रविवार, 10 जनवरी 2021

'वसुंधरा राजे समर्थक राजस्थान मंच' से भाजपा में हलचल- केंद्र के नेताओं की हेकड़ी से भाजपा को नुकसान होगा*

 

* करणीदानसिंह राजपूत *


राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को हासिये पर रखने की कार्वाइयों की बढत के बीच वसुंधरा राजे समर्थक राजस्थान मंच के गठित होने के बाद भाजपा में हलचल मच गई है। भाजपा का प्रदेश संगठन इसे मामूली बताने के लिए कह रहा है कि मंच बनाने वाले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता नहीं रहे हैं। इसे मामूली बताकर टालने की नीति अपनाई जा रही है। 


वसुंधरा समर्थक मंच आगे कितनी शक्ति बना पाएगा? यदि प्रदेश भर में इसकी शाखाएं बन जाती है और शहरों व पंचायत स्तर तक फैल जाती है तो वह शक्ति प्रदर्शन जैसा होगा।

वसुंधरा राजे के अलावा राजस्थान में भाजपा के पास कोई शक्तिशाली नेता नहीं है जो कांग्रेस को टक्कर दे सके। 

राजस्थान में शक्तिशाली नेता नहीं होने और यहां के तीन चार नेताओं के आपस में लड़ते रहने की स्थिति में 2003 में वसुंधरा राजे को केंद्र की राजनीति से राजस्थान में भेजा गया था। उस समय बहुत कमजोर भाजपा को वसुंधरा राजे ने परिवर्तन यात्रा निकाल कर शक्तिशाली बनाया। सन 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा जीती और उसका संपूर्ण श्रेय वसुंधरा राजे को मिला। हालांकि 2008 में राजस्थान में कांग्रेस आई लेकिन 2013 में फिर भाजपा आई और वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनी। 

सन 2018 के चुनाव में भाजपा के भीतर टकराव के कारण वसुंधरा राजे को पराजित करने की चाल चली गईं। इस चाल के बावजूद वसुंधरा राजे को घात से हराया नहीं जा सका। वसुंधरा राजे जीती और 71 से अधिक सीटें भाजपा को मिली। माना जाता है कि इन विधायकों में 45 से 50 विधायक वसुंधरा राजे के संग हैं। 

वसुंधरा की ताकत को केंद्र भी खत्म तो मान नहीं सकता। मोदी, शाह को वसुंधरा राजे पसंद नहीं इसलिए बैठकों आदि से वसुंधरा को दूर रखा जा रहा है। वसुंधरा को यह स्थिति मालुम है। केंद्र में आडवाणी जोशी आदि को जिस तरह से राजनीति में मारा गया उसी तरह का रवैया वसुंधरा राजे के लिए अपनाया जा रहा है। वसुंधरा राजे की जमीनी ताकत को देखते हुए केंद्र वाले डर भी रहे हैं।

यह खतरा एक सोच से पैदा हो रहा है कि वसुंधरा राजे को राजनीति में पछाड़ने की नीति से राजस्थान में सन 2023 के चुनाव में भाजपा जीत नहीं पाई तब क्या होगा? भाजपा के भीतर चल रहे टकराव में कहीं ऐसा न हो जाए कि नाराज कार्यकर्ता भाजपा को हरा कर मोदी शाह को अपनी नाराजगी दिखला दें। यह ऐन ऐसे मौके पर हो जब भाजपा 2024 में केंद्र में फिर से मोदी सरकार लाने की ईच्छा रखे हुए हो। 

