शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

सूरतगढ़ में मां की रसोई- ₹5 में चावल कढी या चावल राजमां- सुशील कुमार जेतली की सेवा.

 


* करणी दान सिंह राजपूत *


सूरतगढ़ में जरुरत मंद लोगों के लिए केवल 5 रूपये में एक प्लेट चावल कढी खाएं या फिर चावल राजमां खाएं। आपकी पसंद। यह सामग्री करीब 350 ग्राम वजन की होती है।


जायकेदार यह चावलकढी और चावल राजमां को बनाने और परोसने का कार्य अपने हाथों से करते हैं सुशील कुमार जेतली। एस.के.जेतली के नाम से अधिक पुकारे जाने वाले व्यक्ति जो शहर की प्रसिद्ध टैगोर शिक्षण संस्थाओं के विशाल ग्रुप के संचालन के स्वामित्व में हैं।





 उनका यह कार्य  वरिष्ठ नागरिक की रूचि और एक महत्वपूर्ण समाज सेवा का संचालन चर्चा में है।


जेतली की यह मां की रसोई शुरू करने का मन कई महीनों से हो रहा था। उन्होंने बताया कि मां की रसोई नाम में अपनत्व है। यही सोच कर यह नाम दिया। अपने हाथों से बनाना और परोसना बहुत आनंद देता है। 

जेतली ने बताया कि अभी शुरुआत है। व्यक्तियों की संख्या बढने पर अन्य का सहयोग भी लिया जाएगा। 


👌 अभी यह रसोई सुबह 10 बजे शुरू करदी जाती है और 2 बजे तक चलती है। 

शहर के बीच प्रमुख सड़कों गलियों से जुडे़ भग्गू वाला कुआ चौक पर यह रसोई है। राजीव वाटिका के पीछे नवीन आदर्श विद्यालय के सामने ही बड़े पोस्टर से रसोई का मालुम पड़ जाता है। *

अनेक लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। अनेक विद्यार्थी भी इस रसोई का स्वाद ले रहे हैं। **

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सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

इस तरह बचा लिया गया सीमेंटकंक्रीट में उगे हुए उखडे़ पीपल के पेड़ को- प्रेरणादायक रिपोर्ट. * करणी दान सिंह राजपूत*

 






सूरतगढ़ 22 फरवरी 2021.
रेलवे स्टेशन सूरतगढ़ के प्लेटफार्म नंबर चार पर ढलान वाले ओवर ब्रिज का निर्माण शुरू हुआ और वहां पर एक पुराने सीमेंट कंक्रीट के पिलर में उगा हुआ पीपल का पेड़ उखड़ गया।
मैं उस उखड़े हुए मैं देखता क्योंकि मेरा वहां से प्रतिदिन आना जाना होता था।
पेड़ की मामूली सी जड़े बची हुई थी बाकी पिलर के अंदर थी पेड़ को नष्ट होते हुए देखता और पीड़ा होती। मानसिक संताप भी बहुत हो रहा था की इस पेड़ को किसी भी तरह से बचाया जाए। सोशल साइटों पर ग्रुपों में और मेरी फेसबुक पर पर्यावरण प्रेमियों से अपील की गई।
कुछ पर्यावरण प्रेमी पहुंचे और देखा और बताया कि इस पेड़ को बचाया नहीं जा सकता। इसमें जड़े बहुत कम बची है और इस प्रकार के पेड़ों को दूसरी जगह लगाने के पूर्व के प्रयास भी सफल नहीं हुए हैं। किसी ने आगे प्रयास की कोशिश नहीं की।
मेरे दिल की पीड़ा को अपने ही छोटे भाई प्रेम सिंह सूर्यवंशी को बताया और कहा कि तुम्हारी पर्यावरण पेड़ लगाओ टीम लेकर किसी भी तरह इस पेड़ को दूसरी जगह रोपो तो सही शायद पेड़ बच जाए।
पेड़ को बचाने का प्रयास तो किया ही जा सकता है।
प्रेम सिंह सूर्यवंशी ने अपने टीम के कुछ साथियों को लेकर इस पेड़ को देखा और दूसरी जगह रोपने का निर्णय किया।
16 अक्टूबर 2020 को सुबह यह टीम पहुंची और पेड़ को उखड़े हुए स्थान से उठाया गया और  रेलवे सीमा में ही दूसरे प्रवेश-निकास द्वार के आगे एक स्थान पर लगा दिया गया। सभी उत्साहित थे। यह कार्य करके आगे  ईश्वर की कृपा पर छोड़ा गया।
आगे आने वाले सर्दियों में यह पेड़ बचेगा नहीं बचेगा यह सोचते हुए दिन निकलते रहे। प्रेमसिंह सूर्यवंशी और टीम के सदस्य भी पेड़ को लगाने के बाद देखने संभालने जाते रहे।

