सोमवार, 24 अगस्त 2020

कोरोना वायरस संक्रमण रोकने और बचाव के लिए शहरों को बंद कर देना कोई उचित हल नहीं है


* गाईड लाइन का पालन आमजन को ही पालन करना होगा*
* नेताओं के समारोहों पर कार्वाई नहीं हो रही- नेताओं को भी टोका जाना चाहिए*
* करणीदानसिंह राजपूत *
हमारे देश में फरवरी 2020 के आसपास कोरोना वायरस संक्रमण अधिक फैलने की सूचनाएं मिलने पर 22 मार्च से लॉकडाउन लगाया गया था।  2 माह से अधिक लॉकडाउन के बाद विभिन्न स्तर पर बाजारों के खोलने का क्रम क्रम जारी किया गया। सावधानियां रखने के निर्देश के बावजूद 7 माह बीतने के बाद भी कोई ऐसी स्थिति व्यवस्था स्थाई रूप से नहीं बन पाई जिससे यह वायरस संपूर्ण रुप से बाजारों को और आम जनजीवन को प्रभावित ना कर सके। मतलब यह है कि इसके रहते हुए भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बन पाई है। अभी तक प्रशासन मास्क लगाने और 6 फीट की दूरी रखने का ही सबसे बड़ा बचाव मानकर चल रहा है।
जब अचानक संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ती है तो अचानक बाजार बंद आदि का लॉक डाउन का कर्फ्यू का आवागमन बंद करने का निर्णय लेना पड़ता है। जो जनता को और व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने वाला होता है लेकिन जो हालात अचानक पैदा हो रहे हैं या हो जाते हैं तब ऐसी स्थिति भी आ सकती है के दो 4 घंटे का समय भी देना मुश्किल हो।
प्रशासन गंभीर स्थिति में एकदम से भी बाजारों को बंद करवा सकता है और आवागमन को रोक सकता है। ऐसी अप्रिय स्थिति प्रशासनिक अधिकारी भी पैदा नहीं करना चाहते। केवल जन जीवन की सुरक्षा के लिए मजबूरी में ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं।
कोरोना वायरस के संक्रमण पर जब तक अच्छे तरीके से रोक की व्यवस्था नहीं हो तब तक दैनिक सामान बेचने खरीदने वालों को,जल्दी ही सामग्री खाद्य सामग्री सब्जी आदि नष्ट होने वाली सामग्री को खरीदते वक्त सावधानी रखनी चाहिए। वह अधिक नहीं खरीदी जाए।
अभी स्थिति यह है कि कोरोना संक्रमण रोकने के लिए जो गाइडलाइन दी हुई है उसका पालन नहीं हो रहा। यहां तक की लोग अपनी बड़ाई करते हैं,यह भी कहते रहते हैं कि हमने मास्क नहीं लगाया हमने 6 फीट की दूरी नहीं रखी। हमने अपने कार्यक्रम किए। हमने अपने व्यवसाय चलाए हैं। बस यह बड़ाई ही एक को नहीं अनेक को खराब कर रही है। बाजारों में वह अन्य स्थानों पर भीड़ नहीं की जाए यह स्थिति जानबूझकर बिगाड़ी जा रही है।
नेताओं के स्वागत समारोह लगातार होने की रिपोर्ट यत्र तत्र से आ रही है। नेताओं के समारोह में उपस्थित होने के बजाय टोका जाना चाहिए।  अधिकारीगण भी बिना मास्क लगाए घूमते हुए कार्य करते हुए फोटोग्राफ छपते रहे हैं। ऐसी स्थिति में जब बचाव के लिए गाइडलाइन का पालन नहीं हो पालन करने वाला और कराने वाला दोनों ही सुस्त हो,अनदेखी कर रहे हों तब आम जनजीवन सुरक्षित नहीं रह सकता।
*अभी राष्ट्रीय स्तर पर राज्यों के स्तर पर जिला कलेक्टर के स्तर पर कोरोना वायरस से संबंधित बैठकें होती है और निर्णय लागू होते हैं।  उपखंड स्तर पर भी यदा-कदा ही बैठकें होती है। इनमें विशेष परिवर्तन व्यवस्था करने की आवश्यकता है। उपखंड स्तर पर नगर पालिका और ग्राम पंचायत स्तर पर हर हफ्ते व्यवस्था की समीक्षा बैठकें  की जानी चाहिए। हर क्षेत्र में यह जागरूकता क्षेत्र विशेष में ही होनी चाहिए। इससे हर हफ्ते व्यवसाय चलाने वालों का और आमजन का गाइडलाइन का तालमेल बैठ सकेगा।
बाजारों को पहले महीनों तक बंद करके देख लिया गया और अब सप्ताह में 2 दिन शनिवार रविवार को भी बंद करके देख रहे हैं लेकिन कोरोना वायरस अव्यवस्था के कारण गाइडलाइन के पालन नहीं होने से सोमवार से शुक्रवार 5 दिन भी फैल सकता है। मतलब यह है कि लोकडाउन से ही इसे रोकना अभी तक संभव नहीं हो पाया है। हर शहर में जो क ई  किलोमीटर परिधि तक फैला होता है वहां बाजार तो बहुत सीमित होते हैं। मोहल्लों गलियों में जो अव्यवस्था होती है उस पर अभी कोई नियंत्रण नहीं है। सामान्य रूप से प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी बाजारों में निरीक्षण या गश्त को निकलते हैं। इसका प्रभाव अधिक समय तक नहीं रहता केवल व्यवसाय चलाने वालों को बाजारों को प्रभावित करना ही सामने आता है। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस का निरीक्षण और गश्त गलियों मोहल्लों में बहुत जरूरी है। जब तक कोरोना वायरस का वैक्सीन तैयार नहीं हो जाता तब तक बड़े से छोटे शहर और गांव तक हर स्तर पर बचाव रखना है।
* यह पहला कर्तव्य होना चाहिए और यह कर्तव्य आमजन को ही पूरा करना होगा*


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