शनिवार, 29 अगस्त 2020

👌 कोरोना संक्रमण बचाव और बंद में जनप्रतिनिधियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों से विचार जरूरी हो? व्यापार और सरकारी हानि पर भी विचार हो।

* करणीदानसिंह राजपूत*



श्रीगंगानगर जिले में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए अगस्त के प्रारंभ से एक आदेश जारी हुआ कि पूरे माह शनिवार रविवार को नो मोबिलिटी रहेगी यानी कि आवागमन पूरी तरह बंद रहेगा।

 इसमें ताजा आदेश जो 29 अगस्त और 30 अगस्त के लिए है उसमें जीरो मोबिलिटी तो रहेगी लेकिन रोडवेज की बसें लोक परिवहन की बसें चलती रहेंगी।

जब बसें चलेंगी तो उनमें यात्रा करने वाले घर से बाहर तो निकलेंगे। बिना घर से बाहर निकले बस स्टैंड तक कैसे पहुंचेंगे? गंतव्य पर पहुंच कर बस स्टैंड से जहां जाना होगा वहां तक बिना आवागमन किए कैसे पहुंचेंगे? जिला कलेक्टर ने अगस्त के शुरू में आदेश जारी किया गांधी जयंती कार्यक्रम को लेकर पहले ही शनिवार को आदेश में एक दिन की छूट देदी।   उस दिन के गांधी जयंती के कार्यक्रम के कारण कोरोना हिंसक रूप नहीं लेगा किसी को मारने के लिए अपना कार्य रोक देगा। महात्मा गांधी के नाम पर वह ऐसा नहीं करेगा। सरकार को पक्का मालूम  हो गया था। 


अब जब आवागमन पूरी तरह से निषेध हो तो बसों के आवागमन को छूट क्यों है? सप्ताह में रविवार बंद हो यह तो साप्ताहिक अवकाश है,लेकिन आखिर शनिवार को भी केवल व्यापार बंद करने से दुकानें बंद करने से कितना लाभ मिलेगा? 

इसकी कभी समीक्षा नहीं होती जब भी प्रशासन के मन में आया उसने अपने विवेक से तुरंत घोषणा कर दी। प्रशासन ने कभी भी इस प्रकार के आदेश जारी करने से पहले व्यापारियों के प्रतिनिधि मंडलों से बात तक नहीं की। इस प्रकार के अचानक आदेश चाहे आपदा प्रबंधन में हो तो भी व्यापारियों के प्रतिनिधि मंडलों से चाहे वे उपखंड स्तर पर चाहे जिला स्तर पर हो पहले बात की जानी चाहिए। उनके अनुभवों को उनके विचारों को प्रशासनिक बैठकों में शामिल करते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए। व्यवसाय बंद करने से संपूर्ण जिले में कितना नुकसान व्यापार को और कितना टैक्सों का नुकसान सरकार को होगा? इस नुकसान को बचाना चाहिए या नहीं,क्या यह बचाया जा सकता है? बाजार खुला रखते हुए क्या प्रबंध किए जा सकते हैं? यह नहीं सोचा गया? 


अभी तक प्रशासन ने जो निर्णय लिए उनमें जनप्रतिनिधियों को भी कभी आमंत्रित नहीं किया गया। श्रीगंगानगर जिले में छह विधायक और एक संसद सदस्य है। इनकी कोई महत्ता होती होगी। जिला प्रशासन इलाके के लिए जो कुछ करता है या करना चाहता है उससे ज्यादा जिम्मेदारी इन छह विधायकों और एक संसद सदस्य की जनता के प्रति है।  यह लोग जनता के साथ हैं और सदा इलाके के साथ हैं। प्रशासनिक अधिकारी एक 2 साल के लिए आते हैं। उन्हें आपदा प्रबंधन के बाजार  बंद जैसे कदम उठाने से पहले व्यापारी प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों से विचार विमर्श करना चाहिए और  उसके बाद ही कोई निर्णय व घोषणा करनी चाहिए।  

आज 29,30 अगस्त के नो मोबिलिटी यानी कि आवागमन बंद की स्थिति में बसों का चलाया जाना और दुकानों का बंद रखा जाना आश्चर्यजनक है। 


प्रशासन से कोई सवाल जवाब नहीं उन्होंने निर्णय लिया और जनता के लाभ का कहते हुए लागू कर दिया।


आज का सवाल मेरा इन जनप्रतिनिधियों से है कि उनकी कोई जिम्मेदारी बनती है या नहीं बनती? जिला प्रशासन के आदेश पर वे कभी भी  ध्यान क्यों नहीं देते?उनको जनता के बीच रहना है? जनता को जो आर्थिक नुकसान होता है और गरीबों मजदूरों की रोजी रोटी पर जो संकट पैदा होता है उसकी सीधी जिम्मेदारी इनकी बनती है इसलिए ये जवाब दें?ये ऐसी व्यवस्था करवाएं कि भविष्य में आपदा प्रबंधन में बंद जैसा निर्णय लेने से पहले जनप्रतिनिधियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों से विचार विमर्श और सभी प्रकार के लाभ हानि की समीक्षा भी हो। 

० इसी प्रकार का विचार विमर्श राज्य की राजधानी यानि कि सचिवालय से भी हो०





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