मैं रोजाना पेड़ के पास से निकलता और हर सातवें आठवें दिन पेड़ के तने को थोड़ा सा कुचर कर देख लेता कि तना गीला है।
बस यही आशा थी कि तना गीला है सूख नहीं रहा, लाभदायक स्थिति रहेगी।
मैं ईश्वर की कृपा से चकित हो गया।

मैं 22 फरवरी 2021 को पेड़ के पास पहुंचा तो देख कर आश्चर्यचकित था। पेड़ पर नई कोंपलें कुछ हरे पत्ते दिखाई दिए। यह ईश्वर की बहुत बड़ी कृपा रही। बसंत ऋतु में यह चमत्कार हुआ।
पर्यावरण प्रेमियों प्रेम सिंह सूर्यवंशी की पूरी टीम की यह सफलता मानता हूं।
उन सभी कार्यकर्ताओं को बधाई और शुभकामनाओं देता हूं कि उनका प्रयास सफल रहा और यह एक प्रेरणादायक कहानी बन गई। 


पेड़ को 16 अक्टूबर 2020 को जब दूसरे स्थान पर  रोपा गया तब के चित्र और रिपोर्ट मेरे ब्लॉग ' करणी प्रेस इंडिया' पर लगाए गए जो  अभी भी इंटरनेट पर देखे जा सकते हैं।
उस समय के चित्र और रिपोर्ट यहां एक बार फिर पाठकों के लिए प्रस्तुत करता हूं।











* करणीदानसिंह राजपूत *

रेलवे पुलनिर्माण में खत्म होने वाले एक पीपल वृक्ष को दूसरी जगह स्थानांतरित कर बचाने का प्रयास सफलता से पूर्ण हुआ है।
पर्यावरण युवा मंडल के प्रयास से रेलवे पुल में खत्म हो रहे पीपल वृक्ष को बचाने के लिए कुछ दूरी पर रेलवे भूमि पर लगा दिया गया है।
दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

इस वृक्ष को बचाने की  पहली अपील  फेसबुक और सोशल साइट ग्रुप्स में 14 अक्टूबर 2020 को हुई थी। पर्यावरण संस्थाओं से जुड़े वृक्ष प्रेमी मौके पर पहुंचे। सूर्योदय नगरी के पर्यावरण युवा मंडल वृक्ष प्रेमियों ने अवलोकन के बाद विचार किया कि पीपल को दूसरी जगह लगा कर बचाया जा सकता है।
पर्यावरण युवा मंडल के कार्यकर्ता 16 अक्टूबर को प्रभात बेला में पहुंचे।
अध्यक्ष प्रेमसिंह सूर्यवंशी,सचिव परमजीत सिंह पम्मी( पूर्व पार्षद) उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, उपाध्यक्ष सतनाम वर्मा, प्रवक्ता ओम अठ वाल ( वर्तमान पार्षद) डाक्टर प्रकुल खत्री,संदीप सेन,मांगी सेन,बब्बू,सुरेन्द्र वर्मा,हरीश खुरीवाल आदि ने कार्य शुरू किया।
पारस मेहरड़ा ,रावत,शकील खान,आबिद खान भी कार्य में जुटे।
रेलवे अधिकारी बाबू लाल  नाहड़िया और  सुरेन्द्र गर्ग (ठेकेदार ओवर ब्रिज निर्माण) का इसमें सहयोग रहा।

