक सेना मुख्यालय भेज दिया जाता है, जहां से उसे सेना मुख्यालय प्रेषित किया जाता है। वहाँ सभी औपचारिक्ताएं पूर्ण करने के बाद स्वास्थ्य परीक्षण व साक्षात्कार उपरांत सफल होने पर प्रादेशिक सेना मे कमीशन किया जाता है।

रेलवे प्रादेशिक सेना मे भर्ती की योग्यताऐं हैं

 रेलवे प्रादेशिक सेना मे भर्ती की योग्यताऐं के तहत उम्र 18-42 वर्ष, शैक्षणिक स्तर स्नातक (अधिकारी हेतु) व मेट्रीक्युलेशन (जवान हेतु), नागरिकता भारत का नागरिक हो तथा शारीरिक व मानसिक रूप से व्यक्ति स्वस्थ्य होना चाहिये। व्यक्ति जो प्रादेशिक सेना मे अधिकारी या जवान के रूप मे सेवाएं देते हैं, उन्हें नियमित सैनिक की भांति प्रमोशन भी दिया जाता है, जिनमें जवान के लिए सिपाही, नायक, हवलदार, नायब सूबेदार, सूबेदार, सूबेदार मेजर तथा अधिकारी के लिए लेफ्टिनेंट, कप्तान, मेजर, ले. कर्नल, कर्नल तथा ब्रिगेडियर आदि।

देश व समाज की नामी हस्तियों ने प्रादेशिक सेना मे शामिल हो कर देश के प्रति अपनी कृतज्ञता को प्रदर्शित कर अपनी देश सेवा करने की भवना को संतुष्ट किया है।

किसी भी देश के लिये उन्नति हेतु उसकी जनता मे अनुशासन ईमानदारी एक देश व एक जिम्मेदार नागरिक के रूप मे अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण अत्यंत आवश्यक है। सरकार अधिक से अधिक नागरिकों को प्रादेशिक सेना की तरफ आकर्षित करने के उदेश्य से विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन प्रदान करती है। इस क्रम मे रेलवे भी अपने रेलवे कार्मिकों को प्रादेशिक सेना मे सम्मिलित होने पर निम्न परिलाभ प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान करती है। जिसके तहत प्रादेशिक सेना के कार्मिकों को प्रशिक्षण की अवधि में और आह्वान करने पर, नियमित सेना के तदनुरूपी पद का वेतन और भत्ता दिया जाता है, जोकि नियमित रेलवे वेतन व भत्तों के अतिरिक्त होता है। प्रादेशिक सेना के कार्मिकों को दैनिक इस्तेमाल की चीजों की खरीद हेतु सीएसडी सुविधा, प्रादेशिक सेना ज्वाईन करने पर कैश पुरुस्कार, रेल आवास आवंटन मे आउट आॅफ टर्न प्राथमिकता, रेल कर्मियों के ट्रैनिंग के दौरान ट्रैनिंग अवधि का रनिंग व ओवर टाइम, अतिरिक्त पास परिवार घर छोड़ने व वापस लाने हेतु (ट्रैनिंग हेतु प्रस्थान से पूर्व), ट्रैनिंग अटेन्ड करने हेतु अग्रिम वेतन तथा प्रादेशिक सेना और टीए मेडल की प्राप्ति पर नकद पुरस्कार का भुगतान आदि।

प्रादेशिक सेना एक ऐसा संगठन है जो एक आम आदमी को  एक सैनिक की भांति स्व.अनुशासन, अपने कर्तव्यों व जिम्मेदारियों (ड्यूटी) के प्रति समर्पण, नैतिकता व खुद को प्रांत, जाति, समाज की धारणा से ऊपर उठ कर राष्ट्रीयता की भवना के अनुरूप सर्वप्रथम एक भारतीय होने का एहसास व विस्तृत दृष्टिकोण विकसित करता है और एक साधारण जीवन को एक अनुशासित जीवन मे बदल देता है, जोकि हमारी हमारे देश की उन्नति के लिये अत्यंत आवश्यक है। ०0०

                                                                       *-- शशि किरण 

उपमहाप्रबंधक (सा)

उ.प.रेलवे।

*******

----------






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यह ब्लॉग खोजें