भाजपा लोकतंत्र का नारा लगाती है मगर संविधान को बस्ते में बंद कर संगठन के पदों पर मनोनयन किए जाने की नीति बढती जा रही है। मनोनीत पदाधिकारी पार्टी के बजाय मनोनीत कराने वाले मंत्रियों, विधायकों, सांसदों के जीहजूरिए बनकर रह जाते हैं। संगठन में हर जगह मनोनीत अध्यक्षों आदि से कार्यकर्ताओं की नाराजगी दिखाई पड़ती है। आम कार्यकर्ता नाराज ही दिखाई पड़ता है। यह नाराजगी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में सामने आ रही है। भाजपा के नेता इसे स्थानीय और छोटे चुनाव बता कर टालते हैं। चाहे भाजपा इनको छोटे चुनाव बताए मगर जहां भाजपा का कार्यकर्ता नगरपालिकाओं और पंचायतों में पहुंचता अधिकारी के साथ बैठ कर काम करवाता वह शक्ति छिन गई। वहां कांग्रेस के कार्यकर्ता अपनी चला रहे हैं। विधानसभा में भाजपा की हार का पूरे प्रदेश में कार्यकर्ताओं को नेताओं पर बुरा असर हुआ है। सभी को मालम है और अभी भी केंद्र और केंद्र के नेता अपनी हेकड़ी पर रहे तो भाजपा को नुकसान ही पहुंचाएंगे।00


* मंच का दावा है कि इससे भाजपा मजबूत होगी*


राजस्थान में कांग्रेस के बाद अब भाजपा में भी सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। भाजपा में भी गुटबाजी की खबरें आ रही है। माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे फिलहाल भाजपा से दरकिनार चल रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए वसुंधरा समर्थकों ने अब एक नया राजनीतिक मंच बना लिया है। समर्थकों ने इस मंच का नाम वसुंधरा राजे समर्थक राजस्थान मंच दिया है। इसी नाम से सोशल मीडिया पर भी आईडी भी बनाई गई है। मंच की ओर से लगातार इस बात का दावा किया जा रहा है कि उनकी टीम वसुंधरा राजे को मजबूत करना चाहती है। अगर राजस्थान में वसुंधरा राजे मजबूत होंगी तो भाजपा को भी मजबूती मिलेगी।

 भाजपा में यह पहली बार हुआ है जब किसी नेता के समर्थन में अलग मंच तैयार किया गया है।  

इस मंच का युवा संगठन और महिला संगठन भी तैयार किया जा रहा है। वसुंधरा राजे समर्थक राजस्थान मंच ने तो हर जिले में अपना जिलाध्यक्ष भी बनाना शुरू कर दिया है। इस मंच के गठन के बाद से ही भाजपा असहज महसूस कर रही है।

इसको लेकर पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात की है। 

नड्डा से मुलाकात करने के बाद राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि पार्टी को इस बात की पूरी जानकारी है और सभी नेता इस बात से अवगत हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो लोग संगठन में काम कर रहे हैं वह फिलहाल भाजपा के सक्रिय सदस्य नहीं है। पुनिया ने कहा कि भाजपा व्यक्ति आधारित नहीं, बल्कि संगठन आधारित पार्टी है। उन्होंने कहा कि वसुंधरा समर्थकों के तरफ से जारी सूची में संगठन का कोई सक्रिय नेता नहीं है। हालांकि कुछ पूर्व विधायक इसमें जरूर शामिल है। पार्टी की ओर से जैसा आदेश मिलेगा वैसा किया जाए।

वसुंधरा समर्थकों में अंदरखाने में इस बात को लेकर शंका है कि कहीं वसुंधरा राजे का कद पार्टी में कम तो नहीं हो रहा। इसी को ध्यान में रखते हुए इस मंच का निर्माण किया गया है। भाजपा की नाराजगी को देखते हुए यह मंच लगातार यह कह रहा है कि इससे पार्टी को ही फायदा होगा। इस मंच का इस्तेमाल वह वसुंधरा राजे के कामों को जनता तक पहुंचाने के लिए करेंगे।  पिछले 2 सालों में लगा है कि कहीं ना कहीं पार्टी वसुंधरा राजे को लेकर अब उतनी गंभीर नहीं है। इस राजनीतिक हलचल के मायने इसी बात से समझा जा सकता है कि कांग्रेस ने भी अपने प्रमुख लोगों को दिल्ली बुलाकर इस मसले पर बैठक करने की शुरुआत कर दी है।00

दि. 10 जनवरी 2021.

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़.(राजस्थान)

94143 81356.

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