इस सहयोगी कार्य से करीब दो घंटों के परिश्रम से नीचे गिरे हुए पीपल को पुराने पिल्लर की कंक्रीट में से जड़ों सहित निकाला गया। पीपल को पास की खाली भूमि तक ले जाया गया। एक विशाल गड्ढा खोदा गया। रस्सियों के सहारे पीपल को गड्ढे में सीधा खड़ा किया गया। सही स्थिति होने पर गड्ढे को मिट्टी से भरा गया। 
सभी आश्वस्त हुए की पीपल सही लगा दिया गया तब पानी डाला गया।
सभी प्रसन्न हुए कि इस सामूहिक कार्य से पीपल पेड़ बच जाएगा।००

💐 और यह पीपल बच गया💐

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सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

देश नै ताकत देवै आपणो राजस्थान अर आपणी राजस्थानी :कविता:


देश नै ताकत देवै
आपणो राजस्थान
अर आपणी राजस्थानी।
जीणै रा आधार दोनूं
राजस्थान अर राजस्थानी।
डूंगरा मांय आवाज गूंजै
धोरिया सोने सिरखा चमकै
हरा हरा खेतां री महक
जीणै रा आधार दोनूं।
देश रै कण कण मांय
राजस्थान बोलै
बठै बठै राजस्थानी
सगळा नै जोडै़।
राजस्थानी गळै मिलावै
सागै सागै कदम बढावै
देश री शान है राजस्थान
देश री ताकत है राजस्थानी।
राजस्थान मांय उपजै
नुंई नुंई उम्मीदां
अर बिंयानै सींचै
सरचै राजस्थानी।
राजस्थानी सूं
सज्योड़ौ है
साहित्य संसार,
वीर रस सगळौ
राजस्थानी भरयौ
सीनो चोड़ौ
करै राजस्थानी।
देश नै ताकत देवै
आपणो राजस्थान
अर आपणी राजस्थानी।


                                     
करणीदानसिंह राजपूत 
स्वतंत्र पत्रकार,
                                              

सूरतगढ़।
                                         

94143 81356                               
:::::::::::::::::::::::::::::::::::
5-12-2015.
updated 30-3-2017.
Updated 15 फरवरी 2021.










रविवार, 14 फ़रवरी 2021

फेस बुक पर तुम्हारा रूप -कविता-करणीदानसिंह राजपूत


फेस बुक पर रोजाना

तुम्हारा बदलता हुआ,

इतराता हुआ लुभावना रूप,

कितनों की करता है,नींद हराम,

आती है अलग अलग टिप्पणियां,

कितने कितने अर्थ लिए,

लेकिन तुम्हें भाती है,

तभी तो रूप बदल बदल आती हो,

अंग प्रत्यंग देख देख,

कैसे कैसे शब्दों में नाइस,गुड लुकिंग,

वेलकम सी टिप्पणियां,

लेकिन हर रूप में

दंत पंक्तियां वही,

सामने के दो दांतों में झिरी,

कहा जाता है,मान्यता है,

अविश्वसनीय होते हैं दंत झिरी वाले।

अब बताओ,

कैसे करूं टिप्पणी?

और क्या करूं टिप्पणी।

लेकिन

तुम चाहने वालों के लिए,

आती रहो,

नहीं तो वे बेचैन होंगे

और उनकी टिप्पणियों के बिना

तुम भी रहोगी बेचैन। 00

******
काव्य दि. 18-10- 2013.
अपडेटेड. दि.14-2-2021.


शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2021

सृजन सम्मान ( राष्ट्रीय) वर्ष 2020 घोषित.साहित्यिक क्षेत्र श्रीगंगानगर से बड़ी खबर

 



* करणीदानसिंह राजपूत *


श्रीगंगानगर 12 फरवरी 2021.


