बुधवार, 1 जुलाई 2020

💐 प्रिय आओ,मैं झूम झूम नाचूंगा: काव्य शब्द- करणीदानसिंह राजपूत*


अगर तुम आज आई
मैं झूम झूम नाचूंगा।
मैं समझूंगा मेरे संदेश
तुमने स्वीकार किये।


मेरा तप मेरे संदेश
तुम देखती रही हो।
मगर कोई उत्तर नहीं
बस तुम्हारा इंतजार।


यह अनोखी परीक्षा
मैं होता पसीना पसीना।
तुम्हें तो सभी चाहते हैं
सभी मिलने को आतुर।


तुम आओगी आज
मुझे बुलाओगी आज।
प्यार बरसाओगी आज
तन मन नहाएगा आज।


मेरे संदेश प्यार भरे
तुम पढती रही हो।
बस नखरा तुम्हारा
कर रहा हूं सहन।


आज तुम आई तो
मैं झूम झूम नाचूंगा।
मैं समझूंगा मेरे संदेश
दिल से स्वीकार किए।


तुम्हारी दूरी बढाती बेचैनी
क्यों आग में झुलसाती हो।
आज आओ बरस पड़ो
तन मन को भिगो डालो।


प्रिय आज आओ न
मैं झूम झूम नाचूंगा।
मैं समझूंगा मेरे संदेश
तुमने स्वीकार किये।


तुम्हारी ठंडी ठंडी बूूंदें
भिगोएगी अंग प्रत्यंग।
बरसने की चाह तुम्हारी
मिलन ईच्छा पूरी होगी।


तुम आओ न आज
मैं झूम झूम नाचूंगा।
००००००
शब्द विन्यास:-
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार
सूरतगढ़।
94143 81356.
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