गुरुवार, 14 जनवरी 2021

संपूर्ण राजस्थान में बर्ड फ्लू की महत्वपूर्ण सूचना.अभी पढें.देरी न करें

 



बर्ड फ्लू की सूचना चिकित्सा विभाग को देनी होगी
श्रीगंगानगर, 14 जनवरी 2021.
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान जयपुर के निर्देशानुसार संयुक्त निदेशक पशुपालन गंगानगर एवियन इन्फ्लूएंजा ए एच 5 (बर्ड फ्लू) इन्फ्लूएंजा रोग के पक्षियों से मानव संचार की संभावना के मध्यनजर बचाव व रोकथाम के लिये बर्ड फ्लू प्रभावित क्षेत्रों की सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी श्रीगंगानगर को दैनिक रूप से उपलब्ध करवानी होगी। जिससे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय रहते अपेक्षित कार्यवाही की जा सके। रोगी, मृत पक्षियों के सम्पर्क में आये व्यक्तियों के इन्फ्लूएंजा लाईक इलनेस लक्षण यथा बुखार, खांसी, जुकाम, गला खराब आदि होने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सूचित किया जाये ताकि बर्ड फ्लू संभावित रोगी का अविलम्ब जांच व उपचार किया जा सके। 

कौओं की असामान्य मृत्यु के संबंध में

बर्ड फ्लू रोग का नियमित आंकलन होगा
पशुपालन विभाग राजस्थान जयपुर के अनुसार प्रदेश में विगत दिवसों में कौओं की असामान्य मृत्यु तथा इनके निदान, नमूने राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान को भिजवाए गये थे, जिनकी प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर इनमें एच5 एविएन इन्फ्लूएंजा वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। 
बर्ड फ्लू वायरस से होने वाला पक्षियों का अतिसंक्रमक रोग है, इसमें पक्षियों में 100 प्रतिशत तक मृत्युदर हो सकती है। यह रोग मुख्यतः मुर्गियों और टर्की में होता है। बतख, वाटर फाउल, प्रवासी पक्षियों व अन्य पक्षियों में एविएन इन्फ्लूएंजा वायरस का संक्रमण होने से रोग फैलता है। वायरस रोगी पक्षी की लार, नाक, आंख के स्त्राव व बीट में पाया जाता है। रोगी पक्षी या संक्रमित वस्तु के सीधे सम्पर्क में आने से यह रोग फैलता है। रोग के संक्रमण पर तीन से पांच दिन में लक्षण दिखाई देते है। अचानक अधिक संख्या में पक्षियों की मृत्यु पक्षी सुस्त होकर खाना पीना बंद कर देते है। अण्डा उत्पादन में अत्यधिक कमी, पक्षी को तेज जुकाम, नाक, आंख के स्त्राव, पक्षी के सिर व गर्दन पर सुजन, कलंगी व लटकन पर सुजन व नीलापन दिखाई देता है। पशुपालन विभाग के निर्देशानुसार जिले में पशुपालन विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय निकाय, वन तथा अन्य समबद्ध विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थितियों का नियमित आंकलन करते हुए कार्य योजना बनाकर कार्यवाही करें।00






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