सृजन सेवा संस्थान की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर दिए जाने वाले वार्षिक सम्मान घोषित कर दिए गए हैं। सृजन के अध्यक्ष डॉ. अरुण शहैरिया ताइर ने बताया कि वर्ष 2020 के लिए सभी सम्मान व्यंग्य विधा पर आधारित हैं।


* पंडित रामचंद्र शास्त्री स्मृति जनमंगल ट्रस्ट, जयपुर की ओर से देय डॉ. विद्यासागर शर्मा सृजन सम्मान प्रख्यात व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल (नई दिल्ली) को दिया जाएगा। 

गोपीराम गोयल चेरिटेबल ट्रस्ट प्रदत श्री गोपीराम गोयल सृजन कुंज सम्मान  पंकज सुबीर (सिहोर, मध्य प्रदेश) की सृजन कुंज में प्रकाशित व्यंग्य रचना ‘आइए, देश को भाड़ में भेजें’ पर दिया जाएगा। ये दोनों सम्मान 11-11 हजार रुपए के हैं।  

*समाजसेवी प्रहलादराय टाक प्रदत श्री सुरजाराम जालीवाला सृजन सम्मान (हिंदी) वरिष्ठ व्यंग्यकार पूरण सरमा (जयपुर) को तथा श्री सुरजाराम जालीवाला सृजन सम्मान (राजस्थानी) बुलाकी शर्मा (बीकानेर) को, वरिष्ठ रंगकर्मी भूपेंद्रसिंह प्रदत माता जसवंतकौर प्रोत्साहन सृजन सम्मान शशिकांत शशि (बिहार) को, अंशुल आहुजा की ओर से देय माता रामदेवी वागीश्वरी सृजन सम्मान अर्चना चतुर्वेदी (नई दिल्ली) को तथा संदीप-बॉबी अनेजा प्रदत श्री सुभाष अनेजा साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान व्यंग्य पत्रिका अट्टहास के अनूप श्रीवास्तव (लखनऊ) को दिया जाएगा। ये सभी सम्मान 5100-5100 रुपए के हैं।


 डॉ. शहैरिया ने बताया कि जुलाई में होने वाले व्यंग्य के राष्ट्रीय सेमिनार में ये सम्मान प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि निर्णायक मंडल में वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. प्रेम जनमेजय, सुभाष चंदर एवं डॉ. मंगत बादल शामिल थे।00

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गुरुवार, 11 फ़रवरी 2021

कैसा मन है प्रधानमंत्री का- काव्य करणीदानसिंह राजपूत.

 


आप भावुक हुए
रोए भी तो किसके लिए।
वह तो सदस्यता अवधि
पूरी करके गये
उनके 6 साल पूरे हुए थे।
लोकतंत्र सेनानी दस बारह
मर रहे रोजाना
दो शब्द कहते कभी।
सेनानियों की तो
उम्र पूरी होती गई।

समय अवधि पूरी होने
और उम्र पूरी होने में
बहुत बड़ा अंतर।
सच्च में आपके
रोने से यह जाना।

वह जो कभी
आपका न था
लेकिन फिर भी आप रोए
आपका बड़प्पन है यह
पराए के लिए रोए।

लोकतंत्र सेनानी तो
अपने ही हैं
उनसे कैसी भावुकता
नहीं निकलती आह
उनके मरते जाने पर।

न संघ और न संगठन
कोई भी नहीं संग।
सभी का मौन
तिरस्कार सा।

सभी मरते हैं
पहले भी मरते रहे
आगे भी मरेंगे।
कोई नयी बात नहीं
यह नियम है सृष्टि का।

