रविवार, 6 दिसंबर 2020

* टीका लगाने के बावजूद स्वास्थ्य मंत्री के संक्रमित हो जाने पर हड़कंप- एंटीबाडी की अवधि सीमा कितने दिन की?

 



* प्रस्तुति - करणीदानसिंह राजपूत *


हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के परीक्षण टीका लगवाने के बावजूद संक्रमित होने के कोरोना संक्रमित हो जाने पर एक प्रश्न ने हलचल मचा डाली है।  क्या टीका लगाने के बाद भी व्यक्ति संक्रमित हो सकता है?

 इस प्रश्न का उत्तर देते हुए अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, टीका लगवाने के बाद प्रतिरोधक क्षमता पैदा होने में कुछ सप्ताह का वक्त लग सकता है। इसका अर्थ ये हुआ कि टीका लगवाने के बावजूद व्यक्ति संक्रमित हो सकते हैं। ज्यादातर टीकों के दो डोज कारगर माने गये है। इसलिए वो लोग भी संक्रमित हो सकते हैं, जिन्होंने एक ही डोज ली है।


कोरोनारोधी टीका बनाने वाली बड़ी दवा कंपनी फाइजर के अध्यक्ष अल्बर्ट बोरला का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि जिन लोगों को कंपनी की तरफ से परीक्षण के तौर पर कोरोनारोधी टीका लगाया गया है, वे अभी भी दूसरों को कोरोना वायरस फैला सकते हैं या नहीं?अभी इस बाबत और अधिक अध्ययन किए जाने की जरूरत है।


बोरला से जब पूछा गया कि क्या कोरोना संबंधी पूरी सुरक्षा मिलने के बावजूद संक्रमण के प्रसार की संभावनाएं हैं। इस बाबत बोरला ने फिर कहा कि मुझे लगता है कि यह एक ऐसी बात है, जिसकी जांच करने की जरूरत है। हम अभी उस चीज़ के बारे में निश्चित नहीं हैं, जो हम जानते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, टीके के विकास से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि कंपनी के परीक्षणों ने यह आकलन नहीं किया है कि यह टीका वायरस को कैसे प्रभावित करता है। इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि टीका लगाए गए लोग अभी भी दूसरों को बीमारी फैला सकते हैं।  

खास बातें

-अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर और जर्मन कंपनी बायोनटैक साझा रूप से टीका बना रहे हैं।

-दावा- फाइजर ने अपने टीके को 95 फीसदी कारगर बताया है।

-ब्रिटेन और बहरीन ऐसे दो देश हैं, जिन्होंने आपातकालीन उपयोग के लिए फाइजर के वैक्सीन को मंजूरी दी है।

-फाइजर अभी भी अमेरिका से मंजूरी का इंतजार कर रहा है, क्योंकि वैक्सीन का मूल्यांकन करने के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) 10 दिसंबर को स्वतंत्र विशेषज्ञों को इकट्ठा कर रहा है।

दावा : मॉडर्ना वैक्सीन कम से कम तीन महीने तक दे सकती है प्रतिरक्षा

एक नए अध्ययन से पता चला है कि कोरोनारोधी मॉडर्ना वैक्सीन कम से कम तीन महीने तक प्रतिरक्षा प्रदान कर सकती है। अमेरिकन दवा कंपनी मॉडर्न इंक ने हाल ही में कहा था कि उसके कोरोनारोधी वैक्सीन में 94.1 प्रतिशत प्रभावकारिता है। नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एलर्जीज एंड इंफेक्शस डिजीज (एनआईएआईडी) के अध्ययन के अनुसार, मॉडर्ना वैक्सीन शक्तिशाली एंटीबॉडी के उत्पादन का कारण बनता है। एंडीबॉडी कम से कम तीन महीने तक रहती हैं और संक्रमण से रक्षा करती हैं।

34 प्रतिभागियों पर परीक्षण

एनआईएआईडी के शोधकर्ताओं ने कहा कि क्लीनिकल ट्रायल के पहले चरण में 34 वयस्क प्रतिभागियों, युवा और बुजुर्गों की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का परीक्षण किया गया। एमआरएनए-1273 नामक वैक्सीन 28 दिनों के अंदर दो खुराक में दी जाती है। न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में पहली खुराक के 119 दिन बाद इम्युनोजेनेसिटी डेटा और दूसरे टीकाकरण के 90 दिनों के बाद पता चला कि वैक्सीन ने 100 ग्राम खुराक पर एंटीबॉडी का बाध्यकारी उच्च स्तर का उत्पादन किया। अध्ययन में बताया गया कि समय के साथ एंटीबॉडी का कम हो जाना चिंता का कारण नहीं है। 

दूसरी खुराक के 90 दिनों बाद भी मजबूत एंटीबॉडी  

विषाणु विज्ञानी बेंजामिन नीमन ने अध्ययन में कहा था कि सकारात्मक बात यह है कि वैक्सीन की दूसरी खुराक के 90 दिनों बाद अपेक्षाकृत मजबूत एंटीबॉडी बनी हुई है। टीके से उत्पन्न एंटीबॉडी की मात्रा ज्यादा उम्र के रोगियों की तुलना में नौजवान रोगियों में अधिक थी, लेकिन मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया 70 साल तक के रोगियों में भी देखी गई।


17 दिसंबर को समीक्षा होगी

उत्साहजनक रूप से अध्ययन से पता चला कि टीका एक निश्चित प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिका को सक्रिय करता है।  एनआईएआईडी के निदेशक एंथोनी फौसी और अन्य विशेषज्ञों ने कहा है कि इस बात की संभावना है कि टीके के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली कोरोना वायरस को हमेशा पहचानेंगी। यदि बाद में दोबारा संक्रमण का खतरा हो तो टीके के कारण फिर नए एंटीबॉडी का उत्पादन हो सकता है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) सलाहकार समिति 17 दिसंबर को वैक्सीन की समीक्षा करेगी।

टीका नई तकनीक पर आधारित

फाइजर और बायोनटेक द्वारा निर्मित वैक्सीन की तरह यह एक नई तकनीक पर आधारित है, जो (मैसेंजर राइबोन्यूक्लिक एसिड) के रूप में आनुवंशिक सामग्री का उपयोग करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एमआरएनए बांह में लगाया जाता है। यह कोरोनोवायरस के खिलाफ प्रोटीन बनाने के लिए मांसपेशियों के अंदर कोशिकाओं का कारण बनता है।

'इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में कोरोना वैक्सीन होगी उपलब्ध'00

6 दिसंबर 2020.

*********





कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

यह ब्लॉग खोजें