रविवार, 22 नवंबर 2020

आयुर्वेद के डॉक्टर भी कर पाएंगे हड्डी, नाक-कान-गला और दांतों की सर्जरी- 19 नवंबर 2020 को गजट नोटिफिकेशन

 


* करणीदानसिंह राजपूत *

19 नवंबर को जारी इस नोटिफिकेशन के आयुर्वेद के पीजी कोर्स में अब सर्जरी को भी जोड़ा जाएगा.इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में और अधिक उन्नति होगी।आयुर्वेद विश्व की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है और वर्तमान कोरोना संकट में भी इस पद्धति को लोगों ने अपनाया है।
मोदी सरकार ने आखिर इसमें क्या किया है? यह जानिए।
आयुर्वेद के छात्रों को शल्य तंत्र शालक्य तंत्र (नेत्र, कान, नाक, गला, सिर और सिर-दंत चिकित्सा का रोग) जैसी डिग्री भी दी जाएंगी.

केन्द्र सरकार ने देश के डॉक्टरों से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के मुताबिक अब आयुर्वेद के डॉक्टर भी सर्जरी कर सकेंगे. सरकार ने एक नोटिफिकेशन के जरिए आयुर्वेद के पीजी छात्रों को सर्जरी करने की इजाजत दी है.
इस नोटिफिकेशन के मुताबिक आयुर्वेद के डॉक्टर हड्डीरोग, नेत्र विज्ञान, नाक-कान-गला (ईएनटी) और दांतों से जुड़ी सर्जरी कर सकेंगे. वहीं दूसरी ओर सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन के अध्यक्ष ने कहा है कि आयुर्वेद संस्थानों में ऐसी सर्जरी पिछले 25 सालों से हो रही हैं. नोटिफिकेशन सिर्फ यह स्पष्ट करता है कि यह सर्जरी वैध हैं.

सरकार की ओर से 19 नवंबर2020 को जारी इस नोटिफिकेशन के मुताबिक आयुर्वेद के पीजी कोर्स में अब सर्जरी को भी जोड़ा जाएगा. इसके साथ ही अधिनियम का नाम बदलकर भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (स्नातकोत्तर आयुर्वेद शिक्षा) संशोधन विनियम, 2020 कर दिया गया है.
आयुर्वेद की प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की ओर से लंबे समय से एलोपैथी की तरह अधिकार देने की मांग की जा रही थी. नए नोटिफिकेशन के मुताबित अब आयुर्वेद के छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही सर्जिरी की भी ट्रेनिंग दी जाएगी. छात्रों को शल्य तंत्र शालक्य तंत्र (नेत्र, कान, नाक, गला, सिर और सिर-दंत चिकित्सा का रोग) जैसी डिग्री भी दी जाएंगी.
आयुर्वेद के डॉक्टरों में इसे लेकर खुशी है। ००

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