सेनानियों के कर्तव्य और
मरने पर आपका मन
नहीं करता मन की बात।

आपका मन है महान
कोई मामूली मन नहीं
प्रधानमंत्री का मन है
संसार के बड़े लोकतांत्रिक
देश के प्रधानमंत्री का मन।

प्रतिमाओं में
प्राण प्रतिष्ठा कर
पूजने वाले भारत में
जीवन में से प्राण
जाते देखते रहना
कैसा मन है आपका।

परमब्रह्म
हमारे सेनानियों को
मोक्ष और आपको
अमरत्त्व प्रदान करे।
आप देखते रहें
सेनानियों का गमन।

आज सभी साधन
सभी अधिकार हैं

स्वतंत्रता की अलख
जगाने वाले
स्वतंत्रता सेनानी।
आपातकाल में
संविधान के रक्षक बने
लोकतंत्र सेनानी
आपकी नजरों से
ओझल हैं।

कृष्ण की गीता अपनाओ
वही संसार में पढी जा रही
काल का चक्र घूम रहा
पल पल हर पल।

देश पर मर मिटने का
मन रखने वालों पर
अपना मन करो
समय बीत रहा।
यह भी इतिहास बनेगा
जो कोई तो लिखेगा।
****
दि. 11 फरवरी 2021. अमावस्या.

*********




करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार (राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान)
94143 81356.
-------
आपातकाल 1975-77 जेलयात्री,

***********


रविवार, 7 फ़रवरी 2021

देश देख रहा है- किसान नेताओं संगठनों को गंदे बतलाना बोलना आगे बहुत परेशान करेगा.

 

-- वोटों के समय क्षमा मांगते हाथ जोड़़ते किसानों ग्रामीणों के द्वार पर भविष्य निर्धारित होगा--

***** करणीदानसिंह राजपूत *


किसान नेताओं और किसान संगठनों को चाहे वे राष्ट्रव्यापी हैं चाहे क्षेत्रीय नेता हैं उनको गाली गलौज वाले  गंदे से गंदे शब्दों में कोसा जा रहा है बदमाश खालिस्तानी आतंकवादी और ना जाने किन किन शब्दों से व्याख्या की जा रही है। किसानों को इतने गंदे गंदे शब्दों में नहीं कोसें कि बाद में मुलाकात हो आमना सामना हो तो बात चीत नहीं की जा सके।

 यह समय व्यतीत हो जाएगा और फिर किसी रूप में किसानों के सामने मजदूरों के सामने और ग्रामीणों के सामने मजदूरों के सामने और ग्रामीणों के ग्रामीणों के सामने जाना पड़ेगा। उस समय क्षमा मांगने के लिए शब्द नहीं होंगे।


प्रजातंत्र है। प्रजातंत्र में मत (वोट)की कीमत है। वोट से ही ही चुनाव होते हैं।वोट से ही सत्ता मिलती है और सत्ता चली भी जाती है। वोट से बड़े बड़े परिवर्तन हो जाते हैं। सत्ता में

जो पहले थे वे अब नहीं है और जो अब हैं उनकी भी कोई गारंटी नहीं है कि वे आने वाले 5-10 सालों तक राज कर पाएंगे?

प्रजातंत्र में जनता जैसी भी हो,विभिन्न विचार धारा किसी भी विचार धारा की हो एक राय होकर सत्ता को पलट सकती है। सत्ता का घमंड अभिमान नहीं होना चाहिए।

सत्ता के सिंहासन पर जो भी रहा उसका यही मानना रहा कि वही अच्छा कर रहा है।उसके मुकाबले में कोई नहीं है और ऐसे दावे करने वाले एक के बाद एक सत्ता से और संसार से भी चले गए। किसी की कोई गारंटी नहीं है। संसार भर में बड़े बड़े प्रजातंत्र वाले और साम्यवादी देशों में भी परिवर्तन होते चले गए। नेता बदलते चले गए।


