गुरुवार, 23 जुलाई 2020

राजस्थानी भाषा के विद्यार्थियों ने लहराया अपना परचम * करणीदानसिंह राजपूत *


 सूरतगढ़। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के 12वीं कला वर्ग 2019-20 के घोषित परीक्षा परिणामों में  श्रीगंगानगर जिले  के विद्यार्थियों ने  मातृभाषा राजस्थानी में सराहनीय नया मुकाम हासिल किया है और क्षेत्र में राजस्थानी का झंडा फहराया है।


श्री गंगानगर जिले में 6  राजकीय उच्च माध्यमिक  विद्यालयों में राजस्थानी साहित्य संचालित है। राजकीय उ.मा.विद्यालयों सरदारपुरा खर्था, जानकीदासवाला, बख्तावरपुरा, मालेर, 12 जीबी, और  2 डीओ का विद्यालय शामिल है |

सत्र 2019-20 के कक्षा 12 में लगभग 190 विद्यार्थियों ने  राजस्थानी साहित्य विषय चुना और परीक्षा दी थी।  इनमें से लगभग 120 विद्यार्थियों ने इस विषय में विशेष योग्यता प्राप्त की व लगभग 9 विद्यार्थियों ने तो 100 में से 100 अंक प्राप्त किए।

वर्तमान में अपनी मातृभाषा के प्रति अपनेपन,प्रेमभाव, लगाव को देखते हुऐ स्कुलों में विषय खोलने की मांग दिन- प्रतिदिन बढती जा रही है |क्योकि इस विषय के साथ अपना इतिहास, कला,संस्कृति,लोक जीवन का हर पहलू जुड़ा हुआ है जिसे सरल व रोचक रूप में प्रस्तुत किया गया है |

-- श्रीगंगानगर जिले नें प्रदेश की मातृभाषा राजस्थानी के साहित्य क्षेत्र को बढ़ाने में सदैव अग्रणी योगदान दिया है | इस पावन धरा से श्री मोहन आलोक,डॉ मंगत बादल,मनोज स्वामी,सन्तोष माया मोहन,डॉ कृष्ण कुमार आसू, जैसे केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार हुऐ है |

नन्दकिशोर सोमानी,भागीरथ रेवाड़ विरूराम चांवरिया,डॉ हरीमोहन सारस्वत'रूंख'. सतीष छिम्पा आदि ने अपनी लेखनी से इस भाषा की साहित्यिक रूप से सेवा की है और लगातार कर रहे हैं। 



-- श्री गंगानगर जिले में सुरेन्द्र कुमार स्वामी, विनोद कुमार गढ़वाल, सत्यपाल, सुरेन्द्र यादव,डा कृष्णा जागिंड़,श्रीमती भानुप्रिया जैसे राजस्थानी साहित्य के व्याख्याता हुऐ है जो राजस्थानी साहित्य की अध्यापन के माध्यम सें सेवा कर रहे हैं।


--- वर्तमान समय में राज्य स्तरीय भर्तियों में राजस्थान की कला संस्कृति और साहित्य के प्रश्नोत्तर सर्वाधिक पूछे जाते हैं, इस संदर्भ में इस विषय का महत्व और भी बढ़ जाता है राज्य सरकार राजस्थानी को प्रदेश की राजभाषा के रूप में जल्द लागू करे जिससे प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को लाभ मिल सके |


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राजस्थानी प्रदेश की मातृभाषा है ,इसमें अपनी संस्कृति,रीतिरिवाज,संस्कार, इतिहास रूपी अमोलक खजाना है |  मानवीय मूल्यों,संस्कारों को पोषित करने  वाली अपनी मातृभाषा को पढना जरूरी है | विश्व की प्रत्येक मातृभाषा में उस समाज का हर पहलू जूड़ा हुआ होता है। बच्चे को प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देना उसके जीवन का सर्वांगीण विकास करना है | राजस्थानी साहित्य विषय का वर्तमान समय में अपना महत्व है | राज्यस्तरीय भर्तियों में राजस्थानी कला,संस्कृति,साहित्य के सर्वाधिक प्रश्नोत्तर पूछे जाते हैं जिसका लाभ इस साहित्य को पढने वाले विद्यार्थियों को विशेषतौर से मिलता है |


सुरेन्द्र यादव

व्याख्याता- राजस्थानी साहित्य

रा,उ ,मा,वि- जानकीदासवाला 

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राजस्थानी के विद्यार्थियों का परिणाम शानदार रहा,इसके लिए समस्त शिक्षकों  विद्यार्थियों ,अभिभावकों  को  बहुत बहुत बधाई |  श्रीगंगानगर की सुरतगढ़ तहसील के 6 स्कुलों में राजस्थानी विषय संचालित है ,पर गुरूशरण छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय सुरतगढ़ में बीए में राजस्थानी विषय नही होने से प्रति वर्ष 200 के लगभग विद्यार्थी अन्य विषय चुनने को मजबूर हैं।  बीए में नियमित रूप सें राजस्थानी विषय संचालन हेतु उच्च शिक्षा मन्त्री जी को अवगत करवा चुके हैं  | इस सम्बध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के मार्फत प्रस्ताव भी भिजवाया जा चुका है | इस सत्र में इन विद्यार्थियों की भावनाओं को समझते हुऐ विषय संचालन होना जरूरी है |


विनोद गढ़वाल 

जिला अध्यक्ष

राजस्थानी मोट्यार परिषद

श्री गंगानगर

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राजस्थानी अपनी मातृभाषा है इसका देश-विदेश में मान सम्मान है | इसका साहित्य भण्डार विश्व में सबसे समृद्ध व बड़ा है | इसको मान्यता मिलने व  प्रदेश की राजभाषा बनने सें रोजगार के हजारो रास्ते खुलेंगे | प्रदेश में बेरोजगारी में कमी आयेगी | वर्तमान समय में राज्यस्तरीय भर्तीयो में इसकी बहुत उपयोगिता है | हमें अपनी मातृभाषा का मान सम्मान करना चाहिये | इसके विस्तार में प्रत्येक राजस्थानवासी को अपना योगदान देना नैतिक जिम्मेदारी है |राजस्थानी के साथ हमारे संस्कार,रीतिरिवाज,तीज त्यौहार ,रहन-सहन,खान-पान और जीवन का हर पहलू जूड़ा है |

मनोज स्वामी, सुरतगढ़

वरिष्ठ राजस्थानी साहित्यकार

राजस्थानी रामलीला के लेखक,निर्देशक |

( संयोजन मनोजकुमार स्वामी,केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत सम्मानित राजस्थानी साहित्यकार,सूरतगढ़)

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