रविवार, 19 जुलाई 2020

राष्ट्र और समाज चिंतक पीके मिश्रा का निधन

* करणीदानसिंह राजपूत *


देश के लोकतंत्र चुनाव प्रणाली में स्वच्छता और ईमानदारी हो की गहन सोच रखने वाले तथा जन चेतना के अभियान चलाते रहने वाले समाजिक कार्यकर्ता पी.के.मिश्रा( पवन कुमार मिश्रा) का हृदय रोग से 18 जुलाई 2020 को निधन हो गया। वे 54 वर्ष की आयु में विदा हो गए। दो वर्ष पहले हृदयाघात हुआ और उसके बाद वे सही रूप में स्वस्थ नहीं हो पाए। 


बिहार प्रांत के रहने वाले पीके मिश्रा ने सूरतगढ़ में वायुसेना की नौकरी भी की लेकिन वह रूचिकर नहीं लगी और देश में बदलाव की सोच को लेकर अपना कर्मक्षेत्र बना लिया था। 

सूरतगढ़ में एनजीओ लक्ष्य संस्था के संस्थापक निदेशक थे। लक्ष्य की अध्यक्ष श्रीमती कुमुद त्रिपाठी और मिश्रा ने कई अभियान चलाए।

अंग्रेजी के श्रेष्ठ जानकर रहे और कोचिंग देते थे। ऐसे लोग अपने जीवन में परेशान भी होते रहते हैं सो पी.के.मिश्रा भी अनेक बार परेशानियों में भी रहे।

सामाजिक गतिविधियों में साथ और ऐसे कार्यकर्मों में उपस्थित रहते। साईकिल पर सवार रहते। कहीं न कहीं बदलाव का स्वयं लिखित पोस्टर लगाते हुए दिखाई देते थे। 

मतदाताओं को जागरूक करने को भी अभियान चलाए। सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा लेकिन बहुत कम वोट मिले।

एड्स रोग संसार में फैल रहा था तब सन 2000 के आसपास लोगों से सहयोग लेकर पैम्फलेट छपवाना और बांटने का अभियान भी खूब चलाया था। 

आम आदमी पार्टी की स्थापना करने वालों में मिश्रा और एडवोकेट विष्णु शर्मा सबसे आगे थे। वे गजल गायक परमानंद 'दर्द' के खास मित्रों में थे।

अनेक विषयों पर सड़क चलते या रेलपुल पर खड़े खड़े मेरे से चर्चा करते या विचार विमर्श भी करते। मैंने ऐसे लोगों में सूरतगढ़ में पत्रकार सत्यपाल 'युवक' समाजवादी चिंतक दिलात्मप्रकाश जैन और पी.के.मिश्रा को देखा जो दिनरात संघर्षों में कुछ न कुछ अभियान चलाते रहे।


कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

यह ब्लॉग खोजें