*राजनीतिक दलों के नेता भी दलबदल करते रहे हैं और राजनीतिक दल भी एक दूसर को कोसते हैं और फिर एक दूसरे के साथ शामिल हो जाते हैं। किसी की कोई गारंटी नहीं है।

** केवल वोट का अधिकार सर्वमान्य है और जब वोट लेने होते हैं तो वोटर की दहलीज पर मत्था टेकना पड़ता है। हाथा जोड़ी करनी पड़ती है।माफियां भी मांगनी पड़ती है। तब जाकर के वोट मिलता है।

इसलिए यह कहना है कि किसानों को गांव वालों को जो अब आंदोलन कर रहे हैं उनको, उनका सहयोग दे रहे राजनीतिक नेताओं और दलों को गंदे से गंदे शब्दों में कोसना बंद कर दें क्योंकि आने वाले समय में जब वोट की आवश्यकता होगी तब इन किसानों के आगे जाना पड़ेगा।हाथ जोड़ने पड़ेंगे।उस समय किसान ने आपसे सवाल जवाब किए गाली गलौज का हिसाब मांग लिया तब आपके पास कोई जवाब नहीं होगा। 

उस समय यही कहेंगे कि मैंने गाली नहीं दी मैंने नहीं कोसा,गाली देने वाला कोई और था। मैं तो आपका भाई हूं। आपके इलाके का हूं। इसलिए यह राय है कि गंदे शब्दों में किसानों को कोसना आतंकवादी बताना खालिस्तानी बताना जो हरकतें की जा रही है उनको तत्काल रोका जाना चाहिए। 

किसानों के आंदोलन पर कहा जा रहा है कि आंदोलनकारी तो काजू बादाम मेवे खा रहे हैं। किसान पैदा करे तो वह मेवे खा क्यों नहीं सकता? केवल पैदा दूसरों के लिए करे। खुद क्यों नहीं खा सकता?सूखी प्याज छाछ मिर्च नमक के साथ रोटी खाने वाला फटे पुराने कपडे़ पहनने वाला किसान चाहिए। एक और बात। ये ट्रेक्टरों पर आए किसान नहीं। असली किसान तो खेतों में लगा है। बैलों से जुताई करते फोटो भी लगाए जा रहे हैं। आज कितने किसान बैलों से खेती करते हैं? सत्ताधारियों को अपने सत्ता स्वार्थ के लिए भूखा नंगा किसान चाहिए।


किसान आंदोलन में लाखों लोग जुड़े हुए हैं। लाखों लोगों में से किसी एक ने या 200 - 300 लोगों ने कोई गलती की है या अचानक कोई कारस्तानी कर दी है तो उसका सारा दोष लाखों लोगों पर डालना और गालियां निकालना शोभा जनक नहीं है।

विशेषकर भारतीय जनता पार्टी जिसके कार्यकर्ताओं की ओर से समर्थकों की ओर से भद्दे से भद्दे शब्दों में किसानों को कोसा जा रहा है वह बंद होना चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी और समर्थक अपने आप को संस्कारवान कहते हैं देशभक्त कहते हैं तो ऐसे संस्कारवान संस्कारवान लोगों को गाली गलौज की भाषा शोभा नहीं देती। 

स्पष्ट रूप से यही राय है कि यदि ऐसे गाली गलौज वाले शब्दों से किसानों को कोसना रोका नहीं गया तो आने वाले समय में बहुत परेशानियां पैदा करेगा। जब भी चुनाव होंगे किसानों के आगे सिर झुकाते हुए माफिया माननी पड़ेगी पड़ेगी। वह वक्त जरूरी नहीं है कि आपको किसान माफी दे दे। 

आप सत्ता धारी कीलें बो रहे हैं और अच्छी फसल पैदा होने के सारे प्रयास कर रहे हैं तो कीलों की फसल के नतीजों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। यह कीलों की फसल ऊपर भी होगी और नीचे भी होगी। न खड़े हो पाएंगे और न नीचे बैठ पाएंगे। खड़े होंगे तो सिर में चुभेंगी और बैठ भी नहीं पाएंगे।

सत्ता का यह घमंड कि हमारे जैसा कोई नहीं है। जनता के सामने कोई विकल्प नहीं है। प्रजातंत्र में यह सोच एकदम झूठी है। विकल्प कब खड़ा हो जाए कब बन जाए इसकी कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। आज जो महसूस हो रहा है कि विकल्प नहीं है तो कल विकल्प बन सकता है। भाजपा के लिए जिन्होंने खेत तैयार किया और फसलें तैयार की उनका आज मालूम नहीं। वे पीछे धकेल दिए गए। मोदी विकल्प बन गए। कल क्या होगा ? यह मालूम नहीं। 

सत्ताधारी तो किसान को किसान ही नहीं मान रहे थे थे। उसे आतंकवादी कहकर और अन्य अनेक  नामों से विभूषित करके बताया जा रहा था। अगर वह किसान नहीं तो फिर सरकार बात करने के लिए आगे कैसे आई? सत्ता तो किसान समझ ही नहीं रही थी वह किसान मानने लगी। कल को यह वार्तालाप सरकार मानती है झुकती है किसानों की राय के अनुरूप चलती है तो जो लोग आज गाली गलौज दे रहे हैं  उनको व्यक्तिगत रूप से भी क्षति होगी। इसलिए अच्छा यही है कि आंदोलन पसंद नहीं है,नेता पसंद नहीं है तो आलोचना करें खूब कोसें अपनी बात कहें लेकिन शब्द शोभायमान नहीं हों तो गाली वाले तो कत्तई नहीं होने चाहिए,ताकि बाद में भी मिलें तो आपस में एक दूसरे का मुंह देख सकें। 00

दि. 7 फरवरी 2021.


करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ (राजस्थान)

94143 81356.

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गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021

👌 विजय भंडारी जी की आत्मकथ्य पत्रकारिता पुस्तक 'भूलूं कैसे'- करणीदानसिंह राजपूत.

 



* राजस्थान पत्रिका जयपुर से भेजी गई माननीय विजय भंडारी जी की पुस्तक 'भूलूं  कैसे'आज मुझे मेरे कार्यालय में आनंद डागा के माध्यम से प्राप्त हुई।
भंडारी जी राजस्थान पत्रिका में काफी समय तक प्रधान संपादक रहे। विजय भंडारी जी की यह है पुस्तक आत्मकथ्य है।
श्रद्धेय कर्पूर चंद कुलिश जी की जीवनी पढ़ने के बाद समझता हूं कि यह दूसरी महत्वपूर्ण पुस्तक है। अभी मिलने के बाद प्रारंभ के कुछ पृष्ठ पढ़ पाया हूं। कुछ पृष्ठों के पढने से ही लग रहा है कि भंडारी जी ने अपना बचपन छात्र जीवन जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था उस समय का भी रोचक वर्णन किया है। पत्रकारों पर भी बहुत कुछ लिखा है। अनेक पत्रकारों का उल्लेख है।
मैंने माननीय विजय भंडारी जी के कार्यकाल में बहुत कुछ सीखा और बहुत छपा भी था।
मेरा यह मानना है कि यह पुस्तक पत्रकारों के लिए भी अति महत्वपूर्ण पुस्तक है जो इसे पढ़ पाएंगे बहुत कुछ सीख देने वाली है।
पूरी पढ़ने के बाद फिर कुछ लिखूंगा।
पत्रिका की यह खूबी रही है कि माननीय गुलाब जी की पुस्तकें भी जब नई आई तब सूरतगढ़ में विशेष रूप से मुझे भिजवाई गई।
आज यह पुस्तक मिलने पर भी बहुत प्रसन्नता हुई।
विजय भंडारी बहुत सख्त संपादक रहे। समाचारों में त्रुटियां सहन नहीं करते थे। उस समय प्रत्येक संस्करण में स्थानीय संपादक ही प्रथम पृष्ठ पर पहली खबर बनाते थे। शाम को 5 से साढे पांच बजे भंडारी जी फोन पर बात करते। उनकी निगाह से समाचारों की त्रुटियां छिपी नहीं रहती। स्थानीय संपादक को जवाब देना होता था।
उनके कार्यकाल में हर पत्रकार को जो पत्रिका में किसी भी पद पर रहा उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला।
इस पुस्तक में बहुत से पत्रकारों का भी वर्णन  है। वर्तमान प्रधान संपादक गुलाब कोठारी और मिलाप कोठारी का भी वर्णन है।
अभी तो यही कह सकता हूं कि इस पुस्तक में राजस्थान पत्रिका का एवं राजस्थान का बहुत बड़ा इतिहास पत्रकारिता के साथ लिखा हुआ है।
पत्रिका के बाद विजय भंडारी जी ने स्वतंत्र पत्रकारिता भी की।
दि.4 फरवरी 2021.
करणी दान सिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.
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बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

जेलों में आपराधिक गतिविधियां रोकने का आॅपरेशन फ्लश आउट




* करणीदानसिंह राजपूत *

जयपुर/श्रीगंगानगर, 3 फरवरी। महानिदेशक जेल राजस्थान राजीव दासोत द्वारा 21 नवम्बर 2020 से राज्य की जेलों में अवांछनीय, निषिद्ध वस्तुओं जैसे मोबाईल, मादक पदार्थ आदि की तस्करी या उपलब्धता तथा जेल से संचालित होने वाली आपराधिक गतिविधियों के विरूद्ध चलाये जा रहे ‘‘आॅपरेशन फ्लश आउट‘‘ के अंतर्गत की जाने वाली कार्यवाही की अवधि आगामी 28 फरवरी 2021 तक बढ़ाई गई है। 

गत 10 सप्ताहों में अर्जित की गई सफलताओं एवं उपलब्धियों को चिरस्थाई बनाने तथा उनमें और अभिवृद्धि करने के उद्देश्य के इस अभियान की अवधि बढ़ाई गई है। इस संबंध में महानिदेशक जेल दासोत ने विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपेक्षा की है कि इस अभियान में वे सभी और अधिक उत्साह, लगन, परिश्रम और दृढ़ता से कार्य करें ताकि जेलों में आपराधिक गतिविधियों के संचालन पर पूर्ण अंकुश लगे तथा जेल विभाग की छवि और अधिक उज्ज्वल हो। 

महानिदेशक जेल दासोत ने बताया कि राज्य की विभिन्न कारागृहों में आॅपरेशन फ्लश आउट के अंतर्गत गत 10 सप्ताह में जेलों में 4992 बार आकस्मिक सघन तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान 77 मोबाईल, 44 सिम कार्ड, 23 चार्जर, 19 ईयर फोन, 08 डाटा केबल, अफीम तंबाकू, चरस, बीड़ी, सिगरेट इत्यादि पदार्थ बरामद किये गये है। 

दासोत ने बताया कि आंतक के पर्याय बने 53 हार्डकोर बंदियों को अन्यत्रा दुरस्थ जेलों में स्थानांतरित किया गया है। इस अभियान के कारण अधिकांश जेलों में विभिन्न अवांछनीय, अनावश्यक, अनाधिकृत एवं अवैधानिक सामग्री तथा सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रवृतियों पर रोक लगी है। 

जेल विभाग के समस्त अधिकारीगण एंव कर्मचारीगण आॅपरेशन फ्लश आउट की सफलता के लिये दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे है। इस अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले कुल 107 अधिकारियों व कर्मचारियों को पुरूस्कृत भी किया गया है, जबकि भ्रष्टाचारी, आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व मिलीभगत रखने वाले जेल अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की